शनिवार, 8 फ़रवरी 2020

The hindu and pib analysis in hindi - 8 february 2020

The hindu analysis

अनौपचारिक की पुकार 

 संदर्भ/ सारांश: 

भारत की छोटी उद्यमियों ग्रामीण इलाकों और शहरी इलाकों में रहने वाले लोगों की आवाज को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए.

How to Use

Gs paper -3 (economics )

Unit -

 उदारीकरण का अर्थव्यवस्था पर प्रभाव, औद्योगिक नीति में परिवर्तन तथा औद्योगिक विकास पर इनका प्रभाव

Previous year question 

– भारतीय अर्थव्यवस्था में वैश्वीकरण के परिणाम स्वरूप औपचारिक क्षेत्र में रोजगार कैसे कम हुए? क्या बढ़ती औपचारिकता देश के विकास के लिए हानिकारक है? (2016)

Gs-1 (unit  7) 

गरीबी और विकासात्मक विषय

Gs-2) 

सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्र में विकास के लिए हस्तक्षेप और उनकी अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय.

(Unit 11)

 विकास प्रक्रिया

Gs -3 ( unit 1)

भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास तथा रोजगार से संबंधित विषय

Unit 2) 

 समावेशी विकास तथा इससे उत्पन्न विषय

Unit 3)

उदारीकरण का अर्थव्यवस्था पर प्रभाव,  औद्योगिक नीति में परिवर्तन तथा औद्योगिक विकास पर इनका प्रभाव

 प्रमुख तथ्य

 शोध पत्र-1

Paper published by the national bureau of economic research, economic seema  jayachandran that there is no strong evidence from studies conducted in meny developing countries that formalisation improves business outcome.

 कोई मजबूत समूह नहीं की है कि औपचारिकता व्यवसाय की परिणामों में सुधार करती है.

 शोध पत्र -2

A background paper for the international labour organization (ilo), economist  santosh calls formalisation an evolutionary process during which small, informal enterprise learn the capabilities required to operatein a more formal global economy.
They can’t be fourced to formalise.

औपचारिकता एक विकास प्रक्रिया-  छोटी अनौपचारिक उद्यम अधिक औपचारिक वैश्विक अर्थव्यवस्था में काम करने के लिए आवश्यक क्षमताओं को सीखते हैं.

- औपचारिक करण के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता

 संगठित और असंगठित क्षेत्र मैं अंतर

 संगठित क्षेत्र-

इसमें सरकार द्वारा पूर्ण निगरानी की जाती है

इसमें शामिल गतिविधियों को सकल घरेलू उत्पाद( जीडीपी) में शामिल किया जाता है.

औपचारिक क्षेत्र विशिष्ट कार्य घंटों और नियमित मजदूरी वाली सभी नौकरियों का प्रतिनिधित्व करते हैं जिसमें कार्यकर्ताओं की रोजगार की सुरक्षा होती है.

श्रमिकों को सरकार,  राज्य या निजी क्षेत्र के उद्यमों द्वारा नियोजित किया जाता है.

यह एक लाइसेंस प्राप्त संगठन है और करों का भुगतान करने के लिए उत्तरदाई है इसमें बड़े पैमाने पर परिचालन जैसे बैंक और अन्य निगम शामिल है.

 असंगठित क्षेत्र-

इस क्षेत्र में सरकार का कोई विशेष हस्तक्षेप नहीं होता है. इसमें छोटी-छोटी और बिखरी इकाइयां आती है जो अधिकांश सरकारी नियंत्रण से बाहर होती है.

असंगठित क्षेत्र में ना किसी प्रकार का कर लगाया जाता है और ना ही इनकी गतिविधियों का जीडीपी और सकल राष्ट्रीय उत्पाद( जीएनपी) में शामिल किया जाता है.
यहां कर्मचारी या श्रमिक किसी नियमित काम की घंटे और मजदूरी के आधार पर कार्य नहीं करते हैं.

यह मुख्य रूप से छोटे पैमाने पर रोजगार और आय उत्पन्न करने की प्राथमिक उद्देश्य के साथ वस्तुओं और सेवाओं के प्राथमिक उत्पादन से संबंधित है.

 फेरी वाला इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है जो अपने जीवन निर्वाह के लिए अपने कृषि उत्पादों का विक्रय करता है.

