शनिवार, 11 जुलाई 2020

Union public service commission | संघ लोक सेवा आयोग क्या है?

यूपीएससी क्या है? 


 यूपीएससी भारत की प्रमुख सेंटर रिक्रूटमेंट एजेंसी में से एक है

 यह सभी इंडियंन सर्विसेज और सेंट्रल सर्विसेज के ग्रुप ए और ग्रुप बी  के लिए नियुक्तीया करता है,  और परीक्षाओं का आयोजन भी

 जिसमें देश की सबसे प्रतिष्ठित सेवाएं जैसे आईएएस,  आईपीएस, आईआरएस,  आईएस एनडीए ने आईएफएससी आदि शामिल है

 यूपीएससी कर्मियों के प्रमोशन और ट्रांसफर से संबंधित मामले को भी देखता है

 पृष्ठभूमि

 तो  चली अब यूपीएससी के बैकग्राउंड के बारे में जान लेते हैं

भारत में लोक सेवाओं का जन्म  काल में हुआ

ली कमीशन के सुझाव पर 1926 में पहली बार सेंट्रल पब्लिक सर्विस कमीशन की स्थापना की है

ली कमीशन के चेयरमैन ली  वार्कर  थे 

इंडियन गवर्नमेंट एक्ट 1935 के तहत इसका नाम बदलकर फेडरल पब्लिक सर्विस कमीशन यानी संघीय लोक सेवा आयोग कर दिया गया

आजादी के बाद 1950 में कुछ बदलाव कर एवं इसके  अधिकारो में  विस्तार करके इसे  यूपीएससी नाम दिया गया

 कांस्टीट्यूशनल स्टेटस

 चलिए कॉन्स्टिट्यूशन स्टेटस को देखते हैं

यूपीएससी इंडियन कॉन्स्टिट्यूशन के पार्ट 14 के आर्टिकल 315 से 323 के बीच कवर किया गया है

यूपीएससी इंडिपेंडेंस कॉन्स्टिट्यूशन बॉडी है क्योंकि इसका गठन कांस्टीट्यूशनल प्रोविजन के द्वारा किया गया है

कंपोजिशन

 तो चली अब यूपीएससी के कंपोजीशन के बारे में जान लेते हैं

इसमें एक चेयरमैन और कुछ मेंबर होते हैं

इसे प्रेसिडेंट ऑफ पॉइंट करते हैं

कॉन्स्टिट्यूशन में आयोग के सदस्यों की संख्या का उल्लेख नहीं किया गया है..

यह राष्ट्रपति के विवेक के ऊपर छोड़ दिया गया है जो आयोग की संरचना का निर्धारण करता है

एलिजिबिलिटी

संविधान कमीशन के सदस्य की एलिजिबिलिटी के संबंध में भी मौन है

हालाकी आवश्यक है कि आयोग की आधे सदस्य को इंडियन गवर्नमेंट या स्टेट गवर्नमेंट के अधीन कम से कम 10 साल का वाकिंग एक्सपीरियंस हो

कॉन्स्टिट्यूशन ऑफ इंडिया प्रेसिडेंट को चेयरमैन या मेंबर की सेवा की शर्तें निर्धारित करने का राइट दिया है

 टर्म्स ऑफ़ ऑफिस

6 year or 65 years of age which  ever is earlier 

राष्ट्रपति को कभी भी त्यागपत्र दे सकते हैं

टर्म्स ऑफ़ ऑफिस पूरा होने से पहले भी प्रेसिडेंट द्वारा संविधान में वर्णित प्रक्रिया के माध्यम से हटाया जा सकता है

 रिमूवल आफ यूपीएससी

प्रेसिडेंट ऑफ इंडिया निम्नलिखित परिस्थितियों में यूपीएससी के चेयरमैन या मेंबर को हटा सकता है

1.) यदि उस पर्सन को दिवालिया घोषित कर दिया जाता है

2.) यदि यूपीएससी के मेंबर या चेयरमैन किसी पेड़ एंप्लॉयमेंट में पाए जाते हैं

3.) और यदि प्रेसिडेंट को लगता है कि वह फिजिकली और मेंटली अनफिट है अपने ऑफिस को continue  करने के लिए

4.) प्रेसिडेंट मिसबिहेवियर के आधार पर भी चेयरमैन या मेंबर को हटा सकता है

5.) किंतु इस प्रकार के मैटर की जांच सुप्रीम कोर्ट द्वारा की जाती है

6.) प्रेसिडेंट ,सुप्रीम कोर्ट द्वारा इस मैटर में दी गई सलाह को मानने के लिए बाध्य है

 इंडिपेंडेंस ऑफ यूपीएससी

 Security of tenure –

चेयरमैन या मेंबर को प्रेसिडेंट ऑफ इंडिया संविधान में वर्णित आधार पर ही हटा सकता है

Conditions  of services – 

हालांकि चेयरमैन या मेंबर की सेवा की शर्तें प्रेसिडेंट डिसाइड करता है लेकिन अपॉइंटमेंट के बाद इसमें अलाभ कारी  परिवर्तन नहीं किया जा सकता है

सैलेरी एंड पेंशन से सम्बंधित सभी  खर्चे कंसोलिडेटेड फंड आफ इंडिया यानी भारत की संचित निधि से दी जाती है

यूपीएससी के इंडिपेंडेंट से रिलेटेड एक और प्रोविजन है कॉन्स्टिट्यूशन में

यूपीएससी के चेयरमैन सेंट्रल गवर्नमेंट स्टेट गवर्नमेंट एंप्लॉयमेंट के लिए एलिजिबल नहीं होंगे

इसके अलावा यूपीएससी के जो मेंबर है वह सिर्फ यूपीएससी के चेयरमैन बन सकते हैं या फिर स्टेट पब्लिक सर्विस कमीशन के चेयरमैन बन सकते हैं

यूपीएससी के चेयरमैन या मेंबर अपने सेकंड टर्म के लिए एलिजिबल नहीं होते

 फंक्शंस ऑफ यूपीएससी

ऑल इंडिया सर्विसेज या अखिल भारतीय सेवाओं सेंट्रल सर्विसेज व यूनियन टेरिटरीज की लोक सेवाओ  में नियुक्ति के लिए परीक्षाओं का आयोजन करता है

दो या दो से अधिक स्टेट्स द्वारा रिक्वेस्ट करने पर संयुक्त भर्ती की योजना व प्रवर्तन करने में सहायता करता है

किसी राज्यपाल के अनुरोध पर प्रेसिडेंट की स्वीकृति के उपरांत सभी या  किन्ही  मामलों पर राज्यों को सलाह प्रदान करता है

 यूपीएससी की भूमिका

सविधान आशा करता है यूपीएससी इंडिया में मेरिट  system का  प्रहरी होगा
इसके अलावा यह गवर्नमेंट को एडवाइज भी देता है जब consult  किया जाता है

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