रविवार, 22 दिसंबर 2019

What is the difference between CRPC sanction 144 and curfew? ( सीआरपीसी की धारा 144 और कर्फ्यू में क्या अंतर है)

प्रदर्शन हिंसा और कानून ( धारा 144 और कर्फ्यू में अंतर)



 इतनी बड़ी आबादी वाला देश एक ऐसा देश है जहां कहते हैं,
हर मिल पर बोली बदल जाती है,  वेशभूषा  बदल जाती है,

यहां तक कि पूरा का पूरा रहन-सहन भी बदल जाता है.

 ऐसा देश जहां हर एक धर्म समुदाय के लोगों को बराबरी का हक मिला हुआ है

 यहां का लोकतंत्र का सबसे बड़ा ग्रंथ संविधान दुनिया का सबसे बड़ा लिखित संविधान है.

और भारत की संसद में लगातार नये कानून बनाए जा रहे हैं और संशोधन भी किए जा रहे हैं.

 इसके पीछे बहुत वाद-विवाद चर्चा और मंथन की जाती हैं
 इतने विभिन्नता वाले कल्चर में मतभेद और असहमति होना बहुत स्वाभाविक है.

 हमें सविधान में इसके लिए भी बकायदा प्रावधान है.

 मौलिक अधिकार के साथ हमको अभिव्यक्ति की आजादी और विरोध प्रदर्शन का भी अधिकार है.

 लेकिन प्रदर्शन करने का भी नियम कायदे हैं

 तो चलिए आज जानेंगे धरना प्रदर्शन के संवैधानिक अधिकार को और जानेंगे  धारा 144 और कर्फ्यू में क्या अंतर है? 

 साथ ही साथ समझने की कोशिश करेंगे कि सर्वजनिक संपत्ति के नुकसान पर भारतीय दंड प्रक्रिया क्या कहती हैं? 

 हाल फिलहाल में नागरिकता संशोधन कानून के  विरोध और समर्थन में देशभर में अलग-अलग हिस्सों से  धरना प्रदर्शन की खबरें आई

 कुछ प्रदर्शन हिंसात्मक हुए तो कई जगहों पर सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान भी पहुंचा

 विरोध जाहिर करने के लिए धरना प्रदर्शन का सहारा लेते हैं.

किसी भी मुद्दे पर हमारा आपका विरोध हो सकता है.

लेकिन विरोध किसी भी तरह से हिंसात्मक नहीं होना चाहिए

यह सबसे महत्वपूर्ण पहलू है. संविधान हमें धरना प्रदर्शन का अधिकार देता है यह अनुच्छेद 19 के तहत मौलिक अधिकार है


 अभिव्यक्ति की आजादी


 अनुच्छेद 19


आर्टिकल 19 (1) में कुछ अधिकार की व्यवस्था

इसमें बोलने और अभिव्यक्ति की आजादी
शांतिपूर्ण और बिना हथियार की एक जगह इकट्ठा होने की आजादी

संगम या संग बनाने की आजादी
देश में कहीं भी स्वतंत्र रूप से घूमने की आजादी

किसी भाग में निवास करने और बस जाने की आजादी के साथ साथ ही
जीविका व्यापार या कारोबार करने का अधिकार शामिल है

 हालांकि यह सारे अधिकार और सीमित या सार्वभौमिक नहीं है. अनुच्छेद 19 (2), (3), (4), (5), (6) के तहत तर्कसंगत सीमाएं भी लगाने की व्यवस्था की गई है 

देश की प्रभुता और अखंडता बरकरार रखना

लोक  व्यवस्था व सदाचार बनाए रखना

आर्टिकल 19 के तहत मिली मौलिक अधिकार पर उचित प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं

 धरना प्रदर्शन

 अनुमति जरूरी

स्थानी नियम कायदों की जानका

स्थानीय प्रशासन और पुलिस से अनुमति

पुलिस से नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट लेना जरूरी होता है
कानून व्यवस्था बिगड़ने नहीं चाहिए

