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बुधवार, 11 दिसंबर 2019

मानव विकास सूचकांक


हाल ही में संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (United Nations Development Programme) द्वारा मानव विकास सूचकांक (Human development Index- HDI) 2019 जारी किया गया है   

External link -


मानव विकास सूचकांक 

(United Nations Development Programme- UNDP):


  सयुंक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) एक संयुक्त राष्ट्र संघ का वैश्विक विकास कार्यक्रम है।

 यह गरीबी कम करने,आधारभूत ढाँचे के विकास और प्रजातांत्रिक प्रशासन को प्रोत्साहित करने का काम करता है 

संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम संयुक्त राष्ट्र के वैश्विक विकास नेटवर्क है, 
न्यूयॉर्क शहर में मुख्यालय, यूएनडीपी परिवर्तन के लिए अधिवक्ताओं और लोगों को बेहतर जीवन बनाने में मदद करने के लिए ज्ञान, अनुभव और संसाधनों को जोड़ता है।

UNDP संयुक्त राष्ट्र के वैश्विक विकास का एक नेटवर्क है।
इसका मुख्यालय न्यूयॉर्क में अवस्थित है

UNDP गरीबी उन्मूलन, असमानता को कम करने हेतु लगभग 70 देशों में कार्य करता है।

इसके अलावा देश के विकास को बढ़ावा देने के लिये नीतियों, नेतृत्व कौशल, साझेदारी क्षमताओं तथा संस्थागत क्षमताओं को विकसित करने और लचीलापन बनाने में मदद करता है।

  संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम 

प्रकार कार्यक्रम

संक्षिप्ति UNDP
अध्यक्ष अचीम स्टेनर
वर्तमान
स्थिति सक्रिय
स्थापना १९६५


हाईलाइट 

रैंकिंग पिछले वर्ष 130 थी. भारत में जीवन प्रत्याशा, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुंच में बढ़ोतरी के कारण भी रैंकिंग में सुधार हुआ है 2019 में 129 वे पायदान पर है 


मानव विकास सूचकांक क्या है?


मानव विकास सूचकांक एक सांख्यिकीय सूचकांक है जिसमें जीवन प्रत्याशा, शिक्षा, और आय सूचकांकों को शामिल किया जाता है.

 इन विभिन्न श्रेणियों को मिलाकर तैयार किये जाने वाले मानव विकास सूचकांक के तरीके को अर्थशास्त्री महबूब-उल-हक ने तैयार किया था. 

संयुक्त राष्ट्र द्वारा पहला मानव विकास सूचकांक 1990 में जारी किया गया था. 
प्रत्येक वर्ष इसे संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) द्वारा प्रकाशित किया जाता है|


मानव विकास सूचकांक में टॉप-10 देश

रैंकिंग देश

1 नॉर्वे

2 स्विट्ज़रलैंड

3 ऑस्ट्रेलिया

4 आयरलैंड

5 जर्मनी

6 आइसलैंड

7 हॉन्गकॉन्ग

8 स्वीडन

9 सिंगापुर

10 नीदरलैंड


पाकिस्तान की स्थिति


मानव विकास सूचकांक में पाकिस्तान ने तीन पायदान की बढ़ोतरी दर्ज की है. 

इसके अनुसार, पाकिस्तान की एच डी आई वैल्यू 0.562 है 

जबकि बांग्लादेश की वैल्यू 0.608 आंकी गई है
. यूएनडीपी द्वारा जारी सूचकांक में बांग्लादेश की रैकिंग जहां 134 है, वहीं पाकिस्तान की रैकिंग 147 है.


भारत की स्थिति 


मानव विकास सूचकांक (ह्यूमन डिवेलपमेंट इंडेक्स) के मामले में इस बार भारत की रैकिंग में एक पायदान का सुधार हुआ है। 
यूनाइटेड नेशंस डिवेलपमेंट प्रोग्राम (UNDP) की तरफ से साल 2019 के जारी ह्यूमन डिवेलपमेंट रैकिंग में कुल 189 देशों में भारत 129वें स्थान पर है 
जबकि 2018 में 130 वे स्थान पर था |


प्रमुख बिंदु:


सूचकांक के अनुसार, 189 देशों की सूची में भारत 129वें स्थान पर है।

भारत की स्थिति में एक स्थान का सुधार हुआ है, ग़ौरतलब है कि वर्ष 2018 में भारत 130वें स्थान पर था।

इस सूचकांक की वरीयता सूची में नार्वे, स्विट्ज़रलैंड, ऑस्ट्रेलिया, आयरलैंड और जर्मनी शीर्ष स्थानों पर हैं।

सूचकांक में सबसे निचले पायदान पर क्रमशः नाइजर, दक्षिण अफ्रीकी गणराज्य, दक्षिण सूडान, चाड और बुरुंडी हैं।

भारत के पड़ोसी देशों में श्रीलंका 71वें स्थान पर और चीन 85वें स्थान पर हैं।

वहीं भूटान 134वें, बांग्लादेश 135वें, म्याँमार 145वें, नेपाल 147वें, पाकिस्तान 152वें और अफगानिस्तान 170वें स्थान पर हैं।

दक्षिण एशिया वर्ष 1990 से 2018 के बीच विश्व में सबसे तेज़ गति से विकास करने वाला क्षेत्र है।

o इस अवधि में मानव विकास सूचकांक के संदर्भ में दक्षिण एशिया में 46% की वृद्धि दर्ज की गई।

o वहीँ पूर्व एशिया और प्रशांत क्षेत्र में 43% की वृद्धि हुई।

o भारत के HDI वैल्यू में 50% तक की वृद्धि हुई है. वर्ष 1990 में जहाँ यह मूल्य .431 था वहीँ वर्ष 2018 में .647 है।
रिपोर्ट के अनुसार, विश्व भर में समूह आधारित असमानता विद्यमान है, यह असमानता विशेषकर महिलाओं को प्रभावित करती है।

o रिपोर्ट के अनुसार, लैंगिक असमानता सूचकांक में 162 देशों की सूची में भारत 122वें स्थान पर है,
 वहीं पड़ोसी देश चीन (39) श्रीलंका (86) भूटान (99) और म्यांमार (106) भारत से बेहतर स्थिति में हैं।

o इस सूची में नॉर्वे, स्विट्ज़रलैंड और आयरलैंड शीर्ष पर हैं।
o यह सूचकांक महिलाओं के प्रजनन स्वास्थ्य, सशक्तीकरण, आर्थिक सक्रियता पर आधारित है।

रिपोर्ट के अनुसार, भारत में जन्म के समय पुरुषों की जीवन प्रत्याशा जहाँ 68.2 वर्ष थी वहीं महिलाओं की जीवन प्रत्याशा 70.7 वर्ष दर्ज की गई है।

रिपोर्ट के अंतर्गत, भारत में स्कूली शिक्षा के अपेक्षित वर्षों की संख्या 12.3 वर्ष आँकी गई है।

o भारत में स्कूली शिक्षा के औसत वर्षों की संख्या 6.5 वर्ष बताई गई है।


स्रोत – विकिपीडिया, द हिन्दू,  दृस्टि आईएएस, जोश जागरण 


शनिवार, 7 दिसंबर 2019

हाइड्रोजन कार

Hydrogen car

 हाइड्रोजन कार्य की विषय पर बात करने का वजह है पर्यावरण, लगता बढ़ते प्रदूषण और जहरीली हवा के कारण जब पूछे जाते हैं तो सड़कों पर चल रही वाहनों की संख्या को गिनाया जाता है.

