सोमवार, 13 जनवरी 2020

swami vivekananda jayanti 2020: 'दृढ़ता ही सफलता की कुंजी है', पढ़िए स्वामी विवेकानंद के शक्तिशाली विचार

swami vivekananda jayanti 2020: 'दृढ़ता ही सफलता की कुंजी है', पढ़िए स्वामी विवेकानंद के शक्तिशाली विचार




“उठो जागो और जब तक लक्ष्य तक ना पूछो ना रुको”

 स्वामी विवेकानंद आज भी देश और दुनिया के करोड़ों लोगों को प्रेरणा देते हैं खासकर युवाओं को.

 स्वामी विवेकानंद का नाम लेते ही एक ऐसें  तेजस्वी युवा सन्यासी की छवि मन में उभरती है.

जो ज्ञान के अथाह भंडार थे. स्वामी विवेकानंद की सोच का दर्शन विश्व बंधुत्व की भावना से भरा हुआ था.

 वह ऐसा समाज चाहते थे जहां बड़े से बड़ा सत्य सामने आ सके.

दरअसल विवेकानंद के लिए सच ही उनका देवता था. पूरी दुनिया को अपना देश मानते थे.

 इनका कहना था “सत्य एक ही है और वहां पहुंचने के लिए रास्ते अलग-अलग है”

 भारत की वैदिक परंपरा को वैश्विक पटल पर रखने वाले स्वामी विवेकानंद. धार्मिक आधार पर एक दूसरे पर एक दूसरे पर श्रेष्ठता के जगह सार्वभौमिक धर्म की कल्पना करते थे.

 विवेकानंद भारत की मिट्टी को अपने लिए सबसे बड़ा स्वर्ग मानते थे. वह मानव सेवा में यकीन रखते थे.

 और कहते थे- “ वह ना ही नेता है और ना ही राजनीति के आंदोलनकारी”
 स्वामी जी का ध्यान बस आत्मा पर रहता था  वो कहते थे कि जब आत्मा ठीक रहेंगे तो सब कुछ ठीक रहेगा.

 “12 जनवरी को देश के संत दार्शनिक और करोड़ों युवाओं के प्रेरणास्रोत स्वामी विवेकानंद जी का जन्म दिवस है”

इस मौके पर लोग सोशल मीडिया पर स्वामी विवेकानंद जी के प्रेरणादायी विचार, क्वेट्स और फोटो शेयर कर रहे हैं।

 यहां हम स्वामी विवेकानंद के कुछ अमर विचारों को आपके साथ साझा कर रहे हैं.

जो लोगों को एक अलग ऊर्जा का संचार करने की क्षमता रखते हैं।

"आप जैसा सोचते हैं वैसा बन जाते हैं" 

(इसका मतलब हम जो कुछ भी हैं वह अपने विचारों की देन हैं, इसलिए इस बात का बहुत ध्यान रखें  आप क्या सोच रहे हैं।
शब्दों का निर्माण विचारों के बाद होता है, विचार जीवित रहते हैं और दूर तक जाते हैं)

"दुढ़ता ही सफलता की कुंजी है"

यदि आप सफल होना चाहते हैं तो आपके अंदर एक जबरदस्त दृढ़ इच्छाशक्ति होनी चाहिए।

'मैं पूरा समुद्र पी जाऊंगा' या 'मैं जिधर चाहूंगा पहाड़ उधर को ही खिसकेगा', ऐसा कोई दृढ़ आत्मा ही कह सकती है।

आपके भीतर ऐसी ही दृढ़ ऊर्जा और इच्छाशक्ति होनी चाहिए।
किसी के भीतर ऐसा संकल्प हो और वह कठिन परिश्रम करे तो किसी भी मुश्किल लक्ष्य को भेद सकता है।






 तो चलिए आज उनके जीवन के बारे में करीब से जानने के लिए कोशिश करते हैं


 सरकार की पहल


 2011 में मलेशियाई सरकार ने इस अवसर को चिह्नित करने के लिए एक डाक टिकट पेश किया।

भारत के युवा मामले और खेल मंत्रालय ने 2013 को स्वामी विवेकानंद की 150 वीं जयंती के वर्ष के रूप में मनाने का निर्णय लिया।

