मंगलवार, 10 दिसंबर 2019

नागरिकता संसोधन बिल क्या है? क्यों हो रहे है इसका विरोध

नागरिकता संशोधन विधेयक लोकसभा में पेस किया गया, क्यों हो रहा है ? इसका विरोध प्रदर्शन  |



नागरिकता संसोधन बिल (Citizen Amendment Bill) को गृहमंत्री अमित शाह ने विपक्षियों के विरोध के बाद लोकसभा में पेस कर दिया,

 नागरिकता संशोधन बिल के क़ानून  बन जाने के बाद  से  पड़ोसी देश पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से धार्मिक उत्पीड़न के चलते आए हिन्दू, सिख, ईसाई, पारसी, जैन और बौद्ध धर्म को लोगों को सीएबी के तहत भारतीय नागरिकता मिल पायेगा |

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क्या है नागरिकता संसोधन बिल 

 नागरिकता संशोधन बिल 2019 क्या है?


 नागरिकता  संशोधन बिल के तहत किसी विदेशी व्यक्ति को भारत की नागरिकता दी जा सकेगी.

नागरिकता संशोधन बिल के तहत  कोई भी हिंदू, जैन, बौद्ध, सिख, पारसी और ईसाई समुदाय के शरणार्थियों को . मुस्लिम समुदाय को छोड़ कर भारत की नागरिकता देने  का प्रावधान है.
आपको बता दें कि मौजूदा कानून (Citizenship Act 1955) के तहत भारतीय नागरिकता के लिए कम से कम 11 साल भारत में रहना जरूरी है.

नए नागरिकता संसोधन बिल में पड़ोसी देशों के अल्पसंख्यकों के लिए यह अवधि घटाकर 6 साल कर दी गई है.

गृह मंत्री अमित शाह के अनुसार- CAB में  धार्मिक उत्पीड़न की वजह से बांग्लादेश, पाकिस्तान, अफ़ग़ानिस्तान से 31 दिसंबर 2014 से पहले भारत में आने वाले हिंदु, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाइयों को नागरिकता प्रदान करने का प्रावधान है.


 विवाद की वजह


  विवाद  का वजह है कि यदि नागरिकता संशोधन बिल 2019 को मंजूरी मिल जाती है तो -

इस नागरिकता संशोधन बिल में प्रावधान किया गया है कि सिर्फ पड़ोसी देश पाकिस्तान अफगानिस्तान बांग्लादेश आदि से आए शरनार्थी जैन, बौद्ध,  हिंदू,  पारसी,  ईसाई इत्यादि को भारतीय नागरिकता प्रदान किया जायेगा


किंतु इस लिस्ट में मुस्लिम समुदाय का जिक्र नहीं किया गया है
इसलिए यह विवाद का विषय बन सकता है क्योंकी  धर्म के आधार पर यह तय किया गया है कि मुस्लिम लोगों को नागरिकता नहीं दी जाएगी|

 और  दूसरी बात यह है  की आखिर धर्म के आधार पर यह कैसे तय किया जा सकता है की किसे नागरिकता देनी है
और .

अगर मुस्लिम शरणार्थी है तो उसे नागरिकता नहीं देंगे और हिंदू, जैन, बौद्ध, सिख, पारसी, ईसाई हुआ तो नागरिकता दे दी जाएगी.

विपक्षी पार्टियों का कहना है कि ये बिल मुसलमानों के खिलाफ है

जो  भारतीय संविधान के अनुच्छेद-14 (समानता का अधिकार) का उल्लंघन कर रहा है.

बस यही इस बिल का विवादास्पद पहलू है और हो सकता है कि अगर मोदी सरकार बिल में मुस्लिमों को भी जोड़ ले तो विवाद ख़त्म हो जायेगा और सब का  का साथ भी मोदी सरकार को  मिल जाए.

नागरिकता संसोधन बिल से जुडी कुछ महत्वपूर्ण बाते 


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नागरिकता  संशोधन बिल अगर कानून का रूप ले लेगा तो  पाकिस्तान, अफगानिस्तान, बांग्लादेश में धार्मिक उत्पीड़न के कारण

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वहां से भागकर आए हिंदू, ईसाई, सिख, पारसी, जैन और बौद्ध धर्म को मानने वाले लोगों को CAB के तहत भारत की नागरिकता मिल जाएगी |

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नागरिकता संशोधन बिल के चलते जो विरोध की आवाज उठ रही है
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उसकी वजह ये है कि इस बिल के प्रावधान के मुताबिक पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से आने वाले मुसलमानों को भारत की नागरिकता नहीं दी जाएगी।

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कांग्रेस समेत कई पार्टियां इसी आधार पर बिल का विरोध कर रही हैं।

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3-देश के पूर्वोत्तर राज्यों में इस विधेयक का विरोध किया जा रहा है,

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और उनकी चिंता है कि पिछले कुछ दशकों में बांग्लादेश से बड़ी तादाद में आए हिन्दुओं को नागरिकता प्रदान की जा सकती है।

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BJP की सहयोगी असम गण परिषद (AGP) ने वर्ष 2016 में लोकसभा में पारित किए जाते वक्त बिल का विरोध किया था,

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और सत्तासीन गठबंधन से अलग भी हो गई थी, लेकिन जब यह विधेयक निष्प्रभावी हो गया, AGP गठबंधन में लौट आई थी

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माकपा महासचिव सीताराम येचुरी ने कहा कि संसद में नागरिकता (संशोधन) विधेयक पेश किए जाने पर पार्टी इसमें दो संशोधन लाएगी

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 क्योंकि वह विधेयक के मौजूदा स्वरूप का विरोध करती है. येचुरी ने कहा कि पार्टी दो संशोधन ला कर उन सभी शर्तों को हटाने की मांग करेगी, जो धर्म को नागरिकता प्रदान करने का आधार बनाते हैं.