कई उपाय करने के बावजूद भी वाहनों से निकलने वाले धुएं का कोई निवारण नजर नहीं आता है. ऐसी में हाइड्रोजन ईंधन में उम्मीद की किरण दिखाई देती है.

 यह फ्यूल पर्यावरण के अनुकूल होने के साथ ही वाहनों के लिए भी बेहतर माना जाता है. यही वजह है कि हाइड्रोजन को भविष्य के ईंधन के रूप में देखा जाता है.

हालांकि हाइड्रोजन फ्यूल के इस्तेमाल में अभी बहुत चुनौती भी है जिस से पार पाने की कोशिश की जा रही है. हाइड्रोजन ईंधन के उपयोगिता को देखते हुए बतौर पर प्रोजेक्ट इसका इस्तेमाल किया जा रहा है. इसके काफी सकारात्मक परिणाम देखने को मिला है

. तो आज जानेंगे हाइड्रोजन ईंधन की विशेषता और इसके इस्तेमाल में आने वाली चुनौतियों को और साथ ही जानेंगे हाइड्रोजन ईंधन को बनाने वाले मैकेनिज्म को

External link - https://en.m.wikipedia.org/wiki/Hydrogen_vehicle
पेट्रोल और डीजल से निकलने वाला धुआं सबसे ज्यादा प्रदूषण फैला रहा है.
 जो न केवल मानव स्वास्थ्य के लिए खतरा है बल्कि पर्यावरण को भी काफी नुकसान पहुंचा रहा है. यही वजह है कि दुनिया भर की कार कंपनियां कई सालों से पेट्रोल और डीजल के विकल्प के तौर पर नए-नए इंधन खोजने में लगी हुई है. इसके लिए कई वैकल्पिक तरीके भी इजाद किए जा रहे हैं

 इसी कड़ी में ट्वेटा समेत कई कार कंपनियां नइ  हाइड्रोजन कार लेकर आ रही हैं. इन कारों का कार्बन उत्सर्जन लेवल शून्य है. जल्द ही इन कारों का बाजार में आने की संभावना है

 हाइड्रोजन फ्यूल सेल


 खासियत


वाहन के प्रेरक शक्ति के लिए हाइड्रोजन ईंधन का उपयोग
हाइड्रोजन,  वाहनों के लिए सबसे अच्छा इंधन
सबसे साफ इंधन और पानी की तरह हवा में कोई प्रदूषक तत्व नहीं छोड़ता
एक बार टैंक फूल होने पर हाइड्रोजन कार 400 से 600 किलोमीटर तक चल सकती है
साथ ही यह कार 4 से 5 मिनट में रिफ्यूल हो जाती है
जबकि इलेक्ट्रिक कार को चार्ज होने में 24 घंटा का समय लगता है

 तकनीक


हाइड्रोजन फ्यूल रसायनिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित करता है
जो हाइड्रोजन गैस और ऑक्सीजन का उपयोग करता है
चुकी वायुमंडल में ऑक्सीजन आसानी से उपलब्ध है. इसीलिए ईंधन सेल को केवल वाहन को बिजली देने के लिए आवश्यक हाइड्रोजन की आपूर्ति जरूरी है

हाइड्रोजन में उच्च ऊर्जा पाई जाती है और इंजन में इसका दहन होने पर कोई प्रदूषण नहीं होता है

स्पेस शटल समेत अन्य रॉकेट को स्पेस में भेजने के लिए नासा 1970 से द्रव हाइड्रोजन का इस्तेमाल कर रही है

स्पेस शटल के इलेक्ट्रिकल सिस्टम को हाइड्रोजन फ्यूल सेल के जरिए पावर मुहैया कराया जाता है

जिससे पानी के रूप में स्वच्छ उत्पाद पैदा होता है
जिसका इस्तेमाल अंतरिक्ष यात्री पानी के लिए करते हैं

केमिकल रिएक्शन से पैदा होती ऊर्जा हाइड्रोजन और ऑक्सीजन के मिश्रण से फ्यूल सेल्स इलेक्ट्रिसिटी हिट और पानी का उत्पादन होता है

फ्यूल सेल की तुलना अक्सर बैटरियो से किया जाता है
बैटरी और फ्यूलसेल दोनों ही केमिकल रिएक्शंस के जरिए ऊर्जा पैदा करते हैं
जिसका इस्तेमाल इलेक्ट्रिक पावर के रूप में किया जाता है
फ्यूल सेल में बताओ निधन हाइड्रोजन की आपूर्ति जरूरी है

 हाइड्रोजन गैस के फायदे और चुनौतियां


लगातार बढ़ते प्रदूषण पर लगाम लगाने की तमाम कोशिशों के बाद अब हाइड्रोजन फ्यूल पर विचार किया जा रहा है
मकसद है कि हम और आप स्वस्थ आबोहवा में खुलकर सांस ले सकें
हमको मुंह पर मास्क लगाकर घुटती हुई सांस लेने की जरूरत नहीं है
प्रदूषण स्तर बढ़ने  पर कई तरह के उपाय किए जा रहे हैं
निर्माण कार्य बंद कर सड़कों, निर्माणकार्यों और धूल वाले जगहों पर पानी का छिड़काव करने समेत

बड़े प्रोजेक्ट्स को निर्माण सामग्री मुहैया कराने वाले रेडीमेड प्लांट,  हॉट मिक्स प्लांट और स्टोन प्रेशर को भी प्रतिबंधित कर दिया जाता है
लेकिन परिणाम सही नहीं रहता है ऐसे में हाइड्रोजन फ्यूल से ढेर सारी उम्मीदें नजर आती है

 हाइड्रोजन कार


 हाइड्रोजन ईंधन के फायदे


हाइड्रोजन ईंधन काफी स्वच्छ इंधन है
प्रदूषक तत्व नहीं छोड़ता है हाइड्रोजन
पर्यावरण के अनुकूल है हाइड्रोजन
वाहनों के लिए बेहतर ईंधन हाइड्रोजन

