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रविवार, 9 फ़रवरी 2020


The hindu and pib analysis in hindi 9 february 2020


व्यापार की दीवारों को बढ़ाने की उच्च लागत

 संदर्भ

भारत का अंतरराष्ट्रीय व्यापार को लेकर संरक्षणवाद रुख

 सारांश

आर्थिक रूप से परस्पर जुड़ी और तकनीकी रूप से अनुच्छेद दुनिया में भारत को व्यापार पर एक खुला दिमाग रखने की आवश्यकता है

 मुख्य तथ्य:

1 फरवरी बजट में निहित
तीन से चार फरवरी आसियान के नेतृत्व वाले आरसीसीपी व्यापार समझौते पर चर्चा में भारत का भाग लेने से इनकार

IQIP


GS-2

 दीपक्षी क्षेत्रीय और वैश्विक समूह और भारत से संबंधित और अथवा भारत के हितों को प्रभावित करने वाले करार.

 GS-3

 उदारीकरण का अर्थव्यवस्था पर प्रभाव

GS-4

 अंतर्राष्ट्रीय नैतिकता

 बजट कैसे

FTAPTA को कई संदर्भों में समस्या बताया

परिणाम  50 से अधिक वस्तुओं के आयात पर शुल्क बढ़ाया, सीमा शुल्क अधिनियम के नियमों में परिवर्तन किया

* वित्त मंत्री


यह देखा गया है कि FTA के तहत आयात बढ़ रहा है
जिसने घरेलू उद्योग के लिए खतरा उत्पन्न कर दिया है
इस तरह के आयात के लिए कणे चेक  की आवश्यकता होती है

* लेखक


उद्देश्य भारतीय बाजारों को डोपिंग से बचाना हो सकता है मुख्य रूप से चीनी सामानों द्वारा


 व्यापार घाटे में वृद्धि


नवंबर 2019 RCEP वार्ता 16 देशों में
बाहर तर्क= व्यापार घाटे में वृद्धि
*आसियान (FTA)
*जापान (CEPA )
*दक्षिण कोरिया (CEPA)

 सभी समझौतों की समीक्षा

 ऐसा करना मुश्किल लेकिन कहना आसान यदि  भारत आरसीपी विराम लगाता है

तो दीपक्षी व्यापार समझौते पर बातचीत करना अन्य देशों के प्राथमिकता नहीं होगी.

 अंतिम बात

RCEP  के दरवाजे बंद
सार्क  को छोड़ दिया गया
भारत किसी भी क्षेत्रीय FTA का हिस्सा नहीं है

FOR PRELIMS

*FTA-PTA
*ASEAN &RCEP
*NAFTA
*MERCOSUR
*EUE
*AFCFTA
*GCC


 सजा प्रक्रिया की निष्पक्षता को उजागर करना


 संदर्भ:

निर्भया बलात्कार आरोपियों को अपनी सभी कानूनी अधिकारों का प्रयोग करने के लिए दिया गया 7 दिन का समय

 सारांश

न्यायिक प्रक्रिया निष्पक्ष क्षमता की मांग करती है जो सजा की पर्याप्त आवश्यकता ओं के कारण होती हैं

 प्रमुख तथ्य:

 निष्पक्ष परीक्षन अधिकार


* public sentiment vs judicial process
“society cry for justice “

 एक महत्वपूर्ण मामला और रूपरेखा

 पहला:

सबसे पहले साल 1973 की जगमोहन बनाम स्टेट ऑफ पंजाब का हवाला दिया गया
इसमें सुप्रीम कोर्ट की 5 जजों की बेंच ने सुनवाई की

केस में फांसी की सजा की संवैधानिक वैधता पर सवाल उठाए गए थे जिसमें बेंच ने इसे क्लियर कर वैध बताया था

दूसरा:

1980 में बच्चन सिंह बनाम स्टेट ऑफ पंजाब किस का हवाला दिया गया
इस केस में भी सुप्रीम कोर्ट के 5 जजों की बेंच ने फांसी की संविधान की वैधता पर उठे सवाल के बाद सजा को वैध ठहराया था
इसी केस में कोर्ट ने रेयरेस्ट ऑफ रेयर केशो का जिक्र किया था जिसमें फांसी की सजा दी जाएगी

 तीसरा:

1983 में मच्छी सिंह बनाम स्टेट ऑफ पंजाब मामले का
इस केस में रेयरेस्ट ऑफ रेयर के तहत आने वाले अपराध तय करने में 5 बिंदु का जिक्र किया गया था
यह थे-
* मैनर ऑफ़  कमीशन ऑफ क्राइम यानी अपराध का तरीका
* मोटिव ऑफ क्राइम यानि  अपराध का मकसद
* सोशल एवोरेस  ऑफ़ क्राइम यानी अपराध से समाज पर क्या प्रभाव पड़ा
* मैग्रीटुड ऑफ क्राइम यानी अपराध की भयावहता
 पर्सनैलिटी ऑफ विक्टिम यानी पीड़ित  का व्यक्तित्व

 चौथा:

1984 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के केस का  भी सरकारी  वकील ने हवाला दिया

उन्होंने कहा कि सुरक्षाकर्मी बयंत सिंह व सतवंत सिंह ने हत्याकांड किया था

बयंत  सिंह को अन्य सुरक्षाकर्मियों ने वही मार गिराया था, जबकि सतवंत सिंह को साल 1988 में सुप्रीम कोर्ट ने फांसी दी
“ क्या आजीवन कारावास का वैकल्पिक विकल्प निर्विवाद रूप से दिया गया है”

 आजीवन करावास का मुद्दा

सामूहिक विवेक
अपराधिक न्याय प्रणाली में जनता का विश्वास

 ट्रंप आगे बढ़ते हैं

 संदर्भ:

 ट्रम का सीनेट में महाभियोग की आरोपों से बरी होना

 सारांश:

 आरोपों की गंभीरता के बावजूद अमेरिकी राष्ट्रपति वरी होने के बाद मजबूत

 आरोप क्या था?

