बुधवार, 11 दिसंबर 2019

Human development index 2019 (मानव विकास सूचकांक 2019)

मानव विकास सूचकांक


हाल ही में संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (United Nations Development Programme) द्वारा मानव विकास सूचकांक (Human development Index- HDI) 2019 जारी किया गया है   

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मानव विकास सूचकांक 

(United Nations Development Programme- UNDP):


  सयुंक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) एक संयुक्त राष्ट्र संघ का वैश्विक विकास कार्यक्रम है।

 यह गरीबी कम करने,आधारभूत ढाँचे के विकास और प्रजातांत्रिक प्रशासन को प्रोत्साहित करने का काम करता है 

संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम संयुक्त राष्ट्र के वैश्विक विकास नेटवर्क है, 
न्यूयॉर्क शहर में मुख्यालय, यूएनडीपी परिवर्तन के लिए अधिवक्ताओं और लोगों को बेहतर जीवन बनाने में मदद करने के लिए ज्ञान, अनुभव और संसाधनों को जोड़ता है।

UNDP संयुक्त राष्ट्र के वैश्विक विकास का एक नेटवर्क है।
इसका मुख्यालय न्यूयॉर्क में अवस्थित है

UNDP गरीबी उन्मूलन, असमानता को कम करने हेतु लगभग 70 देशों में कार्य करता है।

इसके अलावा देश के विकास को बढ़ावा देने के लिये नीतियों, नेतृत्व कौशल, साझेदारी क्षमताओं तथा संस्थागत क्षमताओं को विकसित करने और लचीलापन बनाने में मदद करता है।

  संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम 

प्रकार कार्यक्रम

संक्षिप्ति UNDP
अध्यक्ष अचीम स्टेनर
वर्तमान
स्थिति सक्रिय
स्थापना १९६५


हाईलाइट 

रैंकिंग पिछले वर्ष 130 थी. भारत में जीवन प्रत्याशा, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुंच में बढ़ोतरी के कारण भी रैंकिंग में सुधार हुआ है 2019 में 129 वे पायदान पर है 


मानव विकास सूचकांक क्या है?


मानव विकास सूचकांक एक सांख्यिकीय सूचकांक है जिसमें जीवन प्रत्याशा, शिक्षा, और आय सूचकांकों को शामिल किया जाता है.

 इन विभिन्न श्रेणियों को मिलाकर तैयार किये जाने वाले मानव विकास सूचकांक के तरीके को अर्थशास्त्री महबूब-उल-हक ने तैयार किया था. 

संयुक्त राष्ट्र द्वारा पहला मानव विकास सूचकांक 1990 में जारी किया गया था. 
प्रत्येक वर्ष इसे संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) द्वारा प्रकाशित किया जाता है|


मानव विकास सूचकांक में टॉप-10 देश

रैंकिंग देश

1 नॉर्वे

2 स्विट्ज़रलैंड

3 ऑस्ट्रेलिया

4 आयरलैंड

5 जर्मनी

6 आइसलैंड

7 हॉन्गकॉन्ग

8 स्वीडन

9 सिंगापुर

10 नीदरलैंड


पाकिस्तान की स्थिति


मानव विकास सूचकांक में पाकिस्तान ने तीन पायदान की बढ़ोतरी दर्ज की है. 

इसके अनुसार, पाकिस्तान की एच डी आई वैल्यू 0.562 है 

जबकि बांग्लादेश की वैल्यू 0.608 आंकी गई है
. यूएनडीपी द्वारा जारी सूचकांक में बांग्लादेश की रैकिंग जहां 134 है, वहीं पाकिस्तान की रैकिंग 147 है.


भारत की स्थिति 


मानव विकास सूचकांक (ह्यूमन डिवेलपमेंट इंडेक्स) के मामले में इस बार भारत की रैकिंग में एक पायदान का सुधार हुआ है। 
यूनाइटेड नेशंस डिवेलपमेंट प्रोग्राम (UNDP) की तरफ से साल 2019 के जारी ह्यूमन डिवेलपमेंट रैकिंग में कुल 189 देशों में भारत 129वें स्थान पर है 
जबकि 2018 में 130 वे स्थान पर था |


प्रमुख बिंदु:


सूचकांक के अनुसार, 189 देशों की सूची में भारत 129वें स्थान पर है।

भारत की स्थिति में एक स्थान का सुधार हुआ है, ग़ौरतलब है कि वर्ष 2018 में भारत 130वें स्थान पर था।

इस सूचकांक की वरीयता सूची में नार्वे, स्विट्ज़रलैंड, ऑस्ट्रेलिया, आयरलैंड और जर्मनी शीर्ष स्थानों पर हैं।

सूचकांक में सबसे निचले पायदान पर क्रमशः नाइजर, दक्षिण अफ्रीकी गणराज्य, दक्षिण सूडान, चाड और बुरुंडी हैं।

भारत के पड़ोसी देशों में श्रीलंका 71वें स्थान पर और चीन 85वें स्थान पर हैं।

वहीं भूटान 134वें, बांग्लादेश 135वें, म्याँमार 145वें, नेपाल 147वें, पाकिस्तान 152वें और अफगानिस्तान 170वें स्थान पर हैं।

दक्षिण एशिया वर्ष 1990 से 2018 के बीच विश्व में सबसे तेज़ गति से विकास करने वाला क्षेत्र है।

o इस अवधि में मानव विकास सूचकांक के संदर्भ में दक्षिण एशिया में 46% की वृद्धि दर्ज की गई।

o वहीँ पूर्व एशिया और प्रशांत क्षेत्र में 43% की वृद्धि हुई।

o भारत के HDI वैल्यू में 50% तक की वृद्धि हुई है. वर्ष 1990 में जहाँ यह मूल्य .431 था वहीँ वर्ष 2018 में .647 है।
रिपोर्ट के अनुसार, विश्व भर में समूह आधारित असमानता विद्यमान है, यह असमानता विशेषकर महिलाओं को प्रभावित करती है।

o रिपोर्ट के अनुसार, लैंगिक असमानता सूचकांक में 162 देशों की सूची में भारत 122वें स्थान पर है,
 वहीं पड़ोसी देश चीन (39) श्रीलंका (86) भूटान (99) और म्यांमार (106) भारत से बेहतर स्थिति में हैं।

o इस सूची में नॉर्वे, स्विट्ज़रलैंड और आयरलैंड शीर्ष पर हैं।
o यह सूचकांक महिलाओं के प्रजनन स्वास्थ्य, सशक्तीकरण, आर्थिक सक्रियता पर आधारित है।

रिपोर्ट के अनुसार, भारत में जन्म के समय पुरुषों की जीवन प्रत्याशा जहाँ 68.2 वर्ष थी वहीं महिलाओं की जीवन प्रत्याशा 70.7 वर्ष दर्ज की गई है।

रिपोर्ट के अंतर्गत, भारत में स्कूली शिक्षा के अपेक्षित वर्षों की संख्या 12.3 वर्ष आँकी गई है।

o भारत में स्कूली शिक्षा के औसत वर्षों की संख्या 6.5 वर्ष बताई गई है।


स्रोत – विकिपीडिया, द हिन्दू,  दृस्टि आईएएस, जोश जागरण 


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