यह एक लाइसेंस प्राप्त संगठन नहीं है और न ही इनके द्वारा करो का भुगतान किया जाता है.

औपचारिकता जाल The formalisation trap:

The key question here is : 

who benefits from formalisation of informal firms?

बैंकों की अंतिम मील लागत कम

राज्य को करें एवं निगरानी सहूलियत

 औपचारिकता के लिए नीति क्यों?

बेरोजगारी एवं मंदी का समाधान

औपचारिक क्षेत्र में शामिल होने के लिए अपर्याप्त कौशल और संपत्ति वालों का सहारा

वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में मजबूत भागीदारी

 औपचारिकता में वृद्धि क्यों? औपचारिक क्षेत्र में प्रयुक्त प्रौद्योगिकी में प्रकृति नए व्यवसाय मॉडल का उद्भव गीग  अर्थव्यवस्था का विकास.

 औपचारिकता में वृद्धि क्यों?

अनौपचारिक क्षेत्र में प्रयुक्त प्रौद्योगिकियों में प्रगति
नए व्यवसाय मॉडल का उद्भव
गिग  अर्थव्यवस्था का विकास

नीतियों को फिर से बनाना

 भारत में नौकरियां आय और विकास की चुनौतियों को देखते हुए नीतियों की पुनः रचना की आवश्यकता है.

काम पर उनकी सुरक्षा
उनकी गरिमा
नियोक्ताओं द्वारा उनका उचित उपचार

एक डेटा फायरवॉल के लिए

 संदर्भ

जर्मन साइबर सिक्योरिटी फॉर्म की रिपोर्ट= लाखों भारतीय मरीजों के मेडिकल विवरण का लीक होना और इंटरनेट पर स्वतंत्र रूप से उपलब्ध होना( सीटी स्कैन, एम आर आई, रोगियों की तस्वीर)

 सारांश: 

चिकित्सा जानकारी का रिसाव डेटा सुरक्षा कानून की तत्काल आवश्यकता के लिए बोलता है.

 प्रमुख तथ्य-

 इस डेटा की उपलब्धता का कारण चिकित्सा पेशेवरों  द्वारा उपयोग किए जाने वाले
पिक्चर आर्काइविंग एंड कम्युनिकेशन सिस्टम PACS सरवर में किसी भी सुरक्षा की अनुपस्थिति है

और जो बिना सुरक्षा के सार्वजनिक इंटरनेट से जुड़े हुए प्रतीत होते हैं

 क्या नुकसान-

सोशल इंजीनियरिंग फिशिंग और ऑनलाइन पहचान की चोरी
दुरुपयोग= डार्क नेट
P2P

 भारत में डाटा सुरक्षा कानून की स्थिति

यूरोपीय संघ और अमेरिका में डाटा सुरक्षा नियमों के विपरीत व्यापक कानूनी ढांचे का अभाव

ड्राफ्ट पर्सनल डाटा प्रोटक्शन बिल 2019


 बिल न्यायमूर्ति बीएन श्रीकृष्ण समिति की अनुशंसा पर आधारित:

बिल के मुताबिक कोई भी निजी या सरकारी संस्था किसी व्यक्ति के डाटा का उसकी अनुमति के बिना इस्तेमाल नहीं कर सकती.

मेडिकल इमरजेंसी और राज्य या केंद्र की लाभकारी योजनाओं के लिए ऐसा किया जा सकता है.

किसी भी व्यक्ति को उसकी डाटा के संबंध में अहम अधिकार होंगे.

संबंधित व्यक्ति अपने डेटा में करेक्शन या फिर संस्था के पास मौजूद डाटा तक एक्सेस मांग सकता है.

किसी भी संस्था को संबंधित व्यक्ति को डाटा के यूज के बारे में बताना होगा.

हालांकि विधेयक में में राष्ट्रीय हित से जुड़े मसलों पर डाटा की यूज़ की अनुमति होगी.

जैसे- राष्ट्रीय सुरक्षा, कानूनी कारवाही और पत्रकारिता के उद्देश्यों से इनका इस्तेमाल किया जा सकेगा.

डाटा जुटाने वाली संस्थाओं की निगरानी के लिए डाटा प्रोटेक्शन अथॉरिटी स्थापित करने का भी प्रावधान है

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस श्रीकृष्ण के नेतृत्व वाली कमेटी ने डाटा प्रोटेक्शन को  लेकर एक रिपोर्ट पेश की थी जिसके आधार पर यह बिल तैयार किया गया है.