महाभियोग की प्रक्रिया कब शुरू की गई जब एक अनजान आदमी विसलब्लोअर ने सितंबर में संसद से शिकायत की थी कि जुलाई में राष्ट्रपति ट्रंप ने यूक्रेन के राष्ट्रपति को फोन किया था

ट्रम पर आरोप है कि उस फोन काल में उन्होंने यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर  से कहा था कि अगर वह अमेरिका से सैन्य मदद चाहते हैं तो यूक्रेन को कुछ जांच शुरू करनी होगी जिससे ट्रम्प  को राजनीतिक लाभ होगा

फोन पर हुई इस बातचीत में राष्ट्रपति ट्रंप ने यूक्रेन के राष्ट्रपति से कथित तौर पर जो वाईडेन ( अगले साल होने वाले राष्ट्रपति चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी के संभावित उम्मीदवार) और उनकी बेटी हंटर वाइडेन  के  खिलाफ जांच करने के लिए कहा था

 शपथ की नैतिकता

राष्ट्रपति ट्रंप ने 2020 में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव में यूक्रेन के हस्तक्षेप करने के लिए दबाव डालकर राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ समझौता किया है और अमेरिका के लोगों के प्रति ली गई शपथ को भी तोड़ा है



 मातृत्व लाभ के लिए लंबा इंतजार


 संदर्भ सारांश:

पीएम मोदी द्वारा 3 वर्ष पूर्व घोषित पीएम मातृ वंदना योजना की ने गर्भवती माताओं को जीवनदान दिया है

गुजरात के जनजाति जिले दाहोद में जागृति चंद्र का सर्वे
 सर विकार निष्कर्ष

हक प्राप्त करने के लिए माताओं का संघर्ष क्यों की योजना कागजी कार्यवाही की नौकरशाही चक्रव्यूह में उलझ जाती है

 प्रमुख तथ्य: पीएम मातृ वंदना योजना

* 2017 से लागू
* उद्देश्य:

काम करने वाली महिलाओं की मजदूरी के नुकसान की भरपाई करने के लिए मौजा देना और उनकी उचित आराम और पोषण  को सुनिश्चित करना

गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं के स्वास्थ्य में सुधार और नकदी प्रोत्साहन के माध्यम से अधीन पोषण के प्रभाव को कम करना


 योजना की मुख्य बातें:

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी द्वारा पीएम मातृ वंदना योजना को जनवरी 2017 में शुरू किया गया था इसके तहत गर्भवती ओं को पौष्टिक आहार के लिए सीधे उनके खाते में रुपए सहायता राशि भेजी जाएगी

इस योजना पर सीधे प्रधानमंत्री व राज्यों के मुख्यमंत्री निगरानी रखेंगे

प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन दोनों परिजनों से पहली बार गर्भवती होने वाली ग्रामीण महिला के खाते में कुल ₹6400 व शहरी गर्भवती के खाते में कुल ₹6000 पहुंचेंगे

इस प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के द्वारा पात्र गर्भवती महिलाओं को पहली किस्त में ₹1000 गर्व के 150 दिनों के अंदर दूसरी किस्त में ₹2000 180 दिनों के अंदर व तीसरी किस्त में 2000 प्रसव के  बाद शिशु के प्रथम टीकाकरण चक्र पूरा होने पर मिलेंगे

इस पर योजनाओं का लाभ लेने के लिए अपनी नजदीक स्वास्थ्य केंद्र पर गर्भवती ओपो अपना आधार व खाता नंबर देना होगा

Source - the hindu


शनिवार, 8 फ़रवरी 2020

The hindu analysis

अनौपचारिक की पुकार 

 संदर्भ/ सारांश: 

भारत की छोटी उद्यमियों ग्रामीण इलाकों और शहरी इलाकों में रहने वाले लोगों की आवाज को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए.

How to Use

Gs paper -3 (economics )

Unit -

 उदारीकरण का अर्थव्यवस्था पर प्रभाव, औद्योगिक नीति में परिवर्तन तथा औद्योगिक विकास पर इनका प्रभाव

Previous year question 

– भारतीय अर्थव्यवस्था में वैश्वीकरण के परिणाम स्वरूप औपचारिक क्षेत्र में रोजगार कैसे कम हुए? क्या बढ़ती औपचारिकता देश के विकास के लिए हानिकारक है? (2016)

Gs-1 (unit  7) 

गरीबी और विकासात्मक विषय

Gs-2) 

सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्र में विकास के लिए हस्तक्षेप और उनकी अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय.

(Unit 11)

 विकास प्रक्रिया

Gs -3 ( unit 1)

भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास तथा रोजगार से संबंधित विषय

Unit 2) 

 समावेशी विकास तथा इससे उत्पन्न विषय

Unit 3)

उदारीकरण का अर्थव्यवस्था पर प्रभाव,  औद्योगिक नीति में परिवर्तन तथा औद्योगिक विकास पर इनका प्रभाव

 प्रमुख तथ्य

 शोध पत्र-1

Paper published by the national bureau of economic research, economic seema  jayachandran that there is no strong evidence from studies conducted in meny developing countries that formalisation improves business outcome.

 कोई मजबूत समूह नहीं की है कि औपचारिकता व्यवसाय की परिणामों में सुधार करती है.

 शोध पत्र -2

A background paper for the international labour organization (ilo), economist  santosh calls formalisation an evolutionary process during which small, informal enterprise learn the capabilities required to operatein a more formal global economy.
They can’t be fourced to formalise.

औपचारिकता एक विकास प्रक्रिया-  छोटी अनौपचारिक उद्यम अधिक औपचारिक वैश्विक अर्थव्यवस्था में काम करने के लिए आवश्यक क्षमताओं को सीखते हैं.

- औपचारिक करण के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता

 संगठित और असंगठित क्षेत्र मैं अंतर

 संगठित क्षेत्र-

इसमें सरकार द्वारा पूर्ण निगरानी की जाती है

इसमें शामिल गतिविधियों को सकल घरेलू उत्पाद( जीडीपी) में शामिल किया जाता है.

