गुरुवार, 31 अक्तूबर 2019

Sardar Vallabhbhai Patel : कुछ ऐसा है बल्लभ भाई पटेल के' सरदार' बनाने का सफर, जानिये क्यों मनाया जाता है" राष्ट्रीय एकता दिवस "

कुछ ऐसा है बल्लभ भाई पटेल के 'सरदार ' बनने का सफर,  जानिए कुछ खास बाते 

देश के सभी देशी रियासतों का  भारत में विलय करके, एकता के सूत्र में पिरोने वाले सरदार बल्लभ भाई पटेल की जयंती 31 अक्टूबर को मनाई जाती है |
2014 से मोदी सरकार ने 31अक्टूबर को सरदार बल्लभ भाई पटेल के योगदान को देखते हुए, राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मानना सुनिश्चित किया |
वल्लभभाई पटेल देश के पहले उप - प्रधानमंत्री और गृहमंत्री थे |

जन्म 
सरदार पटेल का जन्म 31 अक्टूबर 1875 को गुजरात के नडियाद में हुआ था. 
पटेल जी ने करमसद में प्राथमिक विद्यालय में शिक्षा प्राप्त की लेकिन उन्होंने अधिकांश ज्ञान खुद से पढ़ कर अर्जित की 

उच्च शिक्षा 
 पटेल जी बैरिस्टर बनने के लिए इंग्लैंड में पढ़ाई करना चाहते थे. पटेल जी ने  एक वकील बनने के लिए अध्ययन किया और आखिर में एक वकील बन गए. उनके सपने सच हो गए इसके पश्चात उन्होंने अपनी कानूनी प्रैक्टिस शुरू की.  उन्होंने एक वकील के रूप में तेजी से सफलता हासिल की और जल्द ही वे अपराधिक मामले लेने वाले बड़े वकील बन गए

खेड़ा सत्याग्रह 

 खेड़ा सत्याग्रह का नेतृत्व करने के लिए पटेल को अपनी पसंद को दर्शाते हुए  गांधीजी ने कहा था,  " कई लोग मेरे पीछे आने के लिए तैयार थे, लेकिन मैं अपना मन नहीं बना पाया कि मेरी डिप्टी कमांडर कौन होना चाहिए|

बारडोली सत्याग्रह 

 1928 में हुए बडोली सत्याग्रह का नेतृत्व किसने किया. बारदोली सत्याग्रह एक किसान आंदोलन था. उस समय जो प्रांतीय सरकार थी वह किसानों से भारी लगाम वसूल किया करती थी. सरकार ने किसानों के लगाम में 30 फ़ीसदी की वृद्धि कर दी थी. जिसके वजह से किसानों की परेशानी और बढ़ गई. पटेल जी ने सरकार के इस मनमानी का कड़ा विरोध किया,   
 सरकार ने इस आंदोलन को कुचलने के लिए कई कदम उठाए. लेकिन सरकार की कोशिश पटेल के आगे नाकामयाब रहे और अंत में विवश होकर सरकार को पटेल के आगे झुकना पड़ा. और किसानों की मांगे पूरी करनी पड़ी और लगान 30 फीसदी  से 6 फीसदी कर दिया गया | 
 बारदोली सत्याग्रह की सफलता के बाद वहां की महिलाओं ने वल्लभ भाई पटेल को" सरदार"की उपाधि से सम्मानित किया |

कराची अधिवेशन 

 1931 में पटेल को कराची अधिवेशन का अध्यक्ष चुना गया. कराची अधिवेशन के कुछ समय पहले ही भगत सिंह , सुखदेव,  राजगुरु को फांसी दिया गया था. जिससे जनता क्रोध में थी. 
 लेकिन कराची अधिवेशन में पटेल जी ने ऐसा भाषण दिया जो लोगों की भावनाओं को दर्शाता था |

राज्यों का भारत में विलय 

 पटेल जी धीरे-धीरे सभी देसी रियासतों का भारत में विलय कराने में समर्थ रहे, लेकिन हैदराबाद और जम्मू कश्मीर   का विलय कराने में परेशानी का सामना करना पड़ा. 
 हैदराबाद के निजाम उस्मान अली खान ने स्वतंत्र रहने का फैसला किया. निजाम भारत और पाकिस्तान किसी में विलय नहीं चाहता था. पटेल ने हैदराबाद के निजाम को ऑपरेशन पोलो द्वारा खदेड़ निकाला और भारत देश ने विलय किया |
 पटेल जी जम्मू कश्मीर में आर्टिकल 370 के सदैव  विरोधी रहे थे |

प्रथम उप -प्रधानमंत्री और गृहमंत्री 

 देश के आजादी के बाद भारत के प्रथम उप प्रधानमंत्री और गृह मंत्री बने |

निधन 

 पाटिल जी का निधन 15 दिसंबर 1950 में मुंबई में हुआ था,  इनके निधन पर नेहरू जी ने कहा था - 

"सरदार जी का जीवन एक महान गाथा  है जिससे हम सभी परिचित हैं और पूरा देश यह जानता है,  इतिहास इसे कई पन्नों में दर्ज करेगा और इन्हें राष्ट्र निर्माता कहेगा. इतिहास इन्हें नए भारत का एकीकरण करने वाला कहेगा और भी बहुत कुछ उनके बारे में कहेगा. लेकिन हममें से कई लोगों के लिए भी आजादी की लड़ाई में हमारी सेना के एक महान सेनानायक के रूप में याद किए जाएंगे. एक ऐसे व्यक्ति जिन्होंने कठिन समय में और जीत के क्षणों में दोनों ही मौकों पर हमें नेक सलाह दी " |

भारत रत्न 


 सरदार वल्लभ भाई पटेल जी द्वारा देश के लिए दिए गए योगदान को देखते हुए 1991 में मरणोपरांत
 "भारत रत्न" से सम्मानित किया गया |




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