International relation लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
International relation लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

गुरुवार, 9 जनवरी 2020

खाड़ी संकट 


खाड़ी देशों के बीच आपसी मतभेद का इतिहास काफी पुराना है.
समय-समय पर हमने इन देशों के बीच कई बड़े और विभातशय  घटनाओं को देखा है.

 इन देशों ने व्यापार से लेकर हमलो तक एक दूसरे को नुकसान पहुंचा कर अपने शक्ति का प्रदर्शन किया है.
कई हमलों में लाखों लोगों की जान गई.

कभी तेल को लेकर तो कभी विस्तार वादी नीति के कारण यह देश हर लिहाज से नुकसान करते रहे हैं. और पश्चिमी देश अमेरिका समेत इसमें राजनीतिक रोटियां सेकते रहते हैं

 अमेरिका ईरान की बात करें तो इन दोनों मुल्कों के बीच फिर से हालात बिगड़ रहे हैं.

 परमाणु समझौते को लेकर भी काफी विवाद रहा. कई शर्तों को मानने के बाद भी शक के चलते ईरान के साथ हुए परमाणु समझौते से अमेरिका ने  किनारा कर लिया.

 और अब ईरान की कमांडर कासिम सुलेमान की हत्या के बाद तनाव काफी बढ़ गया है.  जो बढ़ता ही जा रहा है.

जहां ईरान दो टूक शब्दों में बदलें  की बात कर चुका है. वहीं अमेरिका भी जवाबी कार्रवाई की बात कर रहा है.

खाड़ी में शांति स्थापित करने के लिए यह अच्छे संकेत नहीं है.

 यह विवाद यदि शांत नहीं हुआ तो इसका असर दुनिया पर बहुत भयानक हो सकता है.

इस विवाद का असर कच्चे तेल पर पड़ रहा है साथ ही साथ सोने पर भी पड़ रहा है. 

 दुनिया की छोटी बड़े देश तेल के लिए कहीं ना कहीं खाड़ी देशों पर ही निर्भर है. इसलिए इस विवाद की जद में कई शक्तिशाली देश भी आएंगे.

 तो चलिए जानते हैं खाड़ी के बीच बढ़ते संकट के बारे में. साथ ही बात करेंगे अमेरिका ईरान के बीच के मुद्दे के बारे में. 

 इसके अलावा चर्चा करेंगे खाड़ी संकट के इतिहास के बारे में? 

 अमेरिका ईरान के बीच तनाव शिखर पर है. इसेसे खाड़ी संकट एक बार फिर से गहरा गया है.

अमेरिकी हमले में ईरान के जनरल कासिम सुलेमान के हत्या के बाद. लगतार दोनों देश एक दूसरे को धमकियां दे रहे हैं.

इसका वैश्विक बाजार पर बहुत बुरा असर पड़ रहा है. कच्चे तेल में इजाफा देखा जा रहा है और कई देशों में ध्रुवीकरण तेज हो गई हैं

 अमेरिका ईरान ताजा विवाद


 दरअसल अमेरिका ने 3 जनवरी के दिन बगदाद हवाई अड्डे के पास एक ड्रोन हमला किया.

 इस हमले में जनरल कासिम सुलेमान को निशाना बनाया गया था. और इस हमले में सुलेमान की हत्या भी हो गई.

 इस घटना को लेकर दोनों देश एक दूसरे को धमकियां दे रहे हैं
. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि यदि ईरान कासिम सुलेमान के मौत का बदला लेने की कोशिश करेगा.. तो अमेरिका बड़ी जवाबी कार्रवाई करेगा.

और ईरानी सांस्कृतिक स्थलों पर बमबारी की जाएगी

 अमेरिका चाहता है कि इराक में ईरान का दखल ना हो. इसीलिए उन्होंने इराक से अमेरिकी सैनिकों की वापसी से किसी भी संभावना के लिए इंकार किया है.

