बुधवार, 4 दिसंबर 2019

International day of disability

अंतरराष्ट्रीय दिव्यांग दिवस


 दुनिया की कुल आबादी 7 बिलियन से ज्यादा है इसमें से एक अरब लोग किसी न किसी दिव्यांगता के  साथ जीवन बिता रहे हैं|
 संयुक्त राष्ट्र के इन आंकड़ों से साफ है कि दुनिया की कुल आबादी की 15 फीसदी आबादी किसी न किसी तरह से दिव्यांग की श्रेणी में आते हैं. और ऐसे लोगों में 80 फ़ीसदी लोग विकासशील देशों में है. शारीरिक कमियों के बावजूद इन लोगों में कुछ खास विशेषता होती है. समाज में ऐसे लोगों के प्रति लोगों को ज्यादा संवेदनशील बनाने की जरूरत है.

 इसी मकसद से हर साल 3 दिसंबर को अंतरराष्ट्रीय दिव्यांग जन दिवस मनाया जाता है|

 दिव्यांग दिवस मनाने का उद्देश्य

इसका मुख्य मकसद दिव्यांगों के प्रति लोगों के व्यवहार में बदलाव लाने और उन्हें उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना है

दिव्यांग दिवस ऐसे लोगों को आत्म सम्मान और उनके जीवन को बेहतर बनाने के समर्थन के उद्देश्य से मनाया जाता है


 दिव्यांग दिवस मनाने का इतिहास


इस दिन के इतिहास की बात करें तो संयुक्त राष्ट्र आम सभा ने 1981 को विकलांग व्यक्तियों का अंतर राष्ट्रीय वर्ष घोषित किया था
इसके बाद राष्ट्रीय,  क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनके लिए पुनरुद्धार,  रोकथाम, प्रचार और बराबरी के मौके पर जोर देने के लिए योजना का निर्माण किया गया
अंतर्राष्ट्रीय उत्सव के लिए पूर्ण सहभागिता और समानता के थीम का चुनाव किया गया था
इस थीम के तहत समाज में दिव्यांगों को बराबरी का अवसर देने के साथ ही लोगों को जागरूक करने पर जोर दिया गया
इसके अलावा सामान्य नागरिकों की तरह ही उनकी सेहत पर भी ध्यान देने के साथ ही सामाजिक,  आर्थिक स्थिति को सुधारने जैसे मुद्दों पर ध्यान केंद्रित किया गया था
संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 1983 से 92 तक दिव्यांगों के लिए संयुक्त राष्ट्र के दशक की घोषणा की गई थी
इसके बाद से 3 दिसंबर को हर साल दिव्यांग दिवस मनाया जाता है


 अंतरराष्ट्रीय दिव्यांग दिवस के लिए थीम


 अंतरराष्ट्रीय दिव्यांग दिवस के लिए एक थीम निर्धारित किया जाता है. इस साल की थीम है दिव्यांग व्यक्तियों के नेतृत्व और उसकी भागीदारी को बढ़ावा देना 2030 के विकास के एजेंडे में एक्शन लेना|