औपचारिक क्षेत्र विशिष्ट कार्य घंटों और नियमित मजदूरी वाली सभी नौकरियों का प्रतिनिधित्व करते हैं जिसमें कार्यकर्ताओं की रोजगार की सुरक्षा होती है.

श्रमिकों को सरकार,  राज्य या निजी क्षेत्र के उद्यमों द्वारा नियोजित किया जाता है.

यह एक लाइसेंस प्राप्त संगठन है और करों का भुगतान करने के लिए उत्तरदाई है इसमें बड़े पैमाने पर परिचालन जैसे बैंक और अन्य निगम शामिल है.

 असंगठित क्षेत्र-

इस क्षेत्र में सरकार का कोई विशेष हस्तक्षेप नहीं होता है. इसमें छोटी-छोटी और बिखरी इकाइयां आती है जो अधिकांश सरकारी नियंत्रण से बाहर होती है.

असंगठित क्षेत्र में ना किसी प्रकार का कर लगाया जाता है और ना ही इनकी गतिविधियों का जीडीपी और सकल राष्ट्रीय उत्पाद( जीएनपी) में शामिल किया जाता है.
यहां कर्मचारी या श्रमिक किसी नियमित काम की घंटे और मजदूरी के आधार पर कार्य नहीं करते हैं.

यह मुख्य रूप से छोटे पैमाने पर रोजगार और आय उत्पन्न करने की प्राथमिक उद्देश्य के साथ वस्तुओं और सेवाओं के प्राथमिक उत्पादन से संबंधित है.

 फेरी वाला इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है जो अपने जीवन निर्वाह के लिए अपने कृषि उत्पादों का विक्रय करता है.

यह एक लाइसेंस प्राप्त संगठन नहीं है और न ही इनके द्वारा करो का भुगतान किया जाता है.

औपचारिकता जाल The formalisation trap:

The key question here is : 

who benefits from formalisation of informal firms?

बैंकों की अंतिम मील लागत कम

राज्य को करें एवं निगरानी सहूलियत

 औपचारिकता के लिए नीति क्यों?

बेरोजगारी एवं मंदी का समाधान

औपचारिक क्षेत्र में शामिल होने के लिए अपर्याप्त कौशल और संपत्ति वालों का सहारा

वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में मजबूत भागीदारी

 औपचारिकता में वृद्धि क्यों? औपचारिक क्षेत्र में प्रयुक्त प्रौद्योगिकी में प्रकृति नए व्यवसाय मॉडल का उद्भव गीग  अर्थव्यवस्था का विकास.

 औपचारिकता में वृद्धि क्यों?

अनौपचारिक क्षेत्र में प्रयुक्त प्रौद्योगिकियों में प्रगति
नए व्यवसाय मॉडल का उद्भव
गिग  अर्थव्यवस्था का विकास

नीतियों को फिर से बनाना

 भारत में नौकरियां आय और विकास की चुनौतियों को देखते हुए नीतियों की पुनः रचना की आवश्यकता है.

काम पर उनकी सुरक्षा
उनकी गरिमा
नियोक्ताओं द्वारा उनका उचित उपचार

एक डेटा फायरवॉल के लिए

 संदर्भ

जर्मन साइबर सिक्योरिटी फॉर्म की रिपोर्ट= लाखों भारतीय मरीजों के मेडिकल विवरण का लीक होना और इंटरनेट पर स्वतंत्र रूप से उपलब्ध होना( सीटी स्कैन, एम आर आई, रोगियों की तस्वीर)

 सारांश: 

चिकित्सा जानकारी का रिसाव डेटा सुरक्षा कानून की तत्काल आवश्यकता के लिए बोलता है.

 प्रमुख तथ्य-

 इस डेटा की उपलब्धता का कारण चिकित्सा पेशेवरों  द्वारा उपयोग किए जाने वाले
पिक्चर आर्काइविंग एंड कम्युनिकेशन सिस्टम PACS सरवर में किसी भी सुरक्षा की अनुपस्थिति है

और जो बिना सुरक्षा के सार्वजनिक इंटरनेट से जुड़े हुए प्रतीत होते हैं

 क्या नुकसान-

सोशल इंजीनियरिंग फिशिंग और ऑनलाइन पहचान की चोरी
दुरुपयोग= डार्क नेट
P2P

 भारत में डाटा सुरक्षा कानून की स्थिति

यूरोपीय संघ और अमेरिका में डाटा सुरक्षा नियमों के विपरीत व्यापक कानूनी ढांचे का अभाव

ड्राफ्ट पर्सनल डाटा प्रोटक्शन बिल 2019


 बिल न्यायमूर्ति बीएन श्रीकृष्ण समिति की अनुशंसा पर आधारित:

बिल के मुताबिक कोई भी निजी या सरकारी संस्था किसी व्यक्ति के डाटा का उसकी अनुमति के बिना इस्तेमाल नहीं कर सकती.

मेडिकल इमरजेंसी और राज्य या केंद्र की लाभकारी योजनाओं के लिए ऐसा किया जा सकता है.

किसी भी व्यक्ति को उसकी डाटा के संबंध में अहम अधिकार होंगे.

संबंधित व्यक्ति अपने डेटा में करेक्शन या फिर संस्था के पास मौजूद डाटा तक एक्सेस मांग सकता है.

किसी भी संस्था को संबंधित व्यक्ति को डाटा के यूज के बारे में बताना होगा.

हालांकि विधेयक में में राष्ट्रीय हित से जुड़े मसलों पर डाटा की यूज़ की अनुमति होगी.

जैसे- राष्ट्रीय सुरक्षा, कानूनी कारवाही और पत्रकारिता के उद्देश्यों से इनका इस्तेमाल किया जा सकेगा.

