शुक्रवार, 14 फ़रवरी 2020

भारत में बैंकिंग प्रणाली का इतिहास और प्रकार

भारत में बैंकिंग प्रणाली का  इतिहास और प्रकार

भारत में बैंकिंग प्रणाली का  इतिहास और प्रकार

 वर्तमान परिपेक्ष में बैंक की परिभाषा

 पूरे वित्तीय व्यवस्था का एक ऐसा मध्य बिंदु जो इस पूरे बाजार में मुद्रा का आवागमन का कार्य करता है मुद्रा की आपूर्ति और मुद्रा की प्राप्ति का कार्य करता है बैंक कहलाता है.

 बैंकों का इतिहास

1. ऋण  देने वाले लोगों को नापया नलेखा कहा जाता था

2. मनुस्मृति में ब्याज का वर्णन मिलता है
 आधुनिक बैंकों की स्थापना

1. 1770 बैंक ऑफ हिंदुस्तान कोलकाता
2. 1806  बैंक ऑफ बंगाल
3. 1840 बैंक ऑफ मुंबई
4. 1843 बैंक ऑफ मद्रास

5. 1921 इंपीरियल बैंक ऑफ इंडिया ( मर्ज - बंगाल, मुंबई,  मद्रास)

6. 1955 एसबीआई( इंपीरियल बैंक ऑफ इंडिया का राष्ट्रीयकरण)

7. 1958 59 एसबीआई के सहयोगियों का राष्ट्रीयकरण
8.   1865 इलाहाबाद बैंक की स्थापना

9. 1881 अवध कमर्शियल बैंक( सीमित शक्ति के साथ भारतीयों को प्रबंधन दिया गया था)

10. 1895 पंजाब नेशनल बैंक की स्थापना (भारतीयों के द्वारा प्रबंधित पहला बैंक)

11. 1911 सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया( स्वामित्व – भारतीय,  प्रबंधन- भारतीय,  संस्थापक- पोचखानवाला पहले चेयरमैन-  फिरोजशाह मेहता)

12. 1 जनवरी 1949 आरबीआई का राष्ट्रीयकरण
13. मार्च 1949 बैंकिंग अधिनियम ( 2013 में संशोधन)

14. 1969 14 बड़े बैंकों का राष्ट्रीयकरण( न्यूनतम संपत्ति 50 करोड़)

15. 1980 6 बड़े बैंकों का राष्ट्रीयकरण (न्यूनतम संपत्ति 200 करोड़)

16. 1993 न्यू बैंक ऑफ इंडिया मर्ज कर दी गई पीएनबी

17. 2018 में एसबीआई में मर्ज कर दिया गया स्टेट बैंक आफ सौराष्ट्र

18. 2010 में एसबीआई में मर्ज कर दिया गया स्टेट बैंक ऑफ इंदौर

19. 1 अप्रैल 2017 एसबीआई में मर्ज कर दिया गया एसबीआई के सहयोगी (स्टेट बैंक ऑफ त्रावणकोर, स्टेट बैंक ऑफ पटियाला, मैसूर, बीकानेर,  हैदराबाद,  भारतीय महिला बैंक)

20. 2018 बैंक ऑफ बड़ौदा में मर्ज कर दिया गया विजया बैंक और देना बैंक का


 बैंकों का वर्गीकरण

भारत में बैंकिंग प्रणाली का  इतिहास और प्रकार

1. अनुसूचित बैंक

2. गैर अनुसूचित बैंक


1. अनुसूचित बैंक

आरबीआई एक्ट के अनुसूची दो  में शामिल किया गया है
वर्तमान में जिनकी न्यूनतम संपत्ति 500 करोड़ की होगी
गतिविधि से ग्राहक पर कोई भी नकारात्मक प्रभाव नहीं होगा
जिन पर आरबीआई की मौद्रिक व साख  नीति पूरी लागू होती है

2. गैर अनुसूचित बैंक

 अनुसूची दो में शामिल नहीं किया गया है जैसे जम्मू कश्मीर


 अनुसूचित बैंकों का वर्गीकरण

1. वाणिज्यिक बैंक
2. कोपरेटिव बैंक
3. आरआरबी


 रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया

1. 1934 आरबीआई एक्ट पारित किया गया
2. 1 अप्रैल 1935 आरबीआई कार्य करना प्रारंभ किया
3. 1937 तक मुख्यालय कोलकाता और मुंबई में है

4. सिफारिश गठन - यंग हिल्टन आयोग की स्थापना 1920 सिफारिश 1926

5. 1929 मंदी केंद्रीय बैंक जांच आयोग का गठन दूसरा आयोग था जिसने आरबीआई के गठन का सिफारिश की थी

6. आरबीआई के प्रथम गवर्नर सर ओसबोर्न स्मिथ 1935
7. आजाद भारत के प्रथम सी डी देशमुख

 रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया

1. सरकारी निदेशक मंडल

एक गवर्नर और चार डिप्टी गवर्नर से मिलकर बना होता है इसका कार्यकाल 4 वर्ष का होता है

2. गैर सरकारी निदेशक मंडल

 10 गवर्नमेंट आफ इंडिया से नामित मुंबई दिल्ली चेन्नई और कोलकाता से दिए जाते हैंसदस्य,

दो बार सरकार के अधिकारी, चार क्षेत्रीय गवर्नर- मुंबई दिल्ली चेन्नई और कोलकाता से लिए जाते हैं

 आरबीआई किस उद्देश्य स्थापित की गई

 आगे का उद्देश्य- 

पूरे भारत में वित्तीय संस्थानों का  रेगुलेशन करना तथा भारत में इन्फ्लेशन को नियंत्रित रखने के लिए कदम उठाएं

 मौद्रिक और साख नीति
 महंगाई को नियंत्रित करने के लिए जो कदम होते हैं उसे कहते हैं मौद्रिक और साख नीति

“ RBI भारत में मौजूद मौद्रिक  एवं साख नीति का प्रकाशन करके लिक्विडिटी को नियंत्रित करती है “

 पाली मौद्रिक और साख नीति हर 3 महीने पर आती थी लेकिन अब हर 2 महीने पर साल में 6 बार आती है”

 परिभाषा

 आरबीआई क्या काम करने वाली है क्या कदम उठाने वाली क्या उसमें परिवर्तन होंगे उन सब का लेखा-जोखा एक नीति कहलाती है जिसे मौद्रिक और साख  नीति कहते हैं

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