हाइड्रोजन से चलने वाली कारे  ग्रीन हाउस गैसों में कटौती करने की एक बड़ी माध्यम भी बन सकती है

हाइड्रोजन कारों के इस्तेमाल का फायदा देखते हुए दुनिया के अलग-अलग जगह पर इसका इस्तेमाल हो रहा है

हाइड्रोजन फ्यूल वाले कारों का इस्तेमाल फिलहाल तीन देशों कैलिफोर्निया,  जापान और यूरोप में हो रहा है|

यहां भी इस फ्यूल का प्रयोग पॉपुलर प्रोजेक्ट के रूप में किया जा रहा है

2017 के अंत तक पूरी दुनिया में हाइड्रोजन कारों की संख्या मात्र 6475 थी जिसमें से 53 प्रतिशत कारे  अकेले कैलिफ़ोर्निया में है
30 प्रतिशत के साथ जापान दूसरे नंबर पर हैं
9:0पर्सेंट के साथ हीरो तीसरे नंबर पर है
विशेषज्ञों का मानना है कि वर्ष 2021 तक ऑटोमोबाइल कंपनियां हाइड्रोजन कार का उत्पादन करने लगेंगे

 हाइड्रोजन के बताओ ईंधन के तौर पर कई फायदे हैं किंतु इसके इस्तेमाल को लेकर कई चुनौतियां भी हैं

हाइड्रोजन एक प्राकृतिक संसाधन के रूप में भारी मात्रा में उपलब्ध है
धरती के 70% भाग को ढकने वाला सबसे बड़ा घटक है
 हाइड्रोजन के दो परमाणु और ऑक्सीजन के एक परमाणु से मिलकर पानी एक अणु का निर्माण करते हैं

 हाइड्रोजन ईंधन को लेकर चुनौती


हाइड्रोजन को ऑक्सीजन से अलग करना
पर्याप्त हाइड्रोजन और जियो थर्मल संसाधन की जरूरत
बहुत महंगा होना हाइड्रोजन फ्यूल के मामले में एक बड़ी चुनौती है

यही एक वजह है कि अभी विदेशों में भी यह ईंधन पायलट प्रोजेक्ट के रूप में प्रयोग किया जा रहा है

हाइड्रोसील टूल काफी एडवांस तकनीक पर आधारित और काफी महंगा है

वैज्ञानिक पानी से हाइड्रोजन अलग करने के गैर परंपरागत स्रोत पर भी काम कर रहे हैं

और उम्मीद की जा सकती है कि हाइड्रोजन के इस्तेमाल में आ रही अड़चने जल्द ही दूर होंगे

हाइड्रोजन ईंधन का इस्तेमाल सशक्त ईंधन के रूप में हम प्रयोग कर पाएंगे

 ऊर्जा के स्रोत

 विकल्प


दुनिया भर में सीएनजी का इस्तेमाल
भारत दुनिया में सबसे ज्यादा सीएनजी गाड़ियों वाले 5 देशों में शामिल है

सीएनजी कुकिंग गैस की तरह लो कार्बन इंधन है
जिसका इस्तेमाल जर्मनी इटली, एशिया और दक्षिण
अमेरिका में लोकप्रिय है

और इसी तरह गाड़ियों की इंधन के लिए एलपीजी और एलएनजी का इस्तेमाल भी दुनिया भर में किया जा रहा है

दुनिया अब फ्यूचर कार के रूप में इलेक्ट्रिक और हाइड्रोजन कार को देख रही है

इलेक्ट्रिक कार में बैटरी में स्टोर किए गए ऊर्जा का इस्तेमाल होता है

चार्ज करने के लिए पोर्ट की जरूरत होती है
हाइड्रोजन कार में फ्यूल सेल का इस्तेमाल होता है
ऊर्जा बनाने के लिए रिएक्ट करना

इलेक्ट्रिक कार को इलेक्ट्रिक बोर्ड से चार्ज करने की जरूरत
हाइड्रोजन कार को प्रेशराइज हाइड्रोजन से रिचार्ज करना जरूरी है
दोनों की छमता में बहुत ज्यादा फर्क नहीं है
इलेक्ट्रिक कार बैटरी की वजह से ज्यादा सफल नहीं है
हाइड्रोजन कार इंजन की वजह से बेहतर है
हाइड्रोजन का इलेक्ट्रिक कार का इस्तेमाल में काफी समय लग सकता है

इसलिए कुछ ऐसी तकनीक और ग्रीन फ्यूल भी इजाजत किए गए हैं जो कार्बन उत्सर्जन कम करने में लगातार मददगार साबित हो

ऐसा ही एक इंधन है एड ब्लू डीजल एग्जास्ट फ्लुएड इंधन
नाइट्रोजन ऑक्साइड को भाप और नाइट्रोजन मे बदल देते हैं
इसके अलावा एक और विकल्प के आधार पर बायोडीजल का इस्तेमाल शुरू किया जा रहा है

बायोडीजल क्लीन वार्निंग अक्षय ऊर्जा है
रसायनिक प्रक्रिया से बनाया जाता है

वनस्पति तेल और फैट्स non-toxic
ऊर्जा में तब्दील कर देता है
पेट्रोल के विकल्प के तौर पर एथेनॉल का भी इस्तेमाल किया जा सकता है

100% शुद्ध एथेनाल का इस्तेमाल
रेगुलर अनलिडेड फ्यूल कौन कंस्ट्रेशन  के साथ प्रयोग
गन्ने और मक्के के अवशेषों को प्रोसेस कर बायोफ्यूल का निर्माण करने में
एथेनाल कम प्रदूषण करने वाला स्थाई ईंधन
स्टीम कार भी विकल्प के तौर पर मौजूद
 काइनेटिक यानी गतिज ऊर्जा का इस्तेमाल पेट्रोल या डीजल के विकल्प के रूप में

पेट्रोल डीजल की दो तिहाई उर्जा हिट बनकर बर्बाद हो जाती है
थर्मोइलेक्ट्रिक तकनीक के जरिए हिट से उर्जा उत्पादन संभव
इस तकनीक पर कई कंपनियां काम कर रही है
थर्मोइलेक्ट्रिक पैनल के जरिए ईंधन की खपत 5% तक कम होती है
हवा से भी ऊर्जा बनाने के तरीके पर काम किया जा रहा है
कंप्रेस्ड एयर से पावर जनरेट करना संभव
कई तरह के विकल्पों में
लिक्विड नाइट्रोजन का इस्तेमाल

प्रेशराइज्ड टैंक में गर्म करने से हाई प्रेशर गैस का निर्माण

हाई प्रेशर गैससी पिस्टन और इंजन को चलाया जा सकता है
हालांकि लिक्विड नाइट्रोजन की क्षमता बाकी फॉसिल फ्यूल से कम है
इसके उत्पादन में बिजली की जरूरत पड़ती है

