गुरुवार, 12 दिसंबर 2019

इसरो ने लॉन्च किया RISAT-2BR1 सैटलाइट, के. सिवन बोले -यह सफलता एक मिल का पत्थर साबित होगा

Live: इसरो ने लॉन्‍च किया RISAT-2BR1 सेटेलाइट, के. सिवन बोले- यह सफलता एक मील का पत्‍थर




चेन्नई, एजेंस‍ियां। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने आज बुधवार को देश के एक नए जासूसी उपग्रह आरआइएसएटी-2बीआर 1 (RISAT-2BR1) और नौ विदेशी उपग्रहों को लॉन्‍च कर दिया।

इसरो का रॉकेट पीएसएलवी-सी48 (PSLV-C48) ने अपराह्न 3:25 बजे आरआइएसएटी-2बीआर1 के साथ उड़ान भरी।

आआइएसएटी-2बीआर1 एक रडार इमेजिंग निगरानी उपग्रह है।
 इस उपग्रह का भार 628 किलोग्राम है।

विदेशी उपग्रहों में अमेरिका की छह, इजराइल की एक, इटली की एक और जापान की एक सेटेलाइट है।

सभी उपग्रहों को सफलतापूर्वक उनकी कक्षा में स्‍थापित कर दिया गया है।
(Sorce- dainik jagaran)


External link-

मिशन PSLV-C48 और RISAT-2BR1 की खूबी जानकर मोदी जी का बादल-रडार याद आ जाएगा

सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से लॉन्च किया गया 

यह सैटेलाइट श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के लांचिंग पैड से लॉन्च किया गया।

 इसरो के मुताबिक 21 मिनट में इसे कक्षा में स्थापित करना था, जिसे सफलतापूर्वक पूरा कर दिया गया है।

अपनी इस उड़ान के साथ यह रॉकेट अंतरिक्ष अभियानों का अपना ‘अर्द्धशतक’ पूरा कर लिया है।.
साथ ही यह श्रीहरिकोटा से छोड़ा जाने वाला भी 75वां मिशन है।(sorce- amar ujala)

खास बाते 


देशी रडार इमेजिंग सेटेलाइट आरआईसैट के अलावा नौ विदेशी उपग्रह भी साथ लेकर गया रॉकेट

श्रीहरिकोटा स्थित अंतरिक्ष केंद्र के लॉन्चिंग पैड से दोपहर 3.25 बजे पीएसएलवी सी-48 हुआ लॉन्च
पीएसएलवी के जरिये इस बार एक साथ 10 सैटेलाइट आसमान में रवाना


भारतीय अन्तरिक्ष अनुसन्धान संगठन


, (संक्षेप में- इसरो) (अंग्रेज़ी: Indian Space Research Organisation, ISRO) भारत का राष्ट्रीय अंतरिक्ष संस्थान है
जिसका मुख्यालय बेंगलुरू (कर्नाटक) में है।

संस्थान में लगभग सत्रह हजार कर्मचारी एवं वैज्ञानिक कार्यरत हैं।
 संस्थान का मुख्य कार्य भारत के लिये अंतरिक्ष सम्बधी तकनीक उपलब्ध करवाना है।

 अन्तरिक्ष कार्यक्रम के मुख्य उद्देश्यों में उपग्रहों, प्रमोचक यानों, परिज्ञापी राकेटों और भू-प्रणालियों का विकास शामिल है।(sorce -wekipidia )

9 विदेशी सैटेलाइट भी भेजे गए PSLV द्वारा 


जैसा कि ISRO का पिछले कुछ मिशन्स से रिकॉर्ड रहा है –

इस रॉकेट से अपनी RISAT-2BR1 के अलावा 9 विदेशी सैटेलाइट्स भी भेजी गई हैं.

अमेरिका – 6 सैटेलाइट्स
इज़राइल – 1 सैटेलाइट
इटली – 1 सैटेलाइट
जापान – 1 सैटेलाइट
(Sorce - The lalantop )

PSLV क्या है? 

PSLV मतलब अपना देसी रॉकेट. पूरा नाम है Polar Satellite Launch Vehicle.

 ISRO इतनी सारी सैटेलाइट इसलिए ले जाता है क्योंकि PSLV की पेलोड कैपेसिटी अच्छी खासी है.

