गुरुवार, 19 दिसंबर 2019

Global refugee forum 2019 ( विश्व शरणार्थी मंच 2019)


वैश्विक शरणार्थी मंच


चर्चा में क्यों?

 वैश्विक शरणार्थी मंच चर्चा में इसलिए है क्योंकि 17-18 दिसंबर, 2019 को वैश्विक शरणार्थी मंच (Global Refugee Forum) की पहली बैठक का आयोजन जिनेवा में होने जा रहा है

 वैश्विक शरणार्थी मंच क्या है? 

वैश्विक शरणार्थी मंच अंतर्राष्ट्रीय उत्तरदायित्त्वों के सिद्धांत को ठोस कार्रवाई के रूप में

 बदलने का अवसर प्रदान करने के लिये ‘वैश्विक शरणार्थी समझौते’ (Global Compact on Refugees) द्वारा निर्देशित एक मंच है।

 वैश्विक शरणार्थी मंच का कार्य

यह मंच विभिन्न देशों के मध्य शरणार्थियों की समस्या के निदान के लिये प्रभावशाली योगदानों तथा प्रतिज्ञाओं को प्रस्तुत करता है

 और पूर्व में किये गए अच्छे कार्यों का उदाहरण प्रस्तुत करता है।

वैश्विक शरणार्थी मंच के बारे में:


यह UNHRC द्वारा प्रबंधित एक मंच है

जो अंतर्राष्ट्रीय समुदाय में राजनीतिक इच्छाशक्ति जुटाकर ‘वैश्विक शरणार्थी समझौते’ के उद्देश्यों को आगे बढ़ाता है

 तथा विभिन्न देशों के समर्थन के आधार को व्यापक बनाता है।

मुख्य बिंदु:

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान, तुर्की के राष्ट्रपति रिसेप तईप एर्दोगन तथा कोस्टारिका, इथियोपिया और जर्मनी के नेताओं को

 शरणार्थियों की सुरक्षा एवं भलाई के संदर्भ में उनकी अनुकरणीय भूमिका के लिये मंच के सह-संयोजक के रूप में आमंत्रित किया गया है।

21वीं सदी में शरणार्थियों पर  यह पहली बड़ी बैठक  है
यह बैठक  संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायुक्त (United Nations High कमिश्नर for Refugees- UNHCR), संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी एवं स्विट्ज़रलैंड की सरकार द्वारा संयुक्त रूप से 17-18 दिसंबर, 2019 को जिनेवा में आयोजित किया जा रहा है।

पाकिस्तान का पक्ष 


पाकिस्तान के प्रधानमंत्री  इमरान खान ने  इस बार फिर
भारत के आंतरिक मामलों पर गंभीर और अनुचित टिप्पणी करके अपने संकीर्ण राजनीतिक एजेंडे का परिचय दे
ही दिये

पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने भारत के NRC मुद्दे की तुलना म्याँमार के रोहिंग्या संकट से की तथा  भारत के कश्मीर  मुद्दे पर विश्व से हस्तक्षेप करने का आग्रह किया।

इस बैठक में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने कश्मीर मुद्दे और नागरिकता संशोधन अधिनियम  (CAB) के संदर्भ में भारत की आलोचना की।

पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत द्वारा हाल ही में उठाए गए कदमों का उद्देश्य कश्मीर में मुस्लिमों को बहुसंख्यक को अल्पसंख्यक में बदलना है।

इमरान खान बोले, दक्षिण एशिया में पैदा होने जा रहा है बड़ा शरणार्थी संकट


पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने मंगलवार (17 दिसंबर) को कहा कि

 नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली भारत सरकार के कदमों की वजह से दक्षिण एशिया में एक बड़ा शरणार्थी संकट पैदा होने जा रहा है।

सरकार संचालित रेडियो पाकिस्तान के अनुसार जिनेवा में सह संयोजक के रूप में पहले वैश्विक शरणार्थी फोरम को संबोधित करते हुए खान ने

