मंगलवार, 3 दिसंबर 2019

Anti rape law

एंटी रेप लॉ


 असल में महिलाओं की सुरक्षा के लिए देश में कई कानून है,  बावजूद इसके देश की आधी आबादी के साथ बहुत ही दर्दनाक और खौफनाक होता जा रहा है |
 बात सिर्फ महिला उत्पीड़न की नहीं बल्कि उससे आगे निकल चुकी है यौन हिंसा,  धमकाना और जान लेना बहुत आम हो गया है. ऐसा लगता है कि महिलाएं समाज में रहकर भी सुरक्षित नहीं है.  महिलाएं घरों के अंदर,  बस,  रेल, सड़क , शौचाल में  भी सुरक्षित नजर नहीं आती. तब प्रश्न ये आता  है कि महिलाएं कब और कहां सुरक्षित होंगी.
 रसूल के आगे सुरक्षा और इज्जत के कोई मायने नहीं है कानून का डर खत्म हो गया है दुष्कर्म विरोधी कानून होने के बावजूद भी महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों की वजह से सारे सवाल अनुत्तरित हैं,
 तो सवाल यही है कि क्यों नहीं रुक पा रही है महिलाओं के साथ यौन उत्पीड़न की घटनाएं?
 तथाकथित जागरूक समाज और समाज के ठेकेदार इसे कब तक हलके में लेते रहेंगे
कानूनी मदद और व्यवस्था के तमाम दावे खोखले रहेंगे या कभी इनका असर भी होगा. इस तमाम सवालों के बीच हमारी आज यही जानने की कोशिश है
कि क्या कहता है दुष्कर्म विरोधी कानून?
 निर्भया कांड के बाद उप चीफ जस्टिस जे. यस वर्मा कमेटी की सिफारिशें क्या है?

 संसद में यह मुद्दा

 संसद के दोनों सदनों में महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराध का मुद्दा उठाया गया राज्यसभा के सभापति एम वेंकैया नायडू ने गंभीर चिंता जताते हुए इस समस्या से निपटने के लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति और प्रशासनिक स्कील के साथ मानसिकता में बदलाव पर जोर दिया.
 सभी दलों के सांसदों ने एक सुर में ऐसी मामलों में जल्द और सख्त सजा दिए जाने की जरूरत बताया,
 वहीं लोकसभा में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि सरकार सदस्यों के सुझाव के मुताबिक किसी भी तरह का कानून बनाने को तैयार है.

 सजा

आईपीसी के सेक्शन 375 में बलात्कारी यानी रेपिस्ट के बारे में और सेक्शन 376 में बलात्कार के मामले में सजा का प्रावधान किया गया है
 आईपीसी का सेक्शन 375

 परिभाषा

 जब कोई पुरुष किसी महिला के साथ उसकी मर्जी के खिलाफ, उसके सहमति के बिना,  उसे डरा धमका कर, उसे दिमागी रूप से पागल महिला को धोखा देकर या उस महिला के शराब या नशीले पदार्थ के कारण होश में ना होने पर सभोग करता है, तो उसे बलात्कार कहते हैं|
इसमें चाहे किसी भी कारण से संभोग क्रिया पूरी हुई हो या नहीं कानूनन  वह  बलात्कार के शरीर में ही रखा जाएगा
यदि महिला 18 साल से कम की है तो उसकी मर्जी और मर्जी के खिलाफ सम्भोग करने से बलात्कार की श्रेणी में रखा जाता है.

 सेक्शन 375 प्रावधान 


आईपीसी के सेक्शन 375 के अनुसार एक व्यक्ति को उस स्थिति में बलात्कार का दोषी माना जाएगा जब वह
अपने लिंग लोगों को किसी भी हद तक एक महिला के मुंह. प्राइवेटपार्ट,  सहित अन्य भागों से प्रवेश करता है या उस महिला को उसके साथ या किसी अन्य व्यक्ति के साथ ऐसा करने के लिए कहता है
इसके अलावा किसी भी हद तक किसी भी वस्तु या लिंग के अलावा शरीर का एक हिस्सा एक महिला के प्राइवेट पार्ट में प्रवेश कराता है उस महिला को उसके साथ यहां किसी अन्य व्यक्ति के साथ ऐसा करने के लिए कहता है
या एक महिला के किसी भी हिस्से को तोड़ मरोड़ कर उस महिला के प्राइवेट पार्ट या शरीर के किसी भी भाग में प्रवेश कराता है या उस महिला को उसके साथ यह किसी अन्य व्यक्ति के साथ ऐसा करने के लिए कहता है
या अपने मुंह को एक महिला के प्राइवेट पार्ट पर लगाता है या उस महिला को उसके साथ या  किसी अन्य व्यक्ति साथ ऐसा करने के लिए करता है