 विकलांग से दिव्यांग की ओर कदम


दिसंबर 2015 में पीएम मोदी ने उनको दिव्यांग करने की अपील की थी
इसके पीछे उनका मानना था कि शरीर के किसी अंग से लाचार व्यक्तियों में ईश्वर से मिली कुछ खास विशेषताएं होती हैं
हर साल संयुक्त राष्ट्र की ओर से 3 दिसंबर को अंतर्राष्ट्रीय विकलांग जन दिवस मनाया जाता है
एम वेंकैया नायडू का कहना है कि इस दिवस का नामकरण अंतरराष्ट्रीय दिव्यांग दिवस के रूप में करना चाहिए
दिल्ली के विज्ञान भवन में हुए समारोह में उपराष्ट्रपति ने दिव्यांग सशक्तिकरण की दिशा में कार्य कर रहे लोगों को राष्ट्रीय पुरस्कार दिए
सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय की ओर से आयोजित की गई इस समारोह में दिव्यांगजन सशक्तिकरण में 14 श्रेणियों में 65 पुरस्कार दिए गए
 भारत के संविधान में दिव्यांगों के लिए प्रावधान
अपने सभी नागरिकों के लिए समानता स्वतंत्रता न्याय और गरिमा सुनिश्चित करता है. और स्पष्ट रूप से दिव्यांग व्यक्तियों समेत एक संयुक्त परिवार बनाने पर जोर देता है
सरकार दिव्यांगों को सक्षम और समृद्ध बनाने के लिए समय-समय पर कानून बनाती रही है
जिसका उन्हें काफी फायदा हुआ है
भारतीय संविधान के तहत विकलांगता दिव्यांग जनों का विषय संविधान की सातवीं अनुसूची में राज्य विषय में आता है
भारत सरकार हमेशा से दिव्यांग जनों के व्यक्तिगत,  सामाजिक और आर्थिक उत्थान के लिए सक्रिय रही है
सरकार  ने दिव्यांग व्यक्तियों को समाज के साथ जोड़ने के लिए कानून बनाने समेत कई उपाय किए हैं
इन उपायों का असर उनके जीवन के हर क्षेत्र में दिखाई देता है
भारत ने एशिया प्रशांत क्षेत्र में विकलांगता ग्रसित व्यक्तियों की समानता और संपूर्ण सहभागिता की एक हस्ताक्षर करता के रूप में अपनी जिम्मेदारियों को निभाते हुए विकलांग व्यक्ति समान अधिकारियों का संरक्षण और संपूर्ण सहभागिता अधिनियम 1995 पारित किया थे


 विकलांग व्यक्ति अधिनियम 1995

 प्रावधान

विकलांगता ग्रसित व्यक्तियों का अलग-अलग क्षेत्र में सशक्तिकरण का प्रमुख आधार प्रदान करना
निशक्त व्यक्तियों की समानता और संपूर्ण सहभागिता को स्वीकार और सुनिश्चित करना
आर्थिक एवं सामाजिक अधिकारों की सुरक्षा करना और उसे बढ़ावा देना
सरकारी सरकारी कार्य और सार्वजनिक क्षेत्रो  के उपक्रमों में 3 फीसदी आरक्षण देने का प्रावधान

 राष्ट्रीय नीति 2006

 दिव्यांग जनों के अधिकारों को संरक्षित करने के लिए सरकार ने 2006 में दिव्यांग व्यक्तियों के लिए राष्ट्रीय नीति घोषित की जिनके अनुसार –
दिव्यांग व्यक्ति बहुमूल्य मानव संसाधन के स्रोत हैं
बेहतर प्रशिक्षण से बेहतर जीवन संभव किया गया
मंत्रालय में दिव्यांगों के लिए मुख्य आयुक्त की नियुक्ति की गई
नियमों और आदेशों के उल्लंघन की शिकायतें सुनना
विकलांगता के क्षेत्र में काम करने के लिए 7 राष्ट्रीय स्तर के संस्थान खोले गए
संस्थान विकलांगता के अलग-अलग क्षेत्रों के लिए काम करते हैं

 इस नीति का उद्देश्य था –
विकलांगता की रोकथाम करना, दिव्यांग जनों के पुनर्वास का उपाय करना
महिला दिव्यांगों को शोषण और दुर्व्यवहार से बचाना
दिव्यांग बच्चों की देखभाल करना

