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शुक्रवार, 24 जनवरी 2020


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href="https://1.bp.blogspot.com/-77elxZ6YMqA/Xip_ETeFuGI/AAAAAAAADZM/hRF4Tc7vAvsj0VeyLG9drqlxBlvxbPiQACLcBGAsYHQ/s1600/20200124_104454_0000.png" imageanchor="1" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;">UPSC EPFO Syllabus 2020 – Check Detailed  syllabus snd Topic-Wise Distribution
href="https://en.m.wikipedia.org/wiki/Union_Public_Service_Commission" rel="nofollow">
संघ लोक सेवा आयोग (UPSC - Union Public Service Commission) कर्मचारी भविष्य निधि संगठन 


(EPFO - Employees’ Provident Fund Organisation) इनफोर्समेंट ऑफिसर / अकाउंट्स ऑफिसर (Enforcement Officer / Accounts Officer) की भर्ती 

परीक्षा 4 अक्तूबर 2020 को आयोजित करने वाला है।

 इसके लिए यूपीएससी ने परीक्षा का सिलेबस, पैटर्न और अंकों के आवंटन का नियम जारी कर दिया है।

 लेकिन परीक्षा की तैयारी शुरू करने से पहले, UPSC EPFO सिलेबस 2020 के बारे में जानना बहुत महत्वपूर्ण हो जाता है।

 इस ब्लॉग में, हम यूपीएससी ईपीएफओ प्रवर्तन अधिकारी पाठ्यक्रम 2020 में मौजूद विषयों और उनके उप-विषयों के विस्तृत विवरण को शामिल करेंगे।

 चलिए आगे का विवरण जानने के लिए ब्लॉग शुरू करते हैं।

UPSC EPFO सिलेबस 2020 - परीक्षा योजना
प्रवर्तन अधिकारियों / लेखा अधिकारियों के पदों पर भर्ती के लिए 

साक्षात्कार के लिए उम्मीदवारों को सूचीबद्ध करने के लिए एक पेन और पेपर आधारित भर्ती परीक्षा (आरटी) आयोग द्वारा 04.10.2020 को आयोजित किया जाएगा ।

परीक्षा पैटर्न - विवरण

1.  परीक्षण दो घंटे की अवधि का होगा।
2.  सभी प्रश्न समान अंकों के होंगे।

3.  परीक्षण वस्तुनिष्ठ प्रकार के प्रश्न होंगे जिसमें उत्तर के कई विकल्प होंगे।
4.  परीक्षा का माध्यम हिंदी और अंग्रेजी दोनों होगा।

5.  गलत जवाब देने पर जुर्माना लगेगा। प्रत्येक गलत उत्तर उस प्रश्न को दिए गए अंकों में से एक तिहाई की कटौती करेगा।

 यदि किसी प्रश्न के लिए कोई हंस चिह्नित नहीं है , तो उस प्रश्न के लिए कोई जुर्माना नहीं होगा।

यूपीएससी ईपीएफओ परीक्षा पैटर्न 2020

UPSC EPFO Syllabus 2020 – Check Detailed  syllabus snd Topic-Wise Distribution

UPSC EPFO परीक्षा पैटर्न में दो चरण शामिल हैं। पहले चरण में वस्तुनिष्ठ प्रकार के प्रश्नों को शामिल करना शामिल है, 

और दूसरे चरण में एक साक्षात्कार होगा।साक्षात्कार के लिए उम्मीदवार को शॉर्टलिस्ट करने के लिए, एक पेन और पेपर-आधारित लिखित परीक्षा आयोग द्वारा आयोजित की जाएगी।

परीक्षा

निशान

वेटेज

भर्ती परीक्षा
100
75%
साक्षात्कार
100
25%


लिखित परीक्षा की योजना

  • परीक्षा दो घंटे की होगी
  • परीक्षा बहुविकल्पीय प्रश्नों के साथ वस्तुनिष्ठ प्रकार की होगी
  • परीक्षा का माध्यम अंग्रेजी और हिंदी दोनों होगा
  • गलत उत्तरों के लिए, प्रत्येक गलत प्रश्न के लिए एक-तिहाई अंक की कटौती होगी।
  • संयुक्त राष्ट्र के चिह्नित सवालों के लिए कोई जुर्माना नहीं

नोट: इस परीक्षा में साक्षात्कार के चरण में न्यूनतम योग्यता अंक शामिल हैं।


वर्ग

योग्यता के निशान

सामान्य
50
अन्य पिछड़ा वर्ग
45
अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति / पीएच
40
उदाहरण के लिए, जनरल श्रेणी से संबंधित उम्मीदवारों को न्यूनतम योग्यता मानदंड के रूप में 50/100 स्कोर करना आवश्यक है।
 किसी भी मामले में 49 अंक से कम या उससे अधिक अंक वाले को अयोग्य घोषित किया जा सकता है।

UPSC EPFO ​​सिलेबस 2020


अनु क्रमांक।

विषय

1.
इतिहास: भारतीय स्वतंत्रता संग्राम
2.
भारतीय राजव्यवस्था
3.
भारतीय अर्थव्यवस्था
4.
औद्योगिक संबंध
5.
श्रम कानून
6.
भारत में सामाजिक सुरक्षा
7.
सामान्य विज्ञान
8.
कंप्यूटर अनुप्रयोगों का ज्ञान
9.
सामान्य अंग्रेजी
10.
सामान्य मानसिक योग्यता और मात्रात्मक योग्यता
1 1.
वर्तमान घटनाओं और विकास के मुद्दे
12.
सामान्य लेखा सिद्धांत


अब हम आगे इन व्यापक विषयों पर गौर करेंगे ताकि इन विषयों को कवर किया जा सके।

UPSC EPFO सिलेबस 2020 सामान्य अंग्रेजी के लिए:


क्लोज़ टेस्ट, एरर स्पोटिंग, फिल इन द ब्लैंक्स, पैरा जुंबल्स, वाक्यांश / मुहावरे, वाक्यांश प्रतिस्थापन, रीडिंग कॉम्प्रिहेंशन, सेंटेंस पूरा / पैरा पूरा करना, वर्तनी, पर्यायवाची / विलोम।

 भारतीय स्वतंत्रता संग्राम:


ब्रिटिश विस्तार के लिए UPSC EPF सिलेबस 2020 :
कर्नाटक युद्ध, बंगाल पर आक्रमण। 

मैसूर और ब्रिटिश विस्तार के साथ इसका टकराव: तीन एंग्लो-मराठा युद्ध।रेगुलेटिंग एंड पिट्स इंडिया एक्ट्स। ब्रिटिश राज की प्रारंभिक रचना।

ब्रिटिश शासन में टकराव के लिए यूपीएससी ईपीएफओ प्रवर्तन अधिकारी पाठ्यक्रम:

 1857 का विद्रोह-कारण, चरित्र, पाठ्यक्रम और परिणाम, भारतीय स्वतंत्रता पहला चरण संघर्ष: राष्ट्रीय चेतना का विकास; 

संघों का निर्माण; भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना और उसका मध्यम स्तर; 

स्वदेशी आंदोलन;आर्थिक राष्ट्रवाद; अतिवाद का विकास और कांग्रेस में विभाजन; डिवाइड एंड रूल की नीति; 1916 की कांग्रेस-लीग संधि।


गांधीवादी विचार और जनसमूह की तकनीक:


सविनय अवज्ञा, खिलाफत आंदोलन, असहयोग आंदोलन और भारत छोड़ो आंदोलन; राष्ट्रीय आंदोलन-क्रांतिकारियों, सुभाष चंद्र बोस और भारतीय राष्ट्रीय सेना में एक और भूचाल।

यूपीएससी ईपीएफओ सिलेबस 2020 - वर्तमान घटनाक्रम और विकास संबंधी मुद्दे

वर्तमान घटनाओं को मूल रूप से दैनिक वर्तमान मामलों के रूप में संदर्भित किया जाता है जो परीक्षा के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण हैं। 

विकासात्मक मुद्दे सरकार द्वारा जनता के लिए बनाई गई योजनाओं और कानूनों को सीमित करते हैं,

 जो संविधान को चलाने में आसानी के लिए बनाए रखते हैं।विकास के मुद्दे जनता की भलाई के लिए सरकार द्वारा बताई गई योजना के अंतर्गत आते हैं।


UPSC EPFO सिलेबस 2020 - भारतीय राजनीति और अर्थव्यवस्था

भारतीय संविधान, ऐतिहासिक आधार, विकास, विशेषताएं, संशोधन, संघ और राज्यों, संसद और राज्य विधानसभाओं के कार्य और जिम्मेदारियां -

 संरचना, कामकाज, व्यवसाय, शक्तियों और विशेषाधिकारों का संचालन और इनसे उत्पन्न होने वाले मुद्दे, कमजोर वर्गों के लिए कल्याणकारी योजनाएं।

 केंद्र और राज्यों द्वारा जनसंख्या और इन योजनाओं का प्रदर्शन, शासन के महत्वपूर्ण पहलू, पारदर्शिता और 

जवाबदेही, ई-गवर्नेंस- अनुप्रयोग, मॉडल, सफलताएं, सीमाएं और क्षमता; नागरिक चार्टर्स, पारदर्शिता और जवाबदेही और संस्थागत और अन्य उपाय। 

