शुक्रवार, 28 फ़रवरी 2020

चीन की राजनीतिक व्यवस्था, राष्ट्रीय जन -कांग्रेस के कार्य व अधिकार के बारे में समझाइए


चीन की राजनीतिक व्यवस्था,  राष्ट्रीय जन -कांग्रेस के  कार्य व अधिकार के बारे में समझाइए

चीन – 

चीनी जनवादी -गणराज्य एशिया महाद्वीप के पूर्व में स्थित 1.3 अरब जनसंख्या वाला देश है, यह क्षेत्रफल के दृस्टि से रूस, कनाडा, अमेरिका के बाद विश्व में चौथा स्थान  रखता  है |

इतना अधिक क्षेत्रफल होने के कारण यह बहुत से देशो के साथ सीमा साझा करता है (लगभग रूस के बराबर ) ही.

उत्तर से दक्षिण की ओर – रूस, मंगोलिया, ताईवान, भारत, तिबत, नेपाल, भूटान, भारत, अफगानिस्तान, पाकिस्तान, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान इत्यादि |

रूस में साम्यवाद का पतन होने के बावजूद भी चीन साम्यवाद को अपनाया हुआ है

चीनी सविधान – 

चीन में सविधान पहली बार 1954 में बना था जिसमे 106 अनुच्छेद थे,  दूसरी बार 1975 में बना था जिसमे 38 अनुच्छेद था,

  तीसरी बार 1982 में बना था जो सबसे लम्बा सविधान है इसमें 138 अनुच्छेद है और यही सविधान आज तक चीन में लागु है |

 चीन के सविधान की विशेषताए –

1. लिखित एवं विस्तृत सविधान 


2. समाजवादी गणराज्य की स्थापना – 

पूर्वी यूरोप में साम्यवाद के पतन के बावजूद भी चीन ने साम्यवाद का मार्ग नही त्यागा है |

पूंजीवादी अर्थव्यवस्था अपनाये जाने के बावजूद भी सैद्धांतिक रूप से चीन अपने आप को ‘समाजवादी ‘ कहता है |

3.जनता की सम्प्रभुत्ता –

चीन के सविधान में सम्प्रभुता वहाँ कीं जनता में निहित है |
सविधान के अनुच्छेद 2 के अनुसार,

“चीनी जनवादी गणराज्य में सम्पूर्ण सत्ता का वास जनता में होगा |”

 साथ ही यह भी कहा गया है की इस सत्ता का प्रयोग राष्ट्रीय जनवादी कांग्रेस तथा स्थानीय जनवादी कांग्रेस के माध्यम से किया जायेगा

4.लोकतांत्रिक केन्द्रवाद – 

 पुराने साम्यवादी देशों में अपनाइ गयी व्यवस्था को बनाए रखते हुए इनकी शासन व्यवस्था में लोकतांत्रिक केंद्र वाद के सिद्धांत को बनाया गया है

इस सिद्धांत के अनुसार शासन के सभी प्रतिनिधि अंग नीचे से ऊपर की ओर निर्वाचित होते हैं

 नीचे की इकाइयां ऊपर की इकाई का निर्वाचन करती है यह तो हुआ  लोकतंत्र|

 दूसरी ओर शासन की सभी ऊपर की इकाइयों के आदेश को नीचे की इकाइयों को मानना पड़ता है यह हुआ केंद्रवाद |

5. एकात्मक शासन-

 चीन में एकात्मक शासन की व्यवस्था की गई है संविधान कोई शक्ति विभाजन नहीं करता परंतु चीन के एक विशाल देश होने के कारण ऐसा स्वभाविक है |

कि प्रशासनिक सुविधा के लिए चीन कई प्रांतों में बांटा जाए चीन में 21 प्रांत 5 स्वायत्तशासी क्षेत्र तथा तीन महानगर हैं तिब्बत और सिंकियांग स्वायत्तसासि  क्षेत्र है

एवं स्पीकिंग शंघाई और तिनसिन महानगर है चीन के प्रांत स्वायत्त शासित क्षेत्र तथा महानगरों की नगरपालिका है सभी अपनी शक्तियां केंद्र से ही प्राप्त करते हैं|

6. बहुराष्ट्रीय समाज –

 एकात्मक शासन होती हुई भी चीन में यह तथ्य स्वीकार किया गया है कि उसका समाज एक बहुल  समाज है |

 वहां कई राष्ट्रीयताये हैं| देश में लगभग 60 जातियां हैं जिनके रीति-रिवाज और संस्कृति को सुरक्षित रखने का आश्वासन दिया गया  है,

