बुधवार, 19 फ़रवरी 2020

जानें क्या होता है रेपो रेट, रिवर्स रेपो रेट, सीआरआर, एसएलआर

जानें क्या होता है रेपो रेट, रिवर्स रेपो रेट, सीआरआर, एसएलआर


रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया मॉनिटरी पॉलिसी का रिव्यू करते समय सीआरआर, रेपो रेट और रिवर्स रेपो रेट से संबंधित ऐलान भी करता है।

कई बार यह इसे यथावत रखता है और कई बार इसमें आमूलचूल परिवर्तन करता है।

 आइए जानें कि आखिर रेपो रेट, रिवर्स रेपो रेट, सीआरआर (कैश रिजर्व रेशियो) होता क्या है और एसएलआर यानी  स्टैच्यूटरी लिक्विडिटी रेशियो के क्या मायने हैं :

रेपो रेट

 सभी कॉमर्सिअल बैंक जनता को ऋण देती है कभी कभी एक ही दिन में बहुत ज्यादा मात्रा  में ऋण की मांग आ जाति है.

 और उस स्थिति में बैंक के पास जनता को ऋण देने के लिए पर्याप्त मात्रा में धन् नही होता है.

 तब बैंक केंद्रीय बैंक (भारत में रिजर्व बैंक) से रात भर के लिए (ओवरनाइट) कर्ज लेने का विकल्प अपनाते हैं।

इस कर्ज पर रिजर्व बैंक को उन्हें जो ब्याज देना पड़ता है, उसे ही रेपो रेट कहते हैं।

रेपो रेट कम होने से बैंकों के लिए रिजर्व बैंक से कर्ज लेना सस्ता हो जाता है और तब ही बैंक ब्याज दरों में भी कमी करते हैं

 ताकि ज्यादा से ज्यादा रकम कर्ज के तौर पर दी जा सके।

 अब अगर रेपो दर में बढ़ोतरी का सीधा मतलब यह होता है कि बैंकों के लिए रिजर्व बैंक से रात भर के लिए कर्ज लेना महंगा हो जाएगा।

ऐसे में जाहिर है कि बैंक दूसरों को कर्ज देने के लिए जो ब्याज दर तय करते हैं, वह भी उन्हें बढ़ाना होगा।

 महंगाई पर प्रभाव-

 यदि रेपो रेट बढ़ा दिया जाए तो बैंकों को महँगा  ऋण  मिलेगा तो ब्याज दरें बढ़ जाएंगे जिससे जनता के मनोबल कम होगा

 वस्तु एवं सेवा की मांग कम हुई कीमत कम होगी महंगाई नियन्त्रित होगा

रिवर्स रेपो रेट –

 जब कोई भी वाणिज्य बैंक अतिरिक्त धन को जिसे वह मार्केट में नहीं निकल पा रही हूं

 उसे अगर आरबीआई के पास रख देती है अल्पावधि के लिए आरबीआई कमर्शियल बैंक को जो ब्याज देती है उसे रिवर्स रेपो रेट कहते हैं

 महंगाई पर प्रभाव

 यदि रिवर्स रेपो रेट को बढ़ा दिया जाए तो आरबीआई के पास धन जमा करने के लिए बैंके  आकर्षित होंगीं .

तो  बाजार में धन कम हो जाएगा,  बाजार में धन कम हो जाएगी तो तरलता कम हो जाएगी तरलता कम हो जाने पर बैंक अधिक ब्याज दर पर धन  देने लगेन्गे

 जिसे जनता के मनोबल कम हो जाएगी मनोबल कम होने से मांग कम हो जाएगा जिससे महंगाई कम हो  जाएग


स्टैच्यूटरी लिक्विडिटी रेशियो (एसएलआर)


एसएलआर यानी कि स्टैच्यूटरी लिक्विडिटी रेशियो। वाणिज्यिक बैंकों के लिए

 अपने प्रतिदिन के कारोबार के आखिर में नकद, सोना और सरकारी सिक्यॉरिटीज में निवेश के रूप में एक निश्चित रकम रिजर्व बैंक के पास रखनी जरूरी होता है।

 इस रकम का इस्तेमाल किसी भी आपात देनदारी को पूरा करने में इस्तेमाल किया जा सकता है।

 अब वह रेट जिस पर बैंक यह पैसा सरकार के पास रखते हैं, उसे ही एसएलआर कहते हैं।

 इसके तहत अपनी कुल देनदारी के अनुपात में सोना आरबीआई के पास रखना होता है।


 नकद आरक्षित अनुपात( कैश रिजर्व रेसिओ ) सीआरआर-

 सभी अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों को अपनी समग्र जमाव का एक निश्चित प्रतिशत भारतीय रिजर्व बैंक के पास अनिवार्य रखना पड़ता है जिसे ‘ नगद आरक्षित अनुपात’ कहा जाता है.

 यह विधि साख नियंत्रण के अति महत्वपूर्ण एवं नवीनतम विधि है इसका प्रयोग सर्वप्रथम 1935 में अमेरिका द्वारा किया गया था

यह विधि वहां अधिक उपयुक्त होती है जहां पर मुद्रा बाजार अविकसित होते हैं.

 केंद्रीय बैंक को नकद आरक्षित अनुपात में आवश्यकता अनुसार परिवर्तन करने का अधिकार होता है

देश में साख  की मात्रा को कम करना होता है तो भारतीय रिजर्व बैंक नगद आरक्षित अनुपात को बढ़ा देता है

 इस अनुपात के बढ़ने से बैंकों को अधिक नकद रिजर्व बैंक के पास रखने पड़ते हैं तथा स्वयं उनके पास नगद की मात्रा कम हो जाती है

इस प्रकार इन बैंकों की साख निर्माण की मात्रा कम हो जाती है जिससे यह ग्राहकों को महंगा एवं साख  प्रदान करते हैं

इसके विपरीत नकद  आरक्षित अनुपात में कमी होने से बैंकों को नकद कोष कम रखना पड़ता है जिसे साख निर्माण की मात्रा में वृद्धि होती है |

Source - NDTV


रविवार, 16 फ़रवरी 2020




भारतीय रिजर्व बैंक के कार्य -function of Reserve bank of india

आरबीआई- 

आरबीआई पूरे भारत में वित्तीय संस्थानों का रेगुलेशन करता है तथा भारत में इन्फ्लेशन को नियंत्रित रखने के लिए कदम उठाता है


आरबीआई के कार्य

1.  मौद्रिक प्राधिकारी के रूप में
2.  मुद्रा जारीकर्ता
3.  विकासात्मक भूमिका मे
4.  सरकार के लिए परामर्शदाता के रूप में
5.  विदेशी लेनदेन का पूरा दिखा
6.  मौद्रिक और साख नीति
7.  करेंसी और सिक्को  के प्रकाशन का एकाधिकार
8.  बैंकों को नियमित करना
9.  विकासात्मक कार्यों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है

महत्वपूर्ण बिंदु

 एक रुपए के सिक्के या नोट का परिचालन आरबीआई करता है किंतु प्रकाशन वित्त मंत्रालय करता है

मौद्रिक नीति

 परिभाषा

 किसी अर्थव्यवस्था में मुद्रा के प्रवाह को नियंत्रित करने की नीति को मौद्रिक नीति कहते हैं

 सभी देशों की केंद्रीय बैंक मौद्रिक नीति बनाने का कार्य करती हैं किंतु भारत देश मे मौद्रिक नीति आरबीआई तैयार करता है उसका कार्यान्वयन करता है और उसकी निगरानी भी करते हैं|

 उद्देश्य

 विकास के उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए मूल्य स्थिरता बनाए रखना वित्तीय प्रणाली का विनियामक और पर्यवेक्षक के रूप में कार्य करना

बैंकिंग परिचालन के लिए विस्तृत मानदंड निर्धारित करता है जिसके अंदर देश के बैंकिंग और वित्तीय प्रणालियां काम करती हैं

प्रणाली में लोगों का विश्वास बनाए रखना जमाकर्ताओं के हितों की रक्षा करना और आम जनता को किफायती बैंकिंग सेवाएं उपलब्ध कराना

विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम 1999 का प्रबंधन करता है

विदेशी व्यापार और भुगतान को सुविधाजनक बनाना और भारत में विदेशी मुद्रा बाजार का क्रमिक विकास करना उसे बनाए रखना

 महत्वपूर्ण बिंदु

1 जुलाई से 30 - जून लेखा वर्ष
1 अप्रैल से 31 - मार्च वित्तीय वर्ष
1 जुलाई से 30-  जून कृषि वर्ष


 वित्तीय गतिविधियों को कंट्रोल करने वाली 2 संस्थाएं होती है

1. गवर्नमेंट ऑफ इंडिया
2. रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया


1.) गवर्नमेंट ऑफ इंडिया

 यह बजट वित्त मंत्री द्वारा संसद में पेश किया जाता है इसे राजकोषीय नीति या फिजिकल पॉलिसी कहते हैं

यह वर्ष में एक बार पेश किया जाता है
यह जनता की क्रय शक्ति को सीधा प्रभावित करता है

यह मंगाई तथा मंदी दोनों पर कारगर होता है
संगठित तथा असंगठित क्षेत्र दोनों को प्रभावित करता है

2.) रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया

इसे मौद्रिक और साख नीति कहा जाता है
यह वर्ष में 6 बार जारी किया  जाता है  2 महीने के अंतराल पर

या परोक्ष रूप से बैंक और आम नागरिक दोनों को प्रभावित करता है

मंगाई तो नियंत्रित कर लेता है लेकिन मंदी को उतनी कारगर नीति नहीं बना पाता है

असंगठित क्षेत्र को ज्यादा प्रभावित करती हैं


 मौद्रिक नीति भी दो प्रकार का होता है

1.)  कठोर मौद्रिक नीति –

SLR  और सीआरआर को मात्रात्मक रूप से बढ़ाया जाता है तो उसे कठोर मौद्रिक नीति कहते हैं
 कठोर मौद्रिक नीति तब लाया  जाता है जब बाजार में तरलता बहुत ज्यादा  होता है और अधिक होने के कारण महंगाई बढ़ जाती है तब कठोर मौद्रिक नीति लाई जाती है

2.)  मृदुल मौद्रिक नीति-

 इसके मानो को कम करना

 आरबीआई किस तरह मौद्रिक और साख नीति जारी करके तरलता प्रबंधन करता है?