पंचायती राज, सार्वजनिक नीति, अधिकार मुद्दे

यूपीएससी ईपीएफओ सिलेबस 2020 इकोनॉमी के लिए:

आर्थिक विकास और विकास - अर्थव्यवस्था और अर्थशास्त्र की मूल अवधारणा और परिभाषा, संसाधनों का उपयोग और 

हस्तांतरण, वितरण प्रभाव, मैक्रो और माइक्रोइकॉनॉमिक पॉलिसी, माइक्रो-मैक्रो बैलेंस, आर्थिक नीतियों का वितरण प्रभाव, समावेश - 

परिभाषा, प्रासंगिकता, प्रकार, वित्तीय समावेश हाल की पहल।राजकोषीय नीति - परिभाषा, घटक, प्राप्तियां, राजस्व और पूंजी खाता, कर राजस्व, व्यय, बजट।

UPSC EPFO सिलेबस 2020 - सामान्य लेखा सिद्धांत


लेखा, विश्लेषण और रिकॉर्डिंग लेनदेन, समायोजन और वित्तीय विवरण, लेखा चक्र, सहायक लेजर और विशेष पत्रिकाओं के समापन के सिद्धांत।

UPSC EPFO सिलेबस 2020 - औद्योगिक संबंध और श्रम कानून

श्रम कानूनों के लिए प्रवर्तन अधिकारी पाठ्यक्रम 2020 -

के बारे में,
प्रकार
क्षेत्रों को लागू किया
सेक्टर लागू होते हैं
अवलोकन

यूपीएससी ईपीएफओ पाठ्यक्रम 2020 - औद्योगिक संबंध -

औद्योगिक संबंध कोड (आईआरसी) विधेयक
श्रम सुधारों का मॉडल।

UPSC प्रवर्तन अधिकारी सिलेबस 2020 सामान्य विज्ञान के लिए:

  भौतिक विज्ञान,
रसायन विज्ञान

जीवन विज्ञान
कंप्यूटर अनुप्रयोगों के लिए यूपीएससी ईपीएफओ पाठ्यक्रम 2020 -

कंप्यूटर संगठन
ऑपरेटिंग सिस्टम
डेटाबेस प्रबंधन
डेटा संरचनाएं
डाटा संचार
कंप्यूटर नेटवर्क

UPSC EPFO सिलेबस 2020 - सामान्य मानसिक योग्यता और मात्रात्मक योग्यता

यूपीएससी ईपीएफओ प्रवर्तन अधिकारी पाठ्यक्रम के लिए मात्रात्मक योग्यता:
नंबर सिस्टम
प्रतिशत
लाभ हानि
औसत
अनुपात
SI और CI

UPSC EPFO सिलेबस 2020 के लिए सामान्य मानसिक योग्यता:

डेटा व्याख्या (चार्ट, ग्राफ, टेबल)
डेटा पर्याप्तता
युक्तिवाक्य
पहेलियाँ और अधिक
यह सब दसवीं कक्षा के स्तर पर।
.

UPSC EPFO सिलेबस 2020 - भारत में सामाजिक सुरक्षा:

सामाजिक सुरक्षा क्या है ?, सामाजिक सुरक्षा का इतिहास, भारत में सामाजिक सुरक्षा, सामाजिक सुरक्षा: संवैधानिक प्रावधान 

समवर्ती सूची, राज्य नीति के भाग IV के निर्देशक सिद्धांत, संगठित और असंगठित क्षेत्रों के बीच अंतर 

भारत में सामाजिक सुरक्षा कानून, कर्मचारी राज्य बीमा अधिनियम, 1948 (ईएसआई अधिनियम),

 कर्मचारी भविष्य निधि अधिनियम, 1952, कामगार मुआवजा अधिनियम, 1923 (डब्ल्यूसी अधिनियम), मातृत्व लाभ अधिनियम, 1961 (एमबी अधिनियम), ग्रेच्युटी अधिनियम का भुगतान। , 

1972 (PG Act), भारत में सामाजिक सुरक्षा: विकसित राष्ट्रों से अलग, भविष्य निधि।
UPSC EPFO Syllabus 2020 – Check Detailed  syllabus snd Topic-Wise Distribution


नोट: " हालांकि अधिसूचनाएँ उप-विषयों की सूची को निर्दिष्ट नहीं करती हैं, लेकिन यहाँ उल्लिखित अन्य यूपीएससी परीक्षाओं के सिलेबस पर आधारित हैं।"

Source -gradeup, oliveboard.in


इस ब्लॉग में  हम  वह सब कवर किये है जो इसके लिए रिक्वायर्ड है । हमने एक विशेष दिशा में अपके

 तैयारियों को पूरा करने में आपकी मदद करने के लिए प्रासंगिक UPSC EPFO सिलेबस 2020 को कवर किया है।

हमें उम्मीद है कि यह ब्लॉग UPSC EPFO परीक्षा पाठ्यक्रम के बारे में आपके प्रश्नों का उत्तर देने में  आपकी सहायता करेगी..

 दोस्तों यदि यह ब्लॉग आप के लिए हेल्पफुल रहा हो तो प्लीज आप इसे दूसरों तक भी शेयर करे |





गुरुवार, 23 जनवरी 2020


Is it really possible to crack UPSC CSE in 8 months like Saumya Sharma,

 Is it really possible to crack UPSC CSE in 8 months like Saumya Sharma,


 सौम्या शर्मा 2017 बैच की आईएएस टॉपर है जो ऑल इंडिया रैंक 9 हासिल की थी.

चलिए आज बात कहते हैं उनके स्ट्रेटजी के बारे में  और जानते हैं सौम्या शर्मा कैसे मात्र 8 महीने में तैयारी करके ऑल इंडिया में 9 वां रैंक हासिल कर ली

 तो चलिए सौम्या शर्मा की इंटरव्यू देखते हैं अनीश, सौम्या शर्मा का इंटरव्यू ले रहे हैं-.

IAS Topper's Interview - Saumya Sharma (AIR 9 - CSE 2017)

IAS Topper's Interview - Saumya Sharma (AIR 9 - CSE 2017)

अनीश :  

सौम्या शर्मा को उनकी सफलता पर बधाई देते  है। परिणाम सामने आने के बाद से जीवन कैसे बदल गया है?

सौम्या: 

यह बहुत वैकल्पिक हो गया है, लेकिन यह एक अद्भुत बदलाव है और मैं भगवान के लिए बहुत आभारी हूं।

अनीश

मुझे यकीन है कि इस स्तर पर पहुंचने के लिए इतना कुछ करना होगा।

यह परिवार और सब कुछ के लिए परिवर्धन में आपकी कड़ी मेहनत है, इसलिए यदि आप अपनी शिक्षा और परिवार की थोड़ी सी पृष्ठभूमि दे सकते हैं।

यूपीएससी की तैयारी के लिए आपको क्या प्रेरणा मिली?

सौम्या

मैंने अपनी स्कूली शिक्षा दिल्ली से की और उसके बाद मैंने दिल्ली के नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी में प्रवेश लिया,

जो स्नातक की पढ़ाई के लिए द्वारका में है। मैंने विभिन्न संगठनों में कुछ इंटर्नशिप की,

जिसने मुझमें यह जान डाल दी कि मुझे कुछ बड़ा करने की जरूरत है और वह है देश की सिविल सेवा।

उसके लिए प्रेरणा मेरे माता-पिता के माध्यम से भी आई क्योंकि मेरे माता-पिता दोनों डॉक्टर हैं

और यह पेशा सभी समाज के लिए कुछ करने का है, इसलिए उन्हें देखने के बाद उस चीज ने भी मुझे एक बड़े स्तर पर कुछ करने के लिए प्रेरित किया।

अनीश

यह आपका पहला प्रयास था और आप तब भी कॉलेज में थे जब आप तैयारी कर रहे थे,

 तब आपके दिमाग में यह योजना कैसे आई थी और उसके बाद आपकी क्या तैयारी थी?