 ईरान ने आक्रामक रुख अपनाते हुए इराक में स्थित अमेरिकी सैनिकों के दो ठिकानों पर मिसाइल से 8 जनवरी को हमला किया. ईरान ने इसे जनरल कासिम सुलेमान के हत्या का जवाबी कार्रवाई बताया

 ईरान की ओर से कहा गया है कि उसने अभी अपनी सैन्य क्षमताओं की झांकी ही दिखाई है.

 अगर अमेरिका ने और फिर से हमला किया तो उसे सख्त जवाब दिया जाएगा.

 अमेरिका ने ईरान इराक और ओमान में नागरिक विमान के उड़ान के लिए रोक लगा दिया है.

 इस बीच भारत में स्थित ईरानी राजदूत ने कहा है कि अमेरिका और ईरान के बीच शांति स्थापित करने के लिए भारत के किसी भी कदम का इरान स्वागत करेगा.

 भारतीय विदेश मंत्रालय ने भारत के नागरिकों को इराक की यात्रा से बचने की सलाह दी है.

अमेरिका और ईरान का इतिहास 


 2018 में डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान से परमाणु समझौता खत्म की और उस पर कई प्रतिबंध लगा दिए

 जिससे ईरान की अर्थव्यवस्था में हलचल मच गई. जिससे दोनों  देशों के संबंध लगातार बिगड़ते चले गए

* हालांकि ईरान का परमाणु कार्यक्रम 1950 के दशक में अमेरिका के सहयोग से ही शुरू हुआ था

* लेकिन 1979 में सफल इस्लामी क्रांति के बाद ईरान और अमेरिका के रिश्तों में मनमुटाव पैदा हो गया

* मनमुटाव इतनी गहरी हो गई और समय के साथ मनमुटाव बढ़ता चला गया

* इन दोनों देशों के बीच अविश्वास की जो दीवार खड़ी हुई उसका असर आज सीधा देखा जा सकता है

* एक जमाने में ईरान मध्य पूर्व में अमेरिका का सबसे बड़ा सामरिक सहयोगी था

* ईरान के तत्कालीन शासक रजा साहब ने अमेरिका की सहायता से 1950 ईस्वी में पहला परमाणु कार्यक्रम की शुरुआत की है

 * एटम फॉर पीस कार्यक्रम के जरिए अमेरिका ईरान में पहला परमाणु बिजली संयंत्र बनाना शुरू किया

* लेकिन इस परियोजना के पूरे होने से पहले ही ईरान में राजनीतिक उठापटक शुरू हो गई

* 1979 में ईरानी छात्रों ने 52 अमेरिकी दूत  वासियों को 1 साल के लिए बंधक बना लिया

* इसके कारण इराक के सद्दाम हुसैन ने ईरान पर हमला बोल दिया

* ईरान इराक के बीच करीब 8 साल तक युद्ध चला. इसमें लाखों सैनिक मारे गए

* इस युद्ध में अमेरिका सद्दाम हुसैन का साथ दीया
* जिससे ईरान अमेरिका संबंध और बिगड़ गए

* उधर ईरान में युद्ध के कारण परमाणु कार्यक्रम अधर में लटका रह गया


* और परमाणु कार्यक्रम बंद करा दिया गया

* लेकिन मध्य पूर्व के बढ़ती चुनौतियों को मध्य नजर रखते हुए ईरान ने पुणे 1990 में रूस के सहयोग से परमाणु कार्यक्रम शुरू किया

* अमेरिका और यूरोपीय देशों के अलावा उसके कई पड़ोसी देश में इसके परमाणु कार्यक्रम के विरोध में सामने आए

* इजराइल ने इसे अपने अस्तित्व के लिए खतरा बताया तो सऊदी अरब इसें  मध्य पूर्व में सैनिक महत्वाकांक्षाओ  से जोड़कर देखा