डाटा जुटाने वाली संस्थाओं की निगरानी के लिए डाटा प्रोटेक्शन अथॉरिटी स्थापित करने का भी प्रावधान है

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस श्रीकृष्ण के नेतृत्व वाली कमेटी ने डाटा प्रोटेक्शन को  लेकर एक रिपोर्ट पेश की थी जिसके आधार पर यह बिल तैयार किया गया है.

यूरोपियन यूनियन के जनरल डाटा प्रोटेक्शन रेगुलेटर की तर्ज पर इस बिल का ड्राफ्ट तैयार किया गया है.

 संवेदनशील व्यक्तिगत डेटा को थर्ड पार्टी को बेचना या स्थानांतरित करने “अपराध” वाले प्रावधान को ड्राफ्ट पर्सनल ड्राफ्ट प्रोटक्शन बिल 2019 से हटा दिया गया है

आरबीआई की मौद्रिक नीति समीक्षा 6 फरवरी 2020

 संदर्भ

आरबीआई की मौद्रिक नीति समीक्षा 6 फरवरी 2020

 सारांश: 

विकास को बढ़ावा देने की आरबीआई के प्रयासों से अर्थव्यवस्था में धारणा बदल सकती है

 प्रमुख तथ्य:

ब्याज दरों को घटाने के लिए अब बैंक सिर्फ रेपो रेट घटाने बढ़ाने की भरोसे नहीं रहेगा
ऑटो लोन,  होम लोन और छोटी और मझोली औद्योगिक इकाइयों को ज्यादा कर्ज देने वाले बैंकों के लिए ‘नकद आरक्षित अनुपात (सीआरआर)’ के नियमों में रियायत दी जाएगी.
यह रियायत तभी से लेकर 31 जुलाई तक मिलेगी

आरबीआई ने बैंकों को एक लाख करोड़ रुपए की राशि बहुत ही कम दर पर (रेपो रेट) पर 1 से 3 वर्ष तक के लिए उपलब्ध कराने की घोषणा की है.

* रेपो रेट अभी 5.15 फीसदी  है अगर इसमें बैंकों की 2.5 फीसदी  संचालन लागत जोड़ दें

तो भी ग्राहकों को 8 फीसदी  से नीचे की दर पर कर्ज उपलब्ध कराया जा सकता है.

बैंक जिस सुविधा के तहत अपनी अतिरिक्त पूंजी कुछ दिनों के लिए आरबीआई के पास जमा करा देते थे उसे खत्म कर दिया गया है

* बैंकों को अतिरिक्त बची हुई राशि का कर्ज बांटने में इस्तेमाल करना होगा या फिर सरकारी बॉन्ड्स में निवेश करना होगा.

 क्या विकास को प्रोत्साहन प्रदान करने के लिए बजट पर्याप्त है? 

 संदर्भ /सारांश

बाधाओं के बावजूद खर्च में कटौती नहीं करने से बजट सुनिश्चित करता है कि गति पीछे ना हटे

 प्रमुख प्रश्न उत्तर: 

Q. आर्थिक सर्वेक्षण ने केंद्रीय विषय के रूप में धन सृजन पर जोर दिया है| क्या बजट इसे संबोधित करता है?  यदि ऐसा है तो किस हद तक? 

 अनंत नारायण= अच्छे संकेत

 तीन विषय

आकांक्षा तक भारत
आर्थिक विकास
देखभाल करने वाला समाज

 बजट में खर्च करने में कटौती नहीं की:

जीडीपी में वृद्धि
कृषि, सिंचाई, स्टार्टअप्स 8

 निराशाजनक संकेत : संरचनात्मक स्तर पर

बैंक एवं एनबीएफसी इकोसिस्टम
विद्युत,  टेलीकॉम, एयरलाइन, शिपिंग, रियल स्टेट 

निर्माण में संरचनात्मक मुद्दे


एफडीआई वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला= चीन को रिप्लेस करना

 निष्कर्ष

पर्याप्त धन सृजन के संकेत नहीं दिखता
सुधार केवल बजट में ही नहीं होनी चाहिए वे अलग से भी हो सकता है.

Q. क्या बजट सरकार की डॉलर 5 ट्रिलियन लक्ष्य तक पहुंचने के लिए अर्थव्यवस्था को ट्रैक पर रखने में मदद करता है? 

Ans-cross चिन्ह
पर नाटकीय सुधार भी हो सकते हैं क्योंकि हमारी क्षमता अधिक है
* बैंक + एनबीएफसी रिफॉर्म

Source -The hindu


बुधवार, 29 जनवरी 2020


जानिये coronavirus ke बारे में, जो china के बाद india भी आ सकता है |Wuhanvirus |symptoms |cure
Coronavirus


 बिहार के छपरा की एक लड़की चीन से होकर लौटी उसमें  जुकाम के कुछ लक्षण दिखाई दिए. और उसे फौरन पटना स्थित पटना मेडिकल कॉलेज ले जाया गया. जयपुर के एक लड़के के साथ भी ऐसा ही हुआ.

ऐसे केश को लगातार निगरानी में रखा जा रहा है. और इनकी ब्लड सैंपल पुणे  स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट आफ वायरोलॉजी भेजे गये है.

 इतनी सावधानी का  वजह है पिछले 2 महीने से खबरों में बना चीन का  कोरोना वायरस. जो अब चीन का न  होकर पूरे दुनिया का हो चुका है.

 दोस्तों इस ब्लॉक में  मेरा मकसद है आपके दिमाग में कोरोना वायरस का ठीक-ठाक तस्वीर प्रस्तुत करना.

 वुहान वायरस

 * चीन के वुहान शहर से निकलने के कारण इसे वुहान वायरस भी कहा जा रहा है. 

* लेकिन साइंस के सर्कल में इसकी पहचान 2019 एन काफ से है 

2019 एन कार्फ़ का फुल फार्म - 

2019 नोबेल कोरोना वाइरस 
* इसे समझने के लिए हमें सबसे पहले 2019 नोबेल कोरोना वायरस को तोड़कर समझना होगा.

 वायरस- 

* हमारे आस पास बहुत से कीटाणु टहल रहे हैं. और इनमें से सबसे खुराफाती कीटाणु है वायरस.