सौम्या: 

मेरे 3 साल के अंत की ओर, मैंने सिविल सेवाओं में दिलचस्पी लेना शुरू कर दिया,

लेकिन मैंने इसके लिए कोई तैयारी नहीं की क्योंकि मुझे पढ़ना पसंद है और मैंने आमतौर पर उन विषयों पर कुछ किताबें पढ़ी हैं

जो भारत के बाद गांधी और कुछ अन्य इतिहास हैं और भूगोल की किताबें क्योंकि ऐसी किताबें थीं जिनमें मुझे हमेशा दिलचस्पी थी।

बाद में, मैं कॉलेज की भर्ती में मेरे साथ तीन नौकरी की पेशकश में रखा गया।

मैंने तैयारी शुरू नहीं की। केवल 19 फरवरी 2017 को आखिरी बार, मैंने परीक्षा की तैयारी शुरू की।

यह कुछ ऐसा था, जो घर पर हुआ और इसने मुझे प्रेरित किया कि मैं इस वर्ष, इस परीक्षा को लिखने जा रहा हूं।

22 फरवरी को परीक्षा की अधिसूचना आई। उसी दिन मैंने खुद को पंजीकृत किया और 19 फरवरी 2017 से आगे

और बहुत आश्चर्यजनक रूप से 19 फरवरी 2018 को मेरे साक्षात्कार की तारीख थी।

मैं केवल इस पूरे एक वर्ष का अध्ययन कर रही थी  और इस दौरान कुछ नहीं किया।

मेरे हाथों में समय की कमी के कारण, मुझे बहुत लंबे समय तक काम करना पड़ा

अनीश: 

क्या आप केवल चार महीने में 19 फरवरी 2017 से 19 जून 2017 तक के प्रीलिम्स पर ध्यान केंद्रित करते थे

 या यह एक अधिक व्यापक दृष्टिकोण था जो कि मुख्य और प्रीलिम्स को एक साथ देखना था।

सौम्या: 

नहीं, यह केवल प्रीलिम्स की तैयारी थी क्योंकि जब मैं प्रीलिंमस क्लीयर करने की संभावना देख रही थी

जो निश्चित रूप से क्लीयरिंग मेन की संभावना से बहुत कम थी।

इसलिए मैं प्रीलिम्स में ही हारना नहीं चाहती थी , इसलिए मेरी तैयारी केवल प्रीलिम्स पर केंद्रित थी।

मैंने मानक पाठ्यपुस्तकों जैसे लक्ष्मीकांत या ncert के बारे में पढ़ना शुरू किया, ताकि मैं खुद को प्रीलिम्स के लिए तैयार कर सकूं

हालाँकि, जैसा मैंने कहा कि मैं हमेशा अखबार पढ़ती रही हूँ इसलिए मुझे हमेशा पता था कि क्या हो रहा है।

उसकी वजह से, मुझे प्रीलिम्स के बाद मेन की तैयारी करने में परेशानी नहीं हुई क्योंकि मेरा मानना है कि मेरे पास एक अच्छा आधार था।

मैंने अभ्यास परीक्षण से करंट अफेयर्स किया। मैंने कई टेस्ट सीरीज़ भी ज्वाइन कीं और बहुत सारी प्रैक्टिस भी की।

अनीश

प्रीलिम्स के ठीक बाद, क्या आपको लगता है कि आपके पास हर उस चीज़ को कवर करने के लिए पर्याप्त समय है 
जो मुख्य के लिए आवश्यक थी?

सौम्या

नहीं, मैंने नहीं किया। वास्तव में मेरे पास बहुत कम समय था और मैंने अपने वैकल्पिक विषयों को भी नहीं छुआ था,

लेकिन मेरे लिए फिर से भाग्यशाली था, कानून एक ऐसी चीज है जिसमें मैंने अपने जीवन के पांच साल कॉलेज में शुरू होने पर बिताए हैं।

इसलिए भी कि मैं अपने कॉलेज के दौरान एक ईमानदार छात्रा थी,  और मेरे पास मेरे नोट्स थे।

तो पाठ्यक्रम के भारी हिस्से जैसे संवैधानिक कानून, आपराधिक कानून और उस सब के साथ, मेरे पास एक बहुत व्यापक नोट था इसलिए मैं उठा सकती थी |

प्रीलिम्स के बाद, मैंने मुश्किल से दिन का ब्रेक लिया।

मैं हमेशा एक सकारात्मक तस्वीर देख रही थी कि मैं अभी भी इन घंटों में जो प्रयास कर रहा हूं, उसे अधिकतम कर सकूं।

अनीश

तैयारी और पदानुक्रम के बारे में बात करते हुए, दो चीजें आम तौर पर सामने आती हैं एक उदाहरण के लिए फिर से हमने पढ़ा है कि

जब आप मुख्य की तैयारी कर रहे थे तो आप काफी अच्छा महसूस नहीं कर रहे थे 

और आप उन दिनों वायरल बुखार से पीड़ित थे और आपके पास भी काफी समय से सुनने की दुर्बलता है 

तो उन चीजों ने आपकी यात्रा को अभी तक कैसे आकार दिया है?

सौम्या:

 मैं सबसे पहले अपनी श्रवण दुर्बलता से शुरुआत करूंगी,

इसलिए मेरा मानना है कि इन दो चुनौतियों के बारे में जो भी आप निश्चित रूप से बात कर रहै है,

उसने मुझे एक मजबूत व्यक्ति बनाया है क्योंकि ये वास्तव में मेरे जीवन के निम्न बिंदु थे,

मैंने सुनने के लिए अपने श्रवण यंत्र का उपयोग किया। उ

स समय मैं अपने स्कूल में 11 वीं कक्षा में था और मेरा जीवन बहुत अच्छा चल रहा था, तब तक यह मेरे लिए बहुत बड़ा झटका था।

मुझे यह स्वीकार करने में काफी समय लगा कि ऐसा हुआ है। हालांकि, आखिरकार मैंने स्वीकार कर लिया और इसके साथ शांति बना ली कि यह हुआ है और मैं इसके बारे में कुछ नहीं कर सकती ।

मुझे बस खुद को चुनने की जरूरत है और अपने दिमाग में इस चीज को लेकर आगे बढ़ूं कि मैंने अच्छी तरह से अध्ययन किया।

इसलिए, मुझे सिर्फ दर्शकों को यह बताने की जरूरत है कि आप पर क्या जीवन गिरता है

कृपया जान कर हतोत्साहित न हों, बस खुद को उठाएं और आगे बढ़ें क्योंकि आप कभी नहीं जानते कि बाद में क्या हो सकता है।

मेरे मुख्य समय के बारे में, जैसा कि मैंने आपको बताया था कि मेरे पास बहुत अध्ययन करने के लिए बहुत कम समय था।

परीक्षा के दौरान, मैं बहुत बीमार थी,  सबसे पहले, मेरे दाहिने हाथ में मांसपेशियों में ऐंठन थी और मैं एक पेन भी नहीं उठा सक ती थी

, इसलिए यह मेरे लिए इस पूरे एपिसोड में बहुत बुरा था।

 वह दिन था जब मैं पूरे दिन बिस्तर पर थी और कुछ भी संशोधित नहीं कर सकती थी ।

 मेरे लिए यह बहुत मुश्किल समय था क्योंकि मैंने कभी सोचा भी नहीं था कि बहुत प्रयास करने के बावजूद मुझे अपनी तैयारियों के प्रति इतना ईमानदार होना पड़ेगा, यही होगा।

अपने स्वयं के स्वास्थ्य के बारे में शक्तिहीनता की पूरी भावना एक ऐसी चीज है जिसे आप बस मदद नहीं कर सकते हैं और यह बहुत बुरा था।

हालांकि, मैंने सिर्फ खुद को चुनने और किसी तरह जाने का फैसला किया।

मेरे माता-पिता ने यह नहीं सोचा था कि मैं सुबह उठकर परीक्षा लिखूंगी क्योंकि मेरा बुखार बढ़ रहा था
और यह लगभग 103 था।

यह बात मैं हर किसी से कहना चाहती  हूं कि कृपया ऐसी चीजों को नीचे लाएं। । अपने आप को उठाओ और आगे बढ़ो।

अनीश:

 यह सुनिश्चित करने के लिए कि अगर किसी को परीक्षा से पहले और बीच में IV स्टेज  मिल रही हैं और अंत में रैंक 9 स्कोर कर सकता है

 जो यह बताता है कि कुछ भी असंभव नहीं है और निश्चित रूप से मुझे यकीन है कि जो लोग बाहर हैं उनके लिए बहुत प्रेरणादायक है।

मुझे आपके द्वारा चुने गए विकल्प के बारे में थोड़ा और पूछना चाहिए।

क्या आपके लिए यह बहुत स्पष्ट निर्णय था या आप उस प्रक्रिया से गुज़रे थे 

जहाँ आपने कुछ अन्य विकल्पों को समाप्त कर दिया था और फिर अंत में कानून को संकुचित कर दिया था या यह शुरू से ही बहुत स्पष्ट था?

सौम्या: 

नहीं, कानून मेरे लिए एक बहुत ही स्वाभाविक विकल्प था क्योंकि मैंने एक अच्छे विश्वविद्यालय से कानून की पढ़ाई के लिए ५ साल बिताए थे

और विषयों की मेरी मूल बातें काफी स्पष्ट थीं, इसलिए यह कभी भी एक मुद्दा नहीं है

 और यदि आप वैकल्पिक विषयों को देखें, तो कानून ओवरलैप हो जाता है।

 जीएस -2 पेपर के साथ कुछ विषयों और कानून में फिर से कानून का ज्ञान है जो आपको प्रारंभिक परीक्षा में विनम्रता के साथ मदद करता है।

इसलिए, कानून मेरा स्वाभाविक निर्णय था।

अनीश

तो आपने स्नातक के दौरान पांच साल की शिक्षा के साथ कितना ओवरलैप किया?

