शुक्रवार, 29 नवंबर 2019

ट्रांसजेंडर बिल 2019

  ट्रांसजेंडर विधेयक 2019

ट्रांसजेंडर व्यक्तियों की परिभाषा


 ट्रांसजेंडर यानी उभय लिंगी व्यक्ति वह व्यक्ति है जिसका लिंग जन्म के समय नियत लिंग से मेल नहीं खाता है इसके तहत ट्रांस मेन यानी उभय  पुरुष या ट्रांस  स्त्री (चाहे ऐसे व्यक्ति में लिंग पुनः  निर्धारण शैल्य क्रिया या हार्मोन चिकित्सा या लेजर चिकित्सा या ऐसी अन्यचिकित्सा करवाई हो या नहीं) इंटर सेक्स और जेंडर क़्वीन  आते हैं, इसमें सामाजिक, सांस्कृतिक पहचान वाले व्यक्ति जैसे किन्नर, हिजड़ा,  अरावानी और जोगता शामिल है |

 विधेयक 


 ट्रांसजेंडर बिल राज्यसभा मे  पास हो गया है यह लोकसभा से पहले ही पास हो चुका है,
 इसका उद्देश्य ट्रांसजेंडर व्यक्तियों का समाज के मुख्यधारा में जुड़कर सामाजिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकें के लिए है,
 24 नवंबर को ट्रांसजेंडर बिल राज्यसभा से पारित हो गया ध्वनिमत से,
 अगस्त में पिछले सत्र के दौरान लोकसभा में यह  विधेयक पारित हो गया था,
 इसके पश्चात राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद यह कानून का रूप ले लेगा
 ट्रांसजेंडर बिल सरकार ने 19 जुलाई को लोकसभा में पेश किया था,
 जबकि केंद्रीय कैबिनेट ने 10 जुलाई को विधेयक को मंजूरी दे दी थी|


 पहचान से जुड़ा सर्टिफिकेट


ट्रांसजेंडर व्यक्ति डीएम को आवेदन कर सकता है,
ट्रांसजेंडर के रूप में उसकी आईडेंटिटी से जुड़ा सर्टिफिकेट जारी किया जाएगा,
पुरुष या महिला के तौर पर लिंग परिवर्तन सर्जरी कराने पर यह सर्टिफिकेट भी संशोधित किया जाएगा,

 भेदभाव पर प्रतिबंध




शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य सेवा
सार्वजनिक स्तर पर उपलब्ध उत्पादों
सुविधाओं और अवसरों तक पहुंच और उसका उपभोग
कहीं आने जाने का अधिकार
किसी प्रॉपर्टी में निवास,  किराए पर लेने,  स्वामित्व या कब्जे में लेने का अधिकार,
सार्वजनिक व निजी पद को ग्रहण करने का अवसर
किसी सरकारी या किसी निजी प्रतिष्ठान तक पहुंच
जिसकी देखभाल यह निगरानी किसी ट्रांसजेंडर व्यक्ति द्वारा की जाती है
यह सभी शामिल है

 सरकार द्वारा कल्याणकारी उपाय


समाज में ट्रांसजेंडर व्यक्ति के पूर्व समावेश और भागीदारी को सुनिश्चित करना
ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के बचाव एवं पुनर्वास की व्यवस्था करना
व्यवसायिक प्रशिक्षण एवं स्वरोजगार के लिए कदम उठाना
ट्रांसजेंडर संवेदी योजनाओं का सृजन करना
सांस्कृतिक क्रियाकलापों में ट्रांसजेंडर व्यक्तियों की भागीदारी को बढ़ावा देना

 अपराध और दंड का प्रावधान


भीख मंगवाना, बलपूर्वक या बधुआ मजदूरी करवाना
इसमें सार्वजनिक उद्देश्य के लिए अनिवार्य सरकारी सेवा शामिल नहीं है
ट्रांसजेंडर रोको सार्वजनिक स्थान का प्रयोग करने से रोकना
परिवार गांव आदि में निवास करने से रोकना
शारीरिक यौन, मौखिक भावनात्मक और आर्थिक उत्पीड़ित करना
6 महीने से 2 साल के बीच की सजा और जुर्माना भी हो सकता है इसके लिए