 निष्कर्ष


 पर्यावरण प्रदूषण इस समय विश्व की सबसे बड़ी खतरा बनकर सामने आई हुई है इसलिए यह खोज की जा रही है कि हाइड्रोजन कार के लागत को कम किया जाए और भविष्य में इसके इस्तेमाल की गुंजाइश है|

शुक्रवार, 6 दिसंबर 2019

पाइरेट्स


 पाइरेट्स ऑफ द कैरेबियन फिल्म आपने जरूर देखी होगी. जो समुद्री डाकू पर आधारित एक फिल्म है. जिसमें समुद्री लुटेरों का अभिनय करने वाले एक्टिंग को खूब सराहा गया था, लेकिन जब यह घटनाएं वास्तविक रूप में होती हैं तो ना कोई समुद्री मार्ग और सुरक्षा प्रभावित होती है बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए भी एक बहुत बड़ा खतरा उभर कर आता है. दुनिया के एक छोर से दूसरे छोर तक फैलाया विशाल समुद्र अपने अंदर विशाल संभावनाएं समेटे हुए हैं.
 यह धरती का सबसे व्यस्त रास्ता है दुनिया का करीब 80% व्यापार समुद्र के रास्ते से ही होता है. समुद्री लुटेरों और डकैतों के चलते समुद्री व्यापार चिंता के दायरे में है. दरअसल यह समुद्री लुटेरे कारोबारी जहाज लूटने और चालक दरों को अगवा करने के साथ-साथ, समुद्री व्यापार, समुद्र की सुरक्षा और समुद्री आवाजाही के लिए खतरा पैदा करती है
 जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी असर पड़ता है. भारत समेत कई देशों ने समुद्री डाकू से अपने जहाजों को बचाने के लिए समुद्री मार्गो और समुद्री गाड़ियों में सेना तैनात की हैं.
 यहां तक कि संयुक्त राष्ट्र ने भी इन पर रोक लगाने के लिए संयुक्त राष्ट्र कन्वेंशन ऑन द लॉ ऑफ सी के तहत नियम कायदे बनाए हैं. इसके बावजूद इस तरह की घटनाओं पर रोक नहीं लग पा रही है
 ताजा मामला नाइजीरिया के तट पर हांगकांग के झंडे वाले जहाज को समुद्री डाकू ने अगवा कर लिया. अगवा किए गए 19 चालको में से 18 भारतीय भी शामिल है.
तो आज हम बात करने जा रहे हैं कि समुद्र के जरिए व्यापार या आवागमन करना कितनी चुनौती बन चुका है इसको हम समझेंगे
 इस तरह की गतिविधियों से व्यापार एवं अन्य गतिविधियों पर कितना असर पड़ता है
 और अंतर्राष्ट्रीय समुद्री संगठन ने इस तरह की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए किस तरह के नियम कायदे बनाए हैं
 हांगकांग की झंडेवाली एक जहाज का अपहरण

नाइजीरियाई तट के पास समुद्री लुटेरों ने हांगकांग की धंधे वाली एक जहाज का अपहरण कर लिया है
इसमें 19 लोग सवार थे जिसमें 18 भारतीय हैं
यह सभी चालक दल के सदस्य 3 के टैंकर पर तैनात हैं
समुद्री तट पर नजर रखने वाली एक वैश्विक एजेंसी ने जानकारी दी है
जानकारी के बाद नाइजीरिया में स्थित भारतीय मिशन ने भारतीयों को बचाने के लिए अफ्रीकी राष्ट्र के अधिकारियों से संपर्क बनाया है

International maritime organization (IMO) केमुताबिक 
साल 2019 के पहले 9 महीने में दुनिया भर में हुए 95 समुद्री डकैती और अन्य घटनाओं में से 17 नाइजीरिया के आसपास के समुद्री इलाके में हुई है

वही समुद्री जहाज के चालक दल के अपहरण की घटनाओं में से कुल 82 प्रतिशत घटनाएं गिनी की खाड़ी में हुई
 दुनिया की ज्यादा देशों की सीमा समुद्र से लगती है. समुद्र से लगी 100 से ज्यादा अर्थव्यवस्था की रीढ़ की हड्डी है. रोजाना समुद्र के रास्ते लाखों पोतो की आवाजाही होती है. ऐसी में समुद्री लुटेरों के लिए यह लूट का बड़ा अंडा भी बन गया है

UN के मुताबिक


छोटे दीपों के जरिए नशीले पदार्थों की तस्करी का बड़ा जाल दुनिया के कई इलाकों में फैला हुआ है
संयुक्त राष्ट्र संघ की सतत विकास का 14वां बिंदु इसी बात पर जोर देता है
कि इन अपराधों पर नकेल कसकर तटीय इलाकों में शांति बहाल की जाए
ताकि आर्थिक विकास की गति तेज हो सके
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसके लिए वैश्विक समुद्री अपराध कानून बनाया गया है
जिसमें सभी महानगरों पर विस्तार से बात की गई है
 1982 यूएन की समुद्री कानून संधि

समुद्र में होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने के लिए  1982 में समुद्री कानून संधि बनाई है
दरअसल यूएन की समुद्री कानून संधि एक अंतरराष्ट्रीय समझौता है
जो विश्व की सागर और महासागर पर देशों के अधिकार और जिम्मेदारियां निर्धारित करता है
और समुद्री साधनों के प्रयोग के लिए नियम स्थापित करता है
1982 के UN कन्वेंशन ऑनलाइफ सी यानी UNCOLS अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत खासकर धारा
100 से 107 तक और धारा 110 मे समुद्री डकैती को रोकने की बात कही गई है

 समुद्री लूट के खिलाफ कानून



समुद्री संधि कानून की धारा 100
लूट और डकैती के खिलाफ अंतर्राष्ट्रीय समुद्री संगठन की संहिता
यूएन सुरक्षा परिषद ने सोमालिया में लूट रोकने के लिए प्रस्ताव 1772 और 1816 पारित किया
इसके बाद समुद्री लूट पर दुनिया के कई देशों ने कड़ी कदम उठाए
2007 -08 मे जब सोमालिया में समुद्री लुटेरों ने आतंक फैलाना शुरू किया
तो सुरक्षा परिषद की विशेष प्रस्ताव के बाद यहां अंतरराष्ट्रीय नौसेना की तैनाती की गई
ताकि लुटेरों पर नकेल कसा जा सके
 समुद्री आतंकवाद के खिलाफ कदम
संयुक्त राष्ट्र की विशेष संधि
समुद्र में गैरकानूनी गतिविधियों के खिलाफ संधि
अंतर्राष्ट्रीय जहाज और बंदरगाह सुरक्षा संहिता तैयार की गई
2004 में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा का प्रस्ताव 1526 पारित किया गया
2006 में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का प्रस्ताव 1735 पारित किया गया
समुद्री आतंकवाद पर कड़ी कार्रवाई की बात कही है
 नशीले पदार्थों की तस्करी पर कानून
समुद्री संधि की धारा 108
तस्करी के खिलाफ कड़े कानून बनाए गए हैं
1997 में अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन का विशेष प्रस्ताव को मंजूरी दी
नशीली पदार्थों पर लगाम कसने का प्रस्ताव
विश्व कस्टम संगठन की स्थापना
यूएनओडीसी को कई अधिकार हासिल