सौम्या: 

कानून विकल्प में, कई विषय हैं; मेरे विश्वविद्यालय में लगभग सभी शामिल थे।

हालांकि, परीक्षा की मांग थोड़ी अलग है क्योंकि विश्वविद्यालय में आपको कुछ विषयों को अत्यधिक विस्तार से पढ़ाया जा सकता है और कुछ पर सिर्फ नज़र रखी जा सकती है।

हालांकि, इस परीक्षा में सभी विषयों को समान रूप से अध्ययन करने की आवश्यकता होती है।

 इसलिए आपको इस विषय पर पहले से समझ है। जो आपने पहले ही किया है, उसे करना वास्तव में कभी भी कठिन नहीं है।

अनीश

इन दिनों आप ऐसे लोगों के बारे में भी सुनते हैं जो वास्तव में कानून के विकल्प के रूप में कानून की पृष्ठभूमि से नहीं हैं? आप उससे क्या कहेंगे?

सौम्या

इस साल केवल शीर्ष 20 रैंकरों में से एक वकील नहीं है। वह एक डॉक्टर हैं, नेहा जैन।

वास्तव में पिछले वर्ष में भी, कई लोग जिनके पास कोई कानून की शिक्षा की डिग्री नहीं है, उन्होंने फिर से इस परीक्षा को एक कानूनी विकल्प में क्रैक किया है।

इसलिए इस तरह के लोगों के लिए जिन्हें कानून का कोई पूर्व अनुभव नहीं है,

मैं सिर्फ इतना कहूंगी कि कानून का पाठ्यक्रम बहुत लंबा है। इसलिए यदि आप इसे एक वैकल्पिक विषय के रूप में लेने की कोशिश कर रहे हैं,

 तो कृपया यह जान लें कि यह आपका बहुत समय लेगा, लेकिन उस कानून के साथ निश्चित रूप से एक बहुत ही सुखद वैकल्पिक विषय है और आप इसे निश्चित रूप से ले सकते हैं।

अनीश

तो आपने उल्लेख किया है कि आपने कोई कोचिंग ज्वाइन नहीं की है लेकिन आपने कुछ टेस्ट सीरीज़ चुनी हैं।

सौम्या: 

मैंने नैतिकता मॉड्यूल के बारे में बहुत कुछ पढ़ा था। हालाँकि मेरे पास कक्षाओं के लिए समय नहीं था,

मैंने नैतिकता के पेपर में एक अच्छा स्कोर प्राप्त करने की अपनी संभावनाओं को अधिकतम करने के लिए सिर्फ टेस्ट सीरीज़ में शामिल होने का फैसला किया और भले ही मैं दिल्ली में रहती हूँ,

अनीश

आप ऑनलाइन माध्यम से सहज थे, जिस तरह से टेस्ट सीरीज़ को संभाला गया था?

सौम्या: 

हां, जरूर। यह काफी आरामदायक था।

अनीश

तो, अब जब नतीजे निकल चुके हैं और अगस्त के अंत तक प्रशिक्षण शुरू हो रहा है। 

तो, इन दिनों आपके दिमाग में क्या चल रहा है? मेरा मतलब है कि यह जिम्मेदारी की अधिक समझ क्या है?

 क्या यह उपलब्धियों का अधिक बोध है? इन दिनों किस तरह की भावनाएं चल रही हैं?

सौम्या: 

भावनाएं निश्चित रूप से महान कृतज्ञता और जिम्मेदारी में से एक हैं क्योंकि

अब यह महसूस होता है कि मैंने कदम खत्म कर लिया है लेकिन अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है।

अनीश

तो निश्चित रूप से आप इसे पहले ही यात्रा के प्रयास में साफ़ कर रही  हैं जो आप अभी तक कर रही है ।

 यह निश्चित रूप से बहुत प्रेरणादायक है। मुझे यकीन है कि बहुत से लोग बहुत सारे महान बिंदुओं को दूर कर लेंगे।

 तो जो लोग इस इंटरव्यू को पढ़ रहे हैं उनमें से कुछ भी, जो आप की सिफारिश करना चाहते हैं या कुछ और जो आपने सीखा है?


सौम्या:

 हर कोई जो इस परीक्षा की तैयारी कर रहा है, मैं यह कहना चाहूंगी कि सबसे पहले, खुद के साथ ईमानदार रहें

 और अपनी तैयारी के प्रति ईमानदार रहें क्योंकि अगर किसी भी समय आप गलती करते हैं,

तो बस आपको नुकसान उठाना पड़ेगा

दूसरी बात, परीक्षा के प्रत्येक चरण का और परीक्षा में प्रत्येक पेपर का सम्मान करें

 क्योंकि केवल लगातार अच्छा प्रदर्शन ही आपको अच्छे परिणाम की ओर ले जाएगा इसलिए परीक्षा के किसी भी भाग को हल्के में न लें।

तीसरा, सबसे महत्वपूर्ण यह है कि कभी भी खुद पर विश्वास करना बंद न करें क्योंकि

 यह एक ऐसी चीज है जिसे मैं अपनी पूरी जीवन कहानी के साथ कह सकती हूं।

ऐसे कई पल थे कि मैं बस बैठ गयी और नहीं जाने का फैसला किया और आप जानते हैं कि बस इस बात को छोड़ देना चाहते थे

 कि चीजें कैसे बदल जाएंगी, लेकिन अपने आप पर विश्वास करना मत छोड़िए.

अनीश

 आपके समय के लिए बहुत बहुत सौम्या धन्यवाद। आपकी बहुत बड़ी सफलता के लिए बधाई और आपके भविष्य के लिए शुभकामनाएं।
IAS Topper's Interview - Saumya Sharma (AIR 9 - CSE 2017)


सौम्या: धन्यवाद।

Source - Neostencil.com

 दोस्तों यदि यह ब्लॉक

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गुरुवार, 16 जनवरी 2020



1. हर साल पूरे भारत में सेना दिवस कब मनाया जाता है?




2. भारत ने हाल ही में किस देश को उच्च शिक्षा और अनुसंधान में अपने विकास में सहायता के लिए लगभग एक लाख अकादमिक पाठ्य पुस्तकें प्रदान की हैं?




3. किस क्रिकेटर ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) द्वारा प्रस्तुत ' प्लेयर ऑफ द ईयर' के लिए 'सर गारफील्ड सोबर्स' ट्रॉफी जीता?




4. किस कंपनी ने हाल ही में भारत में लघु और मध्यम व्यवसायो को डिजिटल बनाने के लिए 1 बिलियन डॉलर का निवेश करने की घोषणा की है?




5. कौन सा संगठन भारत में वार्षिक स्थिति शिक्षा रिपोर्ट (ASIR) जारी करता है?




6. किस वैश्विक टेलीकम्युनिकेशन कंपनी ने हाल ही में 'one search ' नामक एक नया गोपनीयता केंद्रीय खोज इंजन लॉन्च किया है?




7. प्रख्यात फिल्म निर्माता और निर्देशक मन मोहन महापात्र जिनका हाल ही में निधन हो गया किस राज्य से थे?




8. प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन में नवीन तरीकों को अपनाने के लिए किस राज्य के जिला प्रशासन ने स्वच्छता दर्पण पुरस्कार जीता है?




9. हाल ही में सड़क सुरक्षा हित धारकों की बैठक में लांच किए गए इंटीग्रेटेड रोड एक्सीडेंट' डेटाबेस ( IRAD) को किस संस्था द्वारा विकसित किया गया था?




10. शहरी क्षेत्र में लैंडफिल और डंप साइट से निकलने वाली गैस है?





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54 Students From Jamia Millia's Coaching Academy Clear Civil Services Main






 पिछले साल यानी 2019 में जामिया के 44 छात्र ने यूपी से पास किया था,

 जिसमें ऑल इंडिया में थर्ड रैंक लाने वाले जुनैद अहमद भी शामिल थे,.
 इस बार का रिजल्ट यानी 2020 का रिजल्ट 20 -29 सितंबर 2019 तक आयोग द्वारा आयोजित परीक्षा का जारी किया गया है

खास बाते 


इस बार के upsc mains में जामिया के 54 छात्र ने कामयाबी हासिल की

पिछले साल यानी 2019 में 44 छात्र जामिया से सिलेक्शन हुए थे

जामिया इस्लामिया की रेजिडेंशियल कोचिंग एकेडमी के छात्रों ने सफलता हासिल की है

 जामिया मिलिया इस्लामिया की रेजिडेंशियल कोचिंग अकेंडमी में  कोचिंग कर रहे छात्रों में से 54 छात्रों ने इस बार की सिविल सेवा मुख्य परीक्षा यानी यूपीएससी मैंस पास कर लिया है

. इन सभी छात्रों को यूपीएससी 2019 में सफलता मिली है.

अब यह सभी सफल छात्र फरवरी में आयोजित होने वाली यूपीएससी इंटरव्यू में हिस्सा लेंगे.

 बता दें कि पिछले साल यानी 2018 में जामिया मिलिया इस्लामिया की रेजिडेंशियल कोचिंग अकैडमी में कोचिंग करने वाले छात्रों में से 44 छात्रों ने यूपीएससी मैंस के लिए किया था.

जिसमें ऑल इंडिया में थर्ड रैंक लाने वाले जुनैद अहमद भी शामिल थे.

 बता दे कि जनवरी में जो यह रिजल्ट जारी किया गया है इसका एग्जाम 20 से 29 सितंबर 2019 में कराया गया था.



