मौद्रिक नीति लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
मौद्रिक नीति लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

रविवार, 16 फ़रवरी 2020




भारतीय रिजर्व बैंक के कार्य -function of Reserve bank of india

आरबीआई- 

आरबीआई पूरे भारत में वित्तीय संस्थानों का रेगुलेशन करता है तथा भारत में इन्फ्लेशन को नियंत्रित रखने के लिए कदम उठाता है


आरबीआई के कार्य

1.  मौद्रिक प्राधिकारी के रूप में
2.  मुद्रा जारीकर्ता
3.  विकासात्मक भूमिका मे
4.  सरकार के लिए परामर्शदाता के रूप में
5.  विदेशी लेनदेन का पूरा दिखा
6.  मौद्रिक और साख नीति
7.  करेंसी और सिक्को  के प्रकाशन का एकाधिकार
8.  बैंकों को नियमित करना
9.  विकासात्मक कार्यों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है

महत्वपूर्ण बिंदु

 एक रुपए के सिक्के या नोट का परिचालन आरबीआई करता है किंतु प्रकाशन वित्त मंत्रालय करता है

मौद्रिक नीति

 परिभाषा

 किसी अर्थव्यवस्था में मुद्रा के प्रवाह को नियंत्रित करने की नीति को मौद्रिक नीति कहते हैं

 सभी देशों की केंद्रीय बैंक मौद्रिक नीति बनाने का कार्य करती हैं किंतु भारत देश मे मौद्रिक नीति आरबीआई तैयार करता है उसका कार्यान्वयन करता है और उसकी निगरानी भी करते हैं|

 उद्देश्य

 विकास के उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए मूल्य स्थिरता बनाए रखना वित्तीय प्रणाली का विनियामक और पर्यवेक्षक के रूप में कार्य करना

बैंकिंग परिचालन के लिए विस्तृत मानदंड निर्धारित करता है जिसके अंदर देश के बैंकिंग और वित्तीय प्रणालियां काम करती हैं

प्रणाली में लोगों का विश्वास बनाए रखना जमाकर्ताओं के हितों की रक्षा करना और आम जनता को किफायती बैंकिंग सेवाएं उपलब्ध कराना

विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम 1999 का प्रबंधन करता है

विदेशी व्यापार और भुगतान को सुविधाजनक बनाना और भारत में विदेशी मुद्रा बाजार का क्रमिक विकास करना उसे बनाए रखना

 महत्वपूर्ण बिंदु

1 जुलाई से 30 - जून लेखा वर्ष
1 अप्रैल से 31 - मार्च वित्तीय वर्ष
1 जुलाई से 30-  जून कृषि वर्ष


 वित्तीय गतिविधियों को कंट्रोल करने वाली 2 संस्थाएं होती है

1. गवर्नमेंट ऑफ इंडिया
2. रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया


1.) गवर्नमेंट ऑफ इंडिया

 यह बजट वित्त मंत्री द्वारा संसद में पेश किया जाता है इसे राजकोषीय नीति या फिजिकल पॉलिसी कहते हैं

यह वर्ष में एक बार पेश किया जाता है
यह जनता की क्रय शक्ति को सीधा प्रभावित करता है

यह मंगाई तथा मंदी दोनों पर कारगर होता है
संगठित तथा असंगठित क्षेत्र दोनों को प्रभावित करता है

2.) रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया

इसे मौद्रिक और साख नीति कहा जाता है
यह वर्ष में 6 बार जारी किया  जाता है  2 महीने के अंतराल पर

या परोक्ष रूप से बैंक और आम नागरिक दोनों को प्रभावित करता है

मंगाई तो नियंत्रित कर लेता है लेकिन मंदी को उतनी कारगर नीति नहीं बना पाता है

असंगठित क्षेत्र को ज्यादा प्रभावित करती हैं


 मौद्रिक नीति भी दो प्रकार का होता है

1.)  कठोर मौद्रिक नीति –

SLR  और सीआरआर को मात्रात्मक रूप से बढ़ाया जाता है तो उसे कठोर मौद्रिक नीति कहते हैं
 कठोर मौद्रिक नीति तब लाया  जाता है जब बाजार में तरलता बहुत ज्यादा  होता है और अधिक होने के कारण महंगाई बढ़ जाती है तब कठोर मौद्रिक नीति लाई जाती है

2.)  मृदुल मौद्रिक नीति-

 इसके मानो को कम करना

 आरबीआई किस तरह मौद्रिक और साख नीति जारी करके तरलता प्रबंधन करता है?

