गुरुवार, 9 जनवरी 2020

खाड़ी संकट (Gulf crisis ) इतिहास, अमेरिका ईरान विवाद, और कासिम सुलेमान के हत्या के बाद तनाव |

खाड़ी संकट 


खाड़ी देशों के बीच आपसी मतभेद का इतिहास काफी पुराना है.
समय-समय पर हमने इन देशों के बीच कई बड़े और विभातशय  घटनाओं को देखा है.

 इन देशों ने व्यापार से लेकर हमलो तक एक दूसरे को नुकसान पहुंचा कर अपने शक्ति का प्रदर्शन किया है.
कई हमलों में लाखों लोगों की जान गई.

कभी तेल को लेकर तो कभी विस्तार वादी नीति के कारण यह देश हर लिहाज से नुकसान करते रहे हैं. और पश्चिमी देश अमेरिका समेत इसमें राजनीतिक रोटियां सेकते रहते हैं

 अमेरिका ईरान की बात करें तो इन दोनों मुल्कों के बीच फिर से हालात बिगड़ रहे हैं.

 परमाणु समझौते को लेकर भी काफी विवाद रहा. कई शर्तों को मानने के बाद भी शक के चलते ईरान के साथ हुए परमाणु समझौते से अमेरिका ने  किनारा कर लिया.

 और अब ईरान की कमांडर कासिम सुलेमान की हत्या के बाद तनाव काफी बढ़ गया है.  जो बढ़ता ही जा रहा है.

जहां ईरान दो टूक शब्दों में बदलें  की बात कर चुका है. वहीं अमेरिका भी जवाबी कार्रवाई की बात कर रहा है.

खाड़ी में शांति स्थापित करने के लिए यह अच्छे संकेत नहीं है.

 यह विवाद यदि शांत नहीं हुआ तो इसका असर दुनिया पर बहुत भयानक हो सकता है.

इस विवाद का असर कच्चे तेल पर पड़ रहा है साथ ही साथ सोने पर भी पड़ रहा है. 

 दुनिया की छोटी बड़े देश तेल के लिए कहीं ना कहीं खाड़ी देशों पर ही निर्भर है. इसलिए इस विवाद की जद में कई शक्तिशाली देश भी आएंगे.

 तो चलिए जानते हैं खाड़ी के बीच बढ़ते संकट के बारे में. साथ ही बात करेंगे अमेरिका ईरान के बीच के मुद्दे के बारे में. 

 इसके अलावा चर्चा करेंगे खाड़ी संकट के इतिहास के बारे में? 

 अमेरिका ईरान के बीच तनाव शिखर पर है. इसेसे खाड़ी संकट एक बार फिर से गहरा गया है.

अमेरिकी हमले में ईरान के जनरल कासिम सुलेमान के हत्या के बाद. लगतार दोनों देश एक दूसरे को धमकियां दे रहे हैं.

इसका वैश्विक बाजार पर बहुत बुरा असर पड़ रहा है. कच्चे तेल में इजाफा देखा जा रहा है और कई देशों में ध्रुवीकरण तेज हो गई हैं

 अमेरिका ईरान ताजा विवाद


 दरअसल अमेरिका ने 3 जनवरी के दिन बगदाद हवाई अड्डे के पास एक ड्रोन हमला किया.

 इस हमले में जनरल कासिम सुलेमान को निशाना बनाया गया था. और इस हमले में सुलेमान की हत्या भी हो गई.

 इस घटना को लेकर दोनों देश एक दूसरे को धमकियां दे रहे हैं
. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि यदि ईरान कासिम सुलेमान के मौत का बदला लेने की कोशिश करेगा.. तो अमेरिका बड़ी जवाबी कार्रवाई करेगा.

और ईरानी सांस्कृतिक स्थलों पर बमबारी की जाएगी

 अमेरिका चाहता है कि इराक में ईरान का दखल ना हो. इसीलिए उन्होंने इराक से अमेरिकी सैनिकों की वापसी से किसी भी संभावना के लिए इंकार किया है.