प्रदर्शन के लिए अनुमति से जुड़े प्रस्ताव पर सभी जानकारियाो का  जिक्र करना जरूरी

इन्हें विरोध प्रदर्शन का कारण,  तारीख,  अवधि और भाग लेने वाले अपेक्षित लोगों की संख्या

और विरोध प्रदर्शन की मार्ग की जानकारी शामिल होनी चाहिए

प्रदर्शन आयोजित करने वाली संस्था के नाम,  पता और फोन नंबर की जानकारी होनी चाहिए

अक्सर हमें विरोध प्रदर्शन के दौरान हिंसा देखने को मिलती है
लेकिन ऐसा करके हम खुद का ही भविष्य बर्बाद कर रहे होते हैं

“ उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू का भी कहना है – कि हिंसा से जनता के संपत्ति को नुकसान पहुंचता है ऐसा करने वाले अपना ही भविष्य बर्बाद कर रहे होते हैं”


 सवाल उठता है कि धरना प्रदर्शन पर तर्कसंगत प्रतिबंध क्या है? 

राज्य की सुरक्षा,  पड़ोसी देशों के साथ मधुर संबंध, कानून व्यवस्था,  अदालत की अवमानना और देश की संप्रभुता और अखंडता कुछ ऐसी शर्ते हैं

जो तर्कसंगत प्रतिबंध की बुनियाद आधार है

सुप्रीम कोर्ट ने भी बार-बार कहां है कि विरोध जाहिर करने के नागरिकों के

मौलिक अधिकार और कानून व्यवस्था बनाए रखने के बीच संतुलन बेहद जरूरी है
इन सब बातों का ध्यान रखते हुए हमें अपने संवैधानिक अधिकारों का उपयोग करते हुए अपने कर्तव्यों का भी एहसास होनी चाहिए


 सीआरपीसी की धारा 144


जब भी देश मैं विरोध प्रदर्शन के चलते हिंसा भड़क उठती है

और उससे जान माल की हानि होने की आशंका होती है तो वहां सीआरपीसी की धारा 144 लागू कर दी जाती है

ताकि शांति बनी रहे और लॉ एंड ऑर्डर मेंटेन रहे


 आइए जानते हैं सीआरपीसी की धारा 144 क्या है? और उसकी पालन न करने पर क्या सजा हो सकती हैं? 

जब लोगों का एक समूह सार्वजनिक शांति भंग करने की इरादों से इकट्ठा होता है तो ऐसे समूह को गैरकानूनी समूह के रूप में माना जाता है

ऐसी प्रक्रियाओं को रोकने के लिए सीआरपीसी की धारा 144 लागू कर दी जाती है


CRPC की धारा 144 क्या है? 


 कोई भी व्यक्ति जो किसी घातक आयुध हथियार या किसी

ऐसी चीज से जिसे आक्रामक विस्फोट के रूप में उपयोग किए जाने पर जानमाल की हानि और मौत की संभावना हो,

  उससे लैस होकर किसी विधि विरुद्ध जन समूह का सदस्य होगा,

तो उसे किसी एक अवधि के लिए कारावास की सजा जिससे 2 वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है

 या आर्थिक दंड या दोनों से दंडित किया जाएगा |

 सजा का प्रावधान


किसी गैर कानूनी असेंबली में घातक हथियार से लैस होना
गैरकानूनी असेंबली यानी 5 या 5 से अधिक लोगों का जमा होना
सार्वजनिक स्थल पर 5 या 5 से ज्यादा लोग जमा नहीं हो सकते
साथी कोई भी व्यक्ति लाठी, बंदूक,  चाकू, तलवार या घातक हथियार के साथ सार्वजनिक स्थल पर नहीं जा सकता है
सिर्फ पुलिस और सुरक्षाकर्मियों को छूट दी गई है
144 के तहत दोषी पाए जाने पर धारा 107 धारा 151 के तहत गिरफ्ता