* हमारा शरीर बहुत सारी कोशिकाओं से मिलकर बना है. यह सिर्फ अपना खाना खुद बनाते हैं.

* वायरस अपना खाना खुद नहीं बनाते उन्हें जैसे ही किसी सेल का चूल्हा जलता दिखता है वह अटैक कर देते हैं.

* अटैक करने के बाद वायरस सेल से एनर्जी खींचते हैं. और यह अपने जैसे दूसरे वायरस बनाने लगते हैं.

* और इस तरह फैलने लगते हैं. इनके फैलने का रफ्तार बहुत तेज होती है इतनी तेज कि अपने आप में एक पैमाना है.

* अगर कोई चीज तेजी से फैलती है तो हम कहते हैं कि वायरल हो गई यह उसी वायरस से आया है

 कोरोना वायरस

Coronavirus

* कोरोना वायरस कोई एक वायरस का नाम नहीं है. यह वायरस के ग्रुप का नाम है. 

* और इस ग्रुप की खासियत यह है कि इसके वायरस की बनावट अलग है. ताज जैसी बनावट 

*  करोना अंग्रेजी के क्राउन से आया है क्राउन मतलब ताज होता है. 

* इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप से देखने पर यह कोरोनावायरस रेसेनुमा आकृतियों से घिरे दिखते हैं. जैसे किसी ने ताज पहना हो.

* इसलिए वायरस के इस फैमिली का नाम पडा  कोरोना वायरस

" सूरत से प्लाज्मा निकलने के कारण सूर्य के बाहरी इलाके को भी कोरोना कहते हैं"

* कोरोना वायरस बहुत बड़ी फैमिली है इसकी ज्यादा केश जानवरों में ही देखे गए हैं. जैसे कि बिल्ली, चमगादड़, ऊंट

* इंसानों तक कोरोनावायरस की बहुत कम पहुंच है ज्यादातर केस में इंसानों तक पहुंचते भी हैं तो थोड़ा जुकाम देकर निकल जाते हैं. 

 "अब तक इंसानों तक 7 कोरोनावायरस पहुंच पाए हैं. आज मुख्य 2 कोरोना वायरस का ही बात करेंगे. "
1) सार्स            ( 2) मर्स 


2019 एन काफ क्या है? 


*   यही वो वायरस है जो हड़कंप मचा रहा है.

* इसका पहला केस दिसंबर 2019 में सामने आया था इसलिए इसकी पहचान के लिए शुरू में 2019 जोड़ा गया है

* 2019 एन काफ कोरोना वायरस फैमिली का सबसे नया सदस्य है इसलिए इसके साथ नावेल सब जोड़ा गया है.

लक्षण 

* यह वायरस सांस नली से होकर अंदर जाते हैं. जिसके कारण सांस नली बहुत तकलीफ में होती है. 

* शरीर के अंदर लड़ी जाने वाली इन लड़ाई को ही हम लक्षण की तरह देखते हैं. 

* इसके लक्षण किसी आम जुकाम के वायरस जैसे ही हैं

* जुकाम वायरस के घुसने के कारण ही  होता है

* ज्यादा तर वाइरस जुकाम देकर निकल जाते हैं हमारा शरीर उन्हें निकाल फेकता है. 

* लेकिन कुछ वायरस गर्म खोपडी के होते हैं उन्हीं में सार्स और मर्स भी आते है. और अब 2019 एन कार्फ़ भी. 

 कोरोना वायरस के शुरुआती लक्षण

Coronavirus

* शुरुआती लक्षण किसी आम वायरस की जैसी ही है. जैसे बुखार  सूखी खांसी,  मांसपेशियों में दर्द,  सांस लेने में तकलीफ इत्यादि

* जैसे-जैसे यह वायरस अंदर फैलती हैं शरीर को न्यूमोनिया जकड़ लेती है


 न्यूमोनिया क्या है? 


* निमोनिया मतलब हमारी  दोनों फेफड़ों तक इनफेक्शंन पहुंच जाता है. इस केस को फेफड़े के एक्स-रे से पहचाना जाता है. 

* अब तक कोरोना वायरस से ग्रसित जिन 41 मरीजों की स्टडी  की गई है उन सभी को न्यूमोनिया थी. 

 नया कोरोना वायरस कहां से आया? 


* कोरोना वायरस जानवरों के बीच रहने के लिए जाने जाते हैं

* बहुत चांस है कि यह जानवरों से ही इंसानों तक आए हैं. इस वाइरस के शुरुआती शिकार वही लोग थे जो वूहान के सीफूड और एनिमल मार्केट होकर आए थे. 

* इसलिए शुरुआत में ऐसा समझा गया कि कोरोनावायरस यहीं से आया है

* इससे पहले कि दो कोरोनावायरस सार्स और मर्स  चमगादड़ से निकलते थे. 

* इसलिए चमगादड़ को भी इस कोरोना वायरस का सोर्स कहा गया. 

* लेकिन बाद में रिसरचस  ने  2019 एन कार्फ़  के जेनेटिक सीक्वेंस की पढ़ाई की, 

* और इसकी तुलना जानवरों में पाई जाने वाली 200 से ज्यादा कोरोना  वायरसों के जेनेटिक्स सीक्वेंस से की गई. 

* और इस स्टडी के नतीजे जनरल ऑफ वायरोलॉजी में छापे गए

* इस स्टडी से यह पता चलता है कि 2019 एन कार्फ़  सांपों से  निकला है. हालांकि कुछ एक्सपोर्ट्स ने इस स्टडी पर भी सवाल उठाए हैं

* पहले ऐसा समझा जाता था कि यह वायरस सिर्फ जानवरों से ही इंसानों तक पहुंच रहे हैं. 

* बाद में इसके इंसान से इंसान तक फैलने के किस भी सामने आए. 


सार्स और मर्स क्या है? 
 

*  सार्स  का पहला केस 2002 में सामने आया था. चीन के ग्वांगडोंन प्रोविन्स से 8000 से ज्यादा लोगों में फैला. इसमें से  750 से अधिक लोगों की जान गई. 