* लेकिन तमाम विरोध के बाद भी ईरान अपने परमाणु कार्यक्रमों पर आगे बढ़ता गया

* इसके बाद भी लगातार ईरान यह दावा करता रहा कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्वक है और यह ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए है

* लेकिन पश्चिम के देश ईरान से सहमत नहीं हुए और उस पर कई प्रतिबंध लगा दियें

* आखिर 2015 में वियना समझौता हुआ जिसे ईरान परमाणु समझौता भी कहा जाता है


* लेकिन डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद उनको और लगने लगा कि ईरान वियना समझौते का इस्तेमाल परमाणु हथियार बनाने के लिए कर रहा है

* तब साल 2018 में ईरान के साथ हुए ऐतिहासिक परमाणु समझौते से अमेरिका खुद को अलग कर दिया

* अमेरिका ने ईरान पर प्रतिबंध भी लगा दिए. और दुनिया के कई देशों को धमकी भी दिया कि जो भी ईरान के साथ व्यापार करेगा वह अमेरिका के साथ कारोबारी संबंध नहीं रख पाएगा

 प्रथम खाड़ी युद्ध 1991


* 1980 में इराक का ईरान पर हमला

* यह लड़ाई 8 साल तक चला

* इस लड़ाई में अमेरिका ने इराक का साथ दिया

* सोवियत संघ ने  भी सद्दाम हुसैन की मदद की

* एक समझौते के साथ युद्ध खत्म हुआ

* इस लड़ाई में करीब 500000 ईरानी और इराकी मारे गए

* ईरान पर इराक रसायनिक हथियारों का भी प्रयोग किया

* इराक ने 1991 में कुवैत पर कब्जा कर लिया

* 6 महीने में ही तेल का उत्पादन 90% गिर गया

 दूसरी खाड़ी युद्ध 2003


* 2003 में हुआ दूसरी खाड़ी युद्ध

* सद्दाम हुसैन को इराक से बेदखल करना था इसका मकसद

* इराक में लोकतंत्र की स्थापना करना

* विनाशकारी हथियारों को समाप्त करना इसका प्रमुख उद्देश्य था

* अमेरिका ने ऑपरेशन इराक स्वतंत्रता का संचालन किया

* यूनाइटेड किंगडम ऑस्ट्रेलिया पोलैंड की संयुक्त सेना भी इराक पर हमला किया

* सद्दाम हुसैन की सरकार का हुआ खात्मा

* आखिरकार अमेरिकी सेनाओं ने इराक की राजधानी बगदाद पर कब्जा कर लिया और सद्दाम हुसैन का नामोनिशान मिटा दिया


 पिछले कई सालों से सऊदी अरब और ईरान की लड़ाई से पूरा खाड़ी देश परेशान है.

ईरान एक मजबूत और शिया बहुल देश है. जो अमेरिका,  अरब और सऊदी अरब की आंखों की किरकिरी होने के कारण भी अपने मजबूत राष्ट्रवाद की चलतें  जिंदा और आबाद है.

 मध्य पूर्व का तेल दुनिया का आर्थिक प्राण है. पश्चिमी यूरोप अपना तीन चौथाई तेल अरब देशों से आयात करता है.

 कच्चे तेल का सबसे बड़ा मार्ग और और हुरमुच की  खाड़ी को माना जाता है जो अभी संकट में घिरा हुआ है|

 दुनिया के सैन्य शक्ति में ईरान भले ही पीछे हो लेकिन बहुत भौगोलिक परिस्थितियों में वह बहुत आगे हैं

 इस समुद्री इलाके से ही मध्य पूर्व से निकलने वाला तेल अमेरिका यूरोप अफ्रीका और दुनिया के अन्य बाजारों में जाता है
 और इसें  ईरान बाधित कर दें तो दुनिया की अर्थव्यवस्था कम समय में ही चौपट हो सकती है

Read also -

ईरान-अमेरिका तनाव के बीच भारतीय नौसेना ने खाड़ी क्षेत्र में तैनात किए अपने युद्धपोत"



गुरुवार, 19 दिसंबर 2019


वैश्विक शरणार्थी मंच


चर्चा में क्यों?