कश्मीर मुद्दा उठाया और दावा किया कि भारत सरकार का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र के जनसांख्यिकी समीकरण को बदलने का है।
खान ने कहा, ''मैं कहना चाहता हूं कि पूरे विश्व को (दक्षिण एशिया में) आसन्न सबसे बड़े शरणार्थी संकट के बारे में अवगत होना चाहिए।"

भारत के नागरिकता कानून और राष्ट्रीय नागरिक पंजी पर टिप्पणी करते हुए खान ने कहा,

''यदि दो-तीन प्रतिशत मुसलमान अपनी नागरिकता साबित नहीं कर सकते हैं तो यह एक बड़ी चुनौती होगी...मैं अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इसे देखने को कहता हूं।

खान ने कहा, ''यदि विश्व भारत पर दबाव डाले तो इसे रोका जा सकता है ।

एक बार संकट शुरू होने पर हम इसे नहीं रोक सकते । यह जटिल और कठिन है।


भारत का पक्ष:



भारत ने  इसके  जवाब   में पाकिस्तान को अपने देश के  अल्पसंख्यकों की देखभाल करने तथा उन्हें पीड़ित न करने की सलाह दी।

पिछले 72 वर्षों में  देखा  गया है की पाकिस्तान ने अपने सभी अल्पसंख्यकों को लगातार प्रताड़ित किया है,

जिसमें से अधिकांश अल्पसंख्यकों को भारत का रुख करना पड़ा।

भारत ने कहा कि पाकिस्तानी सेना ने वर्ष 1971 में पूर्वी पाकिस्तान  जो अब बांग्लादेश कहलाता है

के लोगों के साथ बहुत बुरे तरीके से बर्ताव किया था।

lपाकिस्तान के प्रधानमंत्री द्वारा जिनेवा में वैश्विक 

शरणार्थी मंच पर दिए गए बयान के बारे में पूछे गए प्रश्न पर आधिकारिक प्रवक्ता की प्रतिक्रिया

दिसंबर 17,
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री द्वारा जिनेवा में वैश्विक शरणार्थी मंच पर दिए गए बयान के बारे में

 पूछे गए प्रश्न पर सरकारी प्रवक्ता रवीश कुमार ने कहा :

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने भारत के लिए पूर्ण रूप से

आंतरिक मामलों पर अनावश्यक और अनुचित टिप्पणी करके अपने संकीर्ण राजनीतिक एजेंडे को हवा देने के लिए एक बार पुनः

बहुपक्षीय मंच पर सुपरिचित झूठ बोला है।

 अब पूरी दुनिया को यह स्पष्ट हो जाना चाहिए कि यह उनका वैश्विक मंचों के अभ्यस्त और बाध्यकारी दुरुपयोग का एक स्थापित स्वरूप है।

पाकिस्तान के अधिकांश पड़ोसियों का यह दुर्भाग्यपूर्ण अनुभव रहा है

कि पाकिस्तान द्वारा की गई कार्रवाइयों के प्रतिकूल परिणाम उनके देश में हुए हैं।

विगत 72 वर्षों में, पाकिस्तान के इस्लामी गणराज्य ने योजनाबद्ध तरीके से अपने सभी अल्पसंख्यकों को प्रताड़ित किया है,

जिनमें से अधिकांश भारत भागने के लिए मजबूर हुए है।

इसके अलावा, प्रधानमंत्री खान चाहते हैं कि दुनिया यह भूल जाए कि

उनकी सेना ने पूर्ववर्ती पूर्वी पाकिस्तान के लोगों के साथ 1971 में क्या किया था।

पाकिस्तान को अपने अल्पसंख्यकों और सह-धर्मवादियों के अधिकारों की रक्षा और संवर्धन के लिए कार्य करना चाहिए।”
नई दिल्ली
17 दिसंबर, 2019


Sorce - हिंदुस्तान, दृस्टि आईएएस, विदेश मंत्रालय

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Also read - वैश्विक शरणार्थी मंच क्या है दृस्टि आईएएस 

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