 प्रावधान सात परिस्थितियां


महिला की मर्जी के खिलाफ
महिला के सहमति के बिना संभोग करना
इसके अलावा महिला की सहमति से लेकिन यह जानते हुए कि वह उसका पति नहीं है और महिला की सहमति दी जाती है क्योंकि वह मानती है कि वह वहीं पुरुष है जिसके साथ उसने कानूनी शादी की है
इसके अलावा महिला की सहमति के साथ जब शराब या किसी नशीले पदार्थ की वजह से होश में नहीं होने पर उसके साथ संभोग किया गया हो
अगर महिला की उम्र 18 साल से कम है तो उसकी सहमति या बिना सहमति से होने वाला शंभू भी बलात्कार की श्रेणी में आता है
जब महिला सहमति व्यक्त करने में असमर्थ हो

 अपवाद


जैसे कोई चिकित्सा प्रक्रिया या चिकित्सा के वक्त हस्तक्षेप बलात्कार नहीं माना जाएगा
किसी व्यक्ति का अपनी पत्नी के साथ संभोग बलात्कार नहीं माना जाएगा यदि पत्नी 15 साल से कम आयु की ना हो

 सजा


आईपीसी की सेक्शन 375 में अपराध के बारे में बताया गया है, वही सेक्शन 376 में सजा का प्रावधान किया गया है
सेक्शन 376 के तहत अगर किसी भी महिला के साथ बलात्कार करने के आरोपी पर मुकदमा चलाया जाता है और वह दोषी साबित होता है तो उसे 7 साल से लेकर उम्र कैद और कुछ मामलों में फांसी की सजा भी हो सकती हैं

 सेक्शन 375 में हुए बदलाव


16 दिसंबर 2012 देश की राजधानी दिल्ली में मानवता को शर्मसार करने वाली  दर्दनाक घटना हुई.
बस में सवार निर्भया के साथ सारी हदें पार कर दी गई
इस घटना ने समाज के हर वर्ग को झकझोर दिया
और रेप लॉ में बदलाव की मांग तेज उठने लगी
सेक्शन 375 में बदलाव के लिए संसद से लेकर सड़क तक बहस शुरू हो गई

 जस्टिस जेएस वर्मा कमिशन

 सिफारिशें

3 सदस्यी  कमेटी ने 29 दिनों में रिपोर्ट तैयार किया
29 जनवरी 2013 को 931 पेज की रिपोर्ट सरकार को सौंपी
इस रिपोर्ट के आधार पर एंटी रेप लॉ के लिए सरकार ने ऑर्डिनेंस जारी किया
सरकार ने आपराधिक विधि संशोधन अधिनियम 2013 को लागू किया
 और यह संशोधन अधिनियम 3 फरवरी 2019 से प्रभाव में है

 कानून में बदलाव


रेप को विस्तार से परिभाषित किया गया
रेप हुआ यह माना जाएगा अगर महिला के साथ पुरुष ने जबरन शारीरिक संबंध बनाता है
महिला के प्राइवेट पार्ट में पुरुष द्वारा कोई भी वस्तु डालना
18 साल से कम उम्र में सहमति से संभोग
आईपीसी के सेक्शन 376 के तहत

न्यूनतम 7 साल और अधिकतम उम्र कैद की सजा काप्रावधान
 सेक्शन 376 ए के तहत प्रावधान

जीव के कारण महिला वेजिटेटिव स्टेज में चली जाए
दोषी को अधिकतम फांसी की सजा


 376 बी के तहत प्रावधान

अलगांव में रह रही पत्नी के साथ रेप करने पर 7 साल से 10 साल तक की सजा

 376c के प्रावधान


सरकारी संरक्षण में रह रही महिला के साथ रेप करने पर 5 साल से 10 साल तक की सजा
गैंगरेप के लिए 376d के तहत सजा का प्रावधान
कम से कम 20 साल और अधिकतम उम्र कैद
376 के तहत दोबारा रेप या गैंग रेप का दोषी पाए  जाने पर
उसे उम्र कैद से  लेकर फांसी तक की सजा होगी

 सेक्शन 354


 कानून में बदलाव



महिला के साथ छेड़छाड़ का दोषी पाए जाने पर
पहले 2 साल की सजा का प्रावधान था
बदलकर 1 साल से अधिकतम 5 साल कैद की सजा
गैर जमानती अपराध की श्रेणी में डाला गया
354 के तहत कई सब सेक्शन जोड़े गए
महिला से अशोभनीय और सेक्सुअल नेचर का व्यवहार करने पर
आईपीसी के सेक्शन 354 ए पार्ट फर्स्ट के तहत महिला से सेक्सुअल डिमांड या फिर आग्रह करने पर
आईपीसी की सेक्शन 354 ए पार्ट 2 के तहत महिला के मर्जी के खिलाफ पोर्नोग्राफी दिखाने पर
आईपीसी की सेक्शन 354 ए पार्ट 3 के तहत महिला को जबरन कपड़े उतारने पर मजबूर करने उतारने पर
केस दर्ज किए जाने का प्रावधान है
दोषी साबित होने पर 3 से 7 साल तक कैद की सजा का प्रावधान किया गया है

 यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण विधेयक

 यौन अपराधों से बचने के लिए सरकार ने यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण विधेयक 2019 पारित

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