• union public service commission ( UPSC)  भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS), 

भारतीय विदेश सेवा (IFS), 

भारतीय पुलिस सेवा (IPS) 

और अन्य केंद्रीय सेवाओं के समूह 'A' और समूह 'B' के चयन के लिए सिविल सेवा परीक्षा आयोजित करता है. 


54 छात्रों के पास होने पर यूनिवर्सिट ने एक बयान  जारी करके कहा -
 


'इन छात्रों को सिविल सेवा के जरिए राष्ट्र निर्माण के लिए तैयार करने में विश्वविद्यालय प्रतिबद्ध है.

इन छात्रों को विश्वविद्यालय मुफ्त आवास, लाइब्रेरी सुविधा, क्लासरूम टीचिंग,  प्रैक्टिस टेस्ट आदि प्रदान किए जाते हैं. सीटों की उपलब्धता के आधार पर जामिया आरसीए

 अब कुछ और ऐसे योग्य उम्मीदवारों को ट्रेनिंग देगा जो इंटरव्यू के लिए तैयारी करें

.उम्मीदवार जामिया की आध‍िकारिक वेबसाइट www.jmi.ac.in पर जाकर इस बारे में ओर जानकारी ले सकते सकते हैं.'


 जामिया इस्लामिया रेजिडेंसी कोचिंग एकेडमी की स्थापना


2010 में जामिया इस्लामिया रेजीडेंसी कोचिंग एकेडमी की स्थापना हुई थी

 2010 में स्थापित जे एमआई ने अभी तक यानी 2019 तक में 190 सिविल सर्वेंट तैयार किए हैं

 इसमें यूपीएससी की परीक्षाओं के माध्यम से आईएएस, आईएफएस, आईपीएस, आईआरटीएस आदि शामिल हैं.

इसके अलावा, स्टेट लेवल की सिविल सेवाओं में एसडीएम और डीएसपी के रूप में अफसर दिए हैं

. वहीं असिस्टेंट कमांडेंट (सीएपीएफ), आईबी, असिस्टेंट कमिश्नर (प्रोविडेंट फंड) और बैंक पी.ओ. भी बड़ी संख्या में इस कोचिंग से निकले.


 जामिया इस्लामिया मुस्लिम यूनिवर्सिटी की स्थापना

परिचय

जामिया मिल्लिया इस्लामिया संयुक्त प्रांत,  भारत के अलीगढ़ में मूल रूप से 1920 में एक संस्था के रूप में स्थापित किया गया।

1988 में भारतीय संसद के  अधिनियम द्वारा एक केंद्रीय विश्वविद्यालय बना ।

उर्दू भाषा, में जामिया का अर्थ है विश्वविद्यालय, और मिल्लिया का अर्थ है ‘राष्ट्रीय‘।

आजादी के पूर्व नई दिल्ली में स्थित एक छोटी सी संस्था से केन्द्रीय विश्वविद्यालय तक इसके विकास की कहानी

- नर्सरी से एकीकृत शिक्षा में विशेष क्षेत्रों में अनुसंधान के लिए प्रस्तुत - लोगों के समर्पण,  दृढ़ विश्वास की गाथा है, जो सभी बाधाओं को पार करते हुए कदम बढ़ाते रहे।

भारत कोकिला सरोजिनी नायडू‘ के अनुसार उन्होनेतिनका-तिनका जोड़कर और तमाम कुर्बानियाँ देकर जामिया का निर्माण किया।”


अवधारणा 

औपनिवेशिक ब्रिटिश शासन के अधीन दो प्रमुख प्रवृत्तियों ने हाथ मिलाकर जामिया के निर्माण में योगदान दिया।

 एक उपनिवेश विरोधी इस्लामी सक्रियतावादी थी

और दूसरी पश्चिमी शिक्षित भारतीय मुस्लिम बुद्धिजीवियों के राजनैतिक रूप से कट्टरपंथी धारा की समर्थक एवं स्वतंत्रता आकांक्षी थी।

 1920 के राजनीतिक माहौल में, एक उत्प्रेरक के रूप में महात्मा गांधी के साथ-साथ दो प्रवृतियों,  उपनिवेश विरोधी सक्रियतावादी खिलाफत आन्दोलन और


 भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के असहयोग-आंदोलन ने रचनात्मक शक्तियों को संगठित करने के साथ साथ जामिया मिल्लिया इस्लामिया के निर्माण में भी मदद की।

 रवीन्द्रनाथ टैगोर ने इसे भारत के सबसे प्रगतिशील शैक्षिक संस्थानों में से एक कहा है।

गाँधीजी के आह्वान पर औपनिवेशिक शासन द्वारा समर्थित या चलाए जा रहे सभी शैक्षणिक संस्थाओं का बहिष्कार करने के लिए,

राष्ट्रवादी शिक्षकों और छात्रों के एक समूह ने ब्रिटिश समर्थक इच्छा के खिलाफ विरोध कर अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय छोड़ दिया।

इस आंदोलन के सदस्यों में मौलाना महमूद हसन, मौलाना मौहम्मद अली, हकीम अजमल खान, डॉ. मुख्तार अहमद अंसारी और अब्दुल मजीद ख़्वाजा प्रमुख थे।

संकटकाल

उस समय जन्मे राजनैतिक संकट में थोड़ी देर के लिए ऐसा लगा कि भारत की स्वतंत्रता के गहन राजनैतिक संघर्ष की गर्मी में जामिया बच नहीं पाएगा।

इसने बारडोली संकल्प में भाग लिया और देश के स्वतंत्रता संघर्ष के लिए लोगों को प्रेरित करने के लिए देश भर में स्वयंसेवकों को भेजा।

औपनिवेशिक ब्रिटिश सरकार ने जल्द ही कई शिक्षकों और छात्रों को कैद कर लिया।

1922 में गाँधीजी द्वारा असहयोग-आंदोलन वापस ले लिया गया।

शिक्षकों और छात्रों को छोड दिया गया। मुस्तफा कमाल अतातुर्क ने 1924 में खिलाफ़त के अंत की घोषणा की।

अचानक जामिया ने स्वयं को एक गंभीर संकट में देखा।

 कुछ का विश्वास था कि जामिया अपने मिशन को हासिल करेगा

, दूसरों का विश्वास था कि संस्था ने अपने अस्तित्व को असहयोग और खिलाफत आंदोलन के अंत के साथ खो दिया है।

यहां तक कि खिलाफत से प्राप्त छोटी वित्तीय सहायता भी अब मिलनी बंद हो गई।

जब प्रमुख लोगों ने इसे छोड़ना शुरू कर दिया तब जामिया के विध्वंस की संभावना स्पष्ट दिखाई देने लगी।


जामिया को दिल्ली लाया गया


यह कहावत कि-जब वक्त खराब आता है साया भी साथ छोड जाता है-

जामिया के बारे में चरितार्थ नहीं हो सकी।

जब संकट गहराया तब हकीम अजमल ख़ान, डॉ. मुख्तार अहमद अंसारी और अब्दुल मजीद ख़्वाजा तीनों ने गाँधीजी की सहायता से जामिया को 1925 में अलीगढ़ से करोल बाग, नई दिल्ली में स्थानांतरित किया।

गाँधीजी ने यह कहकर कि -जामिया को चलना होगा, अगर तुम को वित्तीय सहायता की चिंता है तो मैं इसके लिए कटोरा लेकर भीख मांगने के लिए तैयार हूँ।

 इस बात ने जामिया का मनोबल बढ़ाया। जब आत्मनिर्भरता के लिए गांधी जी ने चरखा और तकली के रचनात्मक कार्यक्रम को पसंदीदा पेशे के रूप में अपनाया, जामिया ने उसका अनुगमन किया।

हालांकि गांधीजी ने जामिया की वित्तीय मदद को सुरक्षित करने के लिए बहुत लोगो से संपर्क भी किया,

 लेकिन ब्रिटिश राज के तहत कांग्रेस समर्थित संस्था की मदद करने का जोखिम कई इच्छुक संरक्षक नहीं उठाना चाहते थे।

रूढिवादी मुसलमानों ने भी जामिया को अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के लिए खतरे के रूप में देखा।

उन मुश्किल दिनों के दौरान हकीम अजमल खान ने अपनी जेब से जामिया के ज्यादातर खर्च उठाए।

डॉ एम.ए. अंसारी और अब्दुल मजीद ख़्वाजा ने भारत और विदेशों में जामिया के महत्व को समझाने और इस महान संस्थान के लिए धन इकट्ठा करने के लिए दौरा किया।

उनके सामूहिक हस्तक्षेप ने इसके निश्चित पतन को टाल दिया।

पुनरुत्थानः दूसरी तिकड़ी



1925 में, लंबी विवेचना के बाद तीन दोस्तों के एक समूह -

डॉ. जाकिर हुसैन, डॉ. आबिद हुसैन और डॉ. मोहम्मद मुजीब ने जर्मनी में अध्ययन करने के बाद जामिया की सेवा करने का फैसला किया।

डॉ. जाकिर हुसैन, जिन्होने बर्लिन विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में डॉक्टरेट प्राप्त की थी

, एक प्राकृतिक और करिश्माई नेता थे। डॉ. आबिद हुसैन ने अपनी पी.एच. डी. शिक्षा के क्षेत्र में प्राप्त की थी।