 ईरान ने आक्रामक रुख अपनाते हुए इराक में स्थित अमेरिकी सैनिकों के दो ठिकानों पर मिसाइल से 8 जनवरी को हमला किया. ईरान ने इसे जनरल कासिम सुलेमान के हत्या का जवाबी कार्रवाई बताया

 ईरान की ओर से कहा गया है कि उसने अभी अपनी सैन्य क्षमताओं की झांकी ही दिखाई है.

 अगर अमेरिका ने और फिर से हमला किया तो उसे सख्त जवाब दिया जाएगा.

 अमेरिका ने ईरान इराक और ओमान में नागरिक विमान के उड़ान के लिए रोक लगा दिया है.

 इस बीच भारत में स्थित ईरानी राजदूत ने कहा है कि अमेरिका और ईरान के बीच शांति स्थापित करने के लिए भारत के किसी भी कदम का इरान स्वागत करेगा.

 भारतीय विदेश मंत्रालय ने भारत के नागरिकों को इराक की यात्रा से बचने की सलाह दी है.

अमेरिका और ईरान का इतिहास 


 2018 में डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान से परमाणु समझौता खत्म की और उस पर कई प्रतिबंध लगा दिए

 जिससे ईरान की अर्थव्यवस्था में हलचल मच गई. जिससे दोनों  देशों के संबंध लगातार बिगड़ते चले गए

* हालांकि ईरान का परमाणु कार्यक्रम 1950 के दशक में अमेरिका के सहयोग से ही शुरू हुआ था

* लेकिन 1979 में सफल इस्लामी क्रांति के बाद ईरान और अमेरिका के रिश्तों में मनमुटाव पैदा हो गया

* मनमुटाव इतनी गहरी हो गई और समय के साथ मनमुटाव बढ़ता चला गया

* इन दोनों देशों के बीच अविश्वास की जो दीवार खड़ी हुई उसका असर आज सीधा देखा जा सकता है

* एक जमाने में ईरान मध्य पूर्व में अमेरिका का सबसे बड़ा सामरिक सहयोगी था

* ईरान के तत्कालीन शासक रजा साहब ने अमेरिका की सहायता से 1950 ईस्वी में पहला परमाणु कार्यक्रम की शुरुआत की है

 * एटम फॉर पीस कार्यक्रम के जरिए अमेरिका ईरान में पहला परमाणु बिजली संयंत्र बनाना शुरू किया

* लेकिन इस परियोजना के पूरे होने से पहले ही ईरान में राजनीतिक उठापटक शुरू हो गई

* 1979 में ईरानी छात्रों ने 52 अमेरिकी दूत  वासियों को 1 साल के लिए बंधक बना लिया

* इसके कारण इराक के सद्दाम हुसैन ने ईरान पर हमला बोल दिया

* ईरान इराक के बीच करीब 8 साल तक युद्ध चला. इसमें लाखों सैनिक मारे गए

* इस युद्ध में अमेरिका सद्दाम हुसैन का साथ दीया
* जिससे ईरान अमेरिका संबंध और बिगड़ गए

* उधर ईरान में युद्ध के कारण परमाणु कार्यक्रम अधर में लटका रह गया


* और परमाणु कार्यक्रम बंद करा दिया गया

* लेकिन मध्य पूर्व के बढ़ती चुनौतियों को मध्य नजर रखते हुए ईरान ने पुणे 1990 में रूस के सहयोग से परमाणु कार्यक्रम शुरू किया

* अमेरिका और यूरोपीय देशों के अलावा उसके कई पड़ोसी देश में इसके परमाणु कार्यक्रम के विरोध में सामने आए

* इजराइल ने इसे अपने अस्तित्व के लिए खतरा बताया तो सऊदी अरब इसें  मध्य पूर्व में सैनिक महत्वाकांक्षाओ  से जोड़कर देखा