भारतीय रिजर्व बैंक के कार्य -function of Reserve bank of india

 तरलता प्रबंधन-

1. मात्रात्मक तरलता प्रबंधन
2. गुणात्मक तरलता प्रबंधन


1.) मात्रात्मक तथा प्रबंधन
-

(1)CRR-

 नकद आरक्षित अनुपात वर्तमान में चार पर्सेंट है

*  बैंकों के पास जितना भी धन जमा होता है उसे नेट डिमांड एंड टाइम लायबिलिटीज एनडीटीएल कहते हैं

* एनडीटीएल का चार पर्सेंट बैंकों को नगद रूप में आरबीआई के पास जमा करना होता है इसके बहुत से लक्ष्य है-
A) लोगों का विश्वास बनाए रखने के लिए
B) मार्केट में नकदी की कमी वृद्धि कर सकने के लिए
C) तरलता प्रबंधन के लिए

(2)SLR-
 सांविधिक तरलता अनुपात वर्तमान में 19 परसेंट है
 इसे बैंक को अपने पास रखना होता है नगद, स्वर्ण,  सरकारी प्रतिभूतियों,  के रूप में भी रखा जा सकता है|

(3)omo-

 ओपन मार्केट ऑपरेशंस (खुली बाजार प्रक्रियाएं)- आरबीआई बैंकों को सरकारी प्रतिभूतियां बेचने का टेंडर जारी करेंगे
 सभी बैंकों को सरकारी प्रतिभूतियों को खरीदने के लिए आमंत्रित करता है आरबीआई

 आखिर सरकारी प्रतिभूतियां क्यों खरीदें-

 एफडीआई विदेशों से प्राप्त आय- पैसा एडजस्ट होना चाहिए नहीं तो विकासनगर की कीमतें बढ़ा देती है इसलिए एफडीआई को समायोजित करने के लिए सरकारी प्रतिभूतियों को लेकर आरबीआई आती है,

 इसके माध्यम से मार्केट को अब्जॉर्ब  करने की कोशिश किया जाता है ताकि बाजार में कीमतों की स्थिरता बनी रहे और वृद्धि बना रहे

(4)RR

 रेपो रेट- अल्पकालिक बैंकों की आवश्यकता को पूरा करने के लिए और सरकारी प्रतिभूतियों की एवज में बैंकों को उधार मिलता है जब ब्याज बैंक   चुकती है उसे रेपो  रेट  कहा जाता है वर्तमान में रेपो रेट 5.75% है
(5)RRR

 रिवर्स रेपो रेट- जब कोई भी कमर्शियल बैंक अतिरिक्त धन को जिसे वह मार्केट में नहीं निकाल पा रही है अगर आरबीआई के पास रख देती है अल्पावधि के लिए आरबीआई कमर्शियल बैंक को जो ब्याज देती है उसे रिवर्स रेपो रेट कहते हैं

 वर्तमान में 5.50% है

(6)MSF
 मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी (सीमांत स्थाई सुविधा)-

2.) गुणात्मक तरलता प्रबंधन
(1) सीमांत आवश्यकता
(2) उपभोक्ता साख नियंत्रण
(3) बैंकों को दिशा निर्देश
(4) सीधी कार्यवाही




 मौद्रिक नीति
 मौद्रिक नीति भी दो प्रकार का होता है
3.) कठोर मौद्रिक नीति –
SLR  और सीआरआर को मात्रात्मक रूप से बढ़ाया जाता है तो उसे कठोर मौद्रिक नीति कहते हैं
कठोर मौद्रिक नीति तब लाया  जाता है जब बाजार में तरलता बहुत ज्यादा  होता है और अधिक होने के कारण महंगाई बढ़ जाती है तब कठोर मौद्रिक नीति लाई जाती है
4.) मृदुल मौद्रिक नीति-

 इसके मानो को कम करना


शुक्रवार, 14 फ़रवरी 2020

भारत में बैंकिंग प्रणाली का  इतिहास और प्रकार

भारत में बैंकिंग प्रणाली का  इतिहास और प्रकार

 वर्तमान परिपेक्ष में बैंक की परिभाषा

 पूरे वित्तीय व्यवस्था का एक ऐसा मध्य बिंदु जो इस पूरे बाजार में मुद्रा का आवागमन का कार्य करता है मुद्रा की आपूर्ति और मुद्रा की प्राप्ति का कार्य करता है बैंक कहलाता है.

 बैंकों का इतिहास

1. ऋण  देने वाले लोगों को नापया नलेखा कहा जाता था

2. मनुस्मृति में ब्याज का वर्णन मिलता है
 आधुनिक बैंकों की स्थापना

1. 1770 बैंक ऑफ हिंदुस्तान कोलकाता
2. 1806  बैंक ऑफ बंगाल
3. 1840 बैंक ऑफ मुंबई
4. 1843 बैंक ऑफ मद्रास

5. 1921 इंपीरियल बैंक ऑफ इंडिया ( मर्ज - बंगाल, मुंबई,  मद्रास)

6. 1955 एसबीआई( इंपीरियल बैंक ऑफ इंडिया का राष्ट्रीयकरण)

7. 1958 59 एसबीआई के सहयोगियों का राष्ट्रीयकरण
8.   1865 इलाहाबाद बैंक की स्थापना

9. 1881 अवध कमर्शियल बैंक( सीमित शक्ति के साथ भारतीयों को प्रबंधन दिया गया था)

10. 1895 पंजाब नेशनल बैंक की स्थापना (भारतीयों के द्वारा प्रबंधित पहला बैंक)

11. 1911 सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया( स्वामित्व – भारतीय,  प्रबंधन- भारतीय,  संस्थापक- पोचखानवाला पहले चेयरमैन-  फिरोजशाह मेहता)

12. 1 जनवरी 1949 आरबीआई का राष्ट्रीयकरण
13. मार्च 1949 बैंकिंग अधिनियम ( 2013 में संशोधन)

14. 1969 14 बड़े बैंकों का राष्ट्रीयकरण( न्यूनतम संपत्ति 50 करोड़)

15. 1980 6 बड़े बैंकों का राष्ट्रीयकरण (न्यूनतम संपत्ति 200 करोड़)

16. 1993 न्यू बैंक ऑफ इंडिया मर्ज कर दी गई पीएनबी

17. 2018 में एसबीआई में मर्ज कर दिया गया स्टेट बैंक आफ सौराष्ट्र

18. 2010 में एसबीआई में मर्ज कर दिया गया स्टेट बैंक ऑफ इंदौर

19. 1 अप्रैल 2017 एसबीआई में मर्ज कर दिया गया एसबीआई के सहयोगी (स्टेट बैंक ऑफ त्रावणकोर, स्टेट बैंक ऑफ पटियाला, मैसूर, बीकानेर,  हैदराबाद,  भारतीय महिला बैंक)

20. 2018 बैंक ऑफ बड़ौदा में मर्ज कर दिया गया विजया बैंक और देना बैंक का


 बैंकों का वर्गीकरण

भारत में बैंकिंग प्रणाली का  इतिहास और प्रकार

1. अनुसूचित बैंक

2. गैर अनुसूचित बैंक


1. अनुसूचित बैंक

आरबीआई एक्ट के अनुसूची दो  में शामिल किया गया है
वर्तमान में जिनकी न्यूनतम संपत्ति 500 करोड़ की होगी
गतिविधि से ग्राहक पर कोई भी नकारात्मक प्रभाव नहीं होगा
जिन पर आरबीआई की मौद्रिक व साख  नीति पूरी लागू होती है

2. गैर अनुसूचित बैंक

 अनुसूची दो में शामिल नहीं किया गया है जैसे जम्मू कश्मीर


 अनुसूचित बैंकों का वर्गीकरण

1. वाणिज्यिक बैंक
2. कोपरेटिव बैंक
3. आरआरबी


 रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया

1. 1934 आरबीआई एक्ट पारित किया गया
2. 1 अप्रैल 1935 आरबीआई कार्य करना प्रारंभ किया
3. 1937 तक मुख्यालय कोलकाता और मुंबई में है

4. सिफारिश गठन - यंग हिल्टन आयोग की स्थापना 1920 सिफारिश 1926

5. 1929 मंदी केंद्रीय बैंक जांच आयोग का गठन दूसरा आयोग था जिसने आरबीआई के गठन का सिफारिश की थी