पेलोड मतलब सैटेलाइट्स, जो रॉकेट के सबसे ऊपरी हिस्से में भरी होती हैं.
पेलोड कैपेसिटी मतलब कितने वज़न की सैटेलाइट्स ले जाई जा सकती हैं|(sorce -The lalantop )

RISAT :का मतलब 



RISAT. इस नाम को तोड़कर देखिए. इसमें SAT का मतलब है सैटेलाइट.

और RI का मतलब है Radar Imaging.

 ये सैटेलाइट RISAT 1 का रेंडर मॉडल है. RISAT2BR1 की ऐसी ही है. (सोर्स – ISRO)

RISAT ISRO की रडार इमेजिंग सैटेलाइट्स की एक सीरीज़ है.
RISAT-2BR1 इस सीरीज़ की चौथी सैटेलाइट है. इससे पहले जाने वाली सैटेलाइट्स के नाम हैं –
RISAT 1 
RISAT 2
RISAT 2B

ये सारी रडार इमेजिंग सैटेलाइट्स हैं.(sorce -The lalantop )


रडार इमेजिंग क्या होता है?


सैटेलाइट से किसी पृथ्वी की जानकारी लेने का एक तरीका तो ये होता है कि फोटो खींच ली जाए

. हाई रिजॉल्यूशन कैमरों से. लेकिन मौसम खराब हुआ तो फोटो कैसे लेंगे?
कितने भी हाई रिज़ॉल्यूशन का कैमरा हो, उसके बीचे में बादल आ गए तो किसी काम का नहीं

. यहां काम आती है रडार इमेजिंग.

Sorce -the lalantop

रडार इमेजिंग में रेडियो वेब्स का इस्तेमाल किया जाता है.

रडार में एक ट्रांस्मिटर होता है जो रेडियो वेव छोड़ता है.

ये रेडियो वेव जाकर ज़मीन से टकराती है और लौटकर रडार तक आती है.
इन्हें पकड़ने के लिए एक रिसीवर लगा होता है. इन वापस लौटती रेडियो वेव्स से ज़मीन की डीटेल्स पता चलती हैं.

 बहुत सारी जगहों पर यही टेक्नीक यूज़ होती है. समुद्र में गहराई में झांकने के लिए भी. (Sorce -the lalantop )

आरआईसैट की होगी यह खासियत


05 साल तक सीमाओं की निगरानी करेगी यह सैटेलाइट
628 किलोग्राम है इस सैटेलाइट का वजन
100 किलोमीटर इलाके की तस्वीर एक साथ ले पाएगा
यह सैटेलाइट दिन और रात में एक जैसी निगरानी करेगा
माइक्रोवेव फ्रीक्वेंसी पर काम करेगा यह सैटेलाइट
एक्स बैंड एसएआर कैपेबिल्टी के चलते हर मौसम में साफ तस्वीर देगा
स्वदेश में बने खास डिफेंस इंटेलिजेंस सेंसर से है युक्त

 सिवन बोले- मील का पत्‍थर साबित होगी यह सफलता 


यह उपग्रह करीब सौ किलोमीटर के दायरे की तस्‍वीरें लेकर भेजेगा।
इसको खासतौर पर सीमा पार से होने वाली घुसपैठ रोकने के लिए तैयार किया गया है।

 इससे सीमा पार हो रहे आतंकी जमावड़े की भी जानकारी मिल सकेगी।

पीएसएलवी सीरीज के रॉकेट से होने वाली यह 50वीं लॉन्चिंग है।
 इस मौके पर इसरो के चेयरमैन के. सिवन ने कहा कि यह सफलता इसरो के सफर में मील का पत्‍थर साबित होगी।
(Sorce -dainik jagaran)

आगे क्या करेगा ISRO?


जितनी ज़्यादा सैटेलाइट्स होती हैं, उतने ज़्यादा इलाके पर नज़र रखी जा सकती है.

RISAT सीरीज़ की दो सैटेलाइट्स अभी बाकी हैं – RISAT-2BR2 और RISAT-1A.

इन्हें अगले साल लॉन्च किया जाएगा.
ISRO चीफ के सिवन ने कहा – ये इस साल का आखिरी लॉन्च था.
 हम आशा करते हैं कि अगला साल और सफलता लेकर आएगा(sorce-The lalamtop )


Sorce - Dainik jagaran,  amar ujala,  wekipidia,  The lalantop 


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