 समुद्री अपराध कार्यक्रम के वित्तीय सहयोगी

यूएन ट्रस्ट  - 26%

नीदरलैंड- 17.9%
ब्रिटेन- 17.5%
यूरोपियन यूनियन – 12.8%
डेनमार्क – 9.6%
नार्वे – 8.6%
अमेरिका -4.7%
ऑस्ट्रेलिया- 3.0%

 इतिहास


समुद्री लूट की घटना बहुत पुराना है
जब से समुद्री व्यापार शुरू हुआ है
तब से समुद्री लूट शुरू हो गई है
ईसा पूर्व चौदहवीं सदी में समुद्री व्यापार की शुरुआत हुई थी
उसी के साथ ही समुद्र में लूट का सिलसिला भी जारी हो गया था
उसी समय भूमध्य सागर में होने वाली डकैती के पीछे अधिकतर रोमन. ग्रीस होते थे
एक बार तो समुद्री डकैतों ने मशहूर लेखक जुलियस सीजर को भी बंधक बना लिया था
8 वीं और 12 वीं सदी के दौरान वाइकिंग्स ने की कई लूट
1620 से 1720 तक समुद्री डकैती की सबसे ज्यादा घटनाएं हुई
जिसे समुद्री डकैती का गोल्डन युग भी कहा जाता है
समुद्री डकैतों का सबसे बड़ा गढ़ सोमालिया है
सोमालियाई डकैती की शुरुआत 1990 के दशक में हुई थी
इसका सबसे बड़ा कारण सोमालिया में व्याप्त राजनीतिक अस्थिरता और गरीबी है
यह बढ़ती बढ़ती इतना बढ़ गया यह सोमालियाई डकैत इंटरनेशनल शिपिंग के लिए बड़ा खतरा बन गए हैं
आंकड़ों के लिहाज से समझे तो समुद्री डकैतों ने सीपिंग क्षेत्र में बड़ी मुसीबतों का काम किया है
समुद्री डाकू हमलों से खतरे में आने वाले क्षेत्रों में इंडोनेशिया,  फिलीपींस और नाइजीरिया शामिल है
यहां समुद्री डाकू खुद आसपास के प्राकृतिक संसाधनों की प्रचुरता से आकर्षित होते हैं
तीन परिवहन के लिए रणनीतिक मार्ग जैसे कि सोमालिया या इंडोनेशिया के समुद्री तट  अपराध के लिए कुछ अच्छे तो बन गए हैं
2009 की तेल टैंकरों ने मलक्का जलडमरूमध्य के माध्यम से प्रतिदिन 13.6बिलियन बैरल तेल भेजा
यह यूरोपीय संघ में आयातित तेल के दैनिक मात्रा से काफी ज्यादा था
2018 में तेल की कीमतों में लगभग 70 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल की बढ़ोतरी के साथ
कच्चे तेल का बैरल का अपहरण समुद्री डाकू के अपहरण का केंद्र बन गया

 समुद्री डकैती


2010 में 445 समुद्री डकैती घटना
2016 से 2017 में वेनेजुएला में समुद्री डकैती की 12 घटनाएं
2018 में समुद्री डकैती की 201 घटनाएं दर्ज हुई
3 अप्रैल 2017 को सोमालिया के समुद्री लुटेरों ने भारतीय मालवाहक जहाज हाईजैक किया
इससे पहले 2014 में भारत के साथ नाविकों को 4 साल तक बंधक बनाया
2011 में समुद्री लूट के लिए 237 हमले हुए
 वर्ल्ड बैंक के अध्ययन के मुताबिक
सोमालिया के समुद्री लुटेरे हर साल ग्लोबल इकोनामी को कई देशों की जीडीपी से भी ज्यादा नुकसान पहुंचाते हैं
सोमालिया के डाकुओं के चलते ग्लोबल इकोनामी को हर साल करीब 18 अरब डालकर नुकसान होता है
यह भारत के पड़ोसी देश अफगानिस्तान के कुल जीडीपी से भी ज्यादा है

 महासागरों की अहमियत


दुनिया की जनसंख्या की 30% आबादी तटीय क्षेत्र में रहती है
दुनिया के 80% कारोबार समुद्र के जरिए ही होता है
भारत में भी 95% व्यापार समुद्र के रास्ते ही होता है
 समुद्री गतिविधियां
 वैश्विक चुनौतियां
दुनिया के 20 फीट जी कोरल रीफ समाप्त हो गए हैं
20 फिजी कोरल रीफ विकृत हुए हैं
मैंग्रोव की मात्रा 30 से 50 फीट की घट गई है
29 फीट जी समुद्री घास गायब हो गई है
संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन के मुताबिक
समुद्री मछली भंडार का जरूरत से ज्यादा शोषण हुआ है
दोहन 1974 में 10:00 पर्सेंट से बढ़कर 2008 में 32% हुआ है
जबकि वैश्विक स्तर पर मछलियां पकड़ने का व्यवसाय
1950 में 16.7 मिलियन मीट्रिक टन था
वहीं 2018 में 178 8 मिलियन मीट्रिक टन पहुंच गया
वैश्विक शांति और स्थिरता खतरे में है
सोमालियाई समुद्री लुटेरों ने भारत समेत अन्य देशों के पोतो  को बनाया निशाना
हिंद महासागर क्षेत्र में दुनिया के 75% से अधिक समुद्री व्यापार होते हैं
और 50% वैश्विक तेल खपत आई ओ आर से होकर गुजरता है
इसके बावजूद समुद्री आतंकवाद,  समुद्री डकैती, मानव तस्करी, अवैध और अनियमित रूप से मछली पकड़ना, हथियार चलाना और शिकार करना उस क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा को चुनौती देता है
सभी देशों के बीच आम सहमति का अभाव
एक बड़ी चुनौती है
अपने हिसाब से समुद्र नियम बनाने की देशों की प्रवृत्ति
समुद्री डकैत की पहचान करना मुश्किल कार्य

