रविवार, 15 दिसंबर 2019

रिसर्व बैंक ऑफ़ इंडिया की मौद्रिक नीति (monetary policy of RBI ) 2019-020

RBI की मौद्रिक नीति 



चर्चा में क्यों? 


RBI की मौद्रिक नीति समिति यानी MPC ने बीते 5 दिसंबर को चालू वित्त वर्ष 2019-20 की पांचवी द्विमासिक मौद्रिक समीक्षा का ऐलान किया।

 इस समीक्षा में आरबीआई ने रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया है और इसे 5.15 फीसदी पर ही बनाए रखने का फैसला लिया है।

 रिजर्व बैंक की ऋणनीति की समीक्षा में रेपो रेट नहीं घटाने पर सहमति बनी है।

बढ़ती आर्थिक सुस्ती और घटती विकास दर के बीच आई इस मौद्रिक नीति के अर्थव्यवस्था पर व्यापक असर के कयास लगाए जा रहे हैं।


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इस बार की मौद्रिक नीति के प्रमुख बिंदु


रेपो दर में कोई बदलाव नहीं 5.15 फ़ीसदी पर बना रहेगा।
मौजूदा वित्त वर्ष के लिए जीडीपी की वृद्धि दर का अनुमान 6.1 फीसद से घटाकर 5 फ़ीसदी कर दिया गया।

तमाम संकेतक ऐसा इंगित कर रहे हैं कि मांग अभी भी कमजोर स्थिति में बनी हुई है।

आरबीआई उदार रुख बनाए रखेगा ताकि आर्थिक वृद्धि को बढ़ावा दिया जा सके।

आरबीआई ने यह संकेत भी दिया कि आगामी मौद्रिक नीति समीक्षा में कुछ अन्य कदम भी उठाए जा सकते हैं।

मौजूदा वित्त वर्ष की दूसरी छमाही के लिए खुदरा मुद्रास्फीति अनुमान बढ़ाकर 5.1-4.7 फ़ीसदी किया गया।

3 दिसंबर तक की उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक विदेशी मुद्रा भंडार 451.7 अरब डॉलर पर रहा। पिछले वित्त वर्ष की समाप्ति से यह 38.8 अरब डॉलर ज्यादा रहा।

छठी मौद्रिक नीति समीक्षा के लिए अगली बैठक चार से छह फरवरी 2020 के बीच होगी।
(Sorce - ध्येय आईएएस )

क्या है मौद्रिक नीति?



भारतीय रिजर्व बैंक हर दूसरे महीने मौद्रिक नीति की समीक्षा करता है।
यह काम RBI की मौद्रिक नीति समिति करती है।

इस समीक्षा में अर्थव्यवस्था की हालत को देखते हुए नीतिगत ब्याज दरें घटाने या बढ़ाने का फैसला लिया जाता है।

दूसरे शब्दों में कहें तो मौद्रिक नीति एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसकी मदद से रिजर्व बैंक अर्थव्यवस्था में पैसे की आपूर्ति को नियंत्रित करता है।

वहीँ राजकोषीय नीति के ज़रिए सरकार समग्र मांग और अर्थव्यवस्था पर सरकारी खर्च और करों के असर को नियंत्रित किया जाता है।(sorce - ध्येय आईएएस )


क्या मक़सद होता है मौद्रिक नीति समीक्षा का
?


मौद्रिक नीति से कई मकसद साधे जाते हैं।

इनमें महंगाई पर अंकुश, कीमतों में स्थिरता और टिकाऊ आर्थिक विकास दर का लक्ष्य हासिल करना शामिल है।
इसके अलावा रोजगार के अवसर तैयार करना भी इसके लक्ष्यों में से एक है।

अर्थव्यवस्था में पैसे की आपूर्ति के नियंत्रण के लिए बैंकों के कैश रिजर्व रेशियो या ओपन मार्केट आपरेशन का सहारा लिया जाता है।

रेपो रेट और रिवर्स रेपो रेट के जरिए कर्ज की लागत को बढ़ाया या घटाया जा सकता है।(sorce -ध्येय आईएएस )


आसान, सख़्त और तटस्थ मौद्रिक नीति


सरल या आसान मौद्रिक नीति:

नरम रुख रखने पर आरबीआई मौद्रिक नीति में प्रमुख ब्याज दरों को घटाता है।

 इससे अर्थव्यवस्था में पैसों की आपूर्ति बढ़ने का रास्ता खुल जाता है।
 बाजार में नकदी बढ़ने से आर्थिक गतिविधियां बढ़ जाती हैं।

इसे सरल या आसान मौद्रिक नीति कहा जाता है।

सख़्त मौद्रिक नीति: 

जब केंद्रीय बैंक अपना रुख कठोर करता है तो ब्याज दरों को बढ़ाया जाता है।

इससे अर्थव्यवस्था में नकदी घट जाती है। इसका उत्पादन और खपत दोनों पर विपरीत असर होता है।

