मंगलवार, 14 जुलाई 2020

Finance commission of india |वित्त आयोग |आर्टिकल 280

Finance commission 


चलिए जानते है फाइनेंस कमिशन के बारे में

 पैसा हम सबके लिए जरूरी है एक परिवारके लिए घर चलाने से लेकर  एक सम्मानजनक जीवन जीने के लिए जिस तरह पैसे की जरूरत होती है

 ठीक वैसे ही सरकार को देश या राज्य चलाने के लिए पैसों की जरूरत होती है.

 परिवार में कमाई के बावजूद यदि पैसा कम पड़ जाए तो हम अपने दोस्तों यह मां-बाप से पैसा ले सकते हैं

 संविधान में भी देश को एक परिवार की तरह ही देखा गया है
 इस परिवार के मुखिया यानी केंद्रीय राज्य के पास कमाई की कई स्रोत है

 एक आम परिवार के पास जैसे एक सेविंग अकाउंट होता है ठीक उसी प्रकार केंद्र और राज्य की पूरी कमाई देश के संचित निधि में चला जाता है

 कमाई का हिस्सा भले ही कम या ज्यादा हो लेकिन इसका बटवारा संविधान के मुताबिक समान रूप से होना चाहिए
 और इस कमाई को सब में बराबर तरीके से बांटने का जीमा है 
फाइनेंस कमीशन यानी वित्त आयोग का

 फाइनेंस कमीशन यानी वह संवैधानिक संस्था जो केंद्र से लेकर राज्य के विकास के तमाम कामों के लिए वित्तीय संसाधनों का बंटवारा करती है

 1951 से लेकर अब तक 15 वित्त आयोग गठित हो चुके हैं

. बैकग्राउंड


फाइनेंस कमीशन को हमारे कॉन्स्टिट्यूशन के  आर्टिकल 280 में मेंशन किया गया है

चुकी कॉन्स्टिट्यूशन में मेंशन किया गया है इसलिए यह कॉन्स्टिट्यूशन  बॉडी है

यह 22 नवंबर 1951 को गठित हुआ

फाइनेंस कमीशन quasi-judicial बॉडी है

मींस ये  अपनी अपनी खुद की कुछ डिसीजन ले सकती है और इट कैन परफॉर्म ज्यूडिशरी सिस्टम

फाइनेंस कमीशन कांस्टीट्यूट किया जाता है प्रेसिडेंट ऑफ इंडिया द्वारा

यह हर 5 साल में कांस्टीट्यूट किया जाता है

इसे कुछ कंडीशन पर 5 साल से पहले भी कॉन्स्टिट्यूशन जा सकता है

 कंपोजीशन


इसमें एक चेयरमैन और 4 मेंबर होते हैं

जिसमें दो टेंपरेरी होते हैं दो परमानेंट मेंबर होते हैं

इसे प्रेसिडेंट  अपॉइंट करते हैं

यह अपनी रिअप्वाइंटमेंट के लिए एलिजिबल होते हैं

 क्वालिफिकेशन


 क्या क्वालिफिकेशन होनी चाहिए चेयरमैन या मेंबर को अप्वॉइंट होने के लिए

क्वालीफिकेशन पार्लियामेंट स्पेसिफाइड करती है

पब्लिक अफेयर्स का नॉलेज होना चाहिए चेयरमैन अप्वॉइंट होने के लिए

और 4 मेंबर्स में से पहले मेंबर के लिए जरूरी है कि हाईकोर्ट का जज हो या फिर  हाई कोर्ट का  जज अप्वॉइंट होने के लिए एलिजिबल हो

दूसरे मेंबर के लिए जरूरी है कि उसके पास स्पेशलाइज नॉलेज होना चाहिए फाइनेंस एंड अकाउंट का

तीसरी मेंबर के लिए जरूरी है कि उसके वाइड एक्सपीरियंस होना चाहिए फाइनेंस एंड एडमिनिस्ट्रेशन में

चौथे मेंबर के लिए जरूरी है कि उसके पास स्पेशल नॉलेज होना चाहिए इकोनॉमिक्स का 

 फंक्शंस

 फाइनेंस कमीशन का नाम सुनते ही आप सोच रहे होंगे कि क्या जरूरत है फाइनेंस कमीशन का गठन करने के लिए हमारे देश में
फाइनेंस कमीशन फॉलोइंग मैटर पर रिकमेंडेशन देता है प्रेसिडेंट को

डिसटीब्यूशन करता है टैक्स का सेंट्रल स्टेट के बीच

सहायता में अनुदान कंसोलिडेटेड फंड आफ इंडिया  से दी जाती है उस से रिलेटेड जो भी रिकमेंडेशन होता है वह भी फाइनेंस कमीशन द्वारा दिया जाता है

इसके अलावा पंचायत और म्युनिसिपालिटी के लिए फण्ड  स्टेट फाइनेंस कमिशन द्वारा दिया जाता है लेकिन स्टेट फाइनेंस कमिशन को रिकमेंड करता है सेंट्रल फाइनेंस कमिशन

इन सभी का रिपोर्ट फाइनेंस कमिशन प्रेसिडेंट के पास भेजता है

और प्रेसिडेंट पार्लियामेंट की बोथ हाउसेस लोकसभा और राज्यसभा के सामने पेश करता है

चीजें डिस्कस होती है

हमारे संविधान में यह मेनशन है कि फाइनेंस कमिशन का रिकमेंडेशन गवर्नमेंट के ऊपर  बाइंडिंग नहीं होगा



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