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असम में नागरिकता संशोधन विधेयक (सीएबी) के खिलाफ विभिन्न प्रकार से विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं

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जिनमें नग्न होकर प्रदर्शन करना और तलवार लेकर प्रदर्शन करना भी शामिल है।.

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मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल के चबुआ स्थित निवास और गुवाहाटी में वित्त मंत्री हिमंत बिस्व सरमा के घर के बाहर सीएबी विरोधी पोस्टर चिपकाए गए।

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एनडीए की सहयोगी रही शिवसेना जो अब कांग्रेस और एनसीपी के साथ मिलकर महाराष्ट्र में सरकार चला रही है, इस बिल का समर्थन करेगी।

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कांग्रेस-एनसीपी और कुछ विपक्षी पार्टियां इस बिल का विरोध करेंगे। विपक्षी पार्टियों को कहना कि धर्म के आधार पर देश को बांटने की कोशिश है।
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शिवसेना के सांसद संजय राउत का कहना है कि महाराष्ट्र में सरकार अपनी जगह और देश के प्रति कमिटमेंट एक जगह है। इसलिए हम लोग इस बिल का समर्थन करेंगे।


आखिर पूरा मामला है क्या ?


नागरिकता अधिनियम, 1955 में संशोधन करने के लिए लोकसभा में नागरिकता विधेयक लाया गया था।

इस विधेयक के जरिये अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश के अल्पसंख्यक समुदायों- हिंदुओं, सिखों, बौद्धों, जैन, पारसियों और ईसाइयों को बिना समुचित दस्तावेज के भारतीय नागरिकता देने का प्रस्ताव रखा गया है।

 इसमें भारत में उनके निवास के समय को 12 वर्ष के बजाय छह वर्ष करने का प्रावधान है। यानी अब ये शरणार्थी 6 साल बाद ही भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन कर सकते हैं।

इस बिल के तहत सरकार अवैध प्रवासियों की परिभाषा बदलने के प्रयास में है।

वैसे देखा जाये तो एनआरसी और नागरिकता संशोधन बिल एक-दूसरे के विरोधाभासी हैं

क्योंकि जहां एक ओर नागरिकता संशोधन विधेयक में भारतीय जनता पार्टी धर्म के आधार पर शरणार्थियों को नागरिकता देने पर विचार कर रही हैं वहीं एनआरसी में धर्म के आधार पर शरणार्थियों को लेकर कोई भेदभाव नहीं है।

कांग्रेस, शिवसेना, जदयू, असम गण परिषद और तृणमूल कांग्रेस इस विधेयक के विरोध में हैं।

कांग्रेस का कहना है कि यह 1985 के ‘ऐतिहासिक असम करार’ के प्रावधानों का उल्लंघन है जिसके मुताबिक 1971 के बाद बांग्लादेश से आए सभी अवैध विदेशी नागरिकों को वहां से निर्वासित किया जाएगा भले ही उनका धर्म कुछ भी हो।


विरोध पार्टीयो का विचार 


असरुद्दीन ओवैसी 


असदुद्दीन ओवैसी ने नागरिकता संशोधन विधेयक का विरोध किया। ओवैसी ने कहा कि नागरिकता संशोधन विधेयक मजहब की बुनियाद बनाया जा रहा है। ओवैसी ने इस बिल को सुरक्षा के लिहाज से बलंडर बताया। यह कानून दोबारा बंटवारे के लिए बनाया जा रहा है। यह तो हिटलर के कानून से भी बदतर है। हम मुसलमानों का गुनाह क्या है। ओवैसी ने कहा कि मैं इस बिल को फाड़ता हूं क्योंकि यह हिन्दुस्तान को तोड़ने का काम करता है।

बीजेपी भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने की दिशा में बढ़ रही है: कांग्रेस


नागरिकता संशोधन विधेयक के विरोध में बोलते हुए लोकसभा में कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि हम इस विधेयक का विरोध इसलिए कर रहे हैं क्योंकि यह भेदभावपूर्ण है। उन्होंने आगे कहा कि इस बिल के बारे में पढ़ने के बाद मुझे लगता है कि आप भारत को हिन्दू राष्ट्र बनाने के लिए इस दिशा में जा रहे हैं। यह बिल धर्म की भावना पर आधारित है। हर धर्म के लोगों ने अपना खून बहाया है उसके बाद जाकर यह हिन्दुस्तान बना है। मैं कहना चाहता हूं कि इस हिन्दुस्तान को जोड़ने का काम करें, तोड़ने का नहीं।

कांग्रेस ने किया इस विधेयक का किया विरोध


नागरिकता संशोधन विधेयक के विरोध का कांग्रेस ने विरोध किया। लोकसभा में नागरिकता संशोधन विधेयक पर कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि हम इस विधेयक का विरोध इसलिए कर रहे हैं क्योंकि यह भेदभावपूर्ण है।
तेलंगाना राष्ट्र समिति ने भी बिल का विरोध किया
टीआरएस सांसद नामा नागेश्वर राव ने लोकसभा में कहा कि हम इस नागरिकता संशोधन विधेयक बिल का विरोध करते हैं। हम भारतीय संविधान की आत्मा और प्रावधान को सख्ती से अनुसरण करते हैं।

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