* ऐसा बोला जाता है कि चमगादड़ से बिल्ली तक पहुंचा फिर वहां से इंसानों में

* मर्स  का पहला केस 2012 में सामने आया सऊदी अरब में 2000 से अधिक लोगों में फैली और 667 लोगों की जान गई

* स्टडी करने का पता लगाया गया कि यह वायरस भी चमगादड़ से फैल रहा था

 वायरस से कैसे बचें? 

* बैक्टीरिया को मारने के लिए एंटीबायोटिक्स का इस्तेमाल होता है और वायरस को मारने के लिए एंटीवायरल का

* अब तक हम 2019 एन कार्फ़  को मानने वाला एंटीवायरल नहीं बना पाए हैं इसलिए इससे बचने का इकलौता तरीका है कि से दूर रहें

WHO के गाइड LIलाइन 

* साबुन और पानी से हाथ धोते रहें. 

* खासकते  और छींकते वक्त अपना मुंह और नाक ढक कर रखें. 

* जुकाम जैसे लक्षण दिखते व्यक्ति से दूरी बनाकर रखें

* अपने पास लक्षण पाए जाने पर चेकअप करवाएं. 

* मांस और अंडे को खूब पका कर खाएं

Source - the lalantop 


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मंगलवार, 21 जनवरी 2020


भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्षों का सफर और जेपी नड्डा जी के अध्यक्ष बनने का सफर

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भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष के रूप में जेपी नड्डा यानी जगत प्रताप नड्डा मिल चुके हैं.



 लोकतांत्रिक पार्टी के रूप में भारतीय जनता पार्टी - 

 सभी पार्टियों में भारतीय जनता पार्टी एक ऐसी पार्टी है जो लोकतांत्रिक पार्टी है

 भारत देश मे बीजेपी ही ऐसी पार्टी है जिसके अध्यक्ष का चुनाव किया जाता है  इसमें मनोनीत नहीं किया जाता.


 जेपी नड्डा निर्विरोध जीत हासिल किए


 इस प्रकार 2020 में भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष का चुनाव हुआ जिसमें जेपी नड्डा ने निर्विरोध जीत हासिल की. 

बता दे कि एक स्तरीय पार्टियों में बीजेपी दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी है. 

जिसका अध्यक्ष बनना जेपी नड्डा के लिए गौरव की बात तो है ही साथ ही साथ बहुत चुनौतीपूर्ण भी है. 


 बीजेपी की स्थापना के 40 वर्ष 


भारतीय जनता पार्टी 2020 में अपनी स्थापना के 40 वर्ष पूरा करने जा रही है. 

बीजेपी की स्थापना से लेकर आज इतनी दूर तक लाने में सभी बीजेपी अध्यक्ष की बहुत बड़ी भूमिका है.

 तो चलिए आज हम जानेंगे बीजेपी की स्थापना यानी 1980 से लेकर वर्तमान समय तक के अध्यक्षों के बारे में तथा जेपी नड्डा के जीवन के बारे में कैसे वो बीजेपी के अध्यक्ष बने?

 जेपी नड्डा


 जेपी नड्डा 20 जनवरी 2020 को अध्यक्ष पद के लिए नामांकन करने गए.

 किंतु अकेले नामांकन पत्र भरने और कोई व्यक्ति बीजेपी अध्यक्ष पद के लिए नामांकन पत्र नहीं भरा था. 

यही कारण है कि जेपी नड्डा जी निर्विरोध बीजेपी अध्यक्ष निर्वाचित हुए|
  बता दे की जेपी नड्डा को जून 2019 में बीजेपी का कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया गया था.

 उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव के समय उत्तर प्रदेश का कार्यभार जेपी नड्डा को ही सौंपा गया था जिसमें उन्होंने भारी मतों से bjp  को जीत दिलाई थी|

पदस्थ
कार्यालय ग्रहण 
20 जनवरी 2020
पूर्वा धिकारीअमित शाह

पदस्थ
कार्यालय ग्रहण 
2012
चुनाव-क्षेत्रहिमाचल प्रदेश

पद बहाल
17 जून 2019 – 20 जनवरी 2020
पूर्वा धिकारीपद स्थापित

पद बहाल
9 नवम्बर 2014 – 24 मई 2019
प्रधानमंत्रीनरेन्द्र मोदी
पूर्वा धिकारीडॉ. हर्षवर्धन

जन्म2 दिसम्बर 1960 (आयु 59)
पटना, बिहार
राष्ट्रीयताभारतीय
राजनीतिक दलभारतीय जनता पार्टी
जीवन संगीडॉ. मल्लिका नड्डा
बच्चे2
धर्महिन्दू

जेपी नड्डा का जीवन परिचय


 जेपी नड्डा जी का  जन्म पटना में 1960 मे  हुआ था. B.a और एलएलबी की डिग्री इन्होंने पटना से ही प्राप्त की थी. शुरू से ही वे एबीवीपी से जुड़े हुए थे. 


राजनितिक जीवन 


वे पहली बार 1993 में हिमाचल प्रदेश से विधायक चुने गये थे. उसके बाद वे राज्य और केंद्र में मंत्री भी रहे हैं.

वे 1994 से 1998 तक विधानसभा में पार्टी के नेता भी रहे.
इसके बाद वे दुबारा 1998 में फिर विधायक चुने गये. इस बार उन्हें स्वास्थ्य और संसदीय मामलों का मंत्री बनाया गया.
2007 में उन्हें फिर से चुनाव जीतने का अवसर मिला और प्रेम कुमार धूमल की सरकार में उन्हें वन-पर्यावरण, विज्ञान व टेक्नालॉजी विभाग का मंत्री बनाया गया.

2012 में जेपी नड्डा को राज्यसभा का सांसद चुना गया. उन्हें मोदी सरकार में स्वास्थ्य मंत्रालय दी गई

20 जनवरी 2020 को उन्हें भारतीय जनता पार्टी का अध्यक्ष नियुक्त किया गया।

पार्टी अध्यक्षों की सूची

भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष दल के प्रमुख होते हैं.