 मौहम्मद मुजीब इतिहास के एक ऑक्सफोर्ड विद्वान और जर्मनी में मुद्रण के छात्र थे और वह जोशीले एवं प्रतिबद्ध सुधारवादी नेता थे।

 फरवरी 1926 के प्रारंभ में, तीन दोस्त जर्मनी से ‘नार्दयुशर लॉयड स्टीमर एस एस डेरफिलंगर’ द्वारा जामिया आए।


जामिया में डॉ. जाकिर हुसैन को 100 रूपये वेतन की पेशकश की गई।

यूरोपीय योग्यता प्राप्त उनके दो अन्य दोस्तों को 300 रूपये वेतन की पेशकश की गई।

जामिया के सीमित संसाधनों से भुगतान की कठिनाई का एहसास होने पर आबिद हुसैन और मोहम्मद मुजीब ने स्वेच्छा से अपने वेतन को घटाकर 100 रूपये किया।

अपने दोस्तों की प्रतिबद्धता को देखते हुए डॉ. जाकिर हुसैन ने भी अपना वेतन 80 रु. करने का फैसला किया।


 उन्होने जो कदम उठाए उनमे पहला एक बेहद लोकप्रिय कदम शाम की कक्षाओं में प्रौढ़ शिक्षा की शुरूआत करना था।

यह आंदोलन बाद में अक्तूबर 1938 में इदारा-ए-तालीम-ओ-तरक्की नामक एक संस्था के रूप में जाना जाने लगा।

यह इतना लोकप्रिय हुआ कि छात्रों को समायोजित करने के लिए अलग-अलग कमरे बनाए गए।


1928 में हकीम अजमल खान का निधन हो गया। हकीम साहब जामिया की वित्तीय जरूरतों का इंतजाम करते थे

इसलिए यह दूसरे वित्तीय संकट की शुरुआत थी। जामिया का नेतृत्व फिर डॉ. जाकिर हुसैन के हाथों में आ गया

जो 1928 में जामिया के वाइस चांसलर बने।

जामिया के लगातार संकटों के समाधान के  लिए प्रतिज्ञाबद्ध युवा शिक्षकों के एक समूह ने डॉ. जाकिर हुसैन के नेतृत्व में अगले बीस वर्षों के लिए 150 रूपये के वेतन पर काम करने का संकल्प लिया।

 यह समूह जामिया का आजीवन सदस्य कहलाया  (जब जामिया के शिक्षकों का एक दूसरा समूह एक समान प्रतिज्ञा लेकर 1942 में आया तब इतिहास दोहराया  गया।)


जामिया का मुद्रण और प्रकाशन विभाग दरिया गंज में स्थापित नयी जामिया प्रेस, उर्दू अकादमी और

 मकतबा जामिया के साथ 1928 में प्रो मोहम्मद मुजीब, डॉ. आबिद हुसैन और श्री हामिद अली के प्रभार के तहत क्रमशः स्थापित किया गया।


नये परिसर में स्थानांतरण


1 मार्च 1935 को दक्षिणी दिल्ली के बाहरी इलाके के एक गांव, ओखला में एक विद्यालय भवन की आधारशिला रखी गयी।

 1936 में जामिया प्रेस, मकतबा और पुस्तकालय को छोड़कर सभी संस्थान नये परिसर में स्थानांतरित कर दिए गए।

जामिया का बुनियादी महत्व शिक्षा के नवीन विधियों को विकसित करना था।

 इसने 1938 में टीचर्स कालेज (उस्तादों का मदरसा) की स्थापना की।

1936 में डॉ.  एम.ए. अंसारी का निधन हो गया। 4 जून 1939 को जामिया मिल्लिया इस्लामिया एक संस्था के रूप में पंजीकृत हुआ।


जामिया के नवीन शिक्षा आंदोलन की प्रसिद्धि फैली और विदेशों से गणमान्य व्यक्ति जामिया को देखने आने लगे।

 हुसैन रउफ बे (1933) काहिरा के डॉ. बेहदजेत वाहबी (1934) तुर्की की सुश्री हलीदे अदीब (1936) उनमें से कुछ एक हैं।

विदेशी आगन्तुक जामिया से प्रभावित हुए और जामिया में काम करना शुरू किया।

जर्मन महिला सुश्री गर्दा फिलिप्सबोर्न (आपाजान के नाम से लोकप्रिय) ने कई वर्षों तक जामिया की सेवा की।

 जिन्हें मरणोपरांत जामिया में दफनाया गया।

1939 में डा. जाकिर हुसैन के निमंत्रण पर मौलाना उबेदुल्लाह सिंधी (1872-1944), जोकि एक धर्मज्ञ और स्वतंत्रता सेनानी थे

जामिया में रहने के लिए आये।

उन्होंने जामिया में बैतुल हिकमल नाम से एक इस्लामी अध्ययन का स्कूल शाह वलीउल्लाह की विचारधारा को प्रचारित करने के लिए शुरू किया।

जाकिर हुसैन जो कि बाद में भारत के राष्ट्रपति बने, उन दिनों को बुराई के समक्ष अविनाशी आशावाद के रूप में  याद करते थे ,जैसे वह संतोष के दिन थे

, जब उन्हें बहुत कुछ करने की अभिलाषा थी लेकिन करने के साधन नहीं थे।

1946 में जामिया के रजत जयंती समारोह के दौरान एक संकट देखा गया जिसका सामना भारत को आने वाले वर्षों में करना पडा़;

 श्री और श्रीमती मोहम्मद अली जिन्ना और लियाक़त अली खान मंच पर डॉ. जाकिर हुसैन, कुलपति महोदय के एक तरफ़ थे


और पंडित जवाहरलाल नेहरू, आसफ अली और सर सी. राजगोपालाचारी दूसरी तरफ थे।

स्वतंत्रता और उसके बाद


विभाजन के बाद दंगों ने उत्तर भारत को हिलाकर रख दिया जिससे जामिया भी प्रभावित हुआ लेकिन इसका परिसर नहीं।

 गांधी जी ने यह देखा कि यह परिसर साम्प्रदायिक हिंसा के ”मरूस्थल में एक रमणीय स्थान की तरह है”।

मकतबा जामिया ने आगजनी में 7 लाख रूपये मूल्य की पुस्तकें खो दीं।

स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद, जामिया भिन्नता के साथ एक शैक्षणिक संस्था के रूप में निरंतर विकास करता रहा।

कई विदेशी गणमान्य व्यक्ति नई दिल्ली भ्रमण के दौरान जामिया मिल्लिया इस्लामिया का दौरा करते रहे।

जिनमें मार्शल टीटो (1954), राजा जहीर शाह अफगानिस्तान (1955), युवराज फैसल, सऊदी अरब, राजा रज़ा शाह पहलवी, ईरान (1956) और शहज़ादा मुर्करम जाह (1960) शामिल हैं।

1962 में श्री अब्दुल मजीद ख़्वाजा की मौत के बाद डॉ. ज़ाकिर हुसैन

जो तब तक भारत के उप राष्ट्रपति का प्रभार संभाल रहे थे वह जामिया के कुलाधिपति (1963) बने।

मानित विश्वविद्यालय


1962 में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने जामिया को मानित विश्वविद्यालय घोषित किया।

इसके तुरंत बाद 1967 में समाज कार्य विद्यालय स्थापित किया गया।

1971 में जामिया ने डॉ जाकिर हुसैन जिनका 1969 में निधन हो चुका था,

के सम्मान में डॉ. जाकिर हुसैन इस्लामी अध्ययन संस्थान की शुरूआत की

1978 में सिविल इंजीनियरी में बी.ई. पाठ्यक्रम शुरू किया गया, 1981 में मानविकी एवं भाषा संकाय, प्राकृतिक विज्ञान संकाय,  सामाजिक विज्ञान संकाय, और राज्य संसाधन केन्द्र की स्थापना की गई।

1983 में जनसंचार एवं अनुसंधान केन्द्र और कोचिंग एवं कैरियर योजना केंद्र शुरू किया गया।

 1985 में इंजीनियरिंग एवं प्रौद्योगिकी संकाय और विश्वविद्यालय कंप्यूटर केंद्र स्थापित हुआ।

 1987 और 1988 में अकादमिक स्टाफ कॉलेज और तीसरी दुनिया अध्ययन अकादमी शुरू की गयीं।

केंद्रीय विश्वविद्यालय


दिसंबर 1988 में संसद के एक विशेष अधिनियम के द्वारा जामिया मिल्लिया इस्लामिया भारत का एक केन्द्रीय विश्वविद्यालय बना।

संकायों की सूची में अर्थात् शिक्षा, मानविकी एवं भाषा,  प्राकृतिक विज्ञान,  सामाजिक विज्ञान, इंजीनियरिंग एवं प्रौद्योगिकी में एक और संकाय-विधि संकाय के रूप में 1989 में जुड़ गया।

स्नातक एवं स्नातकोत्तर स्तर पर कई नए पाठ्यक्रम एवं कार्यक्रम शुरू किए गए।


जामिया में नौ संकायों के अलावा, शिक्षण और अनुसंधान के कई केंद्र जैसे एजेके जनसंचार एवं अनुसंधान केंद्र