 भारत का प्रयास


भारतीय विशेष आर्थिक क्षेत्र और पश्चिम की ओर देशांतर रेखा से 65 डिग्री पूर्व तक भारतीय नौसेना ने चौकशी बढ़ाई
भारतीय व्यापारिक जहाजों में सशक्त गार्ड तैनात करने की दिशा निर्देश जारी किए गए हैं
नौसेना ने ओमान की सलाह से समुद्री डकैती रोकने के लिए p18  long-range मेरी टाइम सर्विस लाइन एयरक्राफ्ट तैनात किया है
2008 से अदन की खाड़ी में समुद्री डकैती विरोधी गश्त जारी
देश की तरह से समुद्र से घिरा है
95% व्यापार समुद्र से होता है
26 \11 हमला करने के लिए आतंकवादियों ने मुंबई के समुद्र तट का ही सहारा लिया था
यही वजह है कि समुद्र समुद्र नीति देश के लिए काफी अहमियत रखते हैं|

बुधवार, 4 दिसंबर 2019

अंतरराष्ट्रीय दिव्यांग दिवस


 दुनिया की कुल आबादी 7 बिलियन से ज्यादा है इसमें से एक अरब लोग किसी न किसी दिव्यांगता के  साथ जीवन बिता रहे हैं|
 संयुक्त राष्ट्र के इन आंकड़ों से साफ है कि दुनिया की कुल आबादी की 15 फीसदी आबादी किसी न किसी तरह से दिव्यांग की श्रेणी में आते हैं. और ऐसे लोगों में 80 फ़ीसदी लोग विकासशील देशों में है. शारीरिक कमियों के बावजूद इन लोगों में कुछ खास विशेषता होती है. समाज में ऐसे लोगों के प्रति लोगों को ज्यादा संवेदनशील बनाने की जरूरत है.

 इसी मकसद से हर साल 3 दिसंबर को अंतरराष्ट्रीय दिव्यांग जन दिवस मनाया जाता है|

 दिव्यांग दिवस मनाने का उद्देश्य

इसका मुख्य मकसद दिव्यांगों के प्रति लोगों के व्यवहार में बदलाव लाने और उन्हें उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना है

दिव्यांग दिवस ऐसे लोगों को आत्म सम्मान और उनके जीवन को बेहतर बनाने के समर्थन के उद्देश्य से मनाया जाता है


 दिव्यांग दिवस मनाने का इतिहास


इस दिन के इतिहास की बात करें तो संयुक्त राष्ट्र आम सभा ने 1981 को विकलांग व्यक्तियों का अंतर राष्ट्रीय वर्ष घोषित किया था
इसके बाद राष्ट्रीय,  क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनके लिए पुनरुद्धार,  रोकथाम, प्रचार और बराबरी के मौके पर जोर देने के लिए योजना का निर्माण किया गया
अंतर्राष्ट्रीय उत्सव के लिए पूर्ण सहभागिता और समानता के थीम का चुनाव किया गया था
इस थीम के तहत समाज में दिव्यांगों को बराबरी का अवसर देने के साथ ही लोगों को जागरूक करने पर जोर दिया गया
इसके अलावा सामान्य नागरिकों की तरह ही उनकी सेहत पर भी ध्यान देने के साथ ही सामाजिक,  आर्थिक स्थिति को सुधारने जैसे मुद्दों पर ध्यान केंद्रित किया गया था
संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 1983 से 92 तक दिव्यांगों के लिए संयुक्त राष्ट्र के दशक की घोषणा की गई थी
इसके बाद से 3 दिसंबर को हर साल दिव्यांग दिवस मनाया जाता है


 अंतरराष्ट्रीय दिव्यांग दिवस के लिए थीम


 अंतरराष्ट्रीय दिव्यांग दिवस के लिए एक थीम निर्धारित किया जाता है. इस साल की थीम है दिव्यांग व्यक्तियों के नेतृत्व और उसकी भागीदारी को बढ़ावा देना 2030 के विकास के एजेंडे में एक्शन लेना|

 विकलांग से दिव्यांग की ओर कदम


दिसंबर 2015 में पीएम मोदी ने उनको दिव्यांग करने की अपील की थी
इसके पीछे उनका मानना था कि शरीर के किसी अंग से लाचार व्यक्तियों में ईश्वर से मिली कुछ खास विशेषताएं होती हैं
हर साल संयुक्त राष्ट्र की ओर से 3 दिसंबर को अंतर्राष्ट्रीय विकलांग जन दिवस मनाया जाता है
एम वेंकैया नायडू का कहना है कि इस दिवस का नामकरण अंतरराष्ट्रीय दिव्यांग दिवस के रूप में करना चाहिए
दिल्ली के विज्ञान भवन में हुए समारोह में उपराष्ट्रपति ने दिव्यांग सशक्तिकरण की दिशा में कार्य कर रहे लोगों को राष्ट्रीय पुरस्कार दिए
सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय की ओर से आयोजित की गई इस समारोह में दिव्यांगजन सशक्तिकरण में 14 श्रेणियों में 65 पुरस्कार दिए गए
 भारत के संविधान में दिव्यांगों के लिए प्रावधान
अपने सभी नागरिकों के लिए समानता स्वतंत्रता न्याय और गरिमा सुनिश्चित करता है. और स्पष्ट रूप से दिव्यांग व्यक्तियों समेत एक संयुक्त परिवार बनाने पर जोर देता है
सरकार दिव्यांगों को सक्षम और समृद्ध बनाने के लिए समय-समय पर कानून बनाती रही है
जिसका उन्हें काफी फायदा हुआ है
भारतीय संविधान के तहत विकलांगता दिव्यांग जनों का विषय संविधान की सातवीं अनुसूची में राज्य विषय में आता है
भारत सरकार हमेशा से दिव्यांग जनों के व्यक्तिगत,  सामाजिक और आर्थिक उत्थान के लिए सक्रिय रही है
सरकार  ने दिव्यांग व्यक्तियों को समाज के साथ जोड़ने के लिए कानून बनाने समेत कई उपाय किए हैं
इन उपायों का असर उनके जीवन के हर क्षेत्र में दिखाई देता है
भारत ने एशिया प्रशांत क्षेत्र में विकलांगता ग्रसित व्यक्तियों की समानता और संपूर्ण सहभागिता की एक हस्ताक्षर करता के रूप में अपनी जिम्मेदारियों को निभाते हुए विकलांग व्यक्ति समान अधिकारियों का संरक्षण और संपूर्ण सहभागिता अधिनियम 1995 पारित किया थे