 पहलेअध्यक्ष पद पर नियुक्ति दो सालों के लिए हुआ करती थी और लगातार दो सत्रों तक हो सकती थी।

 इस नियम को बदल दिया गया है अब 3 साल तक और  लगातार दो सत्रों तक एक व्यक्ति अध्यक्ष पद पर रह सकता है

पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह के नेतृत्व में २०१४ में देश में प्रचंड विजय हासिल की और सरकार बनाने में सफल हुई।

 और दोबारा २०१९ में अमित शाह के नेतृत्व में सफलता पाई।

██  ये व्यक्ति एक से अधिक समय तक अध्यक्ष रह चुके है

क्रअध्यक्षचित्रजीवनकालअध्यक्षपद का काल
अटल बिहारी वाजपेयीAb vajpayee.jpg१९२४-२०१८१९८०-८६
लालकृष्ण आडवाणीLkadvani.jpg१९२७-१९८६-९१
मुरली मनोहर जोशीMurli Manohar Joshi MP.jpg१९३४-१९९१-९३
(२)लालकृष्ण आडवाणीLkadvani.jpg१९२७-१९९३-९८
कुशाभाऊ ठाकरे१९२२-२००३१९९८-२०००
बंगारू लक्ष्मण१९३९-२००४२०००-०१
जन कृष्णमूर्तिJana Krishnamurthi.JPG१९२८-२००७२००१-०२
वेंकैया नायडूVenkaiah Naidu official portrait.jpg१९४९-२००२-०४
(२)लालकृष्ण आडवाणीLkadvani.jpg१९२७-२००४-०६
राजनाथ सिंहRajnath.jpg१९५१-२००६-०९
नितिन गडकरीNitin Gadkari 1 (cropped).JPG१९५७-२००९-१३
(८)राजनाथ सिंहRajnath.jpg१९५१-२०१३-१४
१०अमित शाहAmit shah official portrait.jpg१९६४-२०१४-पदस्थ

Source -wikipedia 


सोमवार, 16 दिसंबर 2019

हालिया बलात्कारों पर विदेशी मीडिया ने क्या कहा? 



 बलात्कार एक ऐसा शब्द है. जिसे सुनकर दिल दहल उठता है,
ऐसी अमानवीय व्यवहार ओ भी किसी स्त्री के साथ जिस देश में स्त्रियों को माता का दर्जा दिया जाता है,

जरा सोचिए उस देश के मां बहनों का इतनी बर्बरता से शारीरिक एवं मानसिक तौर पर बलात्कार किया जाता है

कितनी दर्द होती होगी क्या बीता होगा उन पर. कितनी बर्बरता से उनकी जान ली जाती है.

 आज भारत देश जिसे भारत माता कह के पुकारा जाता है और यहा  मां बहनों का ही बलात्कार होता है

 बलात्कार क्षेत्र में  क्या हालत हो गई है भारत की चलिए जानते हैं हालिया बलात्कारों पर विदेशी मीडिया की कें  विचार -


क्या एक बर्बर हत्या भारत को उसके 'रेप कल्चर' का सामना करने पर मजबूर करेगी?
Can a Brutal Murder Shake India into Facing Its Rape Culture?


ये अमरीका की एक समाचार वेबसाइट 'फ़ेयर ऑब्ज़र्वर' पर छपे ओपीनियन लेख का शीषर्क है.

संदर्भ है:   हैदराबाद और उन्नाव में लड़कियों से गैंगरेप के बाद की गई उनकी क्रूर हत्या.

भारत की हलचल पर दुनिया भर की मीडिया की नज़र रहती है.
ज़ाहिर है, हैदराबाद और उन्नाव पर भी वैश्विक मीडिया लगातार नज़र बनाए हुए है

और इसे प्रमुखता से कवर कर रही है.

फ़ेयर ऑब्ज़र्वर ने भारत में 'रेप कल्चर' की समस्या को समझने की ज़रूरत पर ज़ोर देते हुए तकरीबन 1,500 शब्दों का विस्तृत लेख प्रकाशित किया  है

लेख में वर्ष 2012 के निर्भया गैंगरेप के बाद से अब तक क्या बदला है,  पर विस्तार से चर्चा की गई है.

साथ ही बलात्कार को रोकने के लिए क्या उपाय किए जाएं, इस बारे में भी विचार-विमर्श किया गया है.

'बलात्कार पर भारतीयों की दोहरी मानसिकता'



लेख में कहा गया है कि भारत में बलात्कार, यौन हिंसा और यौन उत्पीड़न के मामलों में अक्सर दोहरा रवैया अपनाया जाता है.

लेखिका ने इसका उदाहरण देते हुए बताया है कि कैसे #MeToo मुहिम के दौरान कुछ बड़ी हस्तियों का नाम सामने आने के बाद भी उनकी रोज़मर्रा की ज़िंदगी और फ़ैन फ़ॉलोइंग पर कोई असर नहीं पड़ा.

लेखिका का मानना है कि यौन उत्पीड़न के आरोपों में घिरे लोगों को अपना 'आइकन' मानना और साथ ही कुछ अभियुक्तों के लिए मौत की सज़ा या उसे लिंच किए जाने की वकालत करना भारतीय समाज की दोहरी मानसिकता का परिचायक है.

External link - औरतों को # me too नामक  युद्धघोस से क्या हासिल हुआ

 - औरते यौन शोषण पर इतना बोलने क्यों लगी है ?

 - हैदराबाद एनकाउंटर से सबसे बड़ा नुकसान महिलाओं का

भारत में बलात्कार गंभीर मुद्दा


ब्रिटेन के प्रमुख अख़बार 'द गार्डियन' ने भी इस विषय में एक ओपीनियन लेख छापा है.

इसका शीर्षक है: Another week of violence that brings shame on all India (हिंसा से भरा एक और सप्ताह, जिसने पूरे भारत को शर्मसार किया).

