शुक्रवार, 29 नवंबर 2019

Constitution of india (भारतीय संविधान )

भारतीय संविधान  (कॉन्स्टिट्यूशन ऑफ़ इंडिया)



“ संविधान हमारे देश की लोकतांत्रिक संरचना का सर्वोच्च कानून है   “ -   “राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद
“ अधिकारों के साथ मूल कर्तव्यों का पालन जरूरी”  -  उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू
“भारतीय लोकतांत्रिक अनुभव वास्तव में काफी सकारात्मक रहा “  - उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू
“ अधिकार सुरक्षित रहे इसके लिए कर्तव्यों का पालन भी जरूरी है “  - प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
“ संविधान हमारे लोकतांत्रिक व्यवस्था का उद्गम भी है और आदर्श भी “ - राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद
“ संविधान हमारे देश की लोकतांत्रिक संरचना का सर्वोच्च कानून है”  - रामनाथ कोविंद 



 भारत का संविधान


 विशेषता

 मूल संविधान मैं प्रस्तावना के साथ 22 भाग 395 अनुच्छेद और 8 अनुसूचियां हैं
मूल संविधान से संशोधन के बाद से करीब 20 अनुच्छेद और भाग 7 को हटा दिया गया है
और करीब 90 अनुच्छेद  4a, 9a, 9b, 14a यानी चार भागों को जोड़ा गया है
4 अनुसूचियां यानी 9, 10, 11 और 12 को जोड़ा गया
भारत का संविधान दुनिया का सबसे बड़ा लिखित संविधान है
यह न तो लचीला है ना ही शब्द
संघात्मक के साथ-साथ एकात्मकता की ओर भी झुका हुआ है
आपातकाल के दौरान केंद्र को अधिक शक्तिशाली बनाने के लिए भी प्रावधान किया गया है भारतीय संविधान में
केंद्र और राज्य दोनों ही सरकारों के कार्य संचालन के लिए व्यवस्थाएं बनाई गई है
सिर्फ एक नागरिकता का प्रावधान किया गया है एकल नागरिकता
भारत सरकार का संसदीय रूप दुनिया में अनोखा है
देश में संसदीय संप्रभुता है तो न्यायिक सर्वोच्चता भी
संविधान एकीकृत और स्वतंत्र न्यायपालिका प्रणाली उपलब्ध कराता है
नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा करता है

राज्य के नीति निदेशक सिद्धांत भी दुनिया में अनोखा है
मौलिक अधिकारों के साथ मौलिक कर्तव्यों का भी जिक्र किया गया है भारतीय संविधान में

 भारतीय संविधान का निर्माण प्रक्रिया


 संविधान सभा का उल्लेख पहली बार 1922 में महात्मा गांधी ने किया
 1928 में मोतीलाल नेहरू की अध्यक्षता में एक समिति बनाई गई
 इस समिति ने जो रिपोर्ट दीया वह नेहरू रिपोर्ट के नाम से मशहूर है
 1934 में कांग्रेस कार्यकारिणी ने संविधान तैयार करने की मांग की थी
 पहली बार संविधान सभा के लिए औपचारिक रूप से एक निश्चित मांग की गई थी
 1936 मैं कांग्रेस के लखनऊ अधिवेशन में संविधान सभा द्वारा संविधान निर्माण करने की मांग की गई
 इसके पश्चात 1938 में नेहरू ने घोषणा की कि स्वतंत्र भारत के संविधान का निर्माण वयस्क मताधिकार के आधार पर चुनी गई संविधान सभा के द्वारा बिना बाहरी हस्तक्षेप से किया जाएगा
 इसके पश्चात 1940 में ब्रिटिश सरकार ने अगस्त प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया
 1942 में सर स्टेफोर्ड क्रिप्स संविधान के प्रारूप के प्रस्ताव के साथ भारत आए
 लेकिन क्रिप्स प्रस्ताव को मुस्लिम लीग ने अस्वीकार कर दिया
 मुस्लिम लिंग की यह मांग थी कि भारत को दो स्वायत्त हिस्से में बांटा जाए
 इसके बाद पुनः 1946 में ब्रिटिश हुकूमत ने 30 सदस्यीय कैबिनेट मिशन भारत भेजा
 जिसमें लॉर्ड पैथिक लोरेंस, सर स्टेफोर्ड क्रिप्स और ए वी एलेग्जेंडर शामिल थे
 कैबिनेट मिशन मुस्लिम लिंग की दो संविधान सभा की मांग को खारिज किया
 आखिरकार 389 सीटों में से ब्रिटिश भारत के लिए आवंटित 296 सीटों के लिए चुनाव किया गया