 इससे अर्थव्यवस्था की रफ्तार घटती है। इसे सख़्त मौद्रिक नीति कहा जाता है।

तटस्थ मौद्रिक नीति: 

जब मौद्रिक नीति में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया जाता तो इसे तटस्थ नीति कहा जाता है।(sorce -ध्येय आईएएस )

मौद्रिक नीति समिति



मौद्रिक नीति समिति एक छह सदस्यीय समिति होती है जिसका गठन केंद्रीय सरकार द्वारा किया जाता है।

इस समिति का गठन उर्जित पटेल कमिटी की सिफारिश के आधार किया गया था।

समिति की अध्यक्षता आरबीआई गवर्नर करता है।

इसमें तीन सदस्य आरबीआई से होते हैं और तीन अन्य स्वतंत्र सदस्य भारत सरकार द्वारा चुने जाते हैं।

आरबीआई के तीन अधिकारीयों में एक गवर्नर, एक डिप्टी गवर्नर तथा एक अन्य अधिकारी शामिल होता है।

मौद्रिक नीति निर्धारण के लिए यह समिति साल में चार बार बैठक करती है और सर्वसम्मति से निर्णय लेती है।(sorce -ध्येय आईएएस )

मौद्रिक नीति समीक्षा में प्रयुक्त प्रमुख शब्दावलियाँ


बैंक रेट: 

केंद्रीय बैंक द्वारा वाणिज्यिक बैंकों को दिए जाने वाले लोन पर जो ब्याज दर लगाया जाता है उसे बैंक दर कहते हैं। अमूमन ये लॉन्ग टर्म लोन होता है।

रेपो रेट:

 रेपो रेट वह दर होती है जिस पर बैंकों को आरबीआई कर्ज देता है। बैंक इस कर्ज से ग्राहकों को ऋण देते हैं। अमूमन ये शार्ट टर्म लोन होता है।

रिवर्स रेपो रेट:

 यह रेपो रेट से उलट होता है। यह वह दर होती है जिस पर बैंकों को उनकी ओर से आरबीआई में जमा धन पर ब्याज मिलता है।

कैश रिजर्व रेश्यो: 

देश में लागू बैंकिंग नियमों के तहत हरेक बैंक को अपनी कुल नकदी का एक निश्चित हिस्सा रिजर्व बैंक के पास रखना होता है। इसे ही कैश रिजर्व रेश्यो यानी सीआरआर या नकद आरक्षित अनुपात कहते हैं।

तरलता समायोजन सुविधा: 

तरलता समायोजन सुविधा यानी लिक्विडिटी एडजस्टमेंट फैसिलिटी के माध्यम से आरबीआई रेपो दर और रिवर्स रेपो दर आदि का निर्धारण करती है।


क्रय प्रबंधक का सूचकांक (पीएमआई):

 ये विनिर्माण क्षेत्र के आर्थिक हालत का एक संकेतक है। पीएमआई पांच प्रमुख संकेतकों पर निर्भर करता है:

 नए आदेश, इन्वेंट्री स्तर, उत्पादन, आपूर्तिकर्ता वितरण और रोजगार का माहौल।(sorce -ध्येय आईएएस )


विहंगावलोकन


अधिनियम में निर्दिष्ट लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए मौद्रिक लिखतों के उपयोग के संबंध में केंद्रीय बैंक की मौद्रिक नीति को दर्शाती है।

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) को मौद्रिक नीति के संचालन की जिम्मेदारी निहित है।

 यह ज़िम्मेदारी भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 के तहत स्पष्ट रूप से अनिवार्य है।(sorce- RBI official )

 आरबीआई एक्ट 1934 का संशोधन


मौद्रिक नीति का मुख्य उद्देश्य वृद्धि के उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए मूल्य स्थिरता बनाए रखना है।

 मूल्य स्थिरता संधारणीय वृद्धि की आवश्यक शर्त है।

मई 2016 में, भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) अधिनियम, 1934 को संशोधित किया गया

 जिससे कि लचीले मुद्रास्फीति लक्ष्य निर्धारण ढांचे के कार्यान्वयन के लिए सांविधिक आधार प्रदान किया जा सके।

संशोधित आरबीआई अधिनियम में रिज़र्व बैंक के परामर्श से प्रत्येक पांच वर्ष में एक बार भारत सरकार द्वारा मुद्रास्फीति लक्ष्य निर्धारित करने का प्रावधान भी किया गया
है।

तदनुसार, केंद्रीय सरकार ने सरकारी राजपत्र में 5 अगस्त 2016 से 31 मार्च 2021 तक की अवधि के लिए लक्ष्य के रूप में 4 प्रतिशत उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) मुद्रास्फीति अधिसूचित किया है