* लेकिन तमाम विरोध के बाद भी ईरान अपने परमाणु कार्यक्रमों पर आगे बढ़ता गया

* इसके बाद भी लगातार ईरान यह दावा करता रहा कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्वक है और यह ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए है

* लेकिन पश्चिम के देश ईरान से सहमत नहीं हुए और उस पर कई प्रतिबंध लगा दियें

* आखिर 2015 में वियना समझौता हुआ जिसे ईरान परमाणु समझौता भी कहा जाता है


* लेकिन डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद उनको और लगने लगा कि ईरान वियना समझौते का इस्तेमाल परमाणु हथियार बनाने के लिए कर रहा है

* तब साल 2018 में ईरान के साथ हुए ऐतिहासिक परमाणु समझौते से अमेरिका खुद को अलग कर दिया

* अमेरिका ने ईरान पर प्रतिबंध भी लगा दिए. और दुनिया के कई देशों को धमकी भी दिया कि जो भी ईरान के साथ व्यापार करेगा वह अमेरिका के साथ कारोबारी संबंध नहीं रख पाएगा

 प्रथम खाड़ी युद्ध 1991


* 1980 में इराक का ईरान पर हमला

* यह लड़ाई 8 साल तक चला

* इस लड़ाई में अमेरिका ने इराक का साथ दिया

* सोवियत संघ ने  भी सद्दाम हुसैन की मदद की

* एक समझौते के साथ युद्ध खत्म हुआ

* इस लड़ाई में करीब 500000 ईरानी और इराकी मारे गए

* ईरान पर इराक रसायनिक हथियारों का भी प्रयोग किया

* इराक ने 1991 में कुवैत पर कब्जा कर लिया

* 6 महीने में ही तेल का उत्पादन 90% गिर गया

 दूसरी खाड़ी युद्ध 2003


* 2003 में हुआ दूसरी खाड़ी युद्ध

* सद्दाम हुसैन को इराक से बेदखल करना था इसका मकसद

* इराक में लोकतंत्र की स्थापना करना

* विनाशकारी हथियारों को समाप्त करना इसका प्रमुख उद्देश्य था

* अमेरिका ने ऑपरेशन इराक स्वतंत्रता का संचालन किया

* यूनाइटेड किंगडम ऑस्ट्रेलिया पोलैंड की संयुक्त सेना भी इराक पर हमला किया

* सद्दाम हुसैन की सरकार का हुआ खात्मा

* आखिरकार अमेरिकी सेनाओं ने इराक की राजधानी बगदाद पर कब्जा कर लिया और सद्दाम हुसैन का नामोनिशान मिटा दिया


 पिछले कई सालों से सऊदी अरब और ईरान की लड़ाई से पूरा खाड़ी देश परेशान है.

ईरान एक मजबूत और शिया बहुल देश है. जो अमेरिका,  अरब और सऊदी अरब की आंखों की किरकिरी होने के कारण भी अपने मजबूत राष्ट्रवाद की चलतें  जिंदा और आबाद है.

 मध्य पूर्व का तेल दुनिया का आर्थिक प्राण है. पश्चिमी यूरोप अपना तीन चौथाई तेल अरब देशों से आयात करता है.

 कच्चे तेल का सबसे बड़ा मार्ग और और हुरमुच की  खाड़ी को माना जाता है जो अभी संकट में घिरा हुआ है|

 दुनिया के सैन्य शक्ति में ईरान भले ही पीछे हो लेकिन बहुत भौगोलिक परिस्थितियों में वह बहुत आगे हैं

 इस समुद्री इलाके से ही मध्य पूर्व से निकलने वाला तेल अमेरिका यूरोप अफ्रीका और दुनिया के अन्य बाजारों में जाता है
 और इसें  ईरान बाधित कर दें तो दुनिया की अर्थव्यवस्था कम समय में ही चौपट हो सकती है

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