6. आरबीआई के प्रथम गवर्नर सर ओसबोर्न स्मिथ 1935
7. आजाद भारत के प्रथम सी डी देशमुख

 रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया

1. सरकारी निदेशक मंडल

एक गवर्नर और चार डिप्टी गवर्नर से मिलकर बना होता है इसका कार्यकाल 4 वर्ष का होता है

2. गैर सरकारी निदेशक मंडल

 10 गवर्नमेंट आफ इंडिया से नामित मुंबई दिल्ली चेन्नई और कोलकाता से दिए जाते हैंसदस्य,

दो बार सरकार के अधिकारी, चार क्षेत्रीय गवर्नर- मुंबई दिल्ली चेन्नई और कोलकाता से लिए जाते हैं

 आरबीआई किस उद्देश्य स्थापित की गई

 आगे का उद्देश्य- 

पूरे भारत में वित्तीय संस्थानों का  रेगुलेशन करना तथा भारत में इन्फ्लेशन को नियंत्रित रखने के लिए कदम उठाएं

 मौद्रिक और साख नीति
 महंगाई को नियंत्रित करने के लिए जो कदम होते हैं उसे कहते हैं मौद्रिक और साख नीति

“ RBI भारत में मौजूद मौद्रिक  एवं साख नीति का प्रकाशन करके लिक्विडिटी को नियंत्रित करती है “

 पाली मौद्रिक और साख नीति हर 3 महीने पर आती थी लेकिन अब हर 2 महीने पर साल में 6 बार आती है”

 परिभाषा

 आरबीआई क्या काम करने वाली है क्या कदम उठाने वाली क्या उसमें परिवर्तन होंगे उन सब का लेखा-जोखा एक नीति कहलाती है जिसे मौद्रिक और साख  नीति कहते हैं

रविवार, 9 फ़रवरी 2020


The hindu and pib analysis in hindi 9 february 2020


व्यापार की दीवारों को बढ़ाने की उच्च लागत

 संदर्भ

भारत का अंतरराष्ट्रीय व्यापार को लेकर संरक्षणवाद रुख

 सारांश

आर्थिक रूप से परस्पर जुड़ी और तकनीकी रूप से अनुच्छेद दुनिया में भारत को व्यापार पर एक खुला दिमाग रखने की आवश्यकता है

 मुख्य तथ्य:

1 फरवरी बजट में निहित
तीन से चार फरवरी आसियान के नेतृत्व वाले आरसीसीपी व्यापार समझौते पर चर्चा में भारत का भाग लेने से इनकार

IQIP


GS-2

 दीपक्षी क्षेत्रीय और वैश्विक समूह और भारत से संबंधित और अथवा भारत के हितों को प्रभावित करने वाले करार.

 GS-3

 उदारीकरण का अर्थव्यवस्था पर प्रभाव

GS-4

 अंतर्राष्ट्रीय नैतिकता

 बजट कैसे

FTAPTA को कई संदर्भों में समस्या बताया

परिणाम  50 से अधिक वस्तुओं के आयात पर शुल्क बढ़ाया, सीमा शुल्क अधिनियम के नियमों में परिवर्तन किया

* वित्त मंत्री


यह देखा गया है कि FTA के तहत आयात बढ़ रहा है
जिसने घरेलू उद्योग के लिए खतरा उत्पन्न कर दिया है
इस तरह के आयात के लिए कणे चेक  की आवश्यकता होती है

* लेखक


उद्देश्य भारतीय बाजारों को डोपिंग से बचाना हो सकता है मुख्य रूप से चीनी सामानों द्वारा


 व्यापार घाटे में वृद्धि


नवंबर 2019 RCEP वार्ता 16 देशों में
बाहर तर्क= व्यापार घाटे में वृद्धि
*आसियान (FTA)
*जापान (CEPA )
*दक्षिण कोरिया (CEPA)

 सभी समझौतों की समीक्षा

 ऐसा करना मुश्किल लेकिन कहना आसान यदि  भारत आरसीपी विराम लगाता है

तो दीपक्षी व्यापार समझौते पर बातचीत करना अन्य देशों के प्राथमिकता नहीं होगी.

 अंतिम बात

RCEP  के दरवाजे बंद
सार्क  को छोड़ दिया गया
भारत किसी भी क्षेत्रीय FTA का हिस्सा नहीं है

FOR PRELIMS

*FTA-PTA
*ASEAN &RCEP
*NAFTA
*MERCOSUR
*EUE
*AFCFTA
*GCC


 सजा प्रक्रिया की निष्पक्षता को उजागर करना


 संदर्भ:

निर्भया बलात्कार आरोपियों को अपनी सभी कानूनी अधिकारों का प्रयोग करने के लिए दिया गया 7 दिन का समय

 सारांश

न्यायिक प्रक्रिया निष्पक्ष क्षमता की मांग करती है जो सजा की पर्याप्त आवश्यकता ओं के कारण होती हैं

 प्रमुख तथ्य:

 निष्पक्ष परीक्षन अधिकार


* public sentiment vs judicial process
“society cry for justice “

 एक महत्वपूर्ण मामला और रूपरेखा

 पहला:

सबसे पहले साल 1973 की जगमोहन बनाम स्टेट ऑफ पंजाब का हवाला दिया गया
इसमें सुप्रीम कोर्ट की 5 जजों की बेंच ने सुनवाई की

केस में फांसी की सजा की संवैधानिक वैधता पर सवाल उठाए गए थे जिसमें बेंच ने इसे क्लियर कर वैध बताया था

दूसरा:

1980 में बच्चन सिंह बनाम स्टेट ऑफ पंजाब किस का हवाला दिया गया
इस केस में भी सुप्रीम कोर्ट के 5 जजों की बेंच ने फांसी की संविधान की वैधता पर उठे सवाल के बाद सजा को वैध ठहराया था
इसी केस में कोर्ट ने रेयरेस्ट ऑफ रेयर केशो का जिक्र किया था जिसमें फांसी की सजा दी जाएगी

 तीसरा:

1983 में मच्छी सिंह बनाम स्टेट ऑफ पंजाब मामले का
इस केस में रेयरेस्ट ऑफ रेयर के तहत आने वाले अपराध तय करने में 5 बिंदु का जिक्र किया गया था
यह थे-
* मैनर ऑफ़  कमीशन ऑफ क्राइम यानी अपराध का तरीका
* मोटिव ऑफ क्राइम यानि  अपराध का मकसद
* सोशल एवोरेस  ऑफ़ क्राइम यानी अपराध से समाज पर क्या प्रभाव पड़ा
* मैग्रीटुड ऑफ क्राइम यानी अपराध की भयावहता
 पर्सनैलिटी ऑफ विक्टिम यानी पीड़ित  का व्यक्तित्व

 चौथा:

1984 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के केस का  भी सरकारी  वकील ने हवाला दिया

उन्होंने कहा कि सुरक्षाकर्मी बयंत सिंह व सतवंत सिंह ने हत्याकांड किया था

बयंत  सिंह को अन्य सुरक्षाकर्मियों ने वही मार गिराया था, जबकि सतवंत सिंह को साल 1988 में सुप्रीम कोर्ट ने फांसी दी
“ क्या आजीवन कारावास का वैकल्पिक विकल्प निर्विवाद रूप से दिया गया है”

 आजीवन करावास का मुद्दा

सामूहिक विवेक
अपराधिक न्याय प्रणाली में जनता का विश्वास

 ट्रंप आगे बढ़ते हैं

 संदर्भ:

 ट्रम का सीनेट में महाभियोग की आरोपों से बरी होना

 सारांश:

 आरोपों की गंभीरता के बावजूद अमेरिकी राष्ट्रपति वरी होने के बाद मजबूत

 आरोप क्या था?

महाभियोग की प्रक्रिया कब शुरू की गई जब एक अनजान आदमी विसलब्लोअर ने सितंबर में संसद से शिकायत की थी कि जुलाई में राष्ट्रपति ट्रंप ने यूक्रेन के राष्ट्रपति को फोन किया था

ट्रम पर आरोप है कि उस फोन काल में उन्होंने यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर  से कहा था कि अगर वह अमेरिका से सैन्य मदद चाहते हैं तो यूक्रेन को कुछ जांच शुरू करनी होगी जिससे ट्रम्प  को राजनीतिक लाभ होगा

फोन पर हुई इस बातचीत में राष्ट्रपति ट्रंप ने यूक्रेन के राष्ट्रपति से कथित तौर पर जो वाईडेन ( अगले साल होने वाले राष्ट्रपति चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी के संभावित उम्मीदवार) और उनकी बेटी हंटर वाइडेन  के  खिलाफ जांच करने के लिए कहा था

 शपथ की नैतिकता

राष्ट्रपति ट्रंप ने 2020 में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव में यूक्रेन के हस्तक्षेप करने के लिए दबाव डालकर राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ समझौता किया है और अमेरिका के लोगों के प्रति ली गई शपथ को भी तोड़ा है



 मातृत्व लाभ के लिए लंबा इंतजार


 संदर्भ सारांश:

पीएम मोदी द्वारा 3 वर्ष पूर्व घोषित पीएम मातृ वंदना योजना की ने गर्भवती माताओं को जीवनदान दिया है