चीन में विभिन्न जाति के लोगों को राष्ट्रीय अल्प तम कहा गया जबकि रूस में इन्हें अल्पतम राष्ट्रीयता कहा जाता है |

7. मौलिक अधिकार – 

 चीन के संविधान की एक जोरदार बात यह भी है कि संविधान अपने नागरिकों को कुछ मौलिक अधिकार भी प्रदान करता है|

 अधिकारों में सर्वाधिक उल्लेखनीय है संपत्ति का अधिकार| मेहनत से और वैध उपायों से अर्जित की गई संपत्ति रखने का अधिकार नागरिकों को प्राप्त है
संविधान के अनुच्छेद 38 से 45 तक नागरिकों को दिए गए मौलिक अधिकारों का वर्णन है |

 संपत्ति के अधिकार की व्यवस्था है परंतु साथ ही संविधान में यह भी कहा गया है कि सार्वजनिक हित के लिए राज्य संपत्ति अधिग्रहित कर सकता है|

संपत्ति के अधिकार के अतिरिक्त चीन में नागरिकों को और भी कई अधिकार दिए गए हैं जैसे - मत देने का अधिकार,  विचार और अभिव्यक्ति का अधिकार, धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार,

  काम पाने  का अधिकार,  सामाजिक सुरक्षा का अधिकार,  कानून के समक्ष समानता का अधिकार,  अधिकार केवल दिखावटी हैं

 चीन के संविधान में अधिकारों का उल्लेख किया गया है सविधान में अधिकारों के क्रियान्वयन का कोई उपबंध  नहीं किया गया है|

8. मौलिक कर्तव्य- 

 चीन के संविधान में अधिकारों के साथ कर्तव्य का भी उल्लेख किया गया है किन का संविधान कर्तव्य को और अधिक करता है

कर्तव्य किस सूची में जिन कर्तव्यों का उल्लेख किया गया है उनमें मुख्य  कर्तव्य है- क़ानून का पालन,  सार्वजानिक सम्पति की रक्षा, करो का भुकतान तथा मातृभूमि की रक्षा  करना |

 प्रत्येक नागरिक के लिए आवश्यक है कि वह इन कर्तव्यों का सम्मान करें और इनका पालन करें|

9. एक सदनात्मक व्यवस्था- 

चीन में विधि निर्माण सम्बन्धी समस्त शक्तियो  का वार संसद में है| संसद है - राष्ट्रीय जनवादी कांग्रेस इसमें जनता तथा विभिन्न

स्थानीय निकायों व व्यवसायिक संगठनों से प्रतिनिधि चुने जाते हैं 1987 में इस कांग्रेस की सदस्य संख्या 2978 थी|
10. शासन का स्वरूप मंत्रीमंडलात्मक- 

 चीन में शासन का स्वरूप काफी हद तक मंत्रीमण्डलात्मक ही   है यद्यपि चीन  में राष्ट्रपति भी है
और उपराष्ट्रपति भी परंतु कार्यपालिका की वास्तविक शक्तियों का वास प्रधानमंत्री और उसके मंत्रिमंडल में मंत्रिमंडल राष्ट्रीय जनवादी कांग्रेस के प्रति उत्तरदाई है

राष्ट्रपति के पति नहीं मंत्रिमंडल के सदस्य संख्या निश्चित नहीं है इसे परिवर्तन होता रहता है|


 राष्ट्रीय जन कांग्रेस के कार्य –

1. कानून निर्माण करने का कार्य करता है
2. प्रधानमंत्री के नाम का प्रस्ताव तो राष्ट्रपति करता है किंतु राष्ट्रपति के नाम निर्देशन के पश्चात राष्ट्रीय जन कांग्रेश उस पर विचार करती  हैं
3. राष्ट्रीय जनवादी कांग्रेस के सदस्यों को मंत्रिपरिषद से प्रश्न पूछने का अधिकार है
4. राष्ट्रीय जन कांग्रेस परिषद के सदस्य को आवश्यकतानुसार परिचित भी कर सकती हैं
5. राष्ट्रीय जन कांग्रेस की स्थाई समिति को परिषद के कार्य की देखभाल करने तथा उसके निर्णय एवं आज्ञपतियों को  संविधान विरूद्ध  होने की स्थिति में रद्द घोषित करने का अधिकार है

0 टिप्पणियाँ:

टिप्पणी पोस्ट करें

Thanks for comments