 राष्ट्रीय ट्रांसजेंडर परिषद


 ट्रांसजेनिक व्यक्तियों और विधान संबंधी सरकार को परामर्श देने के लिए एक राष्ट्रीय ट्रांसजेनिक परिषद बनाई जाएगी

परिषद के अध्यक्ष केंद्रीय सामाजिक न्याय मंत्री होंगे
सामाजिक न्याय राज्यमंत्री इसके अध्यक्ष होंगे
इसके सदस्यों में सामाजिक न्याय मंत्रालय की सचिव
स्वास्थ्य,  गृह मंत्रालयो,  आवास
मानव संसाधन विकास से संबंधित मंत्रालयों के प्रतिनिधि भी शामिल होंगे
राज्य सरकारों को भी प्रतिनिधित्व दिया जाएगा
परिषद में ट्रांसजेंडर समुदाय के 5 सदस्य और  गैर सरकारी सदस्य के पांच विशेषज्ञ भी शामिल होंगे
यह परिषद ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के संबंध में नीतियां, विधान और योजनाएं बनाने और उनका निरीक्षण करने के लिए केंद्र सरकार को सलाह देगी|
यह ट्रांसजेंडर लोगों की शिकायतों का निवारण भी करेगी

 देश में ट्रांसजेंडर की स्थिती 

देश में लगभग 500000 से ज्यादा उभयलिंगी व्यक्ति हैं जनगणना के अनुसार
2014 में सुप्रीम कोर्ट ने तीसरे लिंग के रूप में कानूनी मान्यता दी थी ट्रांसजेंडर को
2015 में ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को सरकारी योजनाओं का लाभ देने की पहल की गई थी
1994 में वोटिंग अधिकार तो दिया गया किंतु बात  अटकी  पहचान पत्र पर उसकी जेंडर  लिखने पर
जनगणना के अनुसार पूरे भारत में सबसे ज्यादा संख्या मैं ट्रांसजेंडर उत्तर प्रदेश में रहते हैं
पूरे भारत में इन की साक्षरता दर 56 परसेंट ही थी

 ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के अधिकार

 प्रयास

सुप्रीम कोर्ट समेत तमाम अदालतों ने दिया दखल
2014 में सुप्रीम कोर्ट ने तीसरे लिंग के रूप में ट्रांसजेंडर को कानूनी मान्यता दी
राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण बनाम केंद्र सरकार मामले में
आर्थिक सामाजिक रूप से पिछड़े को मिलने वाले सभी अधिकार देने का फैसला किया गया
2015 में सुप्रीम कोर्ट के दखल के बाद
केंद्र सरकार ने सभी राज्यों को पत्र लिखकर विपरीत लिंगी समुदाय को सरकारी योजनाओं का लाभ देने का कहा
सरकार ने इसके लिए कार्य योजना बनाने के उद्देश्य से एक समिति का गठन भी किया
एक अंतरलिंगी , अंतर मंत्रालय समिति भी बनाई गई
सरकार द्वारा ट्रांसजेंडर के लिए राष्ट्रीय नीति बनाने की योजना
ट्रांसजेंडर के लिए कई राज्य ने अपनी नीति अपनाई है
जिसमें तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और केरल आगे हैं
ट्रांसजेंडर्स के लिए असमंजस होता है कि वह महिला टॉयलेट्स का इस्तेमाल करें या पुरुष
शैक्षणिक संस्थानों में उनके लिए अलग टॉयलेट्स बनाने की पहल कई राज्य में कर दी गई है
केंद्र सरकार का ट्रांसजेंडर नागरिकों पर विचार
ST/SC  या अन्य पिछड़े वर्ग का दर्जा मिले
बिल में ऐसे कई प्रावधान किए गए हैं जिससे ट्रांसजेंडर में पूरे देश में बड़ी तब्दीली देखने को मिलेगी
तमिलनाडु समेत कई राज्यों ने ट्रांसजेंडर अधिकारों को कानूनी मान्यता दे दी
इस वर्ग से जुड़े लोगों को सामाजिक तिरस्कार और बिना किसी कानूनी सुरक्षा के बिना जीने के लिए मजबूर होना पड़ा
अपने अधिकारों के लिए लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी जिससे उसे जीत मिली है
ट्रांसजेंडर अधिकार संरक्षण बिल 2019 पास होने के बाद वेलेंगी व्यक्ति सम्मान के साथ जीवन व्यतीत कर सकेंगे|




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