(एमसीआरसी), अंतर्राष्ट्रीय अध्ययन अकादमी इत्यादि हैं।

जामिया सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) के क्षेत्र में अग्रणी है।

 यह विभिन्न स्नातक एवं स्नातकोत्तर आईटी पाठ्यक्रम प्रदान करता है। इसके अलावा जामिया का एक विस्तृत परिसर नेटवर्क है

जो उसके विभागों और कार्यालयों की एक बड़ी संख्या को आपस में जोड़ता है।

Sorce - NDTV, जामिया इस्लामिया मुस्लिम यूनिवर्सिटी का ऑफिशियल वेबसाइट


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शनिवार, 11 जनवरी 2020

HOW TO PREPARE FOR CURRENT AFFAIRS IN UPSC CIVIL SERVICES EXAM- BY ANUDEEP DURISHETTY, RANK – 1 CSE-2017



पिछले एक वर्ष में, हजारों उम्मीदवारों ने अपने यूपीएससी परीक्षा प्रश्नों के साथ मुझे ईमेल किया।

 एक विषय जो लगातार उनमें से अधिकांश में दिखाया गया है वह करंट अफेयर्स है।

 हालांकि मैंने उन ईमेलों को व्यक्तिगत रूप से जवाब देने की पूरी कोशिश की, लेकिन करंट अफेयर्स पर मेल की मात्रा कभी कम नहीं हुई।

 इसलिए मैंने सोचा कि इस पर एक विस्तृत ब्लॉग पोस्ट आदर्श होगी ताकि हर कोई पढ़ सके और अपने संदेह को स्पष्ट कर सके।



जैसा कि मैंने निबंध और जीएस पर अपने पदों में उल्लेख किया है,

 इस परीक्षा की तैयारी का कोई सबसे अच्छा तरीका नहीं है।

 बाकी पोस्ट केवल मेरी सीखों को दर्शाती हैं; आपको वह चुनना चाहिए जो आपको अच्छा  लगता है कि आप सही हैं और आप इसके बारे में आश्वस्त हैं।

उदाहरण के लिए: मैं हर रोज अखबार को सावधानीपूर्वक पढ़ता हूं, लेकिन मैंने कभी भी इससे हाथ से लिखे हुए नोट्स नहीं बनाए क्योंकि मुझे लगा कि यह कीमती समय की बर्बादी है।

मुझे ऑनलाइन नोट बनाने में एक बेहतर विकल्प मिला (बाद में इस पर अधिक)।

 लेकिन अगर आप सीमित समय में समाचार पत्रों से प्रभावी हाथ से लिखे नोट्स बनाने के लिए उपयोग किए जाते हैं, तो इसके लिए इसे न बदलें।

इस पोस्ट में, मैं 5 सिद्धांतों को सूचीबद्ध करता हूं, जिन्होंने मुझे समाचारों को व्यापक रूप से कवर करने में मदद की और जीएस -1 (123), जीएस -2 (123), और जीएस -3 (136) में अच्छा स्कोर किया।

सिद्धांत 1: 


अपने स्रोतों को सीमित करें
करंट अफेयर्स के साथ एक मूलभूत समस्या पठन सामग्री का प्रलय है।

अपने पहले के प्रयासों में, मैं भ्रम की स्थिति में, करंट अफेयर्स मटेरियल को खरीदने की कोशिश करता था, इस भ्रम में कि अधिक सामग्री का मतलब अधिक अंक है।

मेरा कमरा CSR, Pratiyogita Darpan, EPW, Chronicle, Yojana से भरा हुआ था और हर रैंडम मैगज़ीन जिसका आप नाम ले सकते हैं।

मैं उन्हें उत्साह से नहीं खरीदता, उन्हें मेरी मेज पर सुरक्षित रखता हूँ, समय की कमी के लिए फिर से कभी नहीं खोलना।

मैंने उस कठिन तरीके को सीखा जो बहुत अधिक सामग्री के बाद चल रहा है। मात्रा से अधिक गुणवत्ता चुनें।



"जानकारी का खजाना ध्यान की गरीबी की ओर जाता है" - हर्बर्ट साइमन

मेरे वर्तमान के स्रोत:


द हिंदू (एक अंग्रेजी दैनिक)
वेबसाइट पर IE समझाया अनुभाग (एक मुद्दे की व्यापक समझ के लिए)
एक दैनिक संकलन (इनसाइट्स / आईएएस बाबा / फोरम / विजन / सिविल्सडेली आदि के बीच कोई भी चुनें)
एक मासिक संकलन
ऑल इंडिया रेडियो- स्पॉटलाइट / चर्चा
विविध (RSTV की बड़ी तस्वीर, भारत की दुनिया और PRS इंडिया)

इंटरनेट


कुछ आकांक्षी वर्तमान मामलों के लिए "सर्वश्रेष्ठ वेबसाइट" और 'सर्वश्रेष्ठ कोचिंग सामग्री' वेबसाइट पर शोध करने के लिए अनिश्चित समय बिताते हैं

और वास्तव में इसे पढ़ने में कम समय लगाते हैं। दूसरों की यह पूर्णतावादी मानसिकता है

जो उन्हें बाजार में उपलब्ध सामग्री के टन से नकली नोट और संकलन बनाने के लिए मजबूर करती है।

इससे इच्छा हुई। एक दिन के लिए अपना शोध करें, अपने स्रोतों पर निर्णय लें, और इसके साथ रहें। आप ठीक काम करेंगे



सिद्धांत 2: अपना समय सीमित करें


अधिकांश उम्मीदवारों के साथ समस्या यह नहीं है कि वे अखबारों की उपेक्षा करते हैं,

लेकिन वे इसके महत्व को देखते हैं। कुछ दिन में लगभग 3-4 घंटे अखबार पढ़ते हैं, जिससे उन्हें अन्य विषयों को पढ़ने का समय नहीं मिल पाता है।

करंट अफेयर्स महत्वपूर्ण हैं, समाचार पत्र महत्वपूर्ण हैं, लेकिन इतना नहीं है कि आप इसमें अनुपातहीन मात्रा में निवेश करते हैं।

मेरे अनुभव में, आदर्श रूप से 2 घंटे के तहत दिन के वर्तमान मामलों को पढ़ना चाहिए। रोजमर्रा के करंट अफेयर्स के लिए 3-4 घंटे का ओवरकिल है।

मेरे करंट अफेयर्स की तैयारी शामिल थी


अखबार पढ़ना (30-45 मिनट, कोई नोट बनाना) - रोज
दैनिक समाचार संकलन का ऑनलाइन पढ़ना (इसके लिए कोई भी संस्थान सामग्री चुनें) - हर रोज़ (45 मिनट, सामग्री पर प्रकाश डाला और कैप्चरिंग के लिए)

पिछले सप्ताह के मुद्दों का एक संशोधन, ऑल इंडिया रेडियो (चुनिंदा) पर पकड़, और चयनात्मक मुद्दों पर इंटरनेट अनुसंधान - सप्ताहांत

मासिक संकलन का जिक्र करते हुए (इसके लिए कोई भी संस्थान सामग्री चुनें) - महीने के अंत में।


सिद्धांत 3: मुद्दों पर ध्यान दें, समाचार पर नहीं
 

क्या फर्क पड़ता है? समाचार एक घटना के बारे में बात करता है। मुद्दे विचारों पर केंद्रित होते हैं। मैं आपको कुछ उदाहरण देता हूं।

$ 5 ट्रिलियन अर्थव्यवस्था के बारे में बात करने वाले प्रधानमंत्री समाचार हैं।

 केवल भाषण पर ध्यान देना या अखबारों में जो बताया गया है वह पर्याप्त नहीं है।

आपको बड़े मुद्दे पर शोध करना चाहिए और समझना चाहिए: संख्या 5 ट्रिलियन क्यों? 

किन क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए और सरकार को क्या कदम उठाने चाहिए? 

हमें निवेश की गति कैसे तेजी से बढ़ानी चाहिए? अर्थव्यवस्था के सामने आने वाली बाधाएं क्या हैं? 

2024 तक 5 ट्रिलियन लक्ष्य का एहसास करने के लिए हम उन्हें कैसे पार कर सकते हैं? आदि।

कुलभूषण जाधव पर अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) का फैसला समाचार है लेकिन बड़ा मुद्दा भारत और पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय संबंधों, आईसीजे- इसकी संरचना और जनादेश के बारे में है,

 जो इसके विषय हैं, कैसे मामलों को अदालत में भेजा जाता है, वैश्विक मंचों में भारत की भूमिका आदि।

इसलिए किसी भी मौजूदा मुद्दे को समझने के लिए, मैं निम्नलिखित ढांचे का पालन करता था:

कारण


यह खबरों में क्यों है? (यह आमतौर पर समाचार पत्रों में रिपोर्ट किया जाता है)

पृष्ठभूमि ज्ञान-


 (डेटा, तथ्य, प्रामाणिक रिपोर्ट आदि)
वर्तमान स्थिति- सरकार ने अब तक क्या किया है या नहीं किया है?