 वैश्विक शरणार्थी मंच चर्चा में इसलिए है क्योंकि 17-18 दिसंबर, 2019 को वैश्विक शरणार्थी मंच (Global Refugee Forum) की पहली बैठक का आयोजन जिनेवा में होने जा रहा है

 वैश्विक शरणार्थी मंच क्या है? 

वैश्विक शरणार्थी मंच अंतर्राष्ट्रीय उत्तरदायित्त्वों के सिद्धांत को ठोस कार्रवाई के रूप में

 बदलने का अवसर प्रदान करने के लिये ‘वैश्विक शरणार्थी समझौते’ (Global Compact on Refugees) द्वारा निर्देशित एक मंच है।

 वैश्विक शरणार्थी मंच का कार्य

यह मंच विभिन्न देशों के मध्य शरणार्थियों की समस्या के निदान के लिये प्रभावशाली योगदानों तथा प्रतिज्ञाओं को प्रस्तुत करता है

 और पूर्व में किये गए अच्छे कार्यों का उदाहरण प्रस्तुत करता है।

वैश्विक शरणार्थी मंच के बारे में:


यह UNHRC द्वारा प्रबंधित एक मंच है

जो अंतर्राष्ट्रीय समुदाय में राजनीतिक इच्छाशक्ति जुटाकर ‘वैश्विक शरणार्थी समझौते’ के उद्देश्यों को आगे बढ़ाता है

 तथा विभिन्न देशों के समर्थन के आधार को व्यापक बनाता है।

मुख्य बिंदु:

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान, तुर्की के राष्ट्रपति रिसेप तईप एर्दोगन तथा कोस्टारिका, इथियोपिया और जर्मनी के नेताओं को

 शरणार्थियों की सुरक्षा एवं भलाई के संदर्भ में उनकी अनुकरणीय भूमिका के लिये मंच के सह-संयोजक के रूप में आमंत्रित किया गया है।

21वीं सदी में शरणार्थियों पर  यह पहली बड़ी बैठक  है
यह बैठक  संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायुक्त (United Nations High कमिश्नर for Refugees- UNHCR), संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी एवं स्विट्ज़रलैंड की सरकार द्वारा संयुक्त रूप से 17-18 दिसंबर, 2019 को जिनेवा में आयोजित किया जा रहा है।

पाकिस्तान का पक्ष 


पाकिस्तान के प्रधानमंत्री  इमरान खान ने  इस बार फिर
भारत के आंतरिक मामलों पर गंभीर और अनुचित टिप्पणी करके अपने संकीर्ण राजनीतिक एजेंडे का परिचय दे
ही दिये

पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने भारत के NRC मुद्दे की तुलना म्याँमार के रोहिंग्या संकट से की तथा  भारत के कश्मीर  मुद्दे पर विश्व से हस्तक्षेप करने का आग्रह किया।

इस बैठक में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने कश्मीर मुद्दे और नागरिकता संशोधन अधिनियम  (CAB) के संदर्भ में भारत की आलोचना की।

पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत द्वारा हाल ही में उठाए गए कदमों का उद्देश्य कश्मीर में मुस्लिमों को बहुसंख्यक को अल्पसंख्यक में बदलना है।

इमरान खान बोले, दक्षिण एशिया में पैदा होने जा रहा है बड़ा शरणार्थी संकट


पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने मंगलवार (17 दिसंबर) को कहा कि

 नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली भारत सरकार के कदमों की वजह से दक्षिण एशिया में एक बड़ा शरणार्थी संकट पैदा होने जा रहा है।