 जिसमें ऊपरी सहनशीलता सीमा 6 प्रतिशत और नीचली सहनशीलता सीमा 2 प्रतिशत होगी।

केंद्रीय सरकार ने निम्नलिखित को उन कारकों के रूप में अधिसूचित किया है जिनसे मुद्रास्फीति लक्ष्य हासिल करने में असफलता मिल सकती है

जैसे
(क) औसत मुद्रास्फीति किन्हीं तीन लगातार तिमाहियों के लिए मुद्रास्फीति लक्ष्य के ऊपरी सहनशीलता स्तर से अधिक हो, या

 (ख) औसत मुद्रास्फीति किन्हीं तीन लगातार तिमाहियों के लिए नीचले सहनशीलता स्तर से कम हो।

मई 2016 में भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम में संशोधन करने से पहले, लचीला मुद्रास्फीति लक्ष्य निर्धारण ढांचे को सरकार और भारतीय रिज़र्व बैंक के बीच 20 फरवरी 2015 को मौद्रिक नीति ढांचे पर हुए करार द्वारा नियंत्रित किया गया था।(sorce - RBI official )

मौद्रिक नीति ढांचा 

संशोधित भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम स्पष्ट रूप से रिज़र्व बैंक के लिए देश के मौद्रिक नीति ढांचे को परिचालित करने के लिए विधायी अधिदेश का प्रावधान करता है।

इस ढांचे का लक्ष्य वर्तमान और उभरती समष्टि-आर्थिक स्थिति और मुद्रा बाजार दरों को रेपो दर के आसपास

संचालित करने के लिए चलनिधि स्थिति के उतार-चढ़ाव के आकलन के आधार पर नीति (रेपो) दर निर्धारित करना है।

मुद्रा बाजार के माध्य्म से रेपो दर बदलाव पूरी वित्तीय प्रणाली में अंतरित होते हैं

जो आगे मुद्रास्फीति और वृद्धि के मुख्य निर्धारक तत्व समग्र मांग को प्रभावित करते हैं।

रेपो रेट की घोषणा के बाद, रिज़र्व बैंक द्वारा तैयार किए गए परिचालन ढांचे में उचित कार्रवाई के माध्यम से दैनिक आधार पर चलनिधि प्रबंधन की परिकल्पना की गई है

, इस कार्रवाई का लक्ष्य परिचालन लक्ष्य-भारित औसत कॉल दर (डब्ल्यूएसीआर) को रेपो दर के आसपास संचालित करना है।
परिचालन ढांचे को मौद्रिक नीति रुख की अनुरूपता को सुनिश्चित करते हुए उभरती वित्तीय बाजार और मौद्रिक स्थिति के आधार पर सही और संशोधित किया गया है।

चलनिधि प्रबंधन ढांचे को पिछली बार अप्रैल 2016 में उल्लेखनीय रूप से संशोधित किया गया था।( sorce- RBI official )

मौद्रिक नीति प्रक्रिया


केंद्र सरकार द्वारा धारा 45ZB के तहत गठित मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) मुद्रास्फीति लक्ष्य को हासिल करने के लिए आवश्यक पॉलिसी ब्याज दर निर्धारित करता है।

रिज़र्व बैंक का मौद्रिक नीति विभाग (एमपीडी) मौद्रिक नीति निर्माण में एमपीसी की सहायता करता है।

अर्थव्यवस्था के सभी स्टेकधारकों के विचारों, और रिज़र्व बैंक के विश्लेषणात्मक कार्य से नीति रिपो दर पर निर्णय लेने की प्रक्रिया में योगदान करता है।

वित्तीय बाजार समिति (एफएमसी) चलनिधि की समीक्षा करने के लिए दैनिक आधार पर बैठक करता है

 ताकि सुनिश्चित किया जा सके कि मौद्रिक नीति (भारित औसत ऋण दर) का परिचालन लक्ष्य नीति रिपो दर के करीब रखा जाता है। (sorce - RBI official )

निष्कर्ष


आरबीआइ गवर्नर शक्तिकांत दास की अध्यक्षता में अभी तक जितनी भी एमपीसी की बैठक हुई है
उसमें रेपो रेट को घटाया गया है।

 दास की अध्यक्षता में ऐसा पहली बार हुआ है कि रेपो रेट को यथावत बनाए रखा गया है।

हालांकि लोग रिपोर्ट में 0.25 फ़ीसदी की कटौती की उम्मीद लगा रहे थे।

वहीं दूसरी तरफ बैंकों की तरफ से कर्ज वितरण के जो आंकड़े बाहर आये हैं उससे लगता नहीं है कि रेपो रेट की कटौती का कोई खास फायदा होगा |(sorce-ध्येय आईएएस )


Sorce - RBI official,  ध्येय आईएएस, PIB


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