गुजरात के जनजाति जिले दाहोद में जागृति चंद्र का सर्वे
 सर विकार निष्कर्ष

हक प्राप्त करने के लिए माताओं का संघर्ष क्यों की योजना कागजी कार्यवाही की नौकरशाही चक्रव्यूह में उलझ जाती है

 प्रमुख तथ्य: पीएम मातृ वंदना योजना

* 2017 से लागू
* उद्देश्य:

काम करने वाली महिलाओं की मजदूरी के नुकसान की भरपाई करने के लिए मौजा देना और उनकी उचित आराम और पोषण  को सुनिश्चित करना

गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं के स्वास्थ्य में सुधार और नकदी प्रोत्साहन के माध्यम से अधीन पोषण के प्रभाव को कम करना


 योजना की मुख्य बातें:

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी द्वारा पीएम मातृ वंदना योजना को जनवरी 2017 में शुरू किया गया था इसके तहत गर्भवती ओं को पौष्टिक आहार के लिए सीधे उनके खाते में रुपए सहायता राशि भेजी जाएगी

इस योजना पर सीधे प्रधानमंत्री व राज्यों के मुख्यमंत्री निगरानी रखेंगे

प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन दोनों परिजनों से पहली बार गर्भवती होने वाली ग्रामीण महिला के खाते में कुल ₹6400 व शहरी गर्भवती के खाते में कुल ₹6000 पहुंचेंगे

इस प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के द्वारा पात्र गर्भवती महिलाओं को पहली किस्त में ₹1000 गर्व के 150 दिनों के अंदर दूसरी किस्त में ₹2000 180 दिनों के अंदर व तीसरी किस्त में 2000 प्रसव के  बाद शिशु के प्रथम टीकाकरण चक्र पूरा होने पर मिलेंगे

इस पर योजनाओं का लाभ लेने के लिए अपनी नजदीक स्वास्थ्य केंद्र पर गर्भवती ओपो अपना आधार व खाता नंबर देना होगा

Source - the hindu


शनिवार, 8 फ़रवरी 2020

The hindu analysis

अनौपचारिक की पुकार 

 संदर्भ/ सारांश: 

भारत की छोटी उद्यमियों ग्रामीण इलाकों और शहरी इलाकों में रहने वाले लोगों की आवाज को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए.

How to Use

Gs paper -3 (economics )

Unit -

 उदारीकरण का अर्थव्यवस्था पर प्रभाव, औद्योगिक नीति में परिवर्तन तथा औद्योगिक विकास पर इनका प्रभाव

Previous year question 

– भारतीय अर्थव्यवस्था में वैश्वीकरण के परिणाम स्वरूप औपचारिक क्षेत्र में रोजगार कैसे कम हुए? क्या बढ़ती औपचारिकता देश के विकास के लिए हानिकारक है? (2016)

Gs-1 (unit  7) 

गरीबी और विकासात्मक विषय

Gs-2) 

सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्र में विकास के लिए हस्तक्षेप और उनकी अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय.

(Unit 11)

 विकास प्रक्रिया

Gs -3 ( unit 1)

भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास तथा रोजगार से संबंधित विषय

Unit 2) 

 समावेशी विकास तथा इससे उत्पन्न विषय

Unit 3)

उदारीकरण का अर्थव्यवस्था पर प्रभाव,  औद्योगिक नीति में परिवर्तन तथा औद्योगिक विकास पर इनका प्रभाव

 प्रमुख तथ्य

 शोध पत्र-1

Paper published by the national bureau of economic research, economic seema  jayachandran that there is no strong evidence from studies conducted in meny developing countries that formalisation improves business outcome.

 कोई मजबूत समूह नहीं की है कि औपचारिकता व्यवसाय की परिणामों में सुधार करती है.

 शोध पत्र -2

A background paper for the international labour organization (ilo), economist  santosh calls formalisation an evolutionary process during which small, informal enterprise learn the capabilities required to operatein a more formal global economy.
They can’t be fourced to formalise.

औपचारिकता एक विकास प्रक्रिया-  छोटी अनौपचारिक उद्यम अधिक औपचारिक वैश्विक अर्थव्यवस्था में काम करने के लिए आवश्यक क्षमताओं को सीखते हैं.

- औपचारिक करण के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता

 संगठित और असंगठित क्षेत्र मैं अंतर

 संगठित क्षेत्र-

इसमें सरकार द्वारा पूर्ण निगरानी की जाती है

इसमें शामिल गतिविधियों को सकल घरेलू उत्पाद( जीडीपी) में शामिल किया जाता है.

औपचारिक क्षेत्र विशिष्ट कार्य घंटों और नियमित मजदूरी वाली सभी नौकरियों का प्रतिनिधित्व करते हैं जिसमें कार्यकर्ताओं की रोजगार की सुरक्षा होती है.

श्रमिकों को सरकार,  राज्य या निजी क्षेत्र के उद्यमों द्वारा नियोजित किया जाता है.

यह एक लाइसेंस प्राप्त संगठन है और करों का भुगतान करने के लिए उत्तरदाई है इसमें बड़े पैमाने पर परिचालन जैसे बैंक और अन्य निगम शामिल है.

 असंगठित क्षेत्र-

इस क्षेत्र में सरकार का कोई विशेष हस्तक्षेप नहीं होता है. इसमें छोटी-छोटी और बिखरी इकाइयां आती है जो अधिकांश सरकारी नियंत्रण से बाहर होती है.

असंगठित क्षेत्र में ना किसी प्रकार का कर लगाया जाता है और ना ही इनकी गतिविधियों का जीडीपी और सकल राष्ट्रीय उत्पाद( जीएनपी) में शामिल किया जाता है.
यहां कर्मचारी या श्रमिक किसी नियमित काम की घंटे और मजदूरी के आधार पर कार्य नहीं करते हैं.

यह मुख्य रूप से छोटे पैमाने पर रोजगार और आय उत्पन्न करने की प्राथमिक उद्देश्य के साथ वस्तुओं और सेवाओं के प्राथमिक उत्पादन से संबंधित है.

 फेरी वाला इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है जो अपने जीवन निर्वाह के लिए अपने कृषि उत्पादों का विक्रय करता है.

यह एक लाइसेंस प्राप्त संगठन नहीं है और न ही इनके द्वारा करो का भुगतान किया जाता है.

औपचारिकता जाल The formalisation trap:

The key question here is : 

who benefits from formalisation of informal firms?

बैंकों की अंतिम मील लागत कम

राज्य को करें एवं निगरानी सहूलियत

 औपचारिकता के लिए नीति क्यों?

बेरोजगारी एवं मंदी का समाधान

औपचारिक क्षेत्र में शामिल होने के लिए अपर्याप्त कौशल और संपत्ति वालों का सहारा

वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में मजबूत भागीदारी

 औपचारिकता में वृद्धि क्यों? औपचारिक क्षेत्र में प्रयुक्त प्रौद्योगिकी में प्रकृति नए व्यवसाय मॉडल का उद्भव गीग  अर्थव्यवस्था का विकास.

 औपचारिकता में वृद्धि क्यों?

अनौपचारिक क्षेत्र में प्रयुक्त प्रौद्योगिकियों में प्रगति
नए व्यवसाय मॉडल का उद्भव
गिग  अर्थव्यवस्था का विकास

नीतियों को फिर से बनाना

 भारत में नौकरियां आय और विकास की चुनौतियों को देखते हुए नीतियों की पुनः रचना की आवश्यकता है.

काम पर उनकी सुरक्षा
उनकी गरिमा
नियोक्ताओं द्वारा उनका उचित उपचार

एक डेटा फायरवॉल के लिए

 संदर्भ

जर्मन साइबर सिक्योरिटी फॉर्म की रिपोर्ट= लाखों भारतीय मरीजों के मेडिकल विवरण का लीक होना और इंटरनेट पर स्वतंत्र रूप से उपलब्ध होना( सीटी स्कैन, एम आर आई, रोगियों की तस्वीर)

 सारांश: 

चिकित्सा जानकारी का रिसाव डेटा सुरक्षा कानून की तत्काल आवश्यकता के लिए बोलता है.

 प्रमुख तथ्य-

 इस डेटा की उपलब्धता का कारण चिकित्सा पेशेवरों  द्वारा उपयोग किए जाने वाले
पिक्चर आर्काइविंग एंड कम्युनिकेशन सिस्टम PACS सरवर में किसी भी सुरक्षा की अनुपस्थिति है

और जो बिना सुरक्षा के सार्वजनिक इंटरनेट से जुड़े हुए प्रतीत होते हैं

 क्या नुकसान-

सोशल इंजीनियरिंग फिशिंग और ऑनलाइन पहचान की चोरी
दुरुपयोग= डार्क नेट
P2P

 भारत में डाटा सुरक्षा कानून की स्थिति

यूरोपीय संघ और अमेरिका में डाटा सुरक्षा नियमों के विपरीत व्यापक कानूनी ढांचे का अभाव

ड्राफ्ट पर्सनल डाटा प्रोटक्शन बिल 2019


 बिल न्यायमूर्ति बीएन श्रीकृष्ण समिति की अनुशंसा पर आधारित:

बिल के मुताबिक कोई भी निजी या सरकारी संस्था किसी व्यक्ति के डाटा का उसकी अनुमति के बिना इस्तेमाल नहीं कर सकती.