भारतीय रिजर्व बैंक के कार्य -function of Reserve bank of india

 तरलता प्रबंधन-

1. मात्रात्मक तरलता प्रबंधन
2. गुणात्मक तरलता प्रबंधन


1.) मात्रात्मक तथा प्रबंधन
-

(1)CRR-

 नकद आरक्षित अनुपात वर्तमान में चार पर्सेंट है

*  बैंकों के पास जितना भी धन जमा होता है उसे नेट डिमांड एंड टाइम लायबिलिटीज एनडीटीएल कहते हैं

* एनडीटीएल का चार पर्सेंट बैंकों को नगद रूप में आरबीआई के पास जमा करना होता है इसके बहुत से लक्ष्य है-
A) लोगों का विश्वास बनाए रखने के लिए
B) मार्केट में नकदी की कमी वृद्धि कर सकने के लिए
C) तरलता प्रबंधन के लिए

(2)SLR-
 सांविधिक तरलता अनुपात वर्तमान में 19 परसेंट है
 इसे बैंक को अपने पास रखना होता है नगद, स्वर्ण,  सरकारी प्रतिभूतियों,  के रूप में भी रखा जा सकता है|

(3)omo-

 ओपन मार्केट ऑपरेशंस (खुली बाजार प्रक्रियाएं)- आरबीआई बैंकों को सरकारी प्रतिभूतियां बेचने का टेंडर जारी करेंगे
 सभी बैंकों को सरकारी प्रतिभूतियों को खरीदने के लिए आमंत्रित करता है आरबीआई

 आखिर सरकारी प्रतिभूतियां क्यों खरीदें-

 एफडीआई विदेशों से प्राप्त आय- पैसा एडजस्ट होना चाहिए नहीं तो विकासनगर की कीमतें बढ़ा देती है इसलिए एफडीआई को समायोजित करने के लिए सरकारी प्रतिभूतियों को लेकर आरबीआई आती है,

 इसके माध्यम से मार्केट को अब्जॉर्ब  करने की कोशिश किया जाता है ताकि बाजार में कीमतों की स्थिरता बनी रहे और वृद्धि बना रहे

(4)RR

 रेपो रेट- अल्पकालिक बैंकों की आवश्यकता को पूरा करने के लिए और सरकारी प्रतिभूतियों की एवज में बैंकों को उधार मिलता है जब ब्याज बैंक   चुकती है उसे रेपो  रेट  कहा जाता है वर्तमान में रेपो रेट 5.75% है
(5)RRR

 रिवर्स रेपो रेट- जब कोई भी कमर्शियल बैंक अतिरिक्त धन को जिसे वह मार्केट में नहीं निकाल पा रही है अगर आरबीआई के पास रख देती है अल्पावधि के लिए आरबीआई कमर्शियल बैंक को जो ब्याज देती है उसे रिवर्स रेपो रेट कहते हैं

 वर्तमान में 5.50% है

(6)MSF
 मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी (सीमांत स्थाई सुविधा)-

2.) गुणात्मक तरलता प्रबंधन
(1) सीमांत आवश्यकता
(2) उपभोक्ता साख नियंत्रण
(3) बैंकों को दिशा निर्देश
(4) सीधी कार्यवाही




 मौद्रिक नीति
 मौद्रिक नीति भी दो प्रकार का होता है
3.) कठोर मौद्रिक नीति –
SLR  और सीआरआर को मात्रात्मक रूप से बढ़ाया जाता है तो उसे कठोर मौद्रिक नीति कहते हैं
कठोर मौद्रिक नीति तब लाया  जाता है जब बाजार में तरलता बहुत ज्यादा  होता है और अधिक होने के कारण महंगाई बढ़ जाती है तब कठोर मौद्रिक नीति लाई जाती है
4.) मृदुल मौद्रिक नीति-

 इसके मानो को कम करना