सरकार संचालित रेडियो पाकिस्तान के अनुसार जिनेवा में सह संयोजक के रूप में पहले वैश्विक शरणार्थी फोरम को संबोधित करते हुए खान ने

कश्मीर मुद्दा उठाया और दावा किया कि भारत सरकार का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र के जनसांख्यिकी समीकरण को बदलने का है।
खान ने कहा, ''मैं कहना चाहता हूं कि पूरे विश्व को (दक्षिण एशिया में) आसन्न सबसे बड़े शरणार्थी संकट के बारे में अवगत होना चाहिए।"

भारत के नागरिकता कानून और राष्ट्रीय नागरिक पंजी पर टिप्पणी करते हुए खान ने कहा,

''यदि दो-तीन प्रतिशत मुसलमान अपनी नागरिकता साबित नहीं कर सकते हैं तो यह एक बड़ी चुनौती होगी...मैं अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इसे देखने को कहता हूं।

खान ने कहा, ''यदि विश्व भारत पर दबाव डाले तो इसे रोका जा सकता है ।

एक बार संकट शुरू होने पर हम इसे नहीं रोक सकते । यह जटिल और कठिन है।


भारत का पक्ष:



भारत ने  इसके  जवाब   में पाकिस्तान को अपने देश के  अल्पसंख्यकों की देखभाल करने तथा उन्हें पीड़ित न करने की सलाह दी।

पिछले 72 वर्षों में  देखा  गया है की पाकिस्तान ने अपने सभी अल्पसंख्यकों को लगातार प्रताड़ित किया है,

जिसमें से अधिकांश अल्पसंख्यकों को भारत का रुख करना पड़ा।

भारत ने कहा कि पाकिस्तानी सेना ने वर्ष 1971 में पूर्वी पाकिस्तान  जो अब बांग्लादेश कहलाता है

के लोगों के साथ बहुत बुरे तरीके से बर्ताव किया था।

lपाकिस्तान के प्रधानमंत्री द्वारा जिनेवा में वैश्विक 

शरणार्थी मंच पर दिए गए बयान के बारे में पूछे गए प्रश्न पर आधिकारिक प्रवक्ता की प्रतिक्रिया

दिसंबर 17,
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री द्वारा जिनेवा में वैश्विक शरणार्थी मंच पर दिए गए बयान के बारे में

 पूछे गए प्रश्न पर सरकारी प्रवक्ता रवीश कुमार ने कहा :

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने भारत के लिए पूर्ण रूप से

आंतरिक मामलों पर अनावश्यक और अनुचित टिप्पणी करके अपने संकीर्ण राजनीतिक एजेंडे को हवा देने के लिए एक बार पुनः

बहुपक्षीय मंच पर सुपरिचित झूठ बोला है।

 अब पूरी दुनिया को यह स्पष्ट हो जाना चाहिए कि यह उनका वैश्विक मंचों के अभ्यस्त और बाध्यकारी दुरुपयोग का एक स्थापित स्वरूप है।

पाकिस्तान के अधिकांश पड़ोसियों का यह दुर्भाग्यपूर्ण अनुभव रहा है

कि पाकिस्तान द्वारा की गई कार्रवाइयों के प्रतिकूल परिणाम उनके देश में हुए हैं।

विगत 72 वर्षों में, पाकिस्तान के इस्लामी गणराज्य ने योजनाबद्ध तरीके से अपने सभी अल्पसंख्यकों को प्रताड़ित किया है,

जिनमें से अधिकांश भारत भागने के लिए मजबूर हुए है।

इसके अलावा, प्रधानमंत्री खान चाहते हैं कि दुनिया यह भूल जाए कि

उनकी सेना ने पूर्ववर्ती पूर्वी पाकिस्तान के लोगों के साथ 1971 में क्या किया था।

पाकिस्तान को अपने अल्पसंख्यकों और सह-धर्मवादियों के अधिकारों की रक्षा और संवर्धन के लिए कार्य करना चाहिए।”
नई दिल्ली
17 दिसंबर, 2019