मेडिकल इमरजेंसी और राज्य या केंद्र की लाभकारी योजनाओं के लिए ऐसा किया जा सकता है.

किसी भी व्यक्ति को उसकी डाटा के संबंध में अहम अधिकार होंगे.

संबंधित व्यक्ति अपने डेटा में करेक्शन या फिर संस्था के पास मौजूद डाटा तक एक्सेस मांग सकता है.

किसी भी संस्था को संबंधित व्यक्ति को डाटा के यूज के बारे में बताना होगा.

हालांकि विधेयक में में राष्ट्रीय हित से जुड़े मसलों पर डाटा की यूज़ की अनुमति होगी.

जैसे- राष्ट्रीय सुरक्षा, कानूनी कारवाही और पत्रकारिता के उद्देश्यों से इनका इस्तेमाल किया जा सकेगा.

डाटा जुटाने वाली संस्थाओं की निगरानी के लिए डाटा प्रोटेक्शन अथॉरिटी स्थापित करने का भी प्रावधान है

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस श्रीकृष्ण के नेतृत्व वाली कमेटी ने डाटा प्रोटेक्शन को  लेकर एक रिपोर्ट पेश की थी जिसके आधार पर यह बिल तैयार किया गया है.

यूरोपियन यूनियन के जनरल डाटा प्रोटेक्शन रेगुलेटर की तर्ज पर इस बिल का ड्राफ्ट तैयार किया गया है.

 संवेदनशील व्यक्तिगत डेटा को थर्ड पार्टी को बेचना या स्थानांतरित करने “अपराध” वाले प्रावधान को ड्राफ्ट पर्सनल ड्राफ्ट प्रोटक्शन बिल 2019 से हटा दिया गया है

आरबीआई की मौद्रिक नीति समीक्षा 6 फरवरी 2020

 संदर्भ

आरबीआई की मौद्रिक नीति समीक्षा 6 फरवरी 2020

 सारांश: 

विकास को बढ़ावा देने की आरबीआई के प्रयासों से अर्थव्यवस्था में धारणा बदल सकती है

 प्रमुख तथ्य:

ब्याज दरों को घटाने के लिए अब बैंक सिर्फ रेपो रेट घटाने बढ़ाने की भरोसे नहीं रहेगा
ऑटो लोन,  होम लोन और छोटी और मझोली औद्योगिक इकाइयों को ज्यादा कर्ज देने वाले बैंकों के लिए ‘नकद आरक्षित अनुपात (सीआरआर)’ के नियमों में रियायत दी जाएगी.
यह रियायत तभी से लेकर 31 जुलाई तक मिलेगी

आरबीआई ने बैंकों को एक लाख करोड़ रुपए की राशि बहुत ही कम दर पर (रेपो रेट) पर 1 से 3 वर्ष तक के लिए उपलब्ध कराने की घोषणा की है.

* रेपो रेट अभी 5.15 फीसदी  है अगर इसमें बैंकों की 2.5 फीसदी  संचालन लागत जोड़ दें

तो भी ग्राहकों को 8 फीसदी  से नीचे की दर पर कर्ज उपलब्ध कराया जा सकता है.

बैंक जिस सुविधा के तहत अपनी अतिरिक्त पूंजी कुछ दिनों के लिए आरबीआई के पास जमा करा देते थे उसे खत्म कर दिया गया है

* बैंकों को अतिरिक्त बची हुई राशि का कर्ज बांटने में इस्तेमाल करना होगा या फिर सरकारी बॉन्ड्स में निवेश करना होगा.

 क्या विकास को प्रोत्साहन प्रदान करने के लिए बजट पर्याप्त है? 

 संदर्भ /सारांश

बाधाओं के बावजूद खर्च में कटौती नहीं करने से बजट सुनिश्चित करता है कि गति पीछे ना हटे

 प्रमुख प्रश्न उत्तर: 

Q. आर्थिक सर्वेक्षण ने केंद्रीय विषय के रूप में धन सृजन पर जोर दिया है| क्या बजट इसे संबोधित करता है?  यदि ऐसा है तो किस हद तक? 

 अनंत नारायण= अच्छे संकेत

 तीन विषय

आकांक्षा तक भारत
आर्थिक विकास
देखभाल करने वाला समाज

 बजट में खर्च करने में कटौती नहीं की:

जीडीपी में वृद्धि
कृषि, सिंचाई, स्टार्टअप्स 8

 निराशाजनक संकेत : संरचनात्मक स्तर पर

बैंक एवं एनबीएफसी इकोसिस्टम
विद्युत,  टेलीकॉम, एयरलाइन, शिपिंग, रियल स्टेट 

निर्माण में संरचनात्मक मुद्दे


एफडीआई वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला= चीन को रिप्लेस करना

 निष्कर्ष

पर्याप्त धन सृजन के संकेत नहीं दिखता
सुधार केवल बजट में ही नहीं होनी चाहिए वे अलग से भी हो सकता है.

Q. क्या बजट सरकार की डॉलर 5 ट्रिलियन लक्ष्य तक पहुंचने के लिए अर्थव्यवस्था को ट्रैक पर रखने में मदद करता है? 

Ans-cross चिन्ह
पर नाटकीय सुधार भी हो सकते हैं क्योंकि हमारी क्षमता अधिक है
* बैंक + एनबीएफसी रिफॉर्म

Source -The hindu


बुधवार, 5 फ़रवरी 2020

Health fitness tips in hindi

जबरदस्त फिटनेस

Health fitness tips in hindi, जबरदस्त फिटनेस टिप्स


आज की बदलती लाइफ स्टाइल में सबसे बड़ी चुनौती है खुदको फिट रखना।

फिट रहना तो सब चाहते हैं लेकिन समय अभाव के चलते बहुत ही कम लोग जानते हैं

 कि कैसे छोटी-छोटी बातों को अपनाकर स्वस्थ और फिट रहा जाता सकता है।
आज हम आपको वो 8 आसान तरीके बता रहे हैं जिनको आजमाकर आप अपनी हेल्थ सुधार सकते हैं।
 स्वास्थ्य और जबरदस्त फिटनेस हासिल करने के लिए आपको घंटो जिम में पसीना बहाने की जरूरत नहीं है।

 कुछ आसान उपायों को आप अपने रूटीन में अपनाकर बेहतर फिटनेस हासिल कर सकते हैं।

आइए जानते हैं कुछ ऐसे ही उपाय जो आपको हमेशा फिट रखेंगे।

1.सुबह जल्दी उठना

सुबह जल्दी उठने और रात को जल्दी सोने की आदत बनाएं।
एक सेडुल बना लीजिये की कितने बजे सोना है और कब उठाना है

 और ध्यान रखें आप  जबरदस्त नींद ले  6 घंटे जरूर सोये  सिर्फ इतना करने से ही आपकी स्वास्थ्य संबंधित आधी से अधिक समस्याएं दूर हो जाएंगी,
और आप अपने जीवन भारत कभी मोटापा का सामना नही करेंगे |

2. घूमने के लिए निकालें समय


पैसा कमाने के लिए मशीन न बनें बल्कि अपने पूरे परिवार के साथ दो तीन माह में कुछ दिनों के लिए कहीं बाहर घूमने जाएं।

इस दौरान ऑफिस के कामों की टेंशन से दूर पिकनिक को पूरा इंजॉय करें।

 और टेंशन से दूर रहे अपने फैमली के साथ एन्जॉय करे

3. 10 मिनट एक्सरसाइज का देखें कमाल

Health fitness tips in hindi, जबरदस्त फिटनेस टिप्स

सुबस उठे और अपने लिए सिर्फ 10 मिनट निकालें।

 इन 10 मिनट में पार्क में जाकर हल्की दौड़, योगा, बॉडी वेट एक्ससाइज आदि में से आपको जो भी पसंद हो जरूर करें।
ये सब करने से आपका माइंड भी फ्रेश हो  जायेगा, आप दिन भर कूल महसूस करोगे और हमेसा फिट रहोगे.

4. ब्रेकफास्ट रखेगा एनर्जी से भरपूर

Health fitness tips in hindi, जबरदस्त फिटनेस टिप्स

सुबह में हेल्थी ब्रेकफास्ट बेहद जरूरी है। ब्रेकफास्ट ठीक से न करने पर आपको थकान लगना और वजन बढ़ने जैसी कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

कुछ लोग अपने काम में इतना बिजी रहते है की सुबह का नास्ता नही करते, लेकिन ये नही जानते की इसका नुकसान कितना होता है,

आप यदि सुबह दोपहर और शाम टाइम से खाना नही खाओगे तो बहुत से शारीरिक कष्ट का सामना करना पड़ सकता है

जैसे - गैस का प्रॉब्लम

5. ऐसे करें कैलोरी बर्न

Health fitness tips in hindi, जबरदस्त फिटनेस टिप्स

अक्सर लोग आफिस में सीढ़ियों के बजाये लिफ्ट का प्रयोग करते है , लोग अक्सर ये सब आलस के कारण करते है,

जबकि उन लोगो को पता होता है, की सायद ओ लिफ्ट की जगह सीढ़ियों का इस्तेमाल करते तो उन्हें  मोटापा का सामना नही करना पडता