 विकलांग व्यक्ति अधिनियम 1995

 प्रावधान

विकलांगता ग्रसित व्यक्तियों का अलग-अलग क्षेत्र में सशक्तिकरण का प्रमुख आधार प्रदान करना
निशक्त व्यक्तियों की समानता और संपूर्ण सहभागिता को स्वीकार और सुनिश्चित करना
आर्थिक एवं सामाजिक अधिकारों की सुरक्षा करना और उसे बढ़ावा देना
सरकारी सरकारी कार्य और सार्वजनिक क्षेत्रो  के उपक्रमों में 3 फीसदी आरक्षण देने का प्रावधान

 राष्ट्रीय नीति 2006

 दिव्यांग जनों के अधिकारों को संरक्षित करने के लिए सरकार ने 2006 में दिव्यांग व्यक्तियों के लिए राष्ट्रीय नीति घोषित की जिनके अनुसार –
दिव्यांग व्यक्ति बहुमूल्य मानव संसाधन के स्रोत हैं
बेहतर प्रशिक्षण से बेहतर जीवन संभव किया गया
मंत्रालय में दिव्यांगों के लिए मुख्य आयुक्त की नियुक्ति की गई
नियमों और आदेशों के उल्लंघन की शिकायतें सुनना
विकलांगता के क्षेत्र में काम करने के लिए 7 राष्ट्रीय स्तर के संस्थान खोले गए
संस्थान विकलांगता के अलग-अलग क्षेत्रों के लिए काम करते हैं

 इस नीति का उद्देश्य था –
विकलांगता की रोकथाम करना, दिव्यांग जनों के पुनर्वास का उपाय करना
महिला दिव्यांगों को शोषण और दुर्व्यवहार से बचाना
दिव्यांग बच्चों की देखभाल करना

 दिव्यांग अधिकार विधेयक 2016

1995 के कानून का जगह ले लिया
21 निःशक्तताओ को मान्यता दी गई
1995 के कानून की तुलना में 3 गुना अधिक प्रभावशाली
परंपरागत रूप से निःशक्तता केवल तीन समूहों के साथ था
अस्थि विकलांगता के शिकार, दृष्टिहीन और वधिर
  मानसिक निःशक्तता ,मनोवैज्ञानिक विकार,  कुष्ठ रोगी, मस्तिष्क पक्षाघात को बीमारी मानना
विधेयक के तहत सभी को दिव्यांग जनों में शामिल किया गया
दो अन्य विकलांगता ओं को भी मान्यता प्रदान की गई
वो है पार्किसंस रोग और एसिड की वजह से होने वाली विकलांगता
दिव्यांगों को मिले आरक्षण को 3 से बढ़ाकर 4 फ़ीसदी किया गया
उच्च शिक्षण संस्थानों में पांच फ़ीसदी आरक्षण का प्रावधान
न्यूनतम 40 फिर भी विकलांगता के शिकार लोगों को आरक्षण का लाभ प्राप्त होगा
संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन की फैसले  को भी अपनाया गया
इस अधिनियम के अंतर्गत नियमों का उल्लंघन करने पर धन का भी प्रावधान है
पहली बार उल्लंघन करने पर ₹10000 का जुर्माना देना होगा जबकि इसके बाद प्रत्येक उल्लंघन पर कम से कम ₹50000 और अधिकतम से अधिकतम ₹500000 का जुर्माना होगा

 दिव्यांग की परिभाषा

 भारत में ऐसे दिव्यांगों को दिव्यांग माना गया है जो 40% से कम विकलांगता के शिकार ना हो. इस स्थिति का प्रमाण मेडिकल ऑफिसर द्वारा प्रमाणित होना चाहिए|

 भारत में दिव्यांगों की स्थिति

भारत की 2.21 फ़ीसदी आबादी किसी न किसी रूप में दिव्यांग है
जनगणना 2011 के अनुसार
दिव्यांग पुरुषों की संख्या 1.50 करोड़ है
दिव्यांग महिलाओं की संख्या 1.18 करोड़ है
0.82 करोड़ शहरी क्षेत्र में रहने वाले
0.86 करोड़ ग्रामीण इलाकों में रहने वाले
49 प्रतिशत विकलांग व्यक्ति साक्षर और 34% रोजगार प्राप्त
45 फ़ीसदी विकलांग आबादी अशिक्षित है
पूरी दिव्यांग आबादी की 26 फ़ीसदी दिव्या और अशिक्षित है
शिक्षित दिव्यांगों में 59 फीसदी  दसवीं पास है
 दिक्कतों को दूर करने का लक्ष्य

आने जाने में होने वाली दिक्कतों को दूर करने का लक्ष्य

सार्वजनिक भवन, परिवहन सुविधाएं, सड़क, फुटपाथ, रेलवे प्लेटफार्म, बस स्टॉप इत्यादि परिवहन के सभी माध्यम

सार्वजनिक कार्यो में संकेतिक भाषा के इस्तेमाल को बढ़ावा

सरकारी और गैर सरकारी कार्य में अलग शौचालय की व्यवस्था

संचार जरूरतों की आपूर्ति

सूचना सेवा और सार्वजनिक दस्तावेज को आसान बनाना

ब्रेल, टेप  सर्विस, बड़े  प्रिंट और तकनीकों का इस्तेमाल शुरु हो चुका है

 दिव्यांगों को अधिक मजबूती प्रदान करना

 भारत सरकार ने दिव्यांगों को आर्थिक रूप से मज
बूती प्रदान करने के लिए कई योजनाएं शुरू की है –
कौशल विकास के जरिए दिव्यांग जनों को स्वरोजगार के लिए तैयार किया जा रहा है
सरकार ने दिव्यांग जनों तक लाभ पहुंचाने के लिए राष्ट्रीय डेटाबेस बनाना शुरू कर दिया है
और इसके लिए दिव्यांग जनों को यूनीक डिसेबिलिटी आईडी कार्ड जारी किया जा रहा है|



गुरुवार, 7 नवंबर 2019

भारतीय रेलवे का निजीकरण जानिये सकारात्मक और नकारात्मक पक्ष 

 चर्चा में है 150  ट्रेनों और 50 रेलवे स्टेशन की कमान निजी कंपनी के हाथ में जाने की. नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत ने 50 रेलवे स्टेशनों की छवि सुधारने को लेकर रेलवे को दिखाएं एक पत्र. जिसे कारण रेलवे कर्मचारियों सहित आम लोगों ने सरकार की इस पहल के खिलाफ जमकर प्रदर्शन किया है. 