लेख में हैदराबाद के कथित एनकाउंटर को अनुचित ठहराया गया है और कहा गया है कि पुलिस को बलात्कारियों की हत्या की इजाज़त देकर इंसाफ़ नहीं दिलाया जा सकता.

लेखक का मानना है कि भारत में बलात्कार एक गंभीर मुद्दा बन चुका है लेकिन भारत की न्यायिक प्रक्रिया बेहद धीमी है.

लेखक फिर यह तर्क देकर कथित एनकाउंटर और बलात्कार अभियुक्तों को लिंच करने की मांग का विरोध करते हैं

कि अगर धीमी न्यायिक कार्यवाही एक बड़ी समस्या है तो आम जनता की बर्बरता भी एक बड़ी समस्या है.


 ब्रितानी अखबार डेली मेल ने लिखा है


ब्रितानी अख़बार 'डेली मेल' से सम्बद्ध वेबसाइट 'मेल ऑनलाइन' पर उन्नाव रेप पीड़िता की मौत और हैदराबाद में

बलात्कार अभियुक्तों के कथित एनकाउंटर की ख़बर को एक विस्तृत फ़ोटो स्टोरी के ज़रिए कवर किया गया है.

इसमें पीड़िता की मौत के बाद भड़के प्रदर्शनकारियों की पुलिसकर्मियों के साथ हुई झड़प, प्रदर्शनकारियों को वॉटर कैनन से तितर-बितर करते पुलिसबल और पीड़िता का शव ले जाते वाहन को घेरे लोगों की तस्वीरें हैं.

फ़ोटो स्टोरी में हैदराबाद में कथित एनकाउंटर की जगह पर खड़े पुलिसकर्मियों और पुलिस पर फूल बरसाकर उनका स्वागत करते लोगों की तस्वीरें भी हैं.


'भारत के सबसे भयावह रेप'


इसके साथ ही 'मेल ऑनलाइन' पर एक लिस्टिकल है जिसमें भारत में हुए सबसे भयावह मामलों की सूची बनाई गई है.

 इस सूची में अरुणा शाहबाग, भंवरी देवी और प्रियदर्शिनी मट्टू से लेकर 2012 के निर्भया गैंगरेप तक का ज़िक्र है.

वेबसाइट ने इस सूची को The most dangerous place in the world to be female: India's history of violence against women शीर्षक के साथ छापा है,

जिसका मतलब है: दुनिया में महिला होने के लिए सबसे ख़तरनाक जगह:

'बलात्कार के बाद बलात्कार'



संयुक्त अरब अमीरात से छपने वाले अख़बार 'गल्फ़ न्यूज़' ने भारत में होने वाली बलात्कार की घटनाओं पर एक विचारोत्तेजक ओपीनियन लेख प्रकाशित किया है.

इस लेख का शीर्षक है: Rape after rape after rape, but nothing ever changes in India (बलात्कार के बाद बलात्कार लेकिन भारत में कभी कुछ नहीं बदलता)

लेख में तंज़ करते हुए कहा गया है कि भारत की शिथिल अदालतें यह तय करती हैं कि इंसाफ़ देरी से मिले और देरी से इंसाफ़ मिलने का मतलब नाइंसाफ़ी होता है.


लेख में जो भी बातें कही गई हैं उनका निचोड़ कुछ यूं निकाला गया है:

भारत औरतों का देश नहीं है.

बलात्कार महिलाओं पर आधिपत्य जमाने के लिए एक बर्बर हथियार के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है.

लेखिका ने बलात्कार अभियुक्तों की पुलिस द्वारा हत्या पर कुछ भारतीय सांसदों के सदन के अंदर खुले तौर पर ख़ुशी जताने को चिंताजनक बताया है.

लेख में कठुआ बलात्कार और हत्या मामले का हवाला देते हुए हत्या और यौन हिंसा के अभियुक्त सांसदों की संख्या पर भी नाराज़गी जताई गई है.

लेखिका ने कहा है कि मोदी सरकार की महत्वाकांक्षी योजना 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' अब उन्हें एक धमकी जैसा प्रतीत होता है.

निर्भया गैंगरेप की याद


प्रमुख अमरीकी अख़बार 'द न्यूयॉर्क टाइम्स' ने अपनी एक विस्तृत रिपोर्ट में हैदराबाद में महिला डॉक्टर के गैंगरेप और हत्या को 'हालिया महीनों में भारत का सबसे चिंताजनक बलात्कार' कहा है.

अख़ाबर ने लिखा है

कि हैदराबाद बलात्कार के संदिग्ध अभियुक्तों का कथित एनकाउंटर करने वाले पुलिसबलों को कुछ लोग 'हीरो' मान रहे हैं

और कुछ लोग इस क़दम की आलोचना कर रहे हैं.

न्यूयॉर्क टाइम्स ने लिखा है इससे पहले साल 2012 में दिल्ली गैंगरेप के भयावह अपराध ने अंतरराष्ट्रीय मीडिया का ध्यान कुछ इसी तरह खींचा था.

 * पाकिस्तान के अंग्रेज़ी अख़बार 'डॉन' और 'द एक्सप्रेस ट्रिब्यून'' में उन्नाव और हैदराबाद से जुड़ी सभी ख़बरों को सिलसिलेवार ढंग से कवर किया गया है.

* पिछले साल थॉमसन रॉयटर्स फ़ाउंडेशन ने एक सर्वे प्रकाशित किया था जिसमें भारत को महिलाओं के लिए दुनिया का सबसे ख़तरनाक देश बताया गया था.

* यह सर्वे थॉमसन-रॉयटर्स फ़ाउंडेशन की तरफ़ से महिला मुद्दों पर काम करने वालीं 550 महिला विशेषज्ञों के साथ किया गया था.

भारत में इस सर्वे की काफ़ी आलोचना हुई थी और भारतीय महिला आयोग ने इसे सिरे से ख़ारिज कर दिया था.


 Sorce - BBC NEWS