Sorce - हिंदुस्तान, दृस्टि आईएएस, विदेश मंत्रालय

External link -

Also read - वैश्विक शरणार्थी मंच क्या है दृस्टि आईएएस 

शनिवार, 30 नवंबर 2019

भारत श्रीलंका संबंध 2019

 श्रीलंका के राष्ट्रपति गोटबाय राजपक्षे का भारत दौरा


 श्रीलंका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे सत्ता की बागडोर संभालने के बाद भारत दौरे पर आए हुए हैं इस यात्रा के दौरान इन्होंने पीएम मोदी से मुलाकात की इसके दौरान कई अहम मुद्दों पर चर्चा की गई ऐसी उम्मीद की जा रही है कि भारत और श्रीलंका के संबंध और मजबूत होने जा रही है भारत ने श्रीलंका को विकास के पथ पर आगे बढ़ने के लिए पूरा सहयोग करने का भरोसा जताया है दिल्ली के हैदराबाद हाउस में पीएम मोदी और श्रीलंका के राष्ट्रपति गोटबाया  राजपक्षे के बीच 29 नवंबर को द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने की बात हुई,
 इसमें भारत की ओर से श्रीलंका को 45 करोड डॉलर की आर्थिक मदद देने की घोषणा की गई. द्विपक्षी बैठक में आतंकवाद, तमिल मुद्दे, जातिवाद,  मेल मिलाव,  ढांचागत विकास और मछुआरों की समस्या जैसे मसलों पर सकारात्मक चर्चा हुई,
 और दोनों देशों ने संबंधों को नई ऊंचाई तक ले जाने का संकल्प जाहिर किया,
 मुलाकात के दौरान मोदी जी ने कहा -  “  की स्थिर श्रीलंका न केवल भारत की हित में है बल्कि संपूर्ण हिंद महासागर के हित में है”|


 भारत और श्रीलंका के राजनीतिक संबंध

2015 में श्रीलंका के राष्ट्रपति मैत्रिपाला सिरिसेना भारत दौरे पर आए
साल 2014 में तत्कालीन राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे भारत दौरे पर
 पीएम नरेंद्र मोदी के शपथ ग्रहण समारोह में भाग लेने भारत आए
मार्च 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने श्रीलंका की यात्रा की
मई 2016 में श्रीलंका के राष्ट्रपति मैथिली पाल भारत की यात्रा पर आए
 जो भारत के साथ श्रीलंका के बेहतर संबंधों को दर्शाता है
मई 2017 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो दिवसीय दौरा पर श्रीलंका गए
वहां पीएम मोदी वेसाक महोत्सव में बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए, पीएम मोदी की यात्रा दोनों देशों के मजबूत संबंधों को बयां करती है

 भारत और श्रीलंका के आर्थिक संबंध


दिसंबर 1998 में पहले मुक्त व्यापार समझौता पर हस्ताक्षर किया गया
मुक्त व्यापार समझौता 1 मई 2000 को अस्तित्व में आया
2009 में लिट्टे के खात्मे के बाद भारत ने श्रीलंका में काफी पुनर्निर्माण के काम किए हैं
भारत ने श्रीलंका के बुनियादी ढांचे के पुनर्निर्माण के लिए अरबों डॉलर दिए
2018 में श्रीलंका में भारत के सहयोग से आकस्मिक एंबुलेंस सेवा शुरू की गई
दोनों देशों के बीच 2001 में 0.7 बिलीयन डॉलर का व्यापार हुआ
2017 में यह बढ़कर 5 बिलियन डालर हो गया
2001 में भारत से श्रीलंका को 0.6 billion-dollar का निर्यात किया गया
जो 2017 में बढ़कर 4.5 बिलियन डॉलर हो गया
श्रीलंका का निर्यात 0. 6 बिलियन से बढ़कर 0.7 billion-dollar हो गया
भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश में श्रीलंका का स्थान 52 वा है
जबकि भारत श्रीलंका में दूसरा सबसे बड़ा निवेशक देश है