 दिव्यांग अधिकार विधेयक 2016

1995 के कानून का जगह ले लिया
21 निःशक्तताओ को मान्यता दी गई
1995 के कानून की तुलना में 3 गुना अधिक प्रभावशाली
परंपरागत रूप से निःशक्तता केवल तीन समूहों के साथ था
अस्थि विकलांगता के शिकार, दृष्टिहीन और वधिर
  मानसिक निःशक्तता ,मनोवैज्ञानिक विकार,  कुष्ठ रोगी, मस्तिष्क पक्षाघात को बीमारी मानना
विधेयक के तहत सभी को दिव्यांग जनों में शामिल किया गया
दो अन्य विकलांगता ओं को भी मान्यता प्रदान की गई
वो है पार्किसंस रोग और एसिड की वजह से होने वाली विकलांगता
दिव्यांगों को मिले आरक्षण को 3 से बढ़ाकर 4 फ़ीसदी किया गया
उच्च शिक्षण संस्थानों में पांच फ़ीसदी आरक्षण का प्रावधान
न्यूनतम 40 फिर भी विकलांगता के शिकार लोगों को आरक्षण का लाभ प्राप्त होगा
संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन की फैसले  को भी अपनाया गया
इस अधिनियम के अंतर्गत नियमों का उल्लंघन करने पर धन का भी प्रावधान है
पहली बार उल्लंघन करने पर ₹10000 का जुर्माना देना होगा जबकि इसके बाद प्रत्येक उल्लंघन पर कम से कम ₹50000 और अधिकतम से अधिकतम ₹500000 का जुर्माना होगा

 दिव्यांग की परिभाषा

 भारत में ऐसे दिव्यांगों को दिव्यांग माना गया है जो 40% से कम विकलांगता के शिकार ना हो. इस स्थिति का प्रमाण मेडिकल ऑफिसर द्वारा प्रमाणित होना चाहिए|

 भारत में दिव्यांगों की स्थिति

भारत की 2.21 फ़ीसदी आबादी किसी न किसी रूप में दिव्यांग है
जनगणना 2011 के अनुसार
दिव्यांग पुरुषों की संख्या 1.50 करोड़ है
दिव्यांग महिलाओं की संख्या 1.18 करोड़ है
0.82 करोड़ शहरी क्षेत्र में रहने वाले
0.86 करोड़ ग्रामीण इलाकों में रहने वाले
49 प्रतिशत विकलांग व्यक्ति साक्षर और 34% रोजगार प्राप्त
45 फ़ीसदी विकलांग आबादी अशिक्षित है
पूरी दिव्यांग आबादी की 26 फ़ीसदी दिव्या और अशिक्षित है
शिक्षित दिव्यांगों में 59 फीसदी  दसवीं पास है
 दिक्कतों को दूर करने का लक्ष्य

आने जाने में होने वाली दिक्कतों को दूर करने का लक्ष्य

सार्वजनिक भवन, परिवहन सुविधाएं, सड़क, फुटपाथ, रेलवे प्लेटफार्म, बस स्टॉप इत्यादि परिवहन के सभी माध्यम

सार्वजनिक कार्यो में संकेतिक भाषा के इस्तेमाल को बढ़ावा

सरकारी और गैर सरकारी कार्य में अलग शौचालय की व्यवस्था

संचार जरूरतों की आपूर्ति

सूचना सेवा और सार्वजनिक दस्तावेज को आसान बनाना

ब्रेल, टेप  सर्विस, बड़े  प्रिंट और तकनीकों का इस्तेमाल शुरु हो चुका है

 दिव्यांगों को अधिक मजबूती प्रदान करना

 भारत सरकार ने दिव्यांगों को आर्थिक रूप से मज
बूती प्रदान करने के लिए कई योजनाएं शुरू की है –
कौशल विकास के जरिए दिव्यांग जनों को स्वरोजगार के लिए तैयार किया जा रहा है
सरकार ने दिव्यांग जनों तक लाभ पहुंचाने के लिए राष्ट्रीय डेटाबेस बनाना शुरू कर दिया है
और इसके लिए दिव्यांग जनों को यूनीक डिसेबिलिटी आईडी कार्ड जारी किया जा रहा है|



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