केंद्रीय मानव संसाधन और विकास मंत्रालय और भारत के केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने सभी स्कूलों को

विवेकानंद के कार्यों और आदर्शों में स्कूली बच्चों के हितों को नवीनीकृत करने के लिए स्कूलों में विवेकानंद की जयंती मनाने के लिए कहा।

सीबीएसई के एक वरिष्ठ शिक्षा अधिकारी ने बयान में कहा- "एनसीईआरटी के अधिकारियों ने कहा कि परिषद भारत के 15 महान विचारकों के विचारों से युक्त एक पूरक पुस्तक तैयार कर रही है।

पाठ्यपुस्तक विकास के लिए विशेषज्ञ समिति का प्रयास होगा कि अब तक शामिल नहीं किए गए नामों को शामिल किया जाए। बच्चों पर पाठ्यक्रम और पाठ्यपुस्तक सामग्री का भार स्वीकार्य सीमा के भीतर शेष है।

12 जनवरी 2013 को, भारत सरकार द्वारा एक डाक टिकट जारी किया गया था। 

भारत के राष्ट्रपति श्री प्रणव मुखर्जी ने रुपये का विशेष स्मारक सिक्का सेट जारी किया।

150 और रु। 12 जनवरी 2013 को स्वामी विवेकानंद की ate 150 वीं जयंती मनाने के लिए 5


राजनीतिक दल 


दक्षिण कन्नड़ जिले की राजनीतिक पार्टियों, कर्नाटक ने शहर भर में विभिन्न समारोहों और कार्यक्रमों में विवेकानंद की वंदना की।

 तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता ने बताया कि विवेकानंद का जीवन और शिक्षाएं उनके लिए बहुत बड़ी प्रेरणा रही हैं

और वे विवेकानंद को अपना "राजनीतिक शिक्षक" मानते हैं।

 उसने राज्य के विवेकानंद सांस्कृतिक केंद्र के कल्याण के लिए तमिलनाडु सरकार की ओर से 20 मिलियन (यूएस $ 280,000) का फंड मंजूर किया।

विश्व कांग्रेस 2012 धर्म 



2012 में, विश्व धर्म संस्थान (वाशिंगटन काली मंदिर के) द्वारा 3-दिवसीय विश्व कांग्रेस सम्मेलन का आयोजन किया गया था,

 बर्टन्सविले, मैरीलैंड, ने ए संसद के लिए विश्व धर्म परिषद, शिकागो, इलिनोइस के साथ मिलकर 150 वां आयोजन किया स्वामी विवेकानंद का जन्मदिन

यह आयोजन भारत के दूरदर्शी भिक्षु स्वामी विवेकानंद की 150 वीं जयंती के रूप में मनाया जाता है,

जिन्होंने सितंबर 1893 में शिकागो में विश्व धर्म संसद को संबोधित किया था,

जो उत्साह, सहिष्णुता, कट्टरता और कट्टरता जैसी बुराइयों को खत्म करने के लिए एक मार्ग के रूप में सहिष्णुता और सार्वभौमिक स्वीकृति दोनों के लिए कहता है।

एक नए वैश्विक नागरिक समाज को बनाने के प्रयासों में दुनिया के सभी धार्मिक और आध्यात्मिक समुदाय के नेताओं को शामिल करें

लोकप्रिय मीडिया 


एक द्विभाषी फिल्म द लाइट: स्वामी विवेकानंद को उनकी 150 वीं जयंती पर स्वामी विवेकानंद को श्रद्धांजलि के रूप में भारत में बनाया गया था।

फिल्म के निर्देशक टूटू सिन्हा ने एक साक्षात्कार में कहा- "मैंने तृष्णा और राजमहल जैसे धारावाहिकों का निर्देशन किया है।

मैंने धारावाहिक साधक बनखापा को उसके 1000 वें एपिसोड तक भी निर्देशित किया है।

मैं हमेशा से स्वामीजी पर एक फिल्म बनाना चाहता था।"

बंगाली थियेटर ग्रुप लोककृष्ण ने जयंती मनाने के लिए एक नाटक बिली का मंचन किया।

बंगाली थियेटर अभिनेता दयाशंकर हलधर ने इस नाटक में स्वामी विवेकानंद की भूमिका निभाई।


Sorce - wikipedia, Livehindustan.com


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