 जिसमें भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को 208 सीटें तथा मुस्लिम लिंग को 73 सीटें मिली अन्य छोटे समूहों और स्वतंत्र समूह को 15 सीटें मिली

 देसी रियासतों के लिए अलग से 93 सीटें आवंटित की गई थी, लेकिन उन्होंने खुद को इस सभा से बाहर रखने का फैसला किया था
 इसलिए वह सिटें  भर नहीं पाई थी,
 संविधान सभा की पहली बैठक 9 दिसंबर 1946 को हुआ था
 मुस्लिम लीग ने अलग पाकिस्तान की मांग को लेकर बैठक का बहिष्कार किया
 पहली बैठक में कुल 211 सदस्यों ने हिस्सा लिया , क्योंकि मुस्लिम लिंग इसका बहिष्कार कर रहा था इसलिए इसमें भाग नहीं लिया था,
 डॉ सच्चिदानंद सिन्हा को सभा का अस्थाई अध्यक्ष चुना गया
 बाद में डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद सभा के अध्यक्ष के रूप में निर्वाचित किए गए
 एचसी मुखर्जी और वीटी कृष्णमाचारी सभा के उपाध्यक्ष निर्वाचित हुए,


 उद्देश्य प्रस्ताव 

 13 दिसंबर 1946 मैं पंडित नेहरू ने सभा के सामने पहली बार उद्देश्य प्रस्ताव पेश किया
 इसमें सभा की ढांचा और कामकाज की झलक थी
 इससे भारत को एक स्वतंत्र,  संप्रभु राज्य घोषित किया गया,
 ब्रिटिश भारत के सभी हिस्सों और क्षेत्र को संघ के दायरे में लाया गया
 संप्रभु भारत की सभी अधिकार और शक्तियों का स्रोत जनता को बनाया गया
 न्याय सामाजिक,आर्थिक और राजनीतिक स्वतंत्रता सुरक्षा और समान अवसर, विचार अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता कहीं भी आने-जाने और संगठन बनाने की स्वतंत्रता जैसे कई बातें घोषित की गई|

 इस प्रस्ताव को 22 जनवरी 1947 को सर्वसम्मति से स्वीकार कर लिया गया|

 प्रारूप समिति



 29 अगस्त 1947 को प्रारूप समिति का गठन किया गया
 इसके अध्यक्ष के रूप में डॉ बी आर अंबेडकर को चुना गया.
 इसके अलावा इसमें थे और सदस्य थे|

संविधान सभा के महत्वपूर्ण फैसले

 मई 1949 में राष्ट्रमंडल में भारत की सदस्यता की सत्यापन किया गया,
 22 जुलाई 1947 को भारत के राष्ट्रीय ध्वज को अपना गया,
 24 जनवरी 1950 को संविधान सभा के सदस्यों ने अंतिम रूप से हस्ताक्षर किए
 24 जनवरी 1950 को ही राष्ट्रीय गीत को भी अपनाया गया,
 24 जनवरी 1950 को डॉ राजेंद्र प्रसाद को पहले राष्ट्रपति के रूप में चुना गया

 संविधान का अपनाया जाना 

 इस प्रकार कुल 2 वर्ष 11 माह 18 दिनों में संविधान सभा की 11 प्रमुख बैठके और कई उप समितियों की बैठक हुई,
 डॉक्टर बी आर अंबेडकर की अगुवाई में संविधान निर्माताओं ने 60 देशों के संविधान पर चर्चा की और फिर भारतीय संविधान को बनाया,
 डॉ बी आर अंबेडकर ने 4 नवंबर 1948 को संविधान का अंतिम प्रारूप पेश किया
 इसी दिन संविधान पहली बार पढ़ी गई,
 इस पर 5 दिन तक आम चर्चा हुई तीन बैठके  हुई और आखिरकार 26 नवंबर 1949 को संविधान को सर्वसम्मति से अपना लिया गया,

 संविधान दिवस

 भारत में हर वर्ष 26 नवंबर को संविधान दिवस मनाया जाता है,  इसकी शुरुआत डॉक्टर अंबेडकर के 125 वे  जन्म दिवस के शुभ मौके पर 26 नवंबर 2015 में की गई थी
, जिसके बाद से पूरे भारतवर्ष में हर साल संविधान दिवस मनाया जाता है|

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