मुद्दे के दोनों पक्ष


पेशेवरों और विपक्ष / अवसर और चुनौतियां
राय / सुझाव / रास्ता आगे - हमें इसके बारे में क्या करना चाहिए?


कई बार, कोचिंग सामग्री मुद्दों को बड़े पैमाने पर कवर करती है।

यदि यह नहीं है, तो गुणवत्ता सामग्री खोजने और ऑनलाइन नोट्स बनाने के लिए इंटरनेट का उपयोग करें ताकि आपको प्रत्येक मुद्दे की पूरी समझ



सिद्धांत 4: ऑनलाइन नोट्स बनाना सीखें


मैंने करंट अफेयर्स के लिए कभी भी हाथ से लिखे नोट्स नहीं बनाए।

उन्हें ऑनलाइन करने से मेरा बहुत समय बच गया। मैं पेपर पढ़ता था

, और फिर कोचिंग संस्थानों द्वारा लगाई गई दैनिक समाचार संकलन को पकड़ने और उजागर करने के लिए एवरनोट का उपयोग करता था (किसी को भी चुनें।)

लेकिन फिर, एक अनुवर्ती प्रश्न अक्सर पूछा जाता है। क्या मैं अखबार को पूरी तरह से छोड़ सकता हूं

 और सिर्फ इन संकलन को पढ़ सकता हूं? मैं इसका सुझाव नहीं दूंगा क्योंकि:



समाचार पत्र पढ़ना, जो हो रहा है, का एक अच्छा सारांश देता है और बाद में दैनिक संकलन को पढ़ना इतना आसान हो जाता है।

 चूंकि आप इसे दो बार पढ़ते हैं, आप इसे लंबे समय तक बनाए रखना चाहते हैं।

संभवतः,
 परीक्षक समाचार पत्रों से वर्तमान मामलों के प्रश्न निर्धारित करेंगे।

इसलिए समाचार पत्रों में आवर्ती मुद्दे हमें बताएंगे कि एक मुद्दा कितना वजनदार है और हमें किस पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।

निबंध, नैतिकता और साक्षात्कार के उपाख्यानों और उदाहरणों को अखबार पढ़ने से ही प्राप्त किया जा सकता है।

एक अंग्रेजी दैनिक के लगातार पढ़ने से अवचेतन रूप से आपकी शब्दावली और लेखन में सुधार होता है।


इसके अलावा, क्रोम वेबस्टोर से एवरनोट वेब क्लिपर एक्सटेंशन डाउनलोड करें।

यह उपकरण ऑनलाइन लेखों को क्लिप करने में अविश्वसनीय रूप से उपयोगी है,

सिद्धांत ५: पढ़ें संशोधित करें। निष्पादित।

उपरोक्त तरीके यह सुनिश्चित करेंगे कि आप इस परीक्षा से संबंधित 90-95% वर्तमान मामलों को ढंग से पकड़ें।

लेकिन करंट अफेयर्स एक निरंतर विषय है जो दिन पर दिन बढ़ता रहता है।

सामग्री को बनाए रखने का सबसे अच्छा तरीका निरंतर संशोधन के माध्यम से है और उन्हें उन उत्तरों में निष्पादित करके जो आप दैनिक अभ्यास या टेस्ट श्रृंखला के दौरान लिखते हैं।

 बस एक या दो में प्रासंगिक मुद्दे का उल्लेख अपने जवाब के लिए जबरदस्त मूल्य जोड़ देगा।

इसके अलावा, किसी पेपर के संबंधित स्थिर भाग को पढ़ने के तुरंत बाद करेंट अफेयर्स को संशोधित करना सबसे अच्छा है।

उदाहरण के लिए, यदि आप जीएस -2 मॉक टेस्ट की तैयारी कर रहे हैं, तो स्टैटिक पार्ट समाप्त करने के ठीक बाद, उस प्रासंगिक करंट सेगमेंट को संशोधित करें।

यह आपको अवचेतन रूप से स्थैतिक और करंट को जोड़ने में मदद करेगा और परीक्षा देने पर आपको एक अच्छा उत्तर लिखने में मदद करेगा।

पढ़ने और संशोधित करने के बाद भी, आप परीक्षा हॉल में सभी वर्तमान मामलों की सामग्री को याद नहीं कर सकते हैं।

वह ठीक है। वास्तव में कोई नहीं कर सकता। सही नोटों की तरह, सही जवाब एक मिथक हैं। आपके पास जो सीमित समय है,

 उसमें आप सबसे अच्छा उत्तर लिख सकते हैं। अपने सहज ज्ञान पर भरोसा रखें और उस आत्म विश्वास को अधूरा रखें। आप अपनी खुद की अपेक्षाओं को पूरा करेंगे।

Sorce - Insight ias


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शनिवार, 21 दिसंबर 2019

Best online  resources for upsc preparation 


 किस वेबसाइट से क्या पढ़ना,  और कैसे नोट्स बनाने हैं पूरी जानकारी

 आज 21वीं शताब्दी, जो इंटरनेट का युग है,

 ऐसे में इंटरनेट का प्रयोग करके बहुत कुछ हासिल कर सकते हैं, 

आज हर एक एग्जाम्स का प्रिपरेशन करने वाले स्टूडेंट्स इंटरनेट का सहारा लेते हैं

 यूपीएससी के प्रिपरेशन करने में जिन जिन वेबसाइट्स का मदद सृष्टि जयंत देशमुख ने लिया था 

आज हम  उसी के बारे में डिस्कस करने जा रहे है 

 यूपीएससी का प्रिपरेशन करने में जिन वेबसाइटस का  use  आईएएस के सफल अभ्यर्थी करते थे.

. उसी के बारे में विस्तृत रूप से बताया जायेगा. 

तो कृपया जिसको  उन सभी वेबसाइटस के बारे में जानना है जो एक upsc ऎस्पेरंट्स के लिए जरुरी है. तो last तक पढ़े 


यहाँ वो कैटेगरीज दिये गए है जो इसमें कवर किया गया है 


Upsc syllabus 


UPSC Preliminary Examination Syllabus


1. Paper I - (200 marks)


Current Events of National and International Importance.

History of India and Indian National Movement.

Indian and World Geography-Physical, Social, Economic Geography of India and the World.

Indian Polity and Governance-Constitution, Political System, Panchayati Raj, Public Policy, Rights Issues, etc.

Economic and Social Development-Sustainable Development, Poverty, Inclusion, Demographics, Social Sector Initiatives, etc.

General issues on Environmental ecology, Bio-diversity and Climate Change - that do not require subject specialization.

General Science.


Paper II - (200 marks)


Comprehension; Interpersonal Skills including Communication Skills.

Logical Reasoning and Analytical Ability.

Decision Making and Problem Solving.

General Mental Ability.

Basic Numeracy (Numbers and their Relations, Orders of Magnitude, etc.) (Class X level).

Data Interpretation (charts, graphs, tables, data sufficiency etc. — Class X level).


For mains examination 


1)Gs-1 ( history, social, geography )


2) Gs -2 ( polity, Administration, international reletion )


3) Gs -3( economic development, science and ecology, invorment, internal security )


4) Gs -4 ( ethics, Integrity, interest )


5) optional paper -1


6) optional paper -2 


7) eassy 


यहाँ वो कैटेगरीज दिये गए है जो इसमें कवर किया गया है 

Categories 


1.) Current affairs 

2.) Holistic  upsc prep

3.) General studies 1

4.) General studies 2

5.) General studies 3

6.) General studies 4


1.) Current affairs –

 करंट अफेयर्स एक dynamic पार्ट है upsc  का, 

 इसके लिए useful वेबसाइट है -

- https://pib.gov.in/indexm.aspx


- Www.newsonair.nic.in



- Www.gktoday.in




- Rstv youtube channel 


2.) Holistic upsc prep


इसके लिए  useful website है –


- Www.insightsoindia.com



- Www.iasbaba.com

Tlp program of ias baba is very useful 


- Www.blogforumias.com

- Www.Xaam.in

Important happening some news, find some test that applicable in daily. 


3) general studies 1


- www.pmfias.com


For geography and environment section 

Geography ke preparation ke liye best youtube channel hai-

1)Amit sen gupta sir

2) Rajtonil mam. 

- www.epw.in

For economy and political section -weekly 


2) General studies- 2


www.vikaspedia.in

This is Government own website.

 That really athletic given here.it covers government scheme and the objectives of difference schemes.


- Www.prsindia.org

In covering the polity part of Gs-2.

And here you can find summery of difference bill in the parliament. 


- Www.idsa.in

The institute of defence studies analysis. And here the provide very good information of international platforms.


- Www.orfonline.org


The provide releted to economy, international relation, hunger any such.


- Ministry of external affairs official website 


3.) General studies -3


Www.livemint.com

- Www.arthpedia.in

- Www.weforum.org

  Uniployment, industrial reletion, releted to technology, economic, education etc.cover really well.



- Www.vnenvirment.org


4) General studies -4

.

- Www.skillsyouneed.com



In a very simple understand language . How this is a very easy to understood language. 

Concept – honesty, discipline, leadership, working, intergrity, emotional management etc. Cover really well. 


- Www.oecd.org

Public integrity, curption  covers very well