इसलिए ऑफिस में लिफ्ट का इस्तेमाल न करें, बल्कि सीढ़ियों का उपयोग करें।

इससे आप शरीर में मौजूद अतिरिक्त कैलोरी को बर्न करने में कामयाब रहेंगे।

6. डिनर में इस बात का रखें ध्यान

Health fitness tips in hindi, जबरदस्त फिटनेस टिप्स

हमेशा आपकी कोशिश होनी चाहिए कि रात को डिनर आठ बजे तक जरूर कर लें।

डिनर में जितना संभव हो कम से कम खाएं। और हमेसा डिनर में रोटी ही खाये, चावल नही

 क्युकी ज्यादा चावल खाने से भी मोटापा बढ़ता है इसके अलावा रात में आपको मीठा का सेवन बिल्कुल भी नहीं करना चाहिए।

7. सप्ताह में एक बार फॉस्ट फूड

Health fitness tips in hindi, जबरदस्त फिटनेस टिप्स

आज कल के जवाने में हर एक व्यक्ति चाहे वो बच्चा हो या बूढा सब का मन फ़ास्ट फ़ूड खाने के लिए करता है,

और सब को पता होता है की फ़ास्ट फ़ूड हेल्थ के लिए हानिकारक होता है, फिर भी खाते है,  और मोटापा बढ़ता जाता है
यदि आपको फिट रहना है तो आज से फॉस्ट फूड खाने का बहुत मन करे तो इसके लिए सप्ताह का कोई एक दिन निर्धारित कर लें

और इस दिन फॉस्ट फूड को इंजॉय करें। ज्यादा फॉस्ट फूड खाने से आप मोटापे का शिकार हो जाते हैं।

8. खूब खाएं सलाद

Health fitness tips in hindi, जबरदस्त फिटनेस टिप्स

भोजन में कच्ची चीजें खूब खाएं। खाने के साथ सलाद का अधिक से अधिक सेवन करें।

अक्सर लोग खाने के साथ सलाद खाना पसंद भी करते है

सुबह हो सके तो थोड़ा  अंकुरित चना भी ख लेना चाहिए  भोजन में अंकुरित चनों और दालों को शामिल जरूर करे |

9. मौसमी फलों का सेवन


मौसमी फलों का अधिक से अधिक सेवन करने से आप बीमारियों से दूर रहते हैं।

मौसमी फल जैसे - अमरूद, सरीफा, बैर इत्यादि

 इन फलों को अपने ब्रेकफास्ट और लंच में शामिल करें। इनके जूस का सेवन भी आप कर सकते हैं।

10. स्नैक्स में शामिल करें ड्राईफ्रूट्स

Health fitness tips in hindi, जबरदस्त फिटनेस टिप्स

सुबह और शाम के स्नैक्स में ड्राईफ्रूट्स को शामिल करें। इस दौरान एक नियत मात्रा में ड्राईफ्रूट्स का सेवन आपकी सेहत के लिए अच्छा रहता है।

11. खूब पिएं पानी

गर्मी का मौसम हो या सर्दी का दिनभर में कम से कम तीन से चार लीटर पानी अवश्य पिएं।

क्योंकि कम पानी पीने से हम कई तरह की बीमारियों का शिकार हो सकते हैं


12. खाने के बाद न पिएं पानी


खाना खाने के तुरंत बाद पानी पीने की आदत छोड़े। इससे आपका खाना ठीक से हजम नहीं होता है।

खाना खाने और पानी पीने में कम से कम 30 से 50 मिनट का अंतर होना चाहिए।

13. फ्रिज के ठंडे पानी से बचें

Health fitness tips in hindi, जबरदस्त फिटनेस टिप्स

अक्सर हम गर्म धूप में से आते है  तो तुरंत पानी मांगते है ऐसा कभी ना करे
 गर्मी से आकर कभी भी एकदम से फ्रिज का ठंडा पानी न पिएं, ये आपके शरीर को कमजोर करता है। फ्रिज के पानी में हमेशा ताजा जल मिलाकर ही पिएं।

मंगलवार, 4 फ़रवरी 2020

  • Nelson Mandela -quotes, facts &death -biography

Nelson Mandela -quotes, facts &death -biography  in hindi

 दक्षिण अफ्रीका के पहले अश्वेत राष्ट्रपति थे, जिन्हें उनके रंगभेद विरोधी काम के लिए जेल में समय के बाद चुना गया था।

 उन्होंने 1993 में नोबेल शांति पुरस्कार जीता।

नेल्सन मंडेला कौन थे?


नेल्सन मंडेला एक सामाजिक अधिकार कार्यकर्ता, राजनीतिज्ञ और परोपकारी थे, जो 1994 से 1999 तक दक्षिण अफ्रीका के पहले अश्वेत राष्ट्रपति बने।

20 के दशक में रंगभेद विरोधी आंदोलन में शामिल होने के बाद, मंडेला 1942 में अफ्रीकी राष्ट्रीय कांग्रेस में शामिल हो गए।

 दक्षिण अफ्रीकी सरकार और उसकी नस्लवादी नीतियों के खिलाफ शांतिपूर्ण, अहिंसक अवज्ञा के अभियान का निर्देशन किया।


1962 में शुरू हुआ, मंडेला ने राजनीतिक अपराधों के लिए 27 साल जेल में बिताए।

1993 में, मंडेला और दक्षिण अफ्रीकी राष्ट्रपति F.W. de Klerk को संयुक्त रूप से देश के रंगभेद व्यवस्था को खत्म करने के प्रयासों के लिए शांति के नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।

 आने वाली पीढ़ियों के लिए, मंडेला दुनिया भर में नागरिक अधिकार कार्यकर्ताओं के लिए प्रेरणा का स्रोत होगा।

प्रारंभिक जीवन


मंडेला का जन्म 18 जुलाई, 1918 को दक्षिण अफ्रीका के ट्रांसकेई में मबाशे नदी के तट पर म्वेज़ो के छोटे से गाँव में हुआ था।

उनका जन्म का नाम रोलीहलला मंडेला था। मंडेला के पिता ने कई वर्षों तक आदिवासी प्रमुखों के परामर्शदाता के रूप में काम किया,

लेकिन स्थानीय औपनिवेशिक मजिस्ट्रेट के साथ एक विवाद पर अपना शीर्षक और भाग्य दोनों खो दिया।

मंडेला उस समय केवल एक शिशु थे, और उनके पिता की स्थिति की हानि ने उनकी माँ को परिवार को क्यूवू, यहां तक कि मावेज़ो के एक छोटे से गांव से दूर स्थानांतरित करने के लिए मजबूर किया।

गाँव को एक संकीर्ण घास की घाटी में बसाया गया था; सड़कें नहीं थीं, केवल पगडंडियाँ थीं जो चारागाहों से जुड़ी थीं जहाँ पशुधन चरते थे।


यह परिवार झोपड़ियों में रहता था और मक्का, शर्बत, कद्दू और फलियों की स्थानीय फसल खाता था, जो कि वे सब खर्च कर सकते थे।

झरनों और नालों से पानी आता था और बाहर से खाना बनाया जाता था।

मंडेला ने युवा लड़कों के खेल खेले, जिसमें उन्होंने पेड़ की शाखाओं और मिट्टी सहित उपलब्ध प्राकृतिक सामग्रियों से बने खिलौनों के साथ पुरुष के सही-सही परिदृश्यों का अभिनय किया।

शिक्षा

अपने पिता के दोस्तों में से एक के सुझाव पर, मंडेला को मेथोडिस्ट चर्च में बपतिस्मा दिया गया।

वह स्कूल जाने के लिए अपने परिवार में पहला बन गया। जैसा कि उस समय कस्टम था,

 और शायद दक्षिण अफ्रीका में ब्रिटिश शैक्षिक प्रणाली के पूर्वाग्रह के कारण, मंडेला के शिक्षक ने उन्हें बताया कि उनका नया पहला नाम नेल्सन होगा।

जब मंडेला नौ साल के थे, उनके पिता की फेफड़ों की बीमारी से मृत्यु हो गई,

जिससे उनका जीवन नाटकीय रूप से बदल गया। उन्हें मुख्य जोंतिंटबा दलिंडेबो द्वारा अपनाया गया था,

जो द थम्बू लोगों के अभिनय क्षेत्र - मंडेला के पिता के पक्ष में किया गया एक इशारा है, जिसने सालों पहले जोंगिन्ताबा को प्रमुख बनाने की सिफारिश की थी।

मंडेला ने बाद में लापरवाह जीवन को छोड़ दिया जिसे वह क्यूनू में जानता था,

उसे डर था कि वह फिर कभी अपने गांव को नहीं देखेगा। उन्होंने मोटरकार द्वारा मुंबेकेवनी, प्रांतीय राजधानी थम्बुलैंड की यात्रा की,

जो कि प्रमुख के शाही आवास तक थी। यद्यपि वह अपने प्रिय Qunu गाँव को नहीं भूला था, वह जल्दी से Mqhekezweni के नए, अधिक परिष्कृत परिवेश के अनुकूल हो गया


मंडेला को रीजेंट के दो अन्य बच्चों, उनके बेटे और सबसे पुराने बच्चे, जस्टिस और बेटी नमाफू के रूप में समान दर्जा और जिम्मेदारियां दी गईं।

 मंडेला ने राजमहल के बगल में एक कमरे के स्कूल में कक्षाएं लीं, जिसमें अंग्रेजी, Xhosa, इतिहास और भूगोल का अध्ययन किया गया।