जिसमें 1 साल से लेकर 3 साल तक सजा का प्रावधान

पुलिस या सुरक्षा बलों को उनके काम से रोकने पर भी
 सजा का प्रावधान


 लागू करने का प्रावधान


धारा 144 का आदेश न्यायिक नहीं होता है

यह कार्यपालिका या प्रशासनिक आदेश होता है

जिसे लोग व्यवस्था और शांति बनाए रखने के लिए लागू किया जाता है

आदेश जारी करने की शक्ति केवल कार्यपालक मजिस्ट्रेट को दी गई है

न्यायिक मजिस्ट्रेट को नहीं

इसे लागू करने के लिए कार्यपालक मजिस्ट्रेट एक नोटिफिकेशन जारी करता है

और इसके बाद उस इलाके में धारा 144 लागू हो जाता है
धारा 144 एक बार में  अधिकतम 2 माह के लिए लागू किया जा सकता है
विशेष परिस्थिति में राज्य सरकार 6 महीने के लिए बढ़ा सकती हैं

 कर्फ्यू



धारा 144 और कर्फ्यू में काफी फर्क है

जब हालात ज्यादा खराब हो जाता है तो कर्फ्यू लगाया जाता है

धारा 144 में जहां घर से निकलने और अपने काम काज करने की इजाजत होती हैं वही

कर्फ्यू में कोई भी व्यक्ति अपने घर से बाहर नहीं निकल सकता है

स्कूल कॉलेज सब बंद होता है एक निश्चित समय की छूट दी जाती है जिसमें लोग अपनी जरूरत वाली काम  कर सकते हैं

 निष्कर्ष
लोकतंत्र में अपनी आवाज उठाने के लिए हिंसा का सहारा लेना सही नहीं ठहराया जाता है
आईपीसी में इसके लिए कई प्रावधान है


  सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान

 सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस


सार्वजनिक संपत्ति के नुकसान होने पर जिम्मेदारी आरोपी की होगी

आरोपी को खुद को निर्दोष साबित करना होगा

निर्दोष साबित होने तक आरोपी ही जिम्मेदार माना जाएगा

दंगा करने वालों से सार्वजनिक संपत्ति के नुकसान की वसूली की जाए


 सार्वजनिक संपत्ति नुकसान कानून 1984

 प्रावधान

सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने पर 5 साल जेल की सजा

जेल के साथ या जुर्माना यह दोनों की सजा

वही न्यूनतम सजा 6 महीने से कम नहीं होगी

आईपीसी की धारा 425 के तहत आगजनी या विस्फोटक पदार्थ से नुकसान पर 1 साल कैद की सजा

कैद की सजा 1 साल से कम नहीं होगी

कैद को 10 साल तक भी बढ़ाया जा सकता है

जुर्माना भी वसूला जा सकता है और जमानत के लिए विशेष प्रावधान है


 भारतीय दंड संहिता 1860

 अध्याय 8

सार्वजनिक शांति के खिलाफ धारा 141 से 160 तक प्रावधान

धारा 141 में गैरकानूनी काम, दंगे भड़काना प्रमुख अपराध है
किसी कानून के या किसी कानूनी प्रतिक्रिया के निष्पादन का प्रतिरोध करना

अपराधिक बल से किसी व्यक्ति की संपत्ति पर कब्जा करना

धारा 142 में विधि विरुद्ध जन समूह का सदस्य होना

धारा 143 में गैरकानूनी जन समूह का सदस्य होने पर कारावास की सजा

करावास को 6 महीने बढ़ाने आर्थिक दंड या दोनों से दंडित करने का प्रावधान है

धारा 107 के अनुसार उपेंद्र करने पर एक अवधि के लिए करावास की सजा

सजा को 1 महीने तक बढ़ाया जा सकता है

एक सो रुपए तक का आर्थिक दंड या दोनों से दंडित करने का प्रावधान भी है




































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