 भारत और श्रीलंका की ऐतिहासिक संबंध


सदियों से पुराना संबंध है भारत और श्रीलंका का
धार्मिक और भाषाई समानता भी है
पौराणिक पुस्तकों में भारत और श्रीलंका के बीच आवागमन के प्रमाण मिलते हैं
श्रीलंका के इंटरनेशनल रामायण रिसर्च सेंटर और पर्यटन मंत्रालय दोनों ने मिलकर रामायण से जुड़े 50 स्थल ढूंढ निकाला है
जिनका पुरातात्विक और ऐतिहासिक महत्व है इन स्थानों का रामायण में भी उल्लेख मिलता है
श्रीलंका के राजा देवनम्पिया टीस्सा के शासनकाल के दौरान भारतीय सम्राट अशोक के पुत्र महींदा  श्री लंका पहुंचे
चौथी शताब्दी ईसा पूर्व में बौद्ध धर्म की शुरुआत की
बोधि वृक्ष का एक पौधा श्रीलंका में लाया गया
प्रथम मठ और बौद्ध स्मारक स्थापित किए गए
इसुरुमुनि - विहार और वेस्सा गिरी - विहार पूजा के महत्वपूर्ण केंद्र बने
अशोक को पथमक -चैत्य, जम्बोकोला विहार,  हत्थाल्हा - विहार और चाय खाने के निर्माण का श्रेय दिया जाता है|

 भारत और श्रीलंका के भाषाई संबंध


श्रीलंका की जनसंख्या में करीब 12.60 %हिंदू रहते हैं
सिंधी, बोरा,  गुजराती, मेमोंन पारसी मलयाली और तमिल लोग भी मौजूद हैं
श्रीलंका में बोली जाने वाली मुख्य भाषा सिंघली भारतीय भाषा से मिलती है
श्रीलंका में तमिलों के सबसे अधिक पूर्वज भारत से थे
2011 की जनगणना के मुताबिक भारतीय मूल के तमिल नागरिकों की संख्या एक करोड़ 600000 है
वही पाली भाषा जो भारत से श्रीलंका पहुंची एक मौखिक परंपरा के रूप में संरक्षित है
जिसे तीसरे  ईसा पूर्व के आसपास लिखित रूप में संरक्षित करने के लिए श्रीलंका के प्रतिबंध होने के साक्ष्य मिलते हैं

 भारत और श्रीलंका के सांस्कृतिक संबंध

29 नवंबर 1977 दोनों देशों के बीच दिल्ली में सांस्कृतिक सहयोग समझौता पर हस्ताक्षर किया गया
कोलंबो में भारतीय संस्कृतिक केंद्र सक्रिय रूप से भारतीय संगीत की कक्षाओं का आयोजन कर भारतीय संस्कृति को बढ़ावा देता है
श्रीलंका में 21 जून 2015 को योग का पहला अंतरराष्ट्रीय दिवस मनाया गया
भारत और श्रीलंका ने संयुक्त रूप से भगवान बुद्ध के सम्बुध्दतत्व जयंती का आयोजन किया
इस प्रदर्शनी के दौरान लगभग 3 मिलियन श्रीलंकाई लोगों ने पवित्र अवशेषों को श्रद्धांजलि दी
अंतरराष्ट्रीय बौद्ध संग्रहालय श्री दलादा मालीगावा में भारतीय गैलरी का उद्घाटन दिसंबर 2013 में किया गया था
दोनों सरकारों ने संयुक्त रूप से 2014 में सागरिका  धर्मपाल की 150वीं वर्षगांठ मनाई
12 मई 2017 को कैंडी में प्रधानमंत्री ने डांस अकादमी का अनावरण किया
1998 में एक अंतर सरकारी पहल पर आधारित इंडिया श्रीलंका फाउंडेशन का उद्देश्य नागरिक समाज के आदान-प्रदान के माध्यम से वैज्ञानिक,  तकनीक, सांस्कृतिक व शैक्षिक सहयोग को बढ़ाने और दोनों देशों की युवा पीढ़ियों के बीच संपर्क बढ़ाने के लिए किया गया
शिक्षा सहयोग का महत्वपूर्ण क्षेत्र है इसलिए भारत श्रीलंका के छात्रों को हर साल 290 छात्रवृत्ति स्लॉट प्रदान करता है
इसके अलावा भारत के तकनीकी और आर्थिक सहयोग योजना और कोलंबो योजना के तहत भारत श्रीलंका के नागरिकों को हर साल 370 स्लॉट देता है

 पर्यटन

पर्यटन भी भारत और श्रीलंका के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी है
भारत सरकार ने 14 अप्रैल 2015 को श्रीलंका के पर्यटकों के लिए अनौपचारिक टूरिस्ट विजा शुरू की
दोनों देशों के साझा संस्कृति और विरासत आपसी संबंध को हमेशा मजबूत बनाए रखने के लिए एक कड़ी है

 तनाव



दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ाने में चीन की काफी बड़ी भूमिका है
हंबनटोटा बंदरगाह का विकास कर चीन श्रीलंका के जरिए हिंद महासागर में अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहा है
जो भारत के सामरिक हित में नहीं है
भारत की चिंता में भी वही है कि हिंद महासागर यानी श्रीलंका और मालदीव में चीन का वर्चस्व बढ़ता है तो उसे भारत और चीन के संबंधों के साथ ही दक्षिण एशिया देशों के साथ बीच संबंधों का असर पड़ सकता है
चीन ने कोलंबो बंदरगाह को विकसित करने में बड़ी भूमिका निभाई है
जबकि भारत ने कोलंबो बंदरगाह पर स्टर्न  कंटेनर टर्मिनल बनाने को लेकर श्रीलंका के साथ एक समझौता किया है
इसके चलते भारत आने वाला बहुत सारा सामान कोलंबो बंदरगाह से होकर आता है
ऐसे में श्रीलंका में कोई भी सत्ता में आए भारत को उसकी सहयोग की जरूरत पड़ेगी
इसके साथ दोनों देशों के बीच समुद्री सीमा के भीतर खासकर बाघजलडमरूमध्य और मन्नार की खाड़ी में मछुआरों की भ्रमण  की घटनाएं सामान्य बात है
ऐसे में दोनों देशों को अंतरराष्ट्रीय समुद्री सीमा लाइन पर किसी देश के वास्तविक मछुआरों के
 मुद्दे का समाधान करने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे


 निष्कर्ष


 भारत अपने पड़ोसी देशों के साथ क्षेत्रीय सुरक्षा शांति और आर्थिक विकास को महत्व देते हुए हमेशा मधुर संबंध बनाने के लिए तत्पर रहा है, यही वजह है कि स्टर्न के मौके पर हुए श्रीलंका में आतंकवादी हमले के बावजूद जून 2017 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने श्रीलंका का दौरा किया और एक आशावादी दृष्टिकोण के साथ श्रीलंका की हिम्मत बढ़ाएं, प्रधानमंत्री मोदी की श्रीलंका यात्रा ने कई विपक्षी समझौते के लिए जमीन बनाई है और काफी हद तक दोनों देशों के बीच आपसी सहयोग को बढ़ाया है, इसके साथ भारत सरकार द्वारा श्रीलंका के साथ बेहतर संबंध बनाने का प्रयास जारी है, ऐसी उम्मीद की जा रही है गोटबया राजपक्षे और प्रधानमंत्री मोदी की मुलाकात भारत और श्रीलंका के संबंध को और मजबूती प्रदान करेगी|