यह इस अवधि के दौरान था कि मंडेला ने अफ्रीकी इतिहास में रुचि विकसित की, जो बड़े सरदारों से लेकर आधिकारिक व्यवसाय में ग्रेट पैलेस में आए थे।

 उन्होंने सीखा कि कैसे गोरे लोगों के आने तक अफ्रीकी लोग सापेक्ष शांति में रहते थे।

बड़ों के अनुसार, दक्षिण अफ्रीका के बच्चे पहले भाइयों के रूप में रहते थे, लेकिन गोरे लोगों ने इस संगति को तोड़ दिया।

जहां अश्वेत लोगों ने अपनी जमीन, हवा और पानी को गोरों के साथ साझा किया, वहीं गोरे लोगों ने इन सभी चीजों को अपने लिए ले लिया।

राजनीतिक जागृति


जब मंडेला 16 साल के थे, तब उनके लिए मर्दानगी में प्रवेश करने के लिए पारंपरिक अफ्रीकी खतना अनुष्ठान में भाग लेने का समय था।

खतना का समारोह केवल एक शल्य प्रक्रिया नहीं थी, बल्कि मर्दानगी की तैयारी में एक विस्तृत अनुष्ठान था।

अफ्रीकी परंपरा में, एक खतनारहित व्यक्ति अपने पिता के धन को विरासत में नहीं दे सकता है,

आदिवासी अनुष्ठानों में शादी या अपमान कर सकता है। मंडेला ने 25 अन्य लड़कों के साथ समारोह में भाग लिया।

उन्होंने अपने लोगों के रीति-रिवाजों में भागीदारी करने के अवसर का स्वागत किया और लड़कपन से मर्दानगी में बदलाव लाने के लिए तैयार महसूस किया।


कार्यवाही के दौरान उनका मूड बदल गया, हालांकि, जब समारोह में मुख्य वक्ता चीफ मेलिगकिलि ने युवकों से दुखी होकर बताया कि वे अपने देश में गुलाम थे।

क्योंकि उनकी जमीन गोरे लोगों द्वारा नियंत्रित की जाती थी, उनके पास खुद को शासन करने की शक्ति कभी नहीं होगी, प्रमुख ने कहा।

वह विलाप करने के लिए चला गया कि युवकों का वादा पूरा हो जाएगा क्योंकि वे गोरे लोगों के लिए जीवन यापन करने और दिमागी कार्य करने के लिए संघर्ष करते थे।

 मंडेला ने बाद में कहा था कि जब प्रमुख के शब्दों का उस समय कोई मतलब नहीं था, वे अंततः एक स्वतंत्र दक्षिण अफ्रीका के लिए अपना संकल्प तैयार करेंगे।

1939 में, मंडेला ने फोर्ट हरे के विश्वविद्यालय में दाखिला लिया, जो उस समय दक्षिण अफ्रीका में अश्वेतों के लिए उच्च शिक्षा का एकमात्र आवासीय केंद्र था।

 फोर्ट हरे को अफ्रीका का हार्वर्ड के समकक्ष माना जाता था, जो उप-सहारा अफ्रीका के सभी हिस्सों के विद्वानों को आकर्षित करता था।

विश्वविद्यालय में अपने पहले वर्ष में, मंडेला ने आवश्यक पाठ्यक्रम ले लिए,

 लेकिन एक दुभाषिया या क्लर्क के रूप में सिविल सेवा में करियर की तैयारी के लिए रोमन-डच कानून पर ध्यान केंद्रित किया -

 जो कि एक काला आदमी उस समय प्राप्त कर सकता है सबसे अच्छा पेशा माना जाता है।

University life

रीजेंट जोंगिन्ताबा की संरक्षकता के तहत, मंडेला को उच्च पद संभालने के लिए तैयार किया गया था,

एक प्रमुख के रूप में नहीं, बल्कि एक परामर्शदाता। अम्बु रॉयल्टी के रूप में, मंडेला एक वेस्लीयन मिशन स्कूल, क्लार्कबरी बोर्डिंग इंस्टीट्यूट और वेस्लेयन कॉलेज में भाग लिया,

जहाँ, बाद में, उन्होंने कहा, "सादे कठिन परिश्रम" के माध्यम से उन्होंने शैक्षणिक सफलता हासिल की।

उन्होंने ट्रैक और बॉक्सिंग में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। मंडेला को शुरू में उनके वेस्लीयन सहपाठियों द्वारा "देश का लड़का" कहा गया था,

लेकिन अंततः उनकी पहली महिला मित्र, मथोना सहित कई छात्रों से दोस्ती हो गई।


1939 में, मंडेला ने फोर्ट हरे के विश्वविद्यालय में दाखिला लिया,

जो उस समय दक्षिण अफ्रीका में अश्वेतों के लिए उच्च शिक्षा का एकमात्र आवासीय केंद्र था।

 फोर्ट हरे को अफ्रीका का हार्वर्ड के समकक्ष माना जाता था, जो उप-सहारा अफ्रीका के सभी हिस्सों के विद्वानों को आकर्षित करता था।

विश्वविद्यालय में अपने पहले वर्ष में, मंडेला ने आवश्यक पाठ्यक्रम ले लिए,

लेकिन एक दुभाषिया या क्लर्क के रूप में सिविल सेवा में करियर की तैयारी के लिए रोमन-डच कानून पर ध्यान केंद्रित किया

 - जो कि एक काला आदमी उस समय प्राप्त कर सकता है सबसे अच्छा पेशा माना जाता है।



छात्र बहुमत के साथ, मंडेला ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। इसे असंवेदनशीलता के कार्य के रूप में देखते हुए, विश्वविद्यालय ने शेष वर्ष के लिए मंडेला को निष्कासित कर दिया और उन्हें एक अल्टीमेटम दिया

: यदि वह एसआरसी में सेवा करने के लिए सहमत हो गए तो वे स्कूल लौट सकते हैं।

जब मंडेला घर लौटे, तो रीजेंट गुस्से में थे, उन्होंने उन्हें असमान रूप से कहा कि उन्हें अपने फैसले को याद रखना होगा और गिरावट में स्कूल जाना होगा।



मंडेला के घर लौटने के कुछ हफ़्ते बाद, रीजेंट जोंगिन्ताबा ने घोषणा की कि उन्होंने अपने दत्तक पुत्र के लिए विवाह की व्यवस्था की थी।

 रीजेंट यह सुनिश्चित करना चाहता था कि मंडेला का जीवन ठीक से नियोजित था, और व्यवस्था उनके अधिकार में थी, क्योंकि आदिवासी रिवाज तय था।

खबर से हैरान, फंसे हुए और यह मानते हुए कि उनके पास इस हालिया आदेश का पालन करने के अलावा और कोई विकल्प नहीं था, मंडेला घर से भाग गया।

वह जोहान्सबर्ग में बस गए, जहां उन्होंने एक पत्राचार और क्लर्क के रूप में कई तरह के काम किए,

जबकि पत्राचार पाठ्यक्रमों के माध्यम से अपनी स्नातक की डिग्री पूरी की। फिर उन्होंने लॉ की पढ़ाई करने के लिए जोहान्सबर्ग के विटवाटरसैंड विश्वविद्यालय में दाखिला लिया।


 Anti apartheid  movement

Nelson Mandela -quotes, facts &death -biography  in hindi

मंडेला जल्द ही रंगभेद विरोधी आंदोलन में सक्रिय रूप से शामिल हो गए,

1942 में अफ्रीकी नेशनल कांग्रेस में शामिल हो गए। एएनसी के भीतर, युवा अफ्रीकियों के एक छोटे समूह ने खुद को अफ्रीकी नेशनल कांग्रेस यूथ लीग कहा।

उनका लक्ष्य एएनसी को एक सामूहिक जमीनी स्तर पर आंदोलन में बदलना था,

जो लाखों ग्रामीण किसानों और कामकाजी लोगों की ताकत हासिल करता था, जिनके पास मौजूदा शासन में कोई आवाज नहीं थी।



विशेष रूप से, समूह का मानना था कि एएनसी विनम्र याचिका की पुरानी रणनीति अप्रभावी थी।

1949 में, एएनसी ने आधिकारिक तौर पर पूर्ण नागरिकता, भूमि के पुनर्वितरण, ट्रेड यूनियन अधिकारों और सभी बच्चों के लिए

मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा के नीतिगत लक्ष्यों के साथ यूथ लीग के बहिष्कार, हड़ताल, सविनय अवज्ञा और असहयोग के तरीकों को आधिकारिक तौर पर अपनाया।


20 वर्षों के लिए, मंडेला ने दक्षिण अफ्रीका सरकार और इसकी नस्लवादी नीतियों के खिलाफ 1952 के अवज्ञा अभियान

और 1955 की कांग्रेस की जनवादी नीतियों के खिलाफ शांतिपूर्ण, अहिंसक कार्यों का निर्देशन किया।

उन्होंने ऑलिवर टैम्बो के साथ भागीदारी करते हुए, लॉ फर्म मंडेला और टैम्बो की स्थापना की,

 एक शानदार छात्र, जो फोर्ट फेयर में भाग लेने के दौरान मिले। कानूनी फर्म ने बिना लाइसेंस वाले अश्वेतों को मुफ्त और कम लागत वाली कानूनी सलाह दी।

1956 में, मंडेला और 150 अन्य को गिरफ्तार किया गया और उनकी राजनीतिक वकालत के लिए राजद्रोह का आरोप लगाया गया (वे अंततः बरी हो गए)।

इस बीच, ANC को अफ्रीकीवादियों द्वारा चुनौती दी जा रही थी, अश्वेत कार्यकर्ताओं की एक नई नस्ल जो यह मानती थी कि ANC की शांतिवादी पद्धति अप्रभावी थी।



अफ्रीकी लोगों ने जल्द ही पैन-अफ्रीकनिस्ट कांग्रेस का गठन किया,

जिसने एएनसी को नकारात्मक रूप से प्रभावित किया; 1959 तक, इस आंदोलन ने अपने उग्रवादी समर्थन को खो दिया था।

Wife and children 


मंडेला की तीन बार शादी हुई थी और उनके छह बच्चे थे।

उन्होंने 1944 में अपनी पहली पत्नी एवलिन Ntoko मैसेज की शादी की।

 दम्पति थेम्बिकाइल (d। 1964), माकागाथो (d। 2005), मकाज़ीवे (d। 1948 नौ महीने की उम्र में) और माकी: दंपति के एक साथ चार बच्चे थे। 1957 में दोनों का तलाक हो गया।

1958 में, मंडेला ने विनी मैडीकिज़ेला का विवाह किया।

1996 में अलग होने से पहले, दंपति की दो बेटियां, एक साथ जेनानी (अर्जेंटीना के दक्षिण अफ्रीकी राजदूत) और जिंदज़िसवा (डेनमार्क में दक्षिण अफ्रीकी राजदूत) थीं।

दो साल बाद, 1998 में, मंडेला ने मोज़ाम्बिक के पहले शिक्षा मंत्री, ग्रेका मैशेल से शादी की, जिसके साथ वह 2013 में अपनी मृत्यु तक बने रहे।

Prison year

पूर्व में अहिंसक विरोध के लिए प्रतिबद्ध, मंडेला ने यह मानना शुरू कर दिया कि सशस्त्र संघर्ष परिवर्तन को प्राप्त करने का एकमात्र तरीका था।

1961 में, मंडेला ने उमाखांतो वी सिज़वे की सह-स्थापना की, जिसे एमके के रूप में भी जाना जाता है,

जो एएनसी का एक सशस्त्र अपराध था, जिसने तोड़फोड़ करने के लिए समर्पित और छापामार युद्ध की रणनीति का इस्तेमाल किया था।

1961 में, मंडेला ने तीन-दिवसीय राष्ट्रीय कर्मचारियों की हड़ताल  की।

उन्हें अगले वर्ष हड़ताल का नेतृत्व करने के लिए गिरफ्तार किया गया था और उन्हें पांच साल जेल की सजा सुनाई गई थी।

1963 में, मंडेला को फिर से परीक्षण के लिए लाया गया। इस बार, उन्हें और 10 अन्य एएनसी नेताओं को तोड़फोड़ सहित राजनीतिक अपराधों के लिए उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी




नवंबर 1962 से फरवरी 1990 तक मंडेला ने 27 साल जेल में बिताए।

 उन्हें 27 साल की जेल में 18 साल के लिए रॉबेन द्वीप पर रखा गया था। इस समय के दौरान, उन्होंने तपेदिक का

 अनुबंध किया और, एक काले राजनीतिक कैदी के रूप में, जेलकर्मियों से सबसे कम स्तर का उपचार प्राप्त किया।

हालांकि, जबकि अव्यवस्थित था, मंडेला यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन पत्राचार कार्यक्रम के माध्यम से बैचलर ऑफ लॉ की डिग्री हासिल करने में सक्षम थे।

दक्षिण अफ्रीकी खुफिया एजेंट गॉर्डन विंटर के 1981 के एक संस्मरण में मंडेला के भागने की व्यवस्था करने के लिए दक्षिण अफ्रीकी सरकार द्वारा एक साजिश का वर्णन किया गया था,

ताकि उसे हटाए जाने के दौरान गोली मार दी जा सके; ब्रिटिश खुफिया द्वारा साजिश को नाकाम कर दिया गया था।

मंडेला अश्वेत प्रतिरोध के ऐसे प्रबल प्रतीक बने रहे कि उनकी रिहाई के लिए एक समन्वित अंतर्राष्ट्रीय अभियान शुरू किया गया था,

और समर्थन के इस अंतरराष्ट्रीय आधार ने वैश्विक राजनीतिक समुदाय में मंडेला को शक्ति और सम्मान का उदाहरण दिया।

1982 में, मंडेला और अन्य एएनसी नेताओं को कथित रूप से उनके और दक्षिण अफ्रीकी सरकार के बीच संपर्क को सक्षम करने के लिए, पोल्समूर जेल ले जाया गया।

1985 में, राष्ट्रपति पी। डब्ल्यू। बोथा ने सशस्त्र संघर्ष के त्याग के बदले मंडेला की रिहाई की पेशकश की; कैदी ने फ्लैट की पेशकश को अस्वीकार कर दिया।

Noble peace prize


1993 में, मंडेला और राष्ट्रपति डी क्लार्क को संयुक्त रूप से दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद को खत्म करने के लिए उनके काम के लिए शांति के नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।

मंडेला के जेल से छूटने के बाद, उन्होंने देश के पहले बहुराष्ट्रीय चुनावों के लिए राष्ट्रपति डी केर्लकर से बातचीत की।

व्हाइट साउथ अफ्रीकन सत्ता साझा करने के लिए तैयार थे, लेकिन कई काले दक्षिण अफ्रीकी सत्ता का पूर्ण हस्तांतरण चाहते थे।

वार्ता अक्सर तनावपूर्ण थी, और पूरे देश में एएनसी नेता क्रिस हानी की हत्या सहित हिंसक विस्फोट की खबरें जारी थीं।

प्रदर्शनों और सशस्त्र प्रतिरोध के बीच मंडेला को राजनीतिक दबाव का एक नाजुक संतुलन रखना पड़ा।

Presidency


मंडेला और राष्ट्रपति डी किलक के काम का कोई छोटा हिस्सा नहीं होने के कारण, काले और सफेद दक्षिण अफ्रीकी लोगों के बीच बातचीत हुई:

27 अप्रैल, 1994 को दक्षिण अफ्रीका ने अपना पहला लोकतांत्रिक चुनाव किया।

 मंडेला का उद्घाटन देश के पहले अश्वेत राष्ट्रपति के रूप में 10 मई, 1994 को 77 साल की उम्र में डे किलक के साथ उनके पहले डिप्टी के रूप में हुआ।

1994 से जून 1999 तक, राष्ट्रपति मंडेला ने अल्पसंख्यक शासन से संक्रमण और काले बहुमत वाले शासन को अलग करने के लिए काम किया।

उन्होंने गोरों और अश्वेतों के बीच सामंजस्य को बढ़ावा देने के लिए धुरी बिंदु के रूप में खेलों के लिए राष्ट्र के उत्साह का इस्तेमाल किया,

 काले दक्षिण अफ्रीकी लोगों को एक बार नफरत करने वाली राष्ट्रीय रग्बी टीम का समर्थन करने के लिए प्रोत्साहित किया।

1995 में, दक्षिण अफ्रीका रग्बी विश्व कप की मेजबानी करके विश्व मंच पर आया,

जिसने युवा गणराज्य को और अधिक पहचान और प्रतिष्ठा दिलाई। उस वर्ष मंडेला को ऑर्डर ऑफ मेरिट से भी सम्मानित किया गया था।


अपनी अध्यक्षता के दौरान मंडेला ने दक्षिण अफ्रीका की अर्थव्यवस्था को टूटने से बचाने के लिए भी काम किया।

अपने पुनर्निर्माण और विकास योजना के माध्यम से, दक्षिण अफ्रीकी सरकार ने नौकरियों, आवास और बुनियादी स्वास्थ्य देखभाल के निर्माण के लिए वित्त पोषित किया।

1996 में, मंडेला ने बहुमत के आधार पर एक मजबूत केंद्रीय सरकार की स्थापना की,

और अल्पसंख्यकों के अधिकारों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता दोनों की गारंटी देते हुए, राष्ट्र के लिए एक नए संविधान की स्थापना की।

Movie and books

1994 में, मंडेला ने अपनी आत्मकथा, लॉन्ग वॉक टू फ़्रीडम प्रकाशित की, जिसमें से अधिकांश उन्होंने गुप्त रूप से जेल में रहते हुए लिखी थीं।

 किताब ने 2013 की फिल्म मंडेला: लॉन्ग वॉक टू फ्रीडम को प्रेरित किया।

उन्होंने अपने जीवन और संघर्षों पर कई किताबें भी प्रकाशित कीं, उनमें से नो ईज़ी वॉक टू फ्रीडम; नेल्सन मंडेला: द स्ट्रगल इज माय लाइफ; और नेल्सन मंडेला की पसंदीदा अफ्रीकी लोककथाएँ।
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Mandela day

1994 में, मंडेला ने अपनी आत्मकथा, लॉन्ग वॉक टू फ़्रीडम प्रकाशित की, जिसमें से अधिकांश उन्होंने गुप्त रूप से जेल में रहते हुए लिखी थीं। किताब ने 2013 की फिल्म मंडेला: लॉन्ग वॉक टू फ्रीडम को प्रेरित किया।