यूरोपियन यूनियन के जनरल डाटा प्रोटेक्शन रेगुलेटर की तर्ज पर इस बिल का ड्राफ्ट तैयार किया गया है.

 संवेदनशील व्यक्तिगत डेटा को थर्ड पार्टी को बेचना या स्थानांतरित करने “अपराध” वाले प्रावधान को ड्राफ्ट पर्सनल ड्राफ्ट प्रोटक्शन बिल 2019 से हटा दिया गया है

आरबीआई की मौद्रिक नीति समीक्षा 6 फरवरी 2020

 संदर्भ

आरबीआई की मौद्रिक नीति समीक्षा 6 फरवरी 2020

 सारांश: 

विकास को बढ़ावा देने की आरबीआई के प्रयासों से अर्थव्यवस्था में धारणा बदल सकती है

 प्रमुख तथ्य:

ब्याज दरों को घटाने के लिए अब बैंक सिर्फ रेपो रेट घटाने बढ़ाने की भरोसे नहीं रहेगा
ऑटो लोन,  होम लोन और छोटी और मझोली औद्योगिक इकाइयों को ज्यादा कर्ज देने वाले बैंकों के लिए ‘नकद आरक्षित अनुपात (सीआरआर)’ के नियमों में रियायत दी जाएगी.
यह रियायत तभी से लेकर 31 जुलाई तक मिलेगी

आरबीआई ने बैंकों को एक लाख करोड़ रुपए की राशि बहुत ही कम दर पर (रेपो रेट) पर 1 से 3 वर्ष तक के लिए उपलब्ध कराने की घोषणा की है.

* रेपो रेट अभी 5.15 फीसदी  है अगर इसमें बैंकों की 2.5 फीसदी  संचालन लागत जोड़ दें

तो भी ग्राहकों को 8 फीसदी  से नीचे की दर पर कर्ज उपलब्ध कराया जा सकता है.

बैंक जिस सुविधा के तहत अपनी अतिरिक्त पूंजी कुछ दिनों के लिए आरबीआई के पास जमा करा देते थे उसे खत्म कर दिया गया है

* बैंकों को अतिरिक्त बची हुई राशि का कर्ज बांटने में इस्तेमाल करना होगा या फिर सरकारी बॉन्ड्स में निवेश करना होगा.

 क्या विकास को प्रोत्साहन प्रदान करने के लिए बजट पर्याप्त है? 

 संदर्भ /सारांश

बाधाओं के बावजूद खर्च में कटौती नहीं करने से बजट सुनिश्चित करता है कि गति पीछे ना हटे

 प्रमुख प्रश्न उत्तर: 

Q. आर्थिक सर्वेक्षण ने केंद्रीय विषय के रूप में धन सृजन पर जोर दिया है| क्या बजट इसे संबोधित करता है?  यदि ऐसा है तो किस हद तक? 

 अनंत नारायण= अच्छे संकेत

 तीन विषय

आकांक्षा तक भारत
आर्थिक विकास
देखभाल करने वाला समाज

 बजट में खर्च करने में कटौती नहीं की:

जीडीपी में वृद्धि
कृषि, सिंचाई, स्टार्टअप्स 8

 निराशाजनक संकेत : संरचनात्मक स्तर पर

बैंक एवं एनबीएफसी इकोसिस्टम
विद्युत,  टेलीकॉम, एयरलाइन, शिपिंग, रियल स्टेट 

निर्माण में संरचनात्मक मुद्दे


एफडीआई वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला= चीन को रिप्लेस करना

 निष्कर्ष

पर्याप्त धन सृजन के संकेत नहीं दिखता
सुधार केवल बजट में ही नहीं होनी चाहिए वे अलग से भी हो सकता है.

Q. क्या बजट सरकार की डॉलर 5 ट्रिलियन लक्ष्य तक पहुंचने के लिए अर्थव्यवस्था को ट्रैक पर रखने में मदद करता है? 

Ans-cross चिन्ह
पर नाटकीय सुधार भी हो सकते हैं क्योंकि हमारी क्षमता अधिक है
* बैंक + एनबीएफसी रिफॉर्म

Source -The hindu


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