 पीयूष गोयल ने कहा है कि सरकार रेलवे का निजीकरण करने नहीं जा रही है बल्कि निवेश लाने के लक्ष्य से ppp पब्लिक,  प्राइवेट,  पार्टनरशिप को बढ़ावा देने के लिए विचार कर रही है. हालांकि सरकार की मंशा है कि निजीकरण के द्वारा यात्रा को सुविधाजनक बनाया जा सके. 
 अब सवाल यह है,  कि क्या सरकार ने निजीकरण की नकारात्मक परिणाम के लिए कोई उपाय सोच रखा है या नहीं? 
 क्या सरकार ने रेलवे के निजीकरण का अध्ययन किया है या नहीं? 
 इस प्रकार के प्रश्नों सहित रेल किराए की इजाफे और रेलवे भर्ती  समेत तमाम पहलुओं पर विचार किया जा रहा है. कुछ भी हो ऐसा लगता है कि निजी करण से हमारे अर्थव्यवस्था पर बहुत बड़ा प्रभाव पड़ेगा|

क्या है पूरा मामला? 

 नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत ने एयरपोर्ट की तर्ज पर ट्रेनों को भी निजी कंपनियों के हाथों में सौंपने की वकालत की है. 50 स्टेशनों को वरीयता के आधार पर विश्व स्तर का बनाने और इस काम में निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया है, इसी के आधार पर उन्होंने ट्रेनों के  निजीकरण के लिए एक एम्पॉवर्ड  ग्रुप ऑफ सेक्रेट्री का भी गठन करने की सलाह दि है. 
 रेलवे स्टेशन और ट्रेनों के निजीकरण के लिए एक कमेटी के गठन किए हैं, जिसके सदस्य नीति आयोग के सीईओ,  रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष, आर्थिक मामलों के विभाग के सचिव और रेलवे के फाइनेंशियल कमिशनर  शामिल है|
 नीति आयोग एक ऐसी योजना पर जोर दे रहा है जिसमें निजी निवेश को आकर्षित करके , स्टेशनो के  आसपास के क्षेत्रों का समग्र विकास किया जा सके |

निजीकरण का मतलब है 

 रेलवे को परिचालित करने वाले आवश्यक साधन मसलन प्रक्रिया स्टेशन कर्मचारी रेलवे की ही रहेंगे यात्रियों की सुविधा बढ़ाने और टिकटिंग जैसे काम प्राइवेट कंपनियां करेंगे|

रेलवे के निजीकरण के कारण 


 1.) लगातार आर्थिक घाटे में चलने वाली उपक्रम है भारतीय रेलवे, सेवाओं की गुणवत्ता के उच्च मानकों  को प्राप्त करने में सफल नहीं हो पाई है|

2.) रेलगाड़ी का समय प्रबंधन भी भारतीय रेलवे के समक्ष है एक बड़ी चुनौती|

3.) 2014 में रेलवे बोर्ड ने प्रमुख रेल परियोजनाओं के लिए संसाधन जुटाने  और रेलवे बोर्ड के पुनर्गठन के लिए विवेक देबरॉय  समिति का गठन किया था. समिति ने 2015 में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की और रेल के डिब्बो तथा  इंजन के निजीकरण की बात कही थी;

4.) समिति ने रेलवे के बुनियादी ढांचे के लिए एक अलग कंपनी के निर्माण की भी मांग की है,  माना जा रहा है कि सरकार की इस पहल के पीछे इस समिति की सिफारिश का भी योगदान है;

निजीकरण से क्या फायदे होंगे? 


 1.) टिकटिंग  और रखरखाव जैसे  काम निजी कंपनियों को सौपने  के बाद रेल में घाटे का सिलसिला हो सकता है खत्म;

2.) रेलवे में निजी कंपनियों के आने से बेहतर हो सकेगी  प्रबंधन, बेहतर हो सकेगी  सेवाओं की गुणवत्ता ;

3.) इसके अलावा रेलवे में दुर्घटना भी एक बहुत बड़ी समस्या है घटनाओं का मुख्य कारण रखरखाव है. ऐसा माना जा रहा है कि अगर हमें इन दुर्घटनाओं से निजात पाना होगा तो निजी क्षेत्र को अनुमति देनी होगी;

4.) रेलवे में एकाधिकार के समाप्त होने से पैदा होगा प्रतिस्पर्धा का माहौल रेलवे को मुनाफा पहुंचाने का मार्ग भी हो सकेगा प्रस्त ;

निजीकरण के नाकारात्मक पक्ष ;


1.) निजी कंपनियों के भर्ती के स्तर तक साझेदारी करने से कर्मचारियों की हो सकती है छटनी ;

2.) निजी कंपनियों को तय करने की छूट देने पर आम लोगों की जेब पर पड़ सकती है मंगाई;

3.) रेलवे की निजीकरण से इसकी कनेक्टिविटी हो सकती है सीमित;

4.) अपने व्यवहार में अप्रत्याशित होने के कारण निजी कंपनी में पाई जाती है जवाब देता की कमी ;

आगे की राह क्या होनी चाहिए? 


 रेलवे के निजीकरण का दुनिया भर में देखने को मिला है अनुभव पहल में बेहद सावधानी बरतने की जरूरत है.

 ब्रिटिश रेलवे का निजीकरण रहा है बेहद विवादास्पद विरोधियों का तर्क है कि निजीकरण से कोई फायदा नहीं है,  क्योंकि यात्री किराया अधिक है.
 ट्रेन पहले की अपेक्षा ज्यादा विलम्ब  से चलती है और यात्रीयों में काफी असंतोष देखने को मिला है. इसलिए ब्रिटेन में रेलवे को निजी हाथों से छीन कर फिर से राष्ट्रीयकरण करने की योजना बनाई जा रही है.

 हालांकि जापान में रेलवे का निजीकरण बेहद प्रभावी रहा है, बल्कि लागत में कमी आई और सेवाओं में भी सुधार आई है

 भारत की बात करें तो सरकार का कोई भी उपक्रम जाए वह बैंकिंग हो या पावर सेक्टर या फिर सुदूर संचार कंपनी इसके बारे में ना कोई ज्यादा लोग जानते हैं ना ही प्रत्यक्ष रूप से जुड़े होते हैं. इसलिए लोग उनकी निजी करण का परवाह नहीं करते.
 लेकिन भारतीय रेल लोगो के जीवन से सीधे तौर से जुड़ा हुआ है लोग इसे अपनी संपत्ति मानते हैं इसलिए रेलवे का  निजी हाथों में जाने से लोगों पर मनो वैज्ञानिक असर पड़ेगा;
 संसाधनों से लैस दसको के  अनुभव के बाद भी सरकार की अक्षमता है चिंता का विषय. बड़ी कदम को उठाने से पहले हुए व्यापाक चर्चा करने की जरुरत है 
भारत के रेलवे के निजीकरण का क्या परिणाम होगा ये तो भविष्य में ही देखा जायेगा. 
लिहाजा यह जरुरी है की एक संतुलित दृष्टिकोण अपनाया जाय. और सभी पहलुओं को ध